00:25।
00:41।
01:00बाल बाल बचे
01:01भगवान का शुकर है जो हवेली से कोई आवाज सुनाई नहीं दी
01:05हाँ भाई बाल बाल बचे
01:07अपसे ऐसी घलती कभी नहीं करूंगा
01:09ये सब बोलकर दोनों सुकून की सांस लेकर
01:12महां से अपने घरों की और निकल जाते हैं
01:33तो क्या सच में आपको इतने दूर के गाउं में जाना पड़ेगा
01:37ना सडक ठीक ना अस्पताल ना कोई जान पहचान
01:41आप वहां कैसे रह पाएंगे
01:43अरे भाग्यवान डर क्यों रही हो
01:46ये सरकारी नौकरी है
01:47पोस्टिंग जहां मिले वहां जाना ही पड़ता है
01:50कुछ दिन की बात है फिर मैं अपना ट्रांसफर लगवा लूँगा
01:53वैसे भी गाउं में तो शांती होती है
01:55और हम भी तो गाउं की ही रहने वाले है
02:14अरे नीरा तुम भी ना सुनी सुनाई बातों पर यकीन कर लेती हो
02:18वो सब पुराने जमाने की बाते हैं
02:20भूत प्रेत असलियत में कहा होते हैं
02:22जिंदगी का असली डर तो हमारे दिल में होता है
02:25ठीक है वैसे भी अब हम कर ही क्या सकते हैं
02:28आप बस अपना ध्यान रखना
02:30और दिन रहते ही कोई किराय का कमरा ले लेना
02:33अगली सुभा रवी नीरा से विदा लेकर बस पकड़ने जाता है
02:37काफी इंतजार के बाद उसे सोनगर की बस मिलती है
02:41लेकिन सोनगर पहुँचते पहुँचते शाम ढल जाती है
02:44अब उसे अपने रहने के लिए किराय का कमरा भी ढूणना था
02:48इसलिए वो जल्दी जल्दी गाउं के भीतर चल पड़ा
02:51रास्ते में बहुत सन्नाटा था
02:53अचानक मौसम बिगडने लगा और तेज बारिश शुरू हो गई
02:57बारिश से बचने के लिए रवी दोडने लगा
03:01तभी उसे आगे एक पुरानी हवेली दिखी
03:05और वो बिना कुछ सोचे दोड़ते हुए उस हवेली के अंदर चला गया
03:10अंदर आते ही उसे अजीब सा महसूस होने लगा
03:14आसपास की हवा में एक घुटन सी थी
03:16ये कैसी जगा है? हवा में कैसी घुटन है?
03:21शायद कोई पुरानी हवेली है
03:22रहने लाइक तो नहीं
03:24पर फिलहाल बारिश रुकने तक छट के नीचे तो रही सकता हूँ
03:27उसने एक कोने में अपना बैग रखा
03:30अंदर बहुत अंधेरा और सीलन थी
03:32अचानक उपर से कुछ गिरने की तेज आवाज आई
03:35शायद कोई लकडी गिरी होगी
03:37पुरानी हवेली है
03:39अंधेरे में रवी की नजर दिवार पर पड़ी
03:42वहां मिट्टी में किसी बच्चे की उंगलियों के निशान थे
03:46जैसे किसी ने अंदर से बाहर निकलने की तडप में दिवार को खरोचा हो
03:51ये देखकर रवी थोड़ा डर कर पीछे हट गया
03:54तभी उपर से किसी के रोने की हलकी सी सिस्की सुनाई दी
03:59मुझे मुक्ती चाहिए, मुझे मुक्ती दो
04:02रवी का दिल एक बल के लिए रुग गया
04:05खून ठंडा पड़ गया
04:08उसने सीडियों की तरफ देखा
04:10और वहां सीडियों के ऊपर एक छूटा लड़का खड़ा था
04:16शायद दस बारा साल का
04:18सादे मैले कपड़े, नंगे पाउं
04:21आखों में लाल चमक
04:24ऐसी चमक जो अंधेरों में दिखती है, रोशनी में नहीं
04:28और चहरे पर एक ऐसी उदासी
04:31जो उम्र से कहीं बड़ी थी
