00:00چلیے آج کے اس اکسپلینر میں سیدھا ان اثرار میں اترتے ہیں جو صدیوں سے مسلمانوں کے دلوں اور دماغوں
00:05کو متاثر کرتے آئے ہیں
00:06آج کے اس ایکڈیمک سبق میں ہم قرآن مجید کی سورہ البقرہ کی آیت نمبر دو سو پچپن یعنی آیت
00:12الکرسی کی روحانی اہمیت اور اس کی تاریخی گہرائیوں کا جائزہ لیں گے
00:16एक तालिब इल्म के तोर पर जब हम इन अल्कास पर गोर करते हैं
00:19तो ये सिर्फ चंद सदून का मजमुआ नहीं लगते
00:21बलकि ये एक अजीम काइनाती हकीकत का दर्वाजा खोलते हैं
00:24इस आयत में खालिक की कुदरत, उसकी बात्शाहत
00:27और उसके इल्म के ऐसे प्रोफाउंड असरार चुपे हैं
00:29जो इनसान को अल्टिमेट यक्सुई और स्पिरिच्वल स्टिलनस के बहुत करीब ले जाते हैं
00:33ये सिर्फ एक दुआ नहीं है, ये दरसल मुकमल काइनात का एक अजीम खुलासा है
00:37तो आज के इस नसाब में हमारी तवज्जह इन पांच एहम हिस्सों पर होगी
00:41आयतल कुरसी का तारीखी तारुफ, फिर हम उस पुरिसरार चोर के रास पर बात करेंगे
00:45उसके बाद कुरसी की माइन बेंडिंग काइनाती वस्सत को देखेंगे
00:48खालिक की सिफात को समझेंगे
00:50और आखर में इस आयत को मौडर्न जहनी दबाओ के रुछानी इलाज के तोर पर अपलाई करेंगे
00:54शुरुआत करते हैं अपने पहले से
00:56आईए देखते हैं कि क्लासिकल इस्लामिक स्कॉलर्शिप में आखर
00:59इस मखसूस आयत को कुरान की अजीम तरीन आयत क्यू माना जाता है
01:03मदीना के उस दौर का तस्वर करें जब इस आयत का नजूल हो रहा था
01:07अब्तिदाई इसलामी तारीख गवाही देती है
01:09कि इसकी एहमियत शुरु दिन से ही बिलकुल वाज़े थी
01:12एक बहुत ही मशूर वाकिया है जब अपने एक जलील अल्गदर सहाबी हज़रत अबई बिलकुल काफ से पूछा
01:20कि उनके मताबक कुरान की सबसे अजीम आयत कौन सी है
01:23उन्होंने जब गोरो फिकर के बाद आयत कुर्सी का नाम लिया
01:26तो नबी करीम ने उनके सीने पर हाथ मारा और उन्हें इस दुरुस्त दिल्म पर मुबारक बात दी
01:31मतलब एक्चुली सोची इस बात पर
01:33ये इस बात की तज़्दीक थी कि इस आयत में खुदा की वहदानियत और उसकी कामिल खुदरत का जो जामे
01:38बयान है
01:38वो वाकई इसे बाकी तमाम आयतों पर फौकियत देता है
01:42अब आते हैं अपने दूसरे हिस्से की तरफ एक बहुती दिल्चस्प तारीखी नेरिटिव जो इस आयत की प्रोटेक्टिव नीचर को
01:49वाज़े करता है
01:49इसे हम चोर का राज कह सकते हैं
01:52खर ये एक बहुती मुस्तनद और हैरत अंगेज तारीखी वाकिया है
01:56हजरत अबू हुरेरा को सदके के माल की निगरानी सौंपी गई थी
02:00पहली रात एक अजीब और पुर इसरार घुस बैठिया आया और माल चोरी करने लगा
02:05जब उसे रंगीन हाथों पकड़ा गया
02:07तो उसने भूक और मजबूरी का वास्ता दिया
02:09और उसे तरस खाकर छोड़ दिया गया
02:11अगली सुबा नभी सल्लालाहुताल आली वाली वासलम ने पहले ही बता दिया
02:15कि उसने जूट बोला है और वो फिर आएगा
02:18दूसरी रात बिलकुल वैसा ही हुआ
02:20लेकिन तीसरी रात जब उसे हत्मी तोर पर पकड़ लिया गया
02:24और क्लियर कर दिया गया कि अब कोई रियायत नहीं मिलेगी
02:27तो उसने बच निकलने के लिए एक अजीम रास बताने की पेशकश की
02:31और वो रास क्या था?
