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Nepal Flood Crisis के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है—रेस्क्यू और राहत के लिए पहुंची विदेशी टीमों को नेपाल ने वापस क्यों भेज दिया? भयानक बाढ़, भूस्खलन और भारी तबाही के बीच Nepal Rescue Operations लगातार जारी हैं। इस बीच विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद को लेकर नेपाल के फैसले ने नई चर्चा छेड़ दी है। क्या नेपाल अपने दम पर राहत अभियान चलाना चाहता है, या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है? इस वीडियो में जानिए Nepal Flood Update, विदेशी मदद, Rescue Operations, राहत अभियान और सरकार के फैसले से जुड़ी पूरी कहानी। ताजा अपडेट और पूरी जानकारी के लिए वीडियो अंत तक जरूर देखें।

Nepal is battling a devastating flood and landslide crisis, but a major question has emerged over foreign rescue teams. Why did Nepal turn away international rescue assistance amid the ongoing disaster? With rescue operations continuing across affected areas, the decision has sparked debate over Nepal’s disaster response and its approach to foreign aid. In this video, we explain the latest Nepal Flood Update, the status of rescue operations, foreign assistance and the reasons behind Nepal’s reported decision. Watch the full report for the latest developments from Nepal and understand what this decision could mean for ongoing relief and rescue efforts.

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Transcript
00:07नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हालाद बिगड़े हुए हैं, लेकिन इसी संकड के बीच सरकार ने एक ऐसा फैसला
00:13लिया है जिसने सबका ध्यान खीचा है।
00:16भारत, चीन, अमेरिका और ब्रिटीन समेथ कई देशों ने नेपाल को रेस्क्यू टीम भेजने की पेशकश की, लेकिन नेपाल ने
00:22विदेशी टीमों को बुलाने से इनकार कर दिया।
00:25सवाल है कि जब सैकडों लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं
00:30तो नेपाल ने विदेशी मदद लेने से क्यों मना किया।
00:33इस फैसले के पीछे नेपाल सरकार ने अपनी सेना और पुलिस पर भरोसा जताया है।
00:37अधिकारियों का कहना है कि नेपाली सेना और पुलिस राहत और बचाव अभियान को खुद संभालने में सक्षम है।
00:43सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों की जग है आर्थिक मदद लेने का फैसला किया है।
00:48ताकि राहत का काम नेपाल की अपनी एजिंसिया ही आगे बढ़ा सकें।
00:52नेपाल के इस फैसले को समझने के लिए 2015 के भूकम को याद करना जरूरी है।
00:56उस समय दुनिया के कई देशों से रेस्क्यू टीमें नेपाल पहुची थी।
00:59बड़ी संख्या में विदेशी दल राहत अभियान में शामिल हुए थे।
01:02लेकिन नेपाली अधिकारियों के मुताबिक इतने अलग-अलग दलों के आने से बचाव अभियान में तालमेल बैठाने में मुश्किल हुई
01:08थी।
01:09अलग-अलग टीमों के साथ काम करने, उन्हें इलाके बाटने और राहत सामगरी पहुचाने में समय लगा था।
01:14इसी पुराने अनुभव को देखते हुए इस बार नेपाल ने पहले से ही अपनी रणनीती साफ कर दी है।
01:19भारत ने भी अपनी NDRF टीम भेजने की पेशकश की थी, लेकिन नेपाल ने इसे स्विकार नहीं किया।
01:24इसके बजाए नेपाल ने कहा है कि विदेशी देशों से आर्थिक मदद ली जाएगी और जमीन पर राहत और बचाव
01:30का काम नेपाली सेना, पुलिस और स्थानी एजनसिया संभालेंगी।
01:33लेकिन नेपाल के सामने चुनौती छोटी नहीं है, बाढ़ और भूस खलन से अब तक दोनों देशों में 552 लोगों
01:39की मौत की खबर है, 1500 से ज्यादा लोग अब भी लापता है, इन में करीब 178 भारतिये नागरिक भी
01:45शामिल बताय जा रहे हैं, ऐसे में हर घंटे कीमती है
01:47और बचाव दलों के सामने बड़ी संख्या में लोगों तक पहुचने की चुनौती है, मुश्किल इसलिए भी बढ़ गई है
01:53क्योंकि नेपाल अभी पहली बार से पूरी तरह बाहर नहीं निकला है, और अब एक नहीं प्राकृतिक जील ने चिंता
02:11बढ़ा दी है, नेपाल
02:13जिले में बचाव अभ्यान को करीब 90 मिनिट के लिए रोकना पड़ा, कई नदी किनारे बसे गावों को खाली कराया
02:18जा रहा है, और लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा गया है, चीन ने भी तिबबत में
02:22राहत और बचाव अभ्यान रोक कर लेवल 4 अलर्
02:37जगता है, यानि नेपाल के सामने इस वक्त दोहरी चुनावती है, एक तरफ सैकडों लोगों की तलाश और रहत अभ्यान
02:43चलाना है, दूसरी तरफ नदियों में दोबारा बाढ़ाने का खत्रा बना हुआ है, उपर से विदेशी रेस्क्यू टीमों को नहीं
02:48बुलाने का फ
03:07शर्ण दिख लुबार ऑटिए अच्वाने का लिए नेपना की तलाशने याड़ा ए्माने ओनाओ का झाट लिए अंप्यान घ्यापोबार बुलाने का
03:17खत्रा बना है, युलाने आव की कि तलाश ओल रूंड़ाने वरेस्कित, युलाने का इफ दोग भ्याने का अजिए उ
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