04:33तुम, तुम कौन हो बेटा
04:36यहां क्या कर रहे हो
04:37यह तो बहुत पुरानी हवेली है
04:39लड़का सीडियों से धीरे धीरे नीचे आने लगा
04:43उसके पाउं जमीन पर पड़े
04:46पर कोई आवाज नहीं आई
04:48धूल भी नहीं उड़ी
04:50जैसे वो जमीन को छू ही नहीं रहा था
04:53बस उसके उपर तैर रहा था
04:55कितने बरसों तक यहां रहेंगे आप
04:58मैं भी, मैं भी कई बरसों से यहां हूँ
05:00मुझे यहां से निकालो न
05:02मुझे बहुत अकेला लगता है
05:03क्या बकवास है यह
05:05बाहर बारिश हो रही है
05:07मैं बस कुछ देर के लिए रुका हूँ
05:08तुम, तुम इतने अजीब क्यों लग रहे हो
05:11तुम कहां के रहने वाले हो
05:13क्या आप भी मुझे यहां
05:15अकेले छोड़ कर जाएंगे
05:16रवी ने अंधेरे में ध्यान से देखा तो पाया
05:19कि वो चेहरा इंसानी कम और परचाई ज्यादा लग रहा था
05:24कौन हो तुम सच में
05:25तुम इंसान नहीं लग रहे
05:27मुझे जाने दो यहां से
05:29क्या चाहिए तुमें मुझसे
05:30उन्होंने मुझे यहीं दफना दिया था
05:33अब कोई मुझे सुनता नहीं
05:36क्या मुझे मुझे मुक्ती दिला दोगे
05:38वो आखरी शब्द हवा में गुंजे
05:40मुक्ती दिला दोगे
05:42और अगले ही पल
05:44वो बच्चा बिलकुल गायब हो गया
05:46जैसे था ही नहीं
05:48और तब ही अचानक बाहर की बारिश भी रुख गई.
05:53बिलकुल एक बल में जैसे कोई स्विच बंद हो गया हो.
05:57रवी ने एक सेकंड भी नहीं लगाया.
06:00बैग उठाया और भाग निकला.
06:02दर्वाजे से बाहर निकलता हुआ वो सीधा दोडने लगा.
06:07पर फिर ना चाहते हुए भी उसने एक बार पीछे देखा.
06:12और वही लड़का हवीली की चट पर खड़ा था.
06:17अंधेरों में सिर्फ उसे खूर रहा था.
06:20ना ही हिल रहा, ना ही भाग रहा, बस दीख रहा था.
06:25रवी ने मूँ पहरा और उस रात का सबसे लंबा दोड़ा अपनी जिन्दगी में लगाया.
06:31बदहवास हालत में भागते हुए रवी गाओं के स्कूल के हेड मास्टर के घर पहुचा.
06:36आप कौन है? इतनी रात को क्या चाहिए आपको?
06:41मैं रवी हूँ. आपके स्कूल का नया विज्ञान शिक्षक.
06:45ओ, आए, आए, अंदर.
06:52मुझे लगा था आप दिन में आएंगे, पर आप यहाँ इतनी रात को कैसे?
06:56और ये हाल क्यों है आपका?
06:58आप पूरी तरह भीगे हुए हैं और चहरे पर?
07:02मुझे डर है कि कहीं वही तो नहीं हुआ जिसका मुझे डर था.
07:07बस मिलने में देर हो गई और रास्ते में मेरे साथ जो हुआ उसे देखकर मेरी रूह कांप गई.
07:13उपर से वो अजीब सी बारिश?
07:15मैं सब समझ गया.
07:17आप किस्मत वाले हैं जो वहां से जिन्दा निकलाए.
07:21गाउं में एक बहुत पुरानी अफ्वा है.
07:24शायद अफ्वा से ज्यादा कुछ और.
07:26कौनसी अफ्वासा?
07:28वो हवेली जो भी रात को वहां जाता है, उसे आवाजें सुनाई देती हैं, या परचाई दिखती है.
07:34और गाउं वाले कहते हैं, कि अगर वो आवाज अनसुनी कर दे, तो वो इनसान और उसका परिवार नींद में
07:41ही मर जाते हैं.
