00:11दीग जिले के एंचेरा गाउं में इस्थित द्वापर युगीन कदंब खंडी धाम आज अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रहा
00:20है
00:20भगवान स्रिकिष्ण की रासलीला और बाल क्रिडाओं का साक्सी रहाई एतिहासिक वन अप्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है
00:30यहां लहलाने वाले 208 पवित्र कदंब ब्रिक्सों में से अब महज 22 पेड़ ही जीवित बचे हैं
00:50अब भगवान चेंगे कदम पे पादम बैठके पांचे तोड़ तोड़ तोड़ तोड़ के बनावे लगे दोना इते कुझ निकेल गए
01:00घर कुझ चली गई चोड़ के नहीं ना प्याद है
01:20इस पाउन धाम से एक अद्भुद और कौतुहल से भरी लोग कथा जुड़ी हुई है
01:27मान्यता है कि द्वापर यूग में कान्हा ने इन्ही कदम के पत्तों से दोने बनाए थे और गोपियों की दही
01:35खाई थी
01:36इसी लीला के कारण आज भी यहां एक पेड़ पर प्राकृतिक रूप से दोने के आकार के पत्ते उकते हैं
01:44यही नहीं यहां के प्राचीन पीपल के तनों पर भगवान कृष्ण और गणेश की आकृतियां भी अपने आप उभरी हुई
01:52दिखाई देती है
02:21जैसे बरंदावर रास होता है
02:23इसी परकार से रास करते थे सक्यों सहित अपने जितने भगत करते सक्य थी जो दिब आत्मा थी यह दिब
02:32आतों सारी सारी दान करके यह बरंदावर जैसे रास होता था
02:38ऐसा कुछ पर तक्सिया लोगों में बताया है
02:54सरधालों और ग्रामिनों की गहरी आस्था का केंदर बनी ये ब्रजधरोहर अब नश्ठ होने की कगार पर है
03:01इस्थानी लोग लंबे समय से इस एतिहासिक स्तल को हैरीटेज साइट घोशित करने की मांग कर रहे हैं
03:09ग्रामिनों का कहना है कि यदि सरकार और वन विभाग ने तुरंत इन बच्चे हुए प्लेडों का वैज्यानिक उप्चार नहीं
03:17किया
03:17तो स्री कृष्ण की स्मृतियों को समेटे ये अन्मोल प्राकरतिक विरासत हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी
03:26ETV भारत के लिए भरतपुर से स्यामवीर सिंग की रिपोर्ट