तालाब का छलावा | डरावनी हिंदी भूतिया कहानी | Horror Story | Animated Horror Story
तालाब का छलावा — एक रहस्यमयी और डरावनी हिंदी कहानी, जहाँ सुनसान तालाब के आसपास होने वाली अजीब घटनाएँ हर किसी को डरा देती हैं। इस रोमांचक animated horror story में रहस्य, suspense और supernatural घटनाओं का सामना करें।
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00:01उस शाम पीपल के पेड के नीचे बने पुराने चबूत्रे पर रोज की तरह गाउं के बुज़ुर्ग इकठा थे
00:08हवा में हुक्के का धुआ और एक अंजान डर तैर रहा था
00:12आज हवा फिर रुख बदल रही है
00:14गरम इस बेबाहा तालाब की तरफ से जब भी हवा आती है
00:19अपने साथ सिर्फ धूल नहीं, मौत की बदबू लाती है
00:23मुझे वो दिन यादा रहे है
00:25बदबू नहीं रामकिशन, इसे प्यास कहते हैं
00:28एक ऐसी प्यास जो पानी से नहीं बुज़ती
00:31तभी वो राजू आ पहुँचा
00:3320-21 साल का नौजवान जो शहर से अपनी पढ़ाई पूरी करके लोटा था
00:37उसने जीन्स और टी-शर्ट पहनी हुई थी
00:40जो गाउं के बाकी पहनावे से बिलकुल अलग थी
00:43कैसी बाते कर रहे हो काका
00:45प्यास तो पानी से ही बुच्छती है
00:47और ये तालाप तो कपका सूख चुका है
00:49आप लोग भी ना एक सूखे गड़े से इतना डरते हो
00:52डर नहीं है राजू बेटा
00:54ये इज़्जत है या शायद खौफ
00:56तुम शहर में पढ़े लिखे हो
00:58तुम इन बातों को नहीं समझोगे
01:00ये सिर्फ एक गड़ा नहीं है
01:02ये राजगर का वो जखम है जो कभी नहीं भरा
01:04तुम्हें क्या पता यहां रात को क्या होता है
01:07क्या होता है मुखिया जी
01:08कुछ नहीं होता
01:10बस आप लोगों ने कहानिया बना ली है
01:12मैंने सुना है लोग कहते यहां
01:14शराब बनाने वालों की लाशें भीकी जाती थी
01:16तो खेर लाशें तो हर जगा मिलती है
01:18इसका मतलब ये तो नहीं कि वो गंठा ही खूनी हो गया
01:21चुपकर छोरे
01:22तू क्या जाने
01:23तूने वो राते नहीं देखी
01:25तेरे बाप ने भी वो मंजर नहीं देखा होगा
01:27जो मेरे दादा ने देखा था
01:29ये शराब बनाने वालों की
01:31लाशों से भी पुरानी बात है
01:33ये तब की बात है
01:34जब इस गाउने अपने ही देवता को धोका दिया था
01:37देवता? कैसा देवता?
01:40मैंने तो यहाँ बस एक शिव मंदर देखा है
01:42वो देवता इस शिव मंदर से भी पुराना था
01:45धर्ती का रक्षक कहते थे उसे
01:47वो इसी जगह पर वास करता था
01:49जहां आज ये मनहूस कठा है
01:51वो गाउं को बचाता था
01:53फसले देता था
01:54लेकिन कुछ लालची इंसानों ने
01:56उन्होंने सोचा कि वो देवता से ज़ादा ताकतवर हो गए है
01:59उन्होंने देवता को मिट्टी में बंद कर दिया
02:02क्या काका देवता को मिट्टी में बंद कर दिया
02:05जैसे कोई खजाना हो
02:06ये सब बस किससे कहानिया है
02:08अंध विश्वास है
02:10अंध विश्वास
02:11तब तक जब तक वो तुम्हारी चोकट पर दस्तक न दे राजू
02:14तु इस गाउं का ही खून है
02:16पर शहर की हवा ने तेरी आँखे बंद कर दी है
02:19क्या तुने कभी किसी को यहां
02:20पूर्निमा की रात रुखते देखा है
02:22क्यूं पूर्निमा को क्या खास है
02:24चान ज्यादा रोशन होता है
02:26हाँ रोशन होता है
02:28इतना रोशन कि वो उन दियों को जलते हुए देख सके
02:31जो इस तलाब के किनारे अपने आप जलते हैं
02:34बिना तेल, बिना बाती
02:36और उनकी लौ
02:37उनकी लौ तब तक नहीं बुझती
02:39जब तक सुभा का सूरज उसे देखना ले
02:42ये कोई केमिकल रियाक्शन होगा
02:44चाचा, फॉस्फोरस या यू कुछ और
02:46और वो चहरा क्या?
