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Defence Stocks: From Reliance and Tata to Adani, 5 Firms to Make Weapons with Global Giants!
Defence Stocks: भारत का Defence Sector तेजी से विस्तार कर रहा है। Reliance, Tata, Adani समेत देश की 5 बड़ी कंपनियां विदेशी Defence Giants के साथ साझेदारी कर एडवांस हथियार और Defence Equipment बनाने की तैयारी में हैं। इन Partnerships से भारत में Defence Manufacturing को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ इन कंपनियों के कारोबार और Defence Stocks पर भी नजरें रहेंगी। इस वीडियो में जानिए किन 5 कंपनियों ने विदेशी दिग्गजों के साथ हाथ मिलाया है, कौन से Advanced Weapons और Defence Systems बनाए जाएंगे और इन Deals का कंपनियों के कारोबार पर क्या असर पड़ सकता है। साथ ही जानेंगे Defence Sector और Defence Stocks को लेकर आगे का Outlook।

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Transcript
00:00दुनिया भर में इस वक्त जिस तरह से युद्ध और जियो पॉलिटिकल टेंसन बढ़ रहे हैं उसने हर देश को
00:05अपनी डिफेंस स्टेंथ को मजबूत करने के लिए मजबूर कर दिया है ऐसे माहौल में भारत भी सिर्फ हत्यार खरिदने
00:12वाला देश नहीं रहना चाहता बल
00:27कि दिगज डिफेंस कंपनियों के साथ हाथ मिला रही है यानि आने वाले समय में फाइटर जेट, एंजन्स से लेकर,
00:34एंटी टैंक मिसाइल, स्मार्ट वेपेन, मिलिटरी हेलिकॉप्टर्स और काउंटर ड्रोन सिस्टम्स तक कई एडवांस डिफेंस प्रोडक्ट का प्रो
00:57होगा भारत के डिफेंस सेक्टर और इन कंपनियों के कारोबार पर क्या असर पड़ेगा आईए एक एक करके समझने की
01:02कोशिश करते हैं, सबसे पहले बात करते हैं, रिलाइंस इंडिस्ट्री और रॉल्स रोयसी की, अगस्त में दोनों कंपनियों ने भारत
01:09में डिफेंस औ
01:28अब इसे आसान भाशा में समझे है fighter jet बनाना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी उसका engine है और
01:34aircraft engine technology दुनिया की सबसे complex technology में किनी जाती है अगर यह partnership आगे बढ़ती है तो भारत
01:42को aerospace cash turbine और propulsion technology में बड़ा फायदा मिल सकता है साथ ही domestic manufacturing capability मजबूत होगी
01:50और भविश्च में imported technology पर dependence
01:52कम करने में मदद मिल सकती है अब आते हैं टाटा एडवांस सिस्टम और जैवलिन मिसाइल पर टाटा एडवांस सिस्टम
01:59ने जैवलिन जॉइंट वेंचर के साथ MOU साइन किया है इस जॉइंट वेंचर में अमेरिकी defense केंस रैंथम और लॉकेट
02:06मार्टिन शामिल है इसका मक
02:21component का production भी देश में हो सकता है भारत ने अमेरिका से जैवलिन एंटी टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने पर
02:27भी सहमती जताई है यानि यहां सिर्फ हथियार खरीदने की बात नहीं है बलकि धीरे धीरे उसके production एको सिस्टम
02:33को भारत में लानी की दिशा में कदम उठाया जा रहा
02:36है तीसरी बारी पार्टनर्शिफ है भारत इलेक्ट्रोनिक्स यानि की B.E.L. और सफ्रान इलेक्ट्रोनिक्स एंड डिफेंस की दोनों कंपनियों
02:43ने फरवारी में जॉइंट वेंचर एग्रिमेंट किया था इस पार्टनर्शिफ के तहद भारत में हैमर प्रिसियस गाइ�
03:05और रिपेयर काइपबलिटीज विक्सित करने के लिए सेंटर ओफ एक्सिलेंस बनाने की योजना है यानि इसका फायदा सिर्फ हत्यार बनाने
03:12तक सीमित नहीं रहेगा बलकि मैनुफेक्ट्रिंग के साथ साथ मेंटेनेंस रिपेयर और सप्लाई चेन का पूरा इकोसिश्�
