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आज एकादशी 2026 के पावन अवसर पर जानें राजा हरिश्चंद्र की संपूर्ण व्रत कथा। इस कथा में जानिए कैसे अजा एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा हरिश्चंद्र के जीवन के सभी कष्ट दूर हुए और उन्हें अपना खोया हुआ राजपाट, परिवार और सुख-समृद्धि वापस मिली। जानें अजा एकादशी व्रत का महत्व और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
Aja Ekadashi 2026 Katha: Know the complete vrat katha of King Harishchandra and learn how the divine power of Aja Ekadashi helped him overcome his hardships and regain his lost kingdom and family. Watch this devotional story to understand the significance, importance and religious beliefs associated with Aja Ekadashi Vrat.

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~HT.318~PR.115~ED.120~VG.HM~
Transcript
00:03इस साल 7 सितंबर को अजा एकदशी का वृत है भादरपद माहा के कृष्ण पक्ष की एकदशी तिथी को ये
00:08वृत रखा जाता है
00:09इस बार भादरपद कृष्ण एकदशी तिथी 6 सितंबर को शाम 7 बचकर 29 मिनट से लेकर 7 सितंबर को शाम
00:165 बचकर 3 मिनट तक है
00:18आजा एकदशी के दिन सरवार्थ सिद्धी योग शाम में 6 बच कर 14 पीम से बन रहा है जो पारण
00:24वाले दिन 8 सितंबर को सुबा 6 बच कर 2 मिनट एम तक रहेगा
00:28आजा एकदशी के दिन पूजा के साथ साथ वरत कथा भी सुननी चाहिए जिससे आपके सारे कष्ट मिट सकते हैं
00:36चलिए आपको सुनाते हैं वो कथा
00:37एक बार युदिष्ठिर ने श्री कृष्ण जी से भादरपद कृष्ण कदशी वरत की विधी और महत्व के बारे में बताने
00:44का निवेदन किया
00:44इस पर भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि इसकी कथा राजा हरिश्चंदर से जुड़ी है
00:49एक समय धरती पर चक्रवरती राजा हरिश्चंदर का शासन था
00:53किसी वज़ा से उनका राजपार चला गया
00:55ऐसी स्तिती बन गई की पतनी बेटे और स्वेम को भी बेचना पड़ गया
00:59राजा हरिश्चंदर को एक चंडाल ने खरीदा
01:02वो उसके यहां काम करते थे
01:04राजा हरिश्चंदर उसके सबी आदेश का पालन करते थे
01:07मिर्तकों के वस्तर लेते थे
01:09लेकिन राजा हरिश्चंदर हमेशा सत्यय के मार्ग पर चलते रहे
01:12जब वो एकांत में होते तो अपनी पतनी और पुत्र के दुखों के बारे में सोचते
01:17उनसे मुक्ती का मार्ग सोचते रहते थे वे वो उपाय जानना चाहते थे जिससे उनके कश्ट दूर हो जाए और
01:23उनका उधार हो जाए
01:25राजा हरिश्चंद्र ने काफी समय तक ऐसे ही व्यतीत किया
01:28एक दिन वो उदास और चिंतित बैठे थे तबी वहाँ गौतम रिशी आये राजा हरिश्चंद्र ने उनको प्रणाम किया फिर
01:35अपने दुखों से मुक्ती का मार्ग पूछा
01:37गौतम रिशी ने कहा कि है राजन तुम बहुती भागेशाली हो ठीक आज से साथ दिन बाद भादर पदे का
01:43दशी है उस दिन तुम विधी विधान से वरत रखो और भगवान विश्चंद्र ने विधी विधान से वरत रखा गौतम
02:00रिशी की बताई विधी के अनुसार ही
02:02भगवान विश्चंद्र की पूजा की रात के समय जागरन किया फिर अगली सुबा पारण करके वरत को पूरा किया राजा
02:08हरिश्चंद्र पर भगवान विश्चंद्र की किरपा हुई उनके सारे पाप और कष्ट नश्ट हो गये स्वर्ग से फूलों की वर्षा
02:14होने लगी
02:15उनका मरा हुआ फुत्र दोबारा जीवित हो गया
02:17उनकी पतनी रानी भी एक समान हो गई थी
02:19अजाएकदशी वरत के परभाव से ही
02:21राजहरीश्चंद्र को खोया हुआ राजबाट और परिवार वापस मिल गया
02:25मृत्यों के बाद राजहरीश्चंद्र को स्वर्ग की प्राप्ति हुई
02:28जो व्यक्ति विदिविधान से आजाएकदशी का वरत करता है
02:31राजहरीश्चंद्र की तरह ही उसके सभी कष्टों का निवारण हो जाता है
02:35फिलाल इस वीडियो में तो नहीं आप क्या कहना चाहेंगे
02:37कॉमेंट सेक्षन में में लिख कर जरूर बताएं वीडियो को लाइक करें
02:40शेर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिलकुल अब पुले
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