02:48वो भी केमिकल रियाक्शन है
02:50जो कोई इस तलाब में ज्छाकता है
02:53उसे अपना चहरा नहीं दिखता
02:54उसे उस इनसान का चहरा दिखता है
02:57जो पिछली रात मर चुका होता है
02:59ये बात सुनकर राजू एक पल के लिए सहर गया
03:02माहौल में एक अजीब सी खामोशी चा गई
03:05और जो सबसे डरावनी बात है
03:07जो हमारे बुजर्ग कहते आएं है
03:09तलाब पानी नहीं मांगता
03:11शरीर मांगता है
03:12यहाँ पानी नहीं डूपता राजू
03:14यहाँ परचाईयां डूपती है
03:16कहते हैं जब भी कोई उस तलाब के पास
03:19रात को अकेला बैठता है
03:20उसे अपने नाम से कोई पुकारता है, मीठी, जानी-पहचानी आवाज में.
03:25और जिसने पलट कर जवाब दिया या उस सूखी मिट्टी में झाक लिया, उसकी परचाई वहीं गिर जाती है.
03:32और वो इनसान, वो बस गायब हो जाता है हमेशा के लिए.
03:36मुख्या जी आप सब बहुत ज्यादा सोच रहे हैं
03:40लोग गायब होते हैं मैं मानता हूँ
03:42शायद शहर चले जाते होंगे या कोई हाथसा
03:45पर परच्छाली का डूबना ये सब ये सब बस बस
03:50क्या बेटा अंधविश्वास
03:52जाकर देखा हिम्मत है तो आज रात वन ही रुख जा
03:54पर याद रखना अगर उस तालाब ने तुझे पुकारा
03:57तो वापिस मताना क्योंकि तु वापिस आ ही नहीं पाएगा
04:00राजू चुप हो गया
04:01बुजर्गों की आँखों में उसने डर नहीं
04:04बलकि एक ऐसी सचाई देखी थी जिसे वो सालों से जी रहे थे
04:08सूरज अब पूरी तरह डूप चुका था
04:11बेला तालाब अब एक काले गहरे गढ़े जैसा लग रहा था
04:14जो अंधेरे में किसी का इंतिजार कर रहा हो
04:17कुछ हफते शान्ती से बीते
04:19गाउवाले बेवडा तालाब से दूर रहते
04:22और राजू अपने कामों में लगा रहता
04:24हालांकि बुजुर्गों की बाते उसके दिमाग में कहीं न कहीं अटकी हुई थी
04:28तब ही राजगर में नए पटवारी की नियुकती हुई
04:32विजय कुमार एक चुस्त, पढ़ा लिखा और हद से ज्यादा आत्मविश्वासी नौजवान
04:38जिसने अपनी जिंदगी सिर्फ किताबों और फाइलों में गुजारी थी
04:42अंधविश्वास उसके लिए एक मजाग था
04:45पटवारी विजय ने गाउं का मुआइना शुरू किया
04:48और उसकी नजर गाउं के बीचों बीच उस खाली जमीन पर पड़े
04:51ये क्या बकवास है गाउं के बीचों बीच इतना बड़ा गड़ा
04:56इसे भरवाया क्यूं नहीं अब तक
04:58यहां तो बढ़िया सामुदाइक भवन बन सकता है
05:00सहायक ने डरते डरते उसे बेवडा तालाब के बारे में बताया
05:05ये सुनकर विजय जोर से हसा और सीधा मुखिया श्याम लाल के घर पहुँच गया
05:11मुखिया जी मैं आपकी बहुत इज़त करता हूँ
05:14लेकिन ये अंधविश्वास अब और नहीं चलेगा
05:17ये जमीन सरकारी है और मैं यहां गाउं के विकास के लिए आया हूँ
05:21कहानिया सुनने नहीं
05:22पटवारी जी विकास जरूरी है मैं मानता हूँ
05:26लेकिन जिन्दगी उससे ज्यादा जरूरी है
