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  • 28 minutes ago
BRICS का जॉइंट डिक्लेरेशन भारत की कितनी बड़ी कूटनीतिक जीत? देखें ब्लैक & व्हाइट

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00:00नमस्कार मैं हूँ अंजराउम कश्यप ब्लाक इन वाइट में आपका बहुत बहुत स्वागत है
00:04आज सबसे पहले हम आपको बताएंगे कि कैसे भारत ने आज अंतराशिक खूटनीती के पन्नों पर एक नया एक एतिहासे
00:10का ध्याय लिग दिया है
00:11तमाम वैश्विक मदभेद, तमाम भूर आजनेतिक तनाव और दुनिया भर की चुनोतियों को पीछे चोड़ते हुए
00:18सर्व सम्मती से जॉइन डेकलरेशन पर मोहर लगना किसी चमतकार से ऐसे वक्त पर कम नहीं था
00:23जब विश में, मैं जॉइन डेकलरेशन अपने हाथ में लेकर आई हूँ, जब विश में दो-दो युद्ध चल रहे
00:28हैं
00:29और दुश्मन देश आमने सामने थे, जिसमें इरान मौजूद था, सौधी अरब और यूए भी मौजूद थे
00:35इन सब के बावजूद, आज वेस्ट एशिया वार से लेकर तमाम मुद्धों पर आम सहमती जॉइन स्टेट्मेंट आया
00:41तमाम महाशक्तियों को एक मंच पर लाना, एक साजा घोश्रा पत्र पर सहमत कराना भारत की दूर दशी ने तुर
00:46शमता, उसके बुलंद कूटने तेक धाक उसाबित करता है
00:51जिस सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बलकि दुनिया के सबसे बड़े मंच से भारत की नीती, भारत की कूटने तेक दबदबे
00:59का शंकनाद है
01:00जिसने इस साफ कर दिया है कि आज के विश्व व्यवस्था की दिशा ते करने का दम दिल्ली में है
01:05बड़ी बात यह है कि इस गोशा पत्र में पहलगाओं में हुए आतंग की हमले का जिक्र है, उसकी निंदा
01:10की गई है
01:11आतंग के खिलाफ मिलकर लड़ने का संकल्प है
01:15देखिए
01:17आप सबसे मेरा अनुरूद है कि इसको आप इस पकार से खोल करके
01:35प्रिक से आई तस्वीरों में सबसे ज़ादा चर्चा, उस तस्वीर की हो रही है
01:39जिसमें प्रदानुत्री मोदी, रशा के राशपती पूटिन और चारा के राशपती शी जिन पिंग
01:44त्री वे हैंडशेक करते नजर आ रहे है
01:46दो हफ़ते में यह दूसरा मौका है जब तीनों नेता इस अंदाज में हाथ मिलाते देखें
02:00आज आपको प्रदानुति मोदी और शी जिन पिंग की मुलाकात के बारे में भी बताएंगे
02:03आज दोनों नेताओं के बीच दोए पक्षे बाच्चीत भी हुई
02:07आज दुनिया देख रही है कि क्या एलेफेंट यानि भारत और ड्रागन यानि चाइना अब तनाव भुलाकर नई दोस्ती की
02:14रापर बढ़ सकेंगे
02:15क्या कूटनिती का सबसे पहला नियम जो है वो ये कहता है कि हाथ मिलाईए मगर साबधानी का साथ कभी
02:23मत छोड़िए
02:37द्रामेश्वर मंदिर के विशाल कोरिडॉर का भव्य बैकड्रॉप सजा नजर आया तो धान्वंत्री मोदी इसके बारे में समझाते भी देखे
02:45ग्लोबल पॉलिटिक्स के इस मंच पर पीए मोदी ने ये साबित कर दिया कि वो वैश्विक कूटनीती के साथ साथ
02:51भारतिय
02:52संस्कृती और उसके सबसे बड़े ब्रैंड अम्बासजर हैं
03:16ब्रिक्स समिट का मंच आज विश्व राजनीती का नाया केंद्र बना जहां तीन दिंकज नेताओं के संदेश पूरी दुनिया ने
03:22सुना
03:22पदार्मंत्री नरेंद्र मोधी ने वैश्विक कल्यान, शांती, संबाद, इनको प्रात्मिक्ता दी और समावेशी विकास पर जोड़ दिया
03:30इंक्लूसिव ग्रोथ
03:31वही राश्या की तरफ से राश्वपती व्लादमिर पूतिन ने उभरती अर्थ व्यवस्थाओं को नया ग्लोबल ग्रोथ इंजिन बताया
03:38द्वेपक्षिय व्यापार बढ़ाने का हवान किया
03:41वही चायना राश्वपती शी जिन पिंग ने बैश्विक शान्ती आपसी सहयोग को वक्त की जरूरत बताया
03:50ब्रिक समित से आई एक और तस्वीर की काफी चच्चा है
03:53जिसमें प्रधार्मन्ती नरेंद्र मोधी एरान के राश्वपती मसूद पेजशक्यान का हाथ मजबूती सिथा में नजर आए