02:32यहां सबसे शौकिंग बात ये सामने आए
02:35कि वो घुजबेतिया दर असल कोई आम इनसानी चोर नहीं
02:38बलके खुद शेतान था
02:40उसने बताया कि जो शख्स रात को सोने से पहले आयतुल कुरसी पढ़ता है
02:44अल्ला उस पर सुबह तक एक मुहाफिस फरिश्टा मुकरर कर देता है
02:47और शेतान उसके करीब भी नहीं फटक सकता
02:50जब ये बात नभी सिरल्लाओ अलेशलम को बताई गई
02:52तो उन्होंने तस्दीग की
02:53कि अगर्चे वो शेतान बहुत बड़ा जूटा है
02:56पर इस मखसूस मामले में उसने बिल्कुल सच कहा है
02:59ये अर्ली हिस्ट्री की डॉकुमेंटेशन हमें बताती है
03:01कि कैसे ये आयत एक रोहानी ढाल का काम करती है
03:05यहां से हम तीसरे हिस्से में दाखिल होते हैं
03:07जमीन की इस तारीक से निकल कर
03:09आई एक कुरसी की काइनाती वसब पर गोर करते हैं
03:13कुरसी का थियूलोजिकल कॉंसेट आखिर है क्या
03:16देखिए आज की जदीद फलाकियात
03:19यानी मौडर्न अस्ट्रोनमी हमें हैरान कर देती है
03:21हमारी टेलिसकोप्स अर्बों सितारों
03:24और उन गिनत कहकेशाओं का मुशाइदा करती है
03:26हमारा जहन इस एस्ट्रोनमिकल स्केल को ठीक से प्रॉसेस भी नहीं कर पाता
03:31लेकिन खालिक की ताकत और उसके इल्म के सामने
03:34ये अर्बों कहकेशाएं और काइनात की अजीम वसत एबसलूटली मामूली है
03:39ये काइनात जितनी भी वसी नज़र आए
03:41इस आयत की रोशनी में ये बात क्लियर होती है
03:44कि खालिक इन सब पर पूरी तरह हावी है
03:46इसे क्लासिकल आधिस के एक बहुत ही रिलेटबल और पावरफुल मेटाफर से समझते हैं
03:52सातों आस्मान और जमीनों का मुकमल निजाम अल्ला की कुरसी के सामने बस ऐसा है
03:57जैसे एक बहुत बड़े वसी औरीज सहरा में एक छोटी सी लोहे की अंगूटी फेक दी गई है
04:02Just pause and think about that scale
04:04हमारी पूरी काबले मुशाहदा काइनात उस बड़े सहरा में उस मामूली सी अंगूटी की तरह है
04:10ये तखयल हमारे जहन में अपने रब की अजीम उश्शान बादशाहत का जो कौस्मिक नक्षा खीचता है वो वाकी माइंड
04:16ब्रोइंग है
04:17चौता हिस्सा
04:18इस अजीम काइनात के खालिक की सिफात क्या है
04:21आईए इस वर्ष में मुझूद खुदा के दो अजीम नामों का तज्जिया करते हैं
04:25आयत अलकुर्सी में खालिक की दो बहुती बन्यादी सिफात बेयान हुई है
04:29अल्हाय यानि हमेशा जिन्दा रहने वाला
04:32और अल्कयूम यानि हर चीज़ को काइम रखने और संभालने वाला
04:36हम इस बात पर फोकस करते हैं कि उस खालिक को ना उंग आती है ना नीन्द
04:40हमारी सांसे चल रही हैं
04:42यूमन हार्टबीट से लेकर अंगिनत सितारों के और्बिट्स तक