05:28वो जमीन शापित है
05:30हमारे पुर्खे कहते आये हैं
05:31उस मिट्टी को मत छेड़ो जिसने भी छेड़ा
05:33वो क्या गायब हो गया
05:35मुख्या जी ये 21वी सदी है
05:38आप अभी भी भूत प्रेत और शाप में अटके है
05:40मुझे ये सब बक्वास लगता है
05:42मैंने हुक्म दे दिया है
05:44कल से मजदूर आएंगे
05:45और उस गड़े के चारो और दीवार बनानी शुरू करेंगे
05:48मैं इस बेवडे तालाब को हमेशा के लिए बंद कर दूँगा
05:52दीवार? हाँ तू दीवार बनाएगा
05:54पटवारी तू उस ताकत को रोकेगा
05:57जो जमीन के नीचे से सांस लेती है
05:59अरे पगले जिन दीवारों को तू सीमेंट और इंच से बनाएगा
06:03वो उस देवता के एक फूँक से ढह जाएंगी
06:05जिसे तू जानता भी नहीं
06:06ओ, तो यहाँ एक देवता भी है
06:09बहुत खूब
06:10देखिए चाचा जी, आप लोग पूजा पाट कीजिए
06:13मैं अपना काम करूँगा
06:15और हाँ, अगर कल कीजी ने मेरे मजदूरों को डराने या काम रोकने की कोशिश की
06:20तो मैं पुलिस बुला लूँगा
06:21सरकारी काम में बाधा डालने का केस बनेगा
06:24पुलिस तो पुलिस को बुलाएगा क्या
06:26पुलिस उस चीज को पकड़ पाएगी
06:28जिसकी कोई परचाई नहीं होती
06:30या शायद जिसकी सिर्फ परचाई ही होती है
06:33जा बेटा जा, बना ले दिवार
06:36हम भी देखते हैं तेरी दिवार जादा मजबूत है
06:38या इस तालाब की प्यास
06:40पटवारी विजय घुसे में पैर पटकता हुआ
06:43वहां से चला गया
06:44अगली सुभह जैसा की उसने कहा था
06:46मजदूर आ गए
06:48गाउं के लोग डर के मारे दूर खड़े
06:51तमाशा देख रहे थे
06:52राम किशन, गंगा राम और
06:54शामलाल भी चबूत्रे से सब देख रहे थे
06:57राजू भी वहां खड़ा था
06:59उसे पटवारी की जिद पर
07:01खुसा भी आ रहा था
07:02और बुजर्गों के डर पर हंसी भी
07:05पटवारी जी मैं आपकी बात समझता हूँ
07:07ये सब अंध विश्वास है
07:09लेकिन गाओं वाले डरते हैं
07:11क्या आप कुछ दिन रुक नहीं सकते
07:13शायद कोई और रास्ता निकलाए
07:15तुम भी राजू हो
07:16तुम तो पढ़े लिखे लगते हो
07:18तुम भी इन गवारों की बातों में आ गए
07:20देखो मैं तुम्हें दिखाता हूँ
07:21अंध विश्वास कैसे तोड़ा जाता है
07:23विजय ने एक भावडा उठाया
07:25और खुद तालाप की सूखी मिट्टी पर चड़ गया
07:28उसने जोर से भावडा जमीन पर मारा
07:30ये देखो
07:31कहां है तुम्हारा देवता
07:33कहां है वो प्यासी आत्मा
07:35सब जूठ है
07:36जैसे ही उसने भावडा मारा
07:39जमीन से एक अजीब सी
07:41सड़ी हुई गंद उठी
07:42मजदूरों ने अपनी नाक बंद कर ली
07:45मत कर पटवारी
07:46मत जगा उसे
07:48वो सो रहा है उसे सोने दे
07:50लेकिन विजय ने नहीं सुनी
07:52उसने मजदूरों को काम शुरू करने का आदेश दिया
07:55दिन भर काम चला
07:57डरते डरते ही सही