04:00वेश्विक तनाओं और बढ़ी हुई दुनिया के बीच कैमरे में कैद हुआ ये खास मोमेंट सिर्फ एक सामाने मुलाकात नहीं
04:06बलकि भारत और एरान के बीच मजबूत कूटनितिक और एतिहासिक रष्टों की एक बुलंद तस्वीर पेश करता है
04:13आज आपको ये भी बताएंगे कि आज तक से बात करते हुए एरान के राश्वपती मसूद परजशक्यान ने एरान के
04:20सुप्रीम लीडर मुश्टबा खामनाई की मौत की खबरों पर क्या कहा
04:24इन्फरमेशन हो मिस इन्फरमेशन हो या डिस इन्फरमेशन और वो है आपके नए सुप्रीम लीडर मुश्टबा खामनाई के बारे में
04:32आप जानते हैं कि तकनीक का इस्तेमाल करके उन्होंने हमारे ज्यादातर नेताओं कमांडरों और वैग्यानिकों को निशाना बनाया है
04:40यहां तक कि उनके घरों में उनके परिवार वालों को भी नहीं बखशा गया
04:45दुनिया का कोई भी कानून उन्हें ऐसा करने की इजाज़त नहीं देगा
04:49इसलिए वो इस तरह की अटकलों को और बढ़ा रहे हैं
04:54लेकिन सबसे पहले अब भारत मंडपम से आ रहे ही इन तस्वीरों को देखिए
04:57जहां प्रदानुति मोधी भव गाला डिनर को किमेजबानी कर रहे थे
05:01और वहां ब्रिक्स देशों के शिर्ष नेताउं अंतराश्री प्रतिन दियों का भव विस्वागत किया रहे है
05:50इससे पहले आज शाम को प्रदानुति मोधी और अश्रपती शी जिन पिंग के बीच
05:532020 की गलवान हिंसा के बाद भारत में पहली दोई पक्षे मुलाकात हुई
05:58मुख्य रूप से इस मुलाकात को लेकर चार बड़े मुद्दे रहे
06:01पहला सीमा विवाद और स्थिर्ता दूसरा द्यापार और आर्थिक असंतुला
06:07तीसरा रणनितिक स्वायक्तता यानि दोरो नेता इस बात पर तो सहमत रहे है
06:41कि भारत और चाइना के संबंदों को किसी तीसरे देश के चश्मे से नहीं देखना चाहिए
06:42हारत में आपका हर दिर स्वागत करते हुए तुझे बहुत खुशी हो रहे हैं
06:54तुझे से मिलने समरतर और सहयोग के लिए मैं आपका आप हार्यात करता हुए
07:07अब हमें वीपक्षिय सहयोग पर चलता है
07:20अब आप यह भी सुनिए कि इस मुलाकात में प्रधार्वन्ती मोदी और राश्रपती शी जिन पिंग ने भारत और चायना
07:26के रिष्टों को लेकर क्या कहा है
07:41अब हमें द्वीपक्षिय सहयोग पर चलता करने का अउसर मिल रहा है
07:47एक बार फिर भारत में आपका हर्दित स्वागत है
08:00ब्रिक्स नेताओं की बैठक में भाग लेने के लिए यहां आकर और आपसे फिर से मिलकर मुझे बहुत खुशी हो
08:06रही है
08:07मैं इस बैठक के सफल आयोजन के लिए भारत को शुभकामनाएं देता हूँ
08:12बारह वर्षों के बाद मैं फिर से नई दिल्ली आया हूँ
08:16सतह सप्तमबर 2014 को
08:19आपने अपने जन्म दिन के दिन मेरे लिए अपने ग्रिह नगर की यात्रा का आयोजन किया था
08:24हमने अब तक 20 से अधिक बार मुलाकात की है और कई महत्वपूर्ण सहमतियाओं बनाई है
08:30जिससे चीन भारत संबंधों का समग्र और स्थिर विकास हुआ है
08:39अब आपको ब्रिक समिट में हिस्सा लेने आये चाइना के शीर्ष नेताओं में से एक काईची के बारे में बताते
08:45हैं
08:45जिने राश्रपती शीर जिन पिंग का एकदम राइट हैं कहा जाता है
08:49उनका सबसे भरोसे मान व्यक्ति का आजाता है
08:51चीफ और स्टाफ वो है
08:54काईची चाइना की कम्यूनिस पार्टी की सबसे शक्तिशाली
08:57साथ सदस्य पॉलिट ब्यूरो स्टैंडिंग कमुटी में पांच में नमबर के नेता है
09:01हलाकि आधिकारिक तौर पर प्रधानवंत्री ली क्यांग देश के दूसरे नमर के नेता है
09:06लेकिन विशलेशक काईची को चाइना का वास्तविक शाड़ो नमबर टू मानते है
09:11क्योंकि उनके पास पार्टी की विचाल धारा, सुरक्षा, प्रशासिक इसके एक औसीमित ताकत है
09:19बड़ी बात यह है कि चाइना की राजनीती में इतने शिर्ष स्तर के नेता आमतोर पर विदेशी दौरों पर राश्रोपतियों
09:25के साथ नहीं जाते
09:26और काईची का भी बहुत कब विदेशों में जाना होता है