03:32के लिए एक मजबूत मैनुफेक्ट्रिंग इकोसिश्टम तयार करना चाहती है शुरुवाती फोकस मिलेटरी हेलिकोप्टर पर रहेगा इसके बाद इस इकोसिश्टम
03:40को सीवील हेलिकोप्टर मार्केट तक ले जाने की संभावना है साथ ही भारत को लियोनाडो की ग्लोब
04:04टांडेम डिफेंस के साथ एक्सक्लूसिव आए-पी लािसेंस एग्रीमेंट किया है टांडेम डिफेंस अमयर्की अट्वनोमस पावर कोप्रेशन की सब्सिडरी है
04:12इस एग्रीमेंट के तहत पारस टिफेंस को गारजियन 1 इंटर सेप्रटर टेक्नोलोजी के भारत में प्
04:31ज्रोरा पर चेस्से लाइको आपके आज के समय में द्रोन युद का एह मिस्सा बन चुके हैं ऐसे में काउंटर
04:36ड्रोन टेक्नोलोजी की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है
04:38अलाकि यहाँ एक जरूरी बात है, Gargian 1 को अभी भारतिय सेना ने induction के लिए select नहीं किया है,
04:44यानि technology partnership हो गई है, लेकिन इससे defense order समझना सहीद नहीं होगा, अब इस पूरी तस्वीर को थोड़ा
04:51बढ़ा करके देखिए, भारत का defense expenditure 2025 में 8.9% बढ़कर 92.18$ पहुँच गया, इस
05:06में private sector के भी हिस्सेदारी करिब 24% रही, यानि defense sector में government companies के साथ private companies
05:13की भूमिका भी लगतार बढ़ रही है, सरकार का make in India और आत्म निर्वर defense production पर जोर इसी
05:19बदलाव को बढ़ा रहा है, विदेशी कमपनियों के साथ partnership के चरिये भारत advanced technology manufacturing expertise और global supply
05:26chain तक पहुँच बनाने की कोश
05:28कर रहा है, लेकिन निवेशकों के लिए यहाँ एक जरूरी सावधानी भी है, किसी company का defense partnership करना अपने
05:34आप में एक guarantee नहीं होता कि उसका revenue या profit तुरंत बढ़ जाएगा, कई agreement अभी शुरुआती stage पर
05:41है, कहीं MOU है, कहीं partnership का intent है, और कहीं technology licensing agreement, production शुरू होने, orders मिलने और
05:48commercial scale प
05:53देखते समय सिर्फ headline पर नहीं, बलकि actual order, execution, production capacity, margin और future earnings पर भी नज़र रखना
06:01चरूरी होगा, कुल मिलाकर भारत के defense sector में एक बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है, reliance और रोल सुरेसी
06:07fighter jet engine की दिशा में आगे बढ़ रहे है, टाटा एडवान सिस्टम और अमेर्की defense केंट
06:12चैविलीन मिसाइल को production की संभावना तलास रहे है, BEL और सफरान हैमर स्मार्ट वेपन पर काम कर रहा है,
06:19अड़ानी defense और लिनार्डो helicopter manufacturing ecosystem तयार कर रहे है, और पारस defense counter drone technology को भारत में
06:27लाने की तयारी में है, यानि आने वाले वर्षों में भारत की defense story सिर्फ हतियार रखने की
06:32नहीं बलकि हतियार बनाने, technology develop करने और global supply chain का हिस्सा बनने की कहानी भी हो सकती है,
06:39अब देखना होगा कि इन partnership में कौन सी partnership MOU से आगे बढ़कर बड़े orders, commercial production और मजबूत
06:46earnings में बदलती है, इस पूरे मामले पर आपको क्या लगता है, आपको कौन सी growth story सबसे perfect दिखाई
06:52देती
06:52है, और कौन सी company आपको बहतर लगती है, अपनी राय comment section में जरूर बताएं, और ऐसे ही तमाम
06:57updates, और share market से जुड़ी तमाम जानकारी के लिए आप बने रहें, good returns, digital के सांथ

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