07:59मजदूरों ने शाम तक दीवार का एक हिस्सा खड़ा कर दिया
08:03देखा? कुछ हुआ?
08:04कुछ नहीं हुआ
08:06कल तक ही दीवार पूरी हो जाएगी
08:08और तुम्हारा ये बेबडा तालाब इतिहास बन जाएगा
08:10विजय अपनी कार में बैटकर चला गया
08:13रात हुई
08:14आज पूर्णिमा की रात थी
08:16गाउं में सन्नाटा था
08:18लेकिन ये सन्नाटा रोज जैसा नहीं था
08:21आज हवा में एक अजीब सी घबराहक थी
08:24आधी रात को राम किशन चाचा की नींद खुली
08:27उन्हें लगा जैसे कोई उनके नाम से पुकार रहा है
08:31फिर पूरे गाउं ने एक भयानक आवास सुनी
08:34जैसे कोई विशाल काई चीज जमीन को फाड़ कर बहरा रही हो
08:38एक गड़गडा हट जिसने घरों की दीवारों को हिला दिया
08:43और उसके बाद एक चीख एक इनसानी चीख जो बेवरा तालाब की दिशा से आई थी
08:48और फिर खामोशी
08:50सुबह जब गाउंवाले इकठा हुए तो मनजर देखकर उनकी रूह काम गए
08:55जो दीवार पटवारी ने बनवाई थी वो तूटी हुई थी
08:59इटें और सीमेंट ऐसे बिखरे थे जैसे किसी ने उन्हें खिलोनों की तरह मसल कर फेंग दिया हो
09:05और उस तूटी हुई दीवार के बीचो बीच पटवारी विजय कुमार का एक जूता पड़ा था
09:12सिर्फ एक जूता
09:14बाकी शरीर कभी नहीं मिला
09:16नाश कर दिया हमने
09:18हमने कहा था इस मिट्टी को मत छेडो
09:21इसने एक और को पी लिया
09:23दीवार तूट गई
09:24परचाई एक और बढ़ गई
09:26राजू वहीं खड़ा था
09:28उसके पैरों तले जमीन खिसक गई थी
09:31ये अंध विश्वास नहीं था
09:32ये कोई chemical reaction नहीं था
09:34ये एक भयावा सच्चाई की
09:37उसने उस जूते को देखा
09:39और फिर तालाब की सूखी
09:41जमीन को
09:42उसे लगा जैसे वो जमीन धीरे धीरे हिल रही है
09:45जैसे वो मुस्कुरा रही हो
09:47विजय पटवारी की घटना ने
09:49राजु को पूरी तरह बदल दिया था
09:51उसका शहरी तकबुर
09:53उसका विज्ञान का घमंड
09:54सब उस एक जूते के सामने बिखर गया था
09:57अब वो जानता था
09:59कि बेवडा तलाब सिर्फ एक कहानी नहीं
10:01एक जीती जाकती
10:03सांस लेती हुई आफत है
10:04वो अब जादातर वक्त
10:06राम किशन चाचा और अंगा राम काका के पास
10:09बैठने लगा
10:09वो अब सवाल नहीं करता था
10:11वो बस सुनता था
10:12वो उस राज की तह तक पहुँचना चाहता था
10:15चाचा मुझे सब बताईए शुरू से
10:18ये देवता कौन था
10:19उसे क्यों मिट्टी में बंद किया गया
10:22और ये परचाईया ये सब क्या है
10:24ये बहुत पुरानी बात है बेटा
10:26इतनी पुरानी के अब धुंधली पड़ गई है
10:29कहते हैं जब ये गाउं बस रहा था
10:32तब यहां एक धर्ती का रक्षक देवता प्रकट हुआ था
10:35वो जमीन से ही जन्मा था
10:38गाउं वाले उसकी पूजा करते थे
10:40और वो बदले में गाउं को हर बला से बचाता था
10:44ना कभी सूखा पड़ता ना कभी बार आती
10:47फेर क्या हुआ?