09:29लेकिन आज ब्रिक समिट के लिए जब राश्रोपती शीजिन पिंग भारत आए तो काईची भी उनके साथ मौजूद रहे
09:35और इससे ये भी पता चलता है कि चाइना इस भारत दोरे को कितना गंभीर और उच्चसतरिय मान रहा है
09:41वैसे काईची और राश्रोपती शीजिन पिंग का रिष्टा तीन दशकों से भी पुराना है
09:46उन्होंने 1980 और 1990 के दशक में चाइना के फूजियान और जेजियांग प्रांतों में एक साथ काम किया था
09:53और ऐसा कहा जाता है कि राश्रोपती शीजिन पिंग पर उन पर आख मूंद कर भरोसा करते हैं
09:59और काइची को शीजिन पिंग के निजी सुरक्षा बयल उनके कारक्रमों को नियंतित करने का पूरा जिम्मा मिला हुआ है
10:04देखें
10:25और निचले भाग में वो देश है जो इन डिसीजिन से प्रभाविक्त होते है जा हर देश की आवाज हो
10:35हर सदस का स्टेर हो
10:45इस दूए पक्षे मुलाकात को भारत और चाइना के रिष्टों के लिए नया अध्याय माना जा रहा है और दोनों
10:50देशों के लिए ड्रागन एलेफिंट टैंगो शब्द का इस्तमाल हो रहा है
10:53यह वही शब्द है जिसका पहली बार इस्तमाल साल 2006 में चाइना के ततकालीन प्रधानवंत्री ने किया था
10:59उस वक्त चाइना ने बताना चाहता था कि दोनों देशों की मानव सभिता हजारों साल पुरानी है इसे दोनों देशों
11:06के बीच ड्रागन और एलेफिंट वाली साजहिदारी होनी चाहिए
11:09और यहाँ dragon का मतलब चाइना से है
11:11elephant यानि हाथी का मतलब भारत
11:15चाइना में ऐसी माननेता है कि वहाँ पहले शासक स्वर्ग से
11:18dragon पर वैट कर धर्थी पर आये थे
11:20जिसकी वज़े से dragon को सम्रिधी लाब का वहाँ प्रतीक माला जाता है
11:24और चाइना में हर जगर आश्रवादी कम्यूनिस लोग dragon को अपने देश की पहचान मानते हैं
11:29जब भी त्योहार होता है वहाँ पर dragon के जो तस्वीरे हैं वो लगाई जाती है
11:34धार्मिक महत्व बहुत बड़ा इसका हो गया है और हमारे हैं हाथी का महत्व बहुत बड़ा है
11:38भगवान शिवजी ने भगवान श्री कडेश को हाथी का सिरही समर्पित किया था
11:43जो बुद्धी का प्रतीक बना
11:45और ये भी मानता है कि समुद्रो मंतन में जब एरावत हाती निकला था तब इसे देवराज इंद्र ने ले
11:52लिया था
11:52और एरावती हाती को भी शक्ती, शुद्धता, बुद्धी का प्रतीक माना गया
11:57और भारत की संस्कृती में हाती का महत्व काफी बढ़ गया
12:00लेकिन ये भी सच है कि भारत के संदर्व में हाती शब्द का इस्तमाल
12:04इसलिए हुआ क्योंकि कुछ देश हमारी अर्थविवस्ता को धीमा लेकिन स्थिर बताना चाहते थे
12:09और वो मानते थे कि भारत हाती के रूप में परिभाश्ट हो सकता है
12:12लेकिन हमारा कहना यह है कि भारत की ख्रमताएं हाती की तरह विशाल है
12:16हमारी यत्वेवस्था सुस्त और धीमी नहीं है
12:18बलकि यह शेर की तरह आगे बढ़ रही है दहार रही है
12:22और इस साल की पहली तिमाही में जो GDP ग्रोथ रेत है वो 7.8% है
12:26दुनिया के सभी बड़े देशों में सबसे ज़्यादा चायरा का ड्रागन भी हमसे पीछे देखिए
12:42सिजन मेकिंग केंद्री से और निकले भार से वो देश जह हर देश की आवाज हो सहारे की कमी मैसूस
12:52को देखिए
12:54मेरा प्रस्ताव है
12:56मेरा प्रस्ताव है
13:33अजब ब्रिक्स के कूटने तिक मंच पर इसके ग्यारस अदस्यस देशों के राश्राध्यक्ष एक साथ क्यामरे के सामने आए
13:38तो वो सिर्फ एक आपचारिक तस्वीर नहीं थी बलकि ये बदलते वैश्विक समिकर्णों की एक बहुत शक्ति शाली गवाही थी
13:45इनमें भी इस फैमिली फोटो का सबसे बड़ा आकर्शन प्रधार्मंत्री मोधी, राश्रपती पूतिन और राश्रपती शीजिन पिंग के बीच दिकी
13:52गर्म जोशी थी
13:54प्रधार्मंत्री मोधी ने अपने दाय हाथ से, राश्रपती शीजिन पिंग और वाय हाथ से, पुतिन साहब का हाथ कसकर ठामा
14:00था