04:45ये सब अल्ला की सिफ्थ अल्कयूम का प्रैक्टिकल नतीजा है
04:49वो पूरी काइनात के इस नाजब तवाजन को बगएर किसी थकावट के एफटलेसली चला रहा है
04:54और जब हम Early Classical Scholars के Insights देखते हैं
04:57तो इमाम अबन अरबी और इमाम घजाली जैसी अजीम शक्सियातों का इस बात पर मकमल इतिफाक है
05:03कि इन सिफात को समझना सिर्फ जबान का काम नहीं है
05:06इमाम अबन अरबी समझाते हैं कि ये सिर्फ अलफाज नहीं
05:09بلکہ روحانی recognition کی گہرائی کا نام ہے
05:12وہیں امام غزالی فرماتے ہیں
05:14کہ جب اندرونی پاکی اور اخلاص ہوتا ہے
05:16تب یہ نام انسان کے دل کو transform کر دیتے ہیں
05:19ان صفات پر deep reflection
05:21ہمارے ethical daily living کو shape کرتا ہے
05:24اور ہمارے روئیوں کو بہتر بناتا ہے
05:26آخر میں پانچویں حصہ
05:28ہم ان theological concepts to modern ذہنی دباؤ
05:32اور دنیا کی بیچینیوں کو ختم کرنے کے لیے
05:34کیسے استعمال کر سکتے ہیں
05:36دیکھئے آج کی تیز ترجندگی میں
05:38modern stress کا روحانی حل ہمیں یہاں سے ملتا ہے
05:42اس آیت پر مبنی ایک seven day reflection plan
05:44try کیا جا سکتا ہے
05:45ایک تو ہر فرض نماز کے بعد اسے پڑھنا
05:48کیونکہ روایت کے مطابق یہ عمل انسان اور جنت کے درمیان
05:51صرف موت کا فاصلہ چھوڑتا ہے
05:53دوسرا ہر رات سونے سے پہلے اس کا ورد کرنا
05:56ایک spiritual ڈھال بناتا ہے
05:57اور تیسرا جو سب سے اہم ہے
05:59اپنا توقل اور trust in چھوٹی چھوٹی دنیاوی طاقتوں سے ہٹا کر
06:03صرف اور صرف اس القیوم پر شفٹ کرنا
06:06یہ daily routines
06:07ذہن کو worldy fear سے آزاد کر کے
06:09ultimate stillness اور personal growth کی طرف لے جاتے ہیں
06:12اور اس سبق کو
06:14rap up کرتے ہوئے
06:15یہ ایک بہت ہی provocative سوال ہے
06:17جو ہم سب کو سوچنا چاہیے
06:18اگر ان ارموں کے ہکیشاؤں کا سسٹینر کبھی نہیں سوتا
06:21اور اس کی infinite نگرانی میں
06:23کائنات کا ہر ذرہ سیکیور ہے
06:25تو پھر ہم عام فانی پریشانیوں کو
06:27اپنے ذہن پر اتنا حاوی کیوں ہونے دے
06:29کہ ہماری راتوں کی نید ہی اڑ جائے
06:31یہ آخری سوال واقعی ہماری
06:33modern spiritual anxiety کا ایک profound جواب ہے
06:35آیت الکرسی کے اس message کو
06:37اپنے اندر اترنے دے
06:38اور اس کامل ذات پر بھروسہ کرنا سیکھیں
06:40جس نے literally اس پوری کائنات کو
06:42تھام رکھا ہے
06:43اس explainer میں ساتھ دینے کا بہت شکریہ