10:49लालच हुआ बेटा
11:02वो थे धरंपाल, करमचन, सुदर्शन और मायाराम
11:05हाँ, इन चारों ने मिलकर एक खौफनाक साजिश रची
11:09उन्होंने एक तांत्रिक को बुलाया
11:11और उस देवता को धोका देकर
11:13मंत्रों से बांध कर उसी की जमीन में
11:15जहां उसका मंदिर था, वहीं जिन्दा दफन कर दिया
11:19उपर से मिट्टी डाल दी
11:20उन्होंने सोचा, देवता मर गया
11:23पर वो मरा नहीं बेटा
11:24वो बस मिट्टी में बंध हो गया
11:26तो बेवडा ताराब
11:28वो उस देवता की कबर नहीं
11:30कैद खाना है
11:31और उस कैद खाने में वो तडप रहा है
11:34उसका शरीर तो मिट्टी में फसा है
11:36पर उसकी आत्मा, उसका क्रोध
11:38वो आजाद है
11:39और वो अब इनसानों से बदला ले रहा है
11:42वो अपनी शक्ती वापिस पाने के लिए
11:45परच्छाईया पी रहा है
11:46उसे अपना शरीर वापिस चाहिए
11:48वो हर उस इनसान को अपना शिकार बनाता है
11:51जो उस जमीन पर कबजा करना चाहता है
11:53या जो उसकी ताकत को चुनोती देता है
11:55पटवारी ने वही किया
11:57नाश कर दिया
11:58हमने कहा था
12:00इस मिट्टी को मत छेड़ो
12:01इसने एक और को पी लिया
12:03राजू के दिमाग में एक योजना बनने लगी
12:06हमें उन वंशजों से बात करनी होगी
12:08शायद उनके पास इस श्राप को तोड़ने का कोई रास्ता हो
12:12कोई पुराना ग्रंध, कोई तरीका
12:14राजू सबसे पहले सूरज के पास गया
12:17जो गाउं का सबसे अमीर आदमी था
12:19और अपने दादा धरंपाल की जमीन जायदात पर एश कर रहा था
12:23सूरज भाई, मुझे आपसे बेवडा तालाब के बारे में बात करनी है
12:27मेरे खयाल से हमारे पुर्खों ने जो गलती की है
12:30चुप हो जाओ, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये बात करने की
12:34कौन सा तालाब कौन सी गलती
12:36मेरे दादा जी एक नेक इनसान थे
12:39ये सब इन बुढ़ों की फैलाई हुई बक्वास है
12:42पटवारी अपनी बेवकूफी से मरा होगा
12:44किसी जानवर ने खींच लिया होगा
12:46अब दफा हो जाओ यहां से
12:48वरना मैं तुम्हारे खिलाफ ही पुलिस में शिकायत कर दूँगा
12:51राजू निराश होकर लोटाया
12:53उसका अगला पढ़ाव था भोला
12:55भोला गाउं के बाहर एक तूटी-फूटी जोपडी में रहता था
12:59लोग उसे पागल समझते थे क्योंकि वो अकसर खुद से बाते करता था
13:03और पुरानी फटी हुई किताबे पढ़ता रहता था
13:06वो माया राम का वन्शच था
13:09राजू जब भोला की जोपडी में पहुचा
13:11तो भोला उसे देख कर मुस्कुराया
13:13जैसे उसे राजू के आने का पहले से ही पता हो
13:16आ गए तुम परचाई ढूडने वाले
13:18बहुत देर कर दी