14:00पैश्विक तरावों और वद्भेदों को दरकिनार कर एक ऐसे वक्त पर जब दो-दो युद्ध विश्व में चल रहे हैं
14:06इन तीनों देशों ने महाशक्तियों का एक हैंड इन हैंड पोस्स आज की सबसे बड़ी हैडलाइन बन गया, पूरी दुनिया
14:13में गूगल पर ब्रिक्स समेलन को सबसे जाधा सर्च किया गया है, देखिए
14:36ये फैमिली फोटो दो और वज़ों से खास रहा, जैसे पहली बार ऐसा हुआ जब भारत ने ब्रिक्स के इस
14:42नए विस्तारत रूप की मेजबानी की है, अब इस संगठन में ईजिप्ट है, एथियोपिया है, युए, इरान, इंडोनेशिया जैसे नए
14:50शक्तिशाली देश �
14:50पूरी ताकत से शामिर है, और इन सभी 11 नए पुराने सदस्यों की एक साथ ये पहली सबसे बड़ी भव
14:57फैमिली फोटो थी, और दूसरा इस तस्वीर से में पश्चिम एशिया के एहम चेहरे, जैसे इरान के राश्रपती मसूद पैजश
15:04के आर, दक्षन पूर्व एशिय
15:06से इंडोनेशिया के राश्रपती प्रभोवो सुभ्यांतो, बड़े नेताओं के साथ कंदे से कंदा मिला कर चलते और बात करते देखे,
15:14इन अजारा पश्मी देशों को ये संदेश देने के लिए काफी था, कि इस वक्त दुनिया की आधी आबादी, 50%,
15:2040% बैश्विक GDP का �
15:23प्रते निधित्व करने वाले ये ब्रिक संगठन, अब दुनिया के बड़े फैसले, खुद ते करेंगे, देखे,
15:53कि अरते दुनिया को येझाँ ऑलनाओ और तूभ साहरां सबस्क्रीन के भी, 50%.
16:06कि अक्त कि वाले दो जिसोग़ेगे साहरा गत you so bad, है कि ज्यागका शूवरे तूवरे और झाल, किन और
16:14राक टॉपशिकूश,
16:36परियावरण की रक्षा के सामने नहीं हुई वलकि तबाव नेता बेहद अनौपचारिक अंदाज में भारत मंडपम के वारी थलॉन में
16:43पौधे लगाने के लिए के बाद एक साता है
16:46और परियावरण की रक्षा के संकल्प के साथ किचवाई गई ये तस्वीर कूटनीती में एक नया एक साकरात्मा का ध्याय
16:53जोडने जैसी दे
16:54और अभी इसे ब्रिक्स की थीम से भी जोडा जा रहा है जिसमें सस्टेनबिलिटी यानि टिकाउव विकास का जिक्र है
17:01बगिए
17:02झाल झाल
17:57आज समिट के शिरू होने से पहले
17:58रश्या, इंडिया और चाना यानि रिक के तीनों देशों के रश्ट्राध्यक्षों ने
18:033-Way Handshake किया
18:05पहले करीब
18:06पिछे करीब बारत दिनों के अंदर
18:08ये दूसरा मोका है जब इन तीनों देशों
18:10के नेताव ने 3-Way Handshake
18:11या Trilateral Handshake किया है
18:14इसमें प्रधानुंती मोधी एक साथ राश्रपती पूटिन और शीजिन पिंग के साथ संबाद करते हुए दिखाई देते हैं
18:20यह तस्वीर वैसी है जैसे 31 अगस को किर्गिस्तान में हुए S.C.O. समिट के दौरान पिये मोधी
18:26राश्रपती पूटिन राश्रपती शीजिन पिंग ने एक हैंशेक किया था
18:30यह हैंशेक ब्रिक्स के मंच पर रिक यानी रशा, इंडिया, चाइना की सेव्ट साजेदारी या सिचुएशन ट्रांगल का भी संकेत
18:36देता है
18:37देखें
18:57अब आपको भारत की काल्चुरल डिप्लॉमसी यानी सांस्कृतिक कूटनीती दिखाते हैं
19:03आज भारत मंडपव में जब प्रदानवंती मोधी ने दुनिया के तमाम बड़े नेताओं का स्वागत किया
19:08प्लोस सेशन के पहले तो उन्होंने उनके पीछे तमिलाड के रमेश्वरम में स्थित रामनात स्वामी मंदर की भव्य तस्वीर लगी
19:16हुई थी
19:16पूरा कॉरिडॉर दिख रहा है इससे मंदर के जो गल्यारे हैं नक्याशीदार पत्थर हैं उनके खंबे
19:23मंदर की पारंपरिक द्रविड वास्तु कला को दिखाये गया था और बड़ी बात यही कि जब प्रधानोंती मोधी ब्रिक्स के
19:29मंच पर शीर्षनेताओं का स्वागत कर रहे थे तब यह तस्वीर इस सम्मेलन को लेकर भारत की एक कल्चुरल डिप्लॉमसी
19:35के बारे में बत
19:39यह तस्वीर में एत्रा चपोर्णेताओं झात्या के कि एक रहे थी स्�ट अब kangमा इन यह तो मैं हो ऑसे
20:01स साथ यह तो