07:42और ये भी सुनो, गाउं में आज कोई बारिश नहीं हुई, मैंने खिड़की से बाहर देखा था, आसमान बिलकुल साफ
07:49था, वो बारिश सिर्फ आपके लिए, सिर्फ उस हवेली के आसपास हुई थी.
07:53लेकिन मैं तो हवेली के अंदर था, और मैंने सिर्फ आवाज नहीं सुनी, मैंने एक बच्चे को देखा, वो बिलकुल
08:00भी कोई इनसानी बच्चा नहीं लग रहा था.
08:03रवी, ये तुमने क्या किया? कुछ भी हो जाता, लेकिन तुम्हें वहाँ नहीं जाना चाहिए था. अगर गाउवालों को पटा
08:10चला, तो वे तुम्हें गाउव में रहने भी नहीं देंगे.
08:13रवी उस रात हेड मास्टर के घर ही रुका, लेकिन अपनी पतनी नीरा की चिंता में और उस घटना के
08:19बारे में सोच कर उसे रात भर नींद नहीं आई.
08:23रविवार की सुभा रवी ने डरते हुए हेड मास्टर से बात की.
08:26सर, मुझे पूरी रात नींद नहीं आई. अगर उस हवेली का श्राप लगने से परिवार को नुकसान होता है, तो
08:33क्यों न मैं अपने घर जाऊं ही नहीं?
08:35जो होना है मेरे साथ हो. मेरी गलती की सजा मेरी पत्नी को नहीं मिलनी चाहिए. मैं आज ही उस
08:41हवेली में जाऊंगा और जो होगा मेरे साथ होने दूँगा.
08:44में तो मुझे भी नहीं आई. अफ वाहों पर मुझे संदे है, लगता है वहाँ कोई राज छुपा है. और
08:51तुमने जो बच्चे की परचाई वाली बात बताई, उससे मुझे बहुत हैरानी हो रही है.
08:56कैसी हैरानी सर?
08:58बरसों पहले उस हवेली में गाउं का सबसे अमीर ठाकुर हरीश चंदर अपने बेटे के परिवार के साथ रहता था.
09:05वे दिल के बहुत करूर थे. वहाँ गाउं का एक लड़का काम करता था. बाद में पता चला कि उस
09:12लड़के ने धन के लालच में ठाकुर की पूरे परि
09:27ठाकुर के परिवार में कोई बच्चा था ही नहीं. अगर आत्मा ठाकुर की होती तो बात अलग थी. लेकिन वहाँ
09:34बच्चे की आत्मा का क्या काम? अब तो मुझे भी वहाँ कुछ कहरा राज लगता है. मैं भी तुम्हारे साथ
09:40उस हवेली में चलूँगा. हम दिन में जा
09:56काले में भी हवेली अंदर से बहुत भयानक लग रही थी. कौन हो तुम? कल रात तुमने मुझे यहां क्यूं
10:03बुलाया था? मुझे पता है तुम ही मुझे खीच लाय थे. रवी ऐसे बोलना ठीक नहीं रहेगा. वो हमें नुकसान
10:10पहुचा सकता है. तब ही दूर वो बच्
10:26अजानक उनके एकदम करीब आ गया. दोनों बहुत डर गये. लेकिन उन्होंने देखा कि बच्चे के चहरे पर बहुत दुख
10:34था और वो रो रहा था. मुझे पता है तुम हमसे कुछ कहना चाहते हो. बताओ, हम सुनेंगे. और गाउंवालों
10:43को ये श्राब क्यों दिया है?
10:44सन नाटा. फिर वो बच्चा आँखें नीचे करके धीरे से बोलने लगा. जैसे काफी देर बाद कोई दर्वाजा खुला हो.
10:54मेरी मदद कर दो. मुझे मुक्ती चाहिए. कई सालों से यहां हो पर कोई सुनता नहीं. सब डर के भाग
11:04जाते हैं. तुम दोनों पहले हो. जो ख
11:24सब बताओ.
11:44मुझे इतनी बड़ी सजा दी है. वैसे ही तुम सब भी अपने पाप की सजा खुद ही भुगत कर मरोगे.