13:20अब तक तो कई डूप चुकी है
13:22आप
13:23आपको कैसे पता मैं आऊंगा
13:26मुझे सब पता है
13:27मेरे परदादा माया राम ने
13:30मरने से पहले ये किताब मुझे दी थी
13:32इसमें सब लिखा है
13:33वो पाप, वो शाप
13:35और उससे मुक्ती का रास्ता भी
13:37क्या रास्ता है भोला भाई
13:39बताईए
13:40हम इस गाउं को बचा सकते हैं
13:42बचा सकते हो
13:44इस श्राब से कोई नहीं बच सकता राजू
13:46ये देवता भोका है
13:48उसे अपना शरीर वापस चाहिए
13:51और वो तब तक परचाईया पीता रहेगा
13:53जब तक उसे वो ना मिल जाए
13:55जो उसे चाहिए
13:59उसे एक बलिदान चाहिए
14:01एक नहीं, दो
14:03पहला बलिदान विश्वास घात का खून
14:06उन चार परिवारों में से किसी एक का खून
14:09जो स्वेच्छा से उस मिट्टी पा गिरे
14:11मेरे पर दादा ने लिखा है
14:13कि वो बहुत पचताए थे
14:15पर बाकी तीन, धरमपाल, करमचंद और सुदर्शन
14:19वो कभी नहीं पचताए
14:21उनका खून आज भी घमन से भरा है
14:24जैसे सूरज का है
14:25और दूसरा बलिदान, दूसरा एक निर्दोश परच्छाई
14:29कोई ऐसा जिसने कोई पापना किया हो
14:32जो शुद्ध हो
14:33जब ये दोनों चीजें उस मित्ती को मिलेंगी
14:36तभी देवता का क्रोध शान्त होगा
14:38तभी वो आजाद होगा
14:41वलना वो एक-एक करके
14:42पूरे गाउं की परच्छाईयां पी जाएगा
14:44राजू सन रह गया
14:46विश्वास खात का खून मतलब
14:49सूरज या भोला में से कोई एक
14:51और निर्दोश परच्छाई
14:53जाओ राजू
14:54सूरज को मनाओ
14:55अगर वो मान गया
14:56तो शायद गाउं बच जाए
14:58पर वो मानेगा नहीं
15:00उसे अपनी जमीन प्यारी है
15:01जान नहीं
15:02और मैं तो पागल हूँ
15:04मेरी कौन सुनेगा
15:06राजू वहां से निकला
15:07तो उसका सिर घूम रहा था
15:09ये पहेली सुलजने की बजाए
15:11और उलज गई थी
15:12राथ हो गई
15:14राजू अपने घर की छट पर बैठा
15:16तालाब की ओर देख रहा था
15:18आज पूर्णिमा नहीं थी
15:19फिर भी उसे तालाब से
15:21एक अजीब सी ठंडक महसूस हो रही थी
15:23तभी उसे एक आवाज सुनाई दी
15:26एक मीठी जानी पहचानी आवाज
15:29राजू
15:31राजू
15:31राजू का दिल जोरों से धड़कने लगा
15:34ये आवाज उसकी मा की आवाज जैसी थी
15:37आजा बेटा
15:50उसकी मा तो घर में सो रही थी
15:52तो फिर ये आवाज किसकी थी
15:55वो धीरे धीरे तालाब की ओर बढ़ा
15:58डर से ज्यादा
15:59अब उसके मन में इस रहस्य को सुलजाने की जित थी
16:04जैसे ही वो तालाब की किनारे पहुँचा
16:06आवाज बंध हो गई
16:08वहाँ कोई नहीं था
16:10उसने हिम्मत करके
16:12कापते हुए उस सूखी दर्की हुई जमीन में जहांका