20:32जब चाइना के राश्रपती शीजिन पिंग भारत मंदपम पहुंचे तब उस दौरान
20:35प्रधान मंत्री मोदी ने गर्म जोशी से स्वागत किया और इसके तुरंद बाद उन्हों ने राश्रपती शीजिन पिंग को रामनाथ
20:42स्वामी मंदर का जो भव्य बैकड्रॉप था उसके बारे में भी पूरा बताया और अगर आप इन तस्वीरों को देखेंगे
20:48तो इन मे
20:52पहुचने से पहले ही प्रधान मंत्री मोदी ने शीजिन पिंग को मंदर की तस्वीर के बारे में समझाना उसके एतिहासिक
20:58महत्यों को बताना शुरू कर दिया
21:03बड़ी बात यह है कि इस दौरान राश्रपती शीजिन पिंग भी प्रधानमती मोधी की बातों को सुन रहे थे और
21:08मुस्कुरा कर दोनों विशाल का लियारे की तस्वीर देख रहे थे
21:12बात में हम आपको बताएंगे कि इस मंदिर का चाइना से क्या रिष्टा है
22:07प्रधानमती मोधी द्वारा राश्रपती शीजिन पिंग को ये तस्वीर समझाने के पीछे
22:11एक बहुत गहरा अतिहासिक कूटने तिक संबंध है चाना के फूजियान प्रांत और उसके खौन्जो शेहर से चोड़ता है
22:18असल में राश्रपती शीजिन पिंग ने साल 1985 से 2002 के बीच अपने राजनितिक करियर का एक लंबा समय
22:25फूजियान प्रांत में अलग-अलग सरकारी पदों पर गुजारा और वो खास तोर पर खौन्जो के मैरिटाइम म्यूजियम में कई
22:31बार जा चुके है
22:32जहां प्राचीन भारती और चीनी संस्कृतियों के मिलने के अवशेश रखे है
22:36और ये अवशेश खास क्यों है इन तस्वीरों को देखिए
22:41बारा जाता है कि आज से लगवग 700-800 साल पहले दक्षन भारत के व्यापारी समुदी रास्ते से चाइना के
22:46फूजियान प्रांथ के इस शहर में कारोबार करने जाते थे
22:49और वहाँ इन तमिल व्यापारियों ने भगवान शिव का एक भव्य मंदर बनवा है जिसे काई शवरम मंदर कहा जाता
22:56था जिसने इसे तमिल नाड़ की मूल संस्कृती और भारत से जोड़ा
22:59इसके लावा आज भी फूजियान के प्रसिद्ध काईवान बौध मंदर के खंबो आधार पर हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां है
23:08और नकाशी मौजूद है जो हूबहू तक्षन भारत की द्रविड वास्तु कला जैसे रामेश्वरम में है महाबली पूरम के मंद
23:15में वहाँ से मेल खाती है और इसी वजह से चाइना के फूजियान प्रांत और भारत के तमिलनादु राज्य के
23:21बीच सिस्टर स्टेट रिलेक्शन माना जाता है
23:26आपको याद होगा साल उन्निस में जब राश्रपती श्री जिन पिंग आखरी बार भारत आये थी तब प्रधार्वन्तु मोदी ने
23:31उनका स्वागत तमिलनादु के ही महाबली पूरम में किया था
23:34और अब इसी तमिलनाद के रामनाद स्वामी मंदिर को प्रधार्वन्तु मोदी ने ब्रिक्स के मंच का हिस्सा बना है
23:39देखिए
23:42प्रधार्वन्तु मोदी ने ब्रिक्स के मंच का हिस्सा बना है
23:43He receives
23:45President Xi
23:52A beautiful setting sun
23:55adding magical light
23:57to the sight
24:02The Panch Rathas
24:03are also known as the Panch Pandava Rathas
24:07and they are an excellent example of monolithic architecture
24:18It's interesting how
24:21these Rathas are named
24:23Tamil Nadu के इस मंदिर को प्रिक्स के मंच पर लाकर
24:26प्रधार्वन्तु मोदी ने भारत की हजारो साल पुरानी
24:29Sanatana Sanskriti
24:30Ramayana को रिंखांकित किया है
24:42प्रम चाहते हैं कि आप एक बार इस मंदिर की कहानी भी देखे
24:47मानता है कि जब भगवान श्री राम ने रावण को पराजित करने के बाद
24:51उसका वद किया
24:52तब इसके लिए भगवान श्री राम पर ब्रम महत्या का दोश लगा
24:57इसी दोश से मुक्ति के लिए
24:58रिशी अगस अगस्ति की सलापर भगवान श्री राम ने यहां भगवान श्री राम की पूजा करने का निर्णय लिया था
25:08और यहीं से रामेश्वरम की सबसे प्रसिद्ध कता भी आती है