11:50बच्चे ने बताया कि उसके मरने के बाद ठाकुर के परिवार ने उसकी लाश हवेली के तहखाने यानी बेस्मेंट में
11:58छिपा दी. कुछ दिन बाद मेरे श्राप
12:14की तौर पर तो सब ने यही सोच लिया कि मैंने पैसों के लालच में खून किया और भाग गया.
12:20किसी ने एक बार भी नहीं सोचा कि ये ग्यारा साल का लड़का ये कर सकता है. किसी ने नहीं
12:25सोचा.
12:26और मेरे निर्दोश माता-पिता, मेरे बीमार, बाबा और मेरी अम्मा. गाउंवालों ने उन्हें हत्यारे के माता-पिता कहकर गाउं
12:35से निकाल दिया. वो लोग जंगल में भटक गए. मैं जानता हूँ वो बहुत तकलीफ में रहे. मैं अपने माता
12:43-पिता को अच्छी जि
12:53हैद हो गया. ना जी सकता हूँ. ना जा सकता हूँ. रवी और हेड मास्टर उस छोटे से लड़के की
13:01बात सुन-सुनकर अंदर से तूट रहे थे. रवी ने महसूस किया कि उसकी आँखे भराई हैं. हेड मास्टर ने
13:08आँखों पर हाथ रख लिया. तुम्हारे साथ बहुत
13:11बुरा हुआ. बहुत बड़ा जुल्म हुआ. और किसी ने तुम्हारी आवाज नहीं सुनी. लेकिन हम सुन रहे हैं अब. और
13:18हम तुम्हारी मदद करेंगे. पक्का. तुम गाहों वालों को और तकलीफ मत दो. जो होने वाला है, हमें बताओ. अब
13:27सच्चाई सामने लाने का
13:28कोई फाइदा नहीं. बस तुम लोग मेरा अंतिम संसकार कर दो. ताकि मरने के बाद मैं अपने माता-पिता के
13:36पास जाकर अपनी जिम्मेदारी ना निभापाने की माफी मांग सकूँ. तहखाने में मेरे शरीर का जो अंश पचा है, उसे
13:44ले जाकर पंडित से चिता पर अग
13:56नी दिलवाई. इसके बाद उन्होंने पूरे गाउं को इखठा किया और उस निर्दोश बच्चे और क्रूर ठाकुर की सारी सच्चाई
14:04गाउंवालों को बता दी. थोड़ी ही देर बाद सब लोग देखते हैं कि हवीली से एक चमकती हुई रोशनी उपर
14:11आसमान की तरफ �
14:12जा रही है. सब को ये समझ आ गया कि उस मासूम लड़के की आत्मा को अब हमेशा के लिए
14:17मुक्ती मिल चुकी थी. उस बच्चे की कहानी जानकर सब की आँखे नम हो गए. कोई कुछ नहीं बोला. कुछ
14:25देर तक सब वहां खड़े रहे और सब समझ गये कि वो मासूम आत्म
14:29अब हमेशा के लिए मुक्ती पा गई है. उस बच्चे की कहानी जानकर गाउं में एक खामोशी आई. वो खामोशी
14:36जो समझ के बाद आती है. पच्चतावे की, आंसू की. सब की आँखे नम थी. बाद में रवी ने नीरा
14:43को कॉल किया. फोन लगाया तो नीरा ने पहली ही र
14:57बाद में सब बताऊंगा. अभी बस इतना जानो कि गाउं में एक बच्चा था. बहुत छोटा. जिसे किसी ने सुना
15:04नहीं था कई सालों तक. आज उसने कुछ मांगा था और आज मिल गया उसे. आप ठीकों? हाँ भाग्यवान. बिलकुल
15:13ठीकूं.
15:13रात को रवी ने आसमान की तरफ देखा. तारे थे. वही तारे. वही आसमान. पर आज कुछ अलग था. जिन्दगी
15:23का असली दर्द दिल में होता है. ये रवी ने नीरा को कहा था. पर आज समझा कि दिल में
15:29एक और चीज़ भी होती है. इंसानियत. और जब वो जाग जाए
15:33तो कोई भी आत्मा अंधेरों में नहीं रहती.
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