16:15वहाँ पानी नहीं था
16:17पर उसे एक अक्स दिखाई दिया
16:20ये उसका अपना चेहरा नहीं था
16:22ये पटवारी विजय का चेहरा था
16:25उसकी आखें खुली थी
16:27और चेहरे पर एक खौफ नाक मुस्कान थी
16:31राजू चीखते हुए पीछे हटा
16:34तभी तालाब की बीचों बीच
16:36सूखी मिट्टी में हल चल हुई
16:38मिट्टी हटने लगी
16:40और जमीन से दो होट हुबरे
16:42बस एक और चाया बाकी है
16:47राजू घर लोटाया
16:48पर वो राज सो नहीं पाया
16:51पटवारी का चेहरा
16:53और वो भयानक आवाज
16:54उसके जहन में गूंज रही थी
16:56बस एक और चाया बाकी है
16:59वो समझ गया था
17:01भोला ने कहा था
17:03निर्दोश पर चाई
17:04शायद वो तालाब
17:06उसी का इंतजार कर रहा था
17:08अगले दिन वो फिर भोला के पास गया
17:11भोला भाई
17:12विश्वास घात का खून चाहिए
17:14सूरज तो मानेगा नहीं
17:17और आप
17:18आप क्यों नहीं करते ये बलिदान
17:20मैं राजू
17:22मैं पाप का भागीदार नहीं बनना चाहता
17:25पर मैं मुक्ती भी नहीं चाहता
17:27मेरे परदादा ने ये श्राप मुझे दिया है
17:30मैं इसे जीऊंगा
17:32मैं कायर हूँ
17:34मैं मरना नहीं चाहता
17:35और मेरा खून
17:38शायद देवता को मेरा खून पसंद भी ना आए
17:41वो तो घमंड का खून चाहता है
17:43जैसे धरम पाल का था
17:45राजू ने एक लंबा फैसला लिया
17:48वो सूरज के पास वापस गया
17:51सूरज भाई
17:52आखरी बार पोच रहा हूँ
17:54अपने पुर्खों के पाप का प्रायश्चित कर लो
17:58बस बस अपने खून की दो बूंदे
18:00उस तालाब की मिट्टी पर गिरा दो
18:02शायद सब ठीक हो जाए
18:04तेरी इतनी हिमत
18:05तू फिरा आगया मेरे खून की बूंद
18:07तू जानता नहीं मैं कौन हूँ
18:09मैं अभी
18:11सूरज ने राजू को मारने के लिए
18:13एक डंडा उठाया
18:14राजू ने खुद को बचाने की कोशिश की
18:16हाथा पाई में सूरज का पैर फिसला
18:19और उसका सिर पास पड़े
18:21एक पत्थर से टकरा गया
18:22खून की एक धार उसके माथे से बह निकली
18:25आह तूने
18:27तूने मुझे मार दिया
18:29नहीं नहीं सूरज भाई
18:31मैंने कुछ नहीं किया
18:32आप आपका खून
18:34राजू को भोला की बात याद आई
18:37विश्वास घात का खून
18:39उसने सूरज को उठाया
18:41जो अब भी गालियां बक रहा था
18:42सूरज भाई उठो
18:44हमें तालाब पर चलना होगा
18:46राजू लगभग घसीटते हुए
18:49सूरज को तालाब तक ले गया
18:51गाउं वाले ये तमाशा देख रहे थे
18:54रामकिशन और शामलाल भी
18:55वहाँ पहुँच गए
18:56सूरज आई आपका खून
18:59इसे मिट्टी पर गिराईए
19:00नई मैं नहीं मेरा खून