25:12माना जाता है कि भगवान श्री राम ने हनुमान जी को कैलाश परवत भेजा ताकि वो भगवान श्री राम की
25:21पूजा करके उसे स्थापित किया
25:58और इसी वज़े से इसे राम लिंगम कहा जाता है।
26:04अज रामेश्वरम हिंदु धर्म में बताएगा है चार धामों में से एक है
26:08सबसे बड़ी बात तो रामनाथ स्वामी मंदिर सिर्फ अपने धार्विक महत्व के कारण प्रसिद्ध नहीं है
26:13बलकि इसकी द्रविड कला अध्भुत है एतिहासिक है
26:17ये मंदिर पर सर लगबग 15 एकड़ में फैला है
26:20खास बात इसका गलियारा यानि वही कॉरिडॉर जो तस्वीर लगी थी ब्रिक्स समिट के बैक ड्रॉप में
26:26इन गलियारों में दोनों तरव बड़ी संख्या में रकाशीदार कंभे हैं
26:30और खंबो की लंबी कतार उनकी एक जैसी वास्तुकला मंदिर को बहुत भव्वे बनाती है
26:36अग्भुत द्रिश्य देती है
26:40इसके लावा मंदिर के विशाल गोपुरम भी इसकी पहचान है
26:43और खास तोर पर इस मंदिर का तीसरा जो कॉरिडर है वो बहुत लोग प्रेय है
26:47और भारत सरकार ये भी कहती है कि ये दुनिया में किसी भी मंदिर का सबसे लंबा गलियारा है
26:52और आप जानते है स्वामी विवेका अनंद ने साल 1897 में इस मंदिर में प्रार्थना की थी
26:58और 22 जन्वरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से ठीक पहले 20 जन्वरी को प्रधार्वन्ती मोधी
27:04इस मंदिर में आये थे
27:06उन्होंने अगनी तीर्थम में सनान किया था इसी गलियारे से उनकी ये तस्वीरे आई थी जिने ब्रिक समिट के मंच
27:13का आज हिस्सा बनाया गया देखिए
27:36में का आई गया देखिए
28:11यहाँ आप यहीं भी देखिए कि प्रधानवंती मोदी की कूटनीती में भातिय सब्मिता संस्कृती को भारत की सफपार की तरह
28:16इस्तमाल किया जाता रहा है
28:18समिट में एक दिन पहले जब प्रधानवंती मोदी और राशपती पूतिन की दिविपक्षय मुलाकात हुई
28:23तब प्रधानवंती मोदी ने राशपती पूतिन को 2000 साल पुराने तमिल गरंत का रूसी संसकरण भेद किया था
28:30इससे पहले जब साल 2023 में भारत ने जी ट्वेटी समिट की मेजबानी की
28:34तब वैश्विक नेताओं के स्वागत में नालंदा महावीर, महाविहार और कोणार्क सूर्य मंदर के चक्र कुमंच का हिस्सा बनाए गया
28:42था
28:42और ये सूची खत नहीं हो
28:48उसके प्रधानवंती को पिछले सार प्रधानवंती मोदी ने अयोध्या के राममंदर की प्राक्रतिक और सरियू और महाकुम्ब का पवित्र जल
28:54भेट किया था
28:552015 में ब्रिटिन की दिवंगत महरानी कुईन इलिजबेट को डाजलिंग चाय और कश्मीर का औग्यानिक शहर तोफे के रूप में
29:03दिया गया था
29:052015 में ही जर्मनी की पूर्फ चांसलर अंजला मरकल को वैग्यारिक सीवी रमन की पांडू लिपियां और कागजाद भेट के
29:12गए थे
29:12इलिस बहुत लंबी है सौफ्ट पार की बात हो रही है यानि प्रदानुती मोधी कूटनीती में भारत की सभिता आध्यात्मिक
29:19परंपरा ज्यान कला विज्यान शेत्रे विरासर दूसरे देशों के साथ संबंदों की भाशा बनाने की इसको कोशिश करते दिखाई देते
29:27हैं
29:28और भारत अब अपनी संस्कृती को सौफ्ट पार के रूप में पेश करें इस बार का ब्रिक समिट इसले भी
29:35खास्ता क्योंकि एक ऐसे वक्त में आयूजित हुआ जिस समय मिडल इस्ट युद्ध की आग में जल रहा है ब्रिक्स
29:42के कुछ सदस से देशी इस युद्ध का हिस
29:44इस बने हुए है इरान खुद अमेरिका से लड़ रहा है और इस दोरान वो अमेरिका समर्थक देशों जैसे यूए
29:51उफ्ति के हमलों से परिशान है जिसके बारे में मारा जाता है कि वो इरान का समर्थित संगठन ग्यित है।
30:13लेकिन मिडली इसमें युद्ध की मौजूदा परिस्तियों को देखते हुए इस बार इन देशों को एक मंच पर लाना और
30:19साजा बयान जारी करवाने बड़ा चालेंज था
30:21ऐसा लग रहा था कि इस बार जॉइन डेक्लरेशन नहीं हो पाएगा क्योंकि युद्ध से प्रभावित देश है वो अपसी