19:03राजू ने जबरदस्ती
19:06सूरज का सिर पकड़ा
19:07और उसके माथे से बहते
19:08खून की कुछ भूंदे
19:10तालाब की सूखी जमीन पर टपका दी
19:13जैसे ही खून की भूंदे
19:14मिट्टी पर गिरी तालाब की
19:16जमीन कांपने लगी
19:17एक भयंकर गड़गड़ा हट हुई
19:19सूखी मिट्टी भटने लगी और
19:22जमीन के नीचे से एक सडान भरी
19:24HEWA का जोका आया
19:25पहला बलिदान पूरा हुआ
19:28देवता जाग गया है
19:30सूरज डर के मारे
19:32बेहोश हो गया
19:33सबकी नजरें तालाप पर थी
19:35मिट्टी अब शान्त हो गई थी
19:37लेकिन कुछ बदला नहीं था
19:39हवा में अभी वही प्यास थी
19:41पहला बलिदान हो गया राजू, पर वो शांत नहीं हुआ, उसे अभी भी निर्दोश पर छाई चाहिए
19:49सबकी नजरें राजू पर टिक गए, वो गाउं का सबसे पढ़ा लिखा, सबसे साफ दिल का लड़का था, वो निर्दोश
19:58था
19:58नहीं राजू बेटा, तू नहीं, तू भाग जाए हां से
20:03कहां जाओं चाचा, अगर मैं चला गया, तो ये तलाब कल आपको, परसो मुख्या जी को, और फिर एक-एक
20:12करके पूरे गाउं को पी जाएगा
20:15नहीं, पटवारी की परचाई के बाद, बस एक ही चाया बाकी है, मेरी चाया
20:22राजू ने अपने माता-पिता को याद किया, उसने अपनी पढ़ाई को याद किया
20:28उसे लगा उसका सारा विज्ञान, सारी तर्क शक्ती, आज इस एक अंधविश्वास के सामने हार गई थी
20:35या शायद जीत गई थी
20:38वो धीरे-धीरे तलाब की किनारे गया, उसने आखरी बार अपने गाउं को देखा
20:44मुख्या जी, अगर मैं वापस ना आऊं तो इस तलाब की जगह पर एक स्कूल बनवा देना
20:49ताकि अगली बार कोई राजू इन अंधविश्वासों से लड़ने के लिए नहीं, बलकि उन्हें समझने के लिए पढ़े
20:54राजू ने गहरी सांस ली और तलाब की सूखी जमीन में जहाका
20:59इस बार वहाँ पटवारी का चहरा नहीं था
21:02वहाँ एक शांत सौम्य चहरा खा, एक देवता का चहरा
21:07उसकी आखें बन थे, पर होट मुस्कुरा रहे थे
21:10आजा बेटा, एक शांत आवाज आई
21:14राजू ने अपनी आखें बंद की और एक कदम आगे बढ़ा दिया
21:19राजू का शरीर वहीं खड़ा रहा, पर वो अब राजू नहीं था
21:23वो बस एक खाली खोल था
21:25उसकी आखें खुली, पर उनमें कोई जान नहीं थी
21:28वो मुड़ा गाउवालों को देखा
21:31और फिर वो भी मिट्टी में धसने लगा
21:35देखते ही देखते राजू जमीन में समा गया
21:38गाउवाले चीक पड़े और फिर एक चमतकार हुआ
21:41जिस जगह राजू डूबा था, वहाँ से पानी का एक सोता फूट पड़ा
21:46सालों से सूखा पड़ा बेवडा तालाब उसमें पानी भरने लगा
21:50साफ नीला पानी
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