30:30सहमती कैसे करेंगे वो कैसे साजा बयान पर एक साथ हस्ताक्षत करेंगे लेकिन आखरकार भारत ये करवाने में कामियाब रहा
30:36मारा जा रहा है कि ब्रिक्स देशों के बीच साजा बयान को लेकर आज सुबह करीब चार बजे तक बाचीत
30:41का दौर चला और सदर्से देशों को मत भेद भुला कर एक मंच पर आने की अपील की गई
30:46ये भारत के एक बड़ी उपलबधी भी है और इसके प्रयासों से ब्रिक्स समित में न्यू डेली डेकलरेशन पर साजा
30:53सहमती बन गई
30:54इसमें कई बड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिनको लेकर सभी देश राजी जैसे युद्ध और अन्य विवादों में उल्चे देश, समवाद,
31:03हूटनेतिक रास्तों से सुलजाने की कोशिश करेंगे
31:06जरूरी चीजों की सप्लाई उर्जा की आपूर्टी बाधित नहीं होने दी जाएगे
31:11WTO के नियमों के खिलाफ जाकर एक तरफा टारिफ लगाने वालों पर भी चिन्ता व्यक्त की गई
31:17इसके साथ साथ नए युद्ध के खत्रों पर चिन्ता जटाएगे
31:20ब्रिक्स देश स्थानिय करंसी में पेमेंट से जुड़ी विवस्था पर अपना काम जारी रखेंगे
31:25लेकिन फिलाल ब्रिक्स करंसी को लेकर कोई बात नहीं हुई है
31:29ब्रिक्स ने IMF और World Bank में विकाशील देशों के जादा प्रतिनिधित्तों की मांग की
31:34इसके अलावा ब्रिक्स देशों ने पिछवे साल हुए पहलगाओ अटैक को लेकर आतंकबाद के खिलाफ एक जुटता दिखा यह और
31:39आतंकी सगटनों की फंडिंग
31:40सीमा पार गतिविदी उनके ठिकानों के खिलाफ आक्शन को समर्थन देए
31:45ब्रिक्स में गाजा पर भी बात हुई गाजा में हो रहे भौगोलिक और डेमोग्राफिक बदलाव का विरोध किया गया
31:50इसके अलावा नागरिकों पर हो रहे हमले मानविय मदद रोके जाने पर चिंता जाहिर की गई
31:57खास तोर पर पहलगाओ हमले की भी निंदा
32:01हमारे समक्ष ब्रिक्स न्यू देली डेकलेरेशन 2026 का ड्राव प्रस्तूत है इसमें हमारी चर्चाओं का सार प्रमुक वैश्विक और ख्षेत्री
32:19विश्यों पर हमारी दर्शकौन शामील है
32:22साथ ही ब्रिक्स कोपरेशन को और सुद्रुट करने की प्रात्मिक्ता इसमाहीत है
32:34यदि किसी सदस्य को कोई आपत्ती न हो तो मैं डिकलेरेशन को एड़ अड़ प करने का प्रस्ताव रखता हूँ
32:54किसी सदस्य की और से आपत्ती व्यक्त नहीं की गई है
33:03न्यूट देहली डेकलेशन 2026 को सर्व सम्बत्ती से एड़ अप किया जाता है
33:12आज ब्रिक्स समिट पे चैपरसेंट प्रधानमंजी नरेंद्र मोधी ने समिट का आगाज एक ओपनिंग स्टेटमेंट से किया है
33:18पिये मोधी ने ब्रिक्स को लेकर पूरे विश्व से एक बड़ी बात कही
33:21उन्होंने कहा कि ब्रिक्स एक ऐसा समू है
33:23जिसने वैश्विक मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई और ये किसी के खिलाफ नहीं है
33:27बल्कि सबको साथ लेकर चलता है
33:30पिये मोधी ने पिरमिड अफ प्रिविलिज की बात कही
33:33जिसमें माना जाता है कि सभी लोगों को समान अवसर, समान संसाधन नहीं दिये जाते है
33:38उनका कहना था कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की पहली पंक्ती में है
33:42और फैसले लेने के मामले में सबसे पीछे
33:45इसलिए वक्त आ गया है कि हर सदसे की आवाज सुनी जाए सबका लाव
33:50पिये मोधी ने समुद्री व्यापार को और सुरक्षत बनाने के लिए
33:53नाविकों के लिए सीफेरर्स एमजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बनाने का प्रस्ताओ दिया
33:58पिछले बीस वर्सों में ब्रिक्ष ने वैस्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बढ़ाई है
34:07हम किसी के विरुद्ध नहीं बलकि सबको साथ लेकर चलने का की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते
34:19हैं
34:20सी फेरर्स का वैच्विक व्यापार में बहुत बड़ा योगदान है किन्तु अक्सर मुश्किल समय में उन्हें सहारे की कमी मैसूस
34:32होती है
34:32मेरा प्रस्ताव है कि क्या हम सी फेरर्स एमर्जन्ची सपोर्ट नेटवर्क बना सकते हैं
34:42ब्रिक समिट के शुरू होने से पहले आज करीब साड़े दस बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोधी और मलेशा के पीम अनवर
34:47इब्राहीम के बीच एक द्विपक्षे वारता हुए
34:49इस बाचीत में दोनों देशों के बीच हुई महत्पूर्ण मुद्धों पर पैसले लिये जाने थे लेकिन इसकी शुरुआत बड़ी रोचक
34:56रही हुआ यह कि मालेशा के पीम अनवर इब्राहीम और पीम मोधी हाइदरबाद हाउस में मिले हाथ मिलाया जब कुरसी
35:02पर बै
35:29इस साल परवरी में प्रधानुत्री नरेंद्र मोधी ने मलेशा की याद्रा प्री की थी और माना जा रहा था कि
35:37ब्रिक्स के दौरान दोनों देशों के बीच दिवपक्षे बैटक में महत्पून साजेदारियों पर बात रोगी
35:42आज वी दिपक्षे बैटक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश को बढ़ाने, रक्षा समझोते, सेमी कंड़क्टर्स, इंफ्रास्ट्रॉक्चर, डिजिटल एकॉनमी,
35:51उर्जाप, फिंटेक और तूरिजम को बढ़ाने पर चर्चा
35:55पिशे काफी समय से मलेशिया भारत के साथ डिफेंस डील करना चाहता है और इसके साथ अपने सैनिको की ट्रेनिंग
36:01के लिए भारत की मदद चाहता है
36:03मलेशा चाहता है कि भारत के साथ उसके संबंध केवल व्यापार तक सीमित ना हो बलकि टेक्नोलिजी रक्षाक्षित दोनों देश
36:10मजबूत साजेदार बने
36:12यहां आपको एक बात और बता दे कि मलेशिया ब्रिक्स का सदस्य नहीं है बलकि साजेदार देश है पिछले साल
36:18से ही वो ब्रिक्स का साजेदार देश बना है
36:21मलेशिया के साथ द्वेपक्षेवारता से पहले प्रधानमती मोदी ने इतियोपिया के पी-म अभी एहमद अली से भी मुलाकात की
36:27इन दोनों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने रक्षा समझाते दोनों देशों के बीच प्यापारिक सहयोग इन सब पर बात हुई
36:34भारत ने ब्रिक्स के सदस्य देश इतियोपिया की सराहणा की है
36:39ब्रिक्स से आई एक तस्वीर अमेरिका को बहुत परिशान कर रही होगी
36:44यह तस्वीर प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी और इरान के राश्रपती मसूद पैजशक्यान की है
36:48जिसमें प्रधानवंत्री मोदी ने मसूद पर जशकयान का हाथ पकड़ा है और वो उन्हें लेकर ब्रिक्स के कारक्रम में जा
36:55रहे है
36:55इरान के राश्रपती और भारत के प्रधानवंत्री की ये तस्वीरे देखकर अमेरिका को जटका तो सरूर लगा होगा
37:01दोनों देशियों के नेताओं की मुस्कुराती हुई ये तस्वीर भारत और इरान के संबंधों की तस्दीक करती है
37:07प्रियमोदी मसूद पर जशकयान का हाथ पकड़े ब्रिक्स बिजनस फोरम के कारक्रम में लेकर जा रहे थे
37:12इस दोरान उनके साथ रश्या के राश्रपती व्लादमिर पूटिन, दक्षण अफ्रिका के राश्रपती सिरल रामाफोसा मौझूद थे
37:19इस कारक्रम में ये सभी नेता एक फोटो सेशन में शामिन
37:23इन दोनों नेताओं के बीच इस गर्म जोशी के एक वज़ा ये भी है कि मसूद परजशक्यान पहली बार भारत
37:28यात्रा पर आये हैं
37:29और इस गर्म जोशी के जरिये भारत ये संदेश देना चाता है कि इरान के साथ उसकी दोस्ती पर मिडल
37:35इस में छड़े
37:35युद का कोई असर नहीं होगा साओधी भी अमारा दोस्त है यूए भी है इरान भी अमारा दोस्त है और
37:40दोनों देश मिलकर एक दूसरे के हित में काम कर सकते है
37:43प्रधान मुदी मोदी ने युद को लेकर ये भी कहा कि भारत शांती का पक्षत है
37:49मसूद पजशक्यान भारत में है तो ऐसे में पूरी दुनिया एक एहम सवाल का जवाब चाती है
37:53सवाल ये कि अमेरिका के हमलों के बाद इरान की स्थिती क्या है
37:56खास दोर पर मुच्तवा खामनाई की सेहत कैसी है
37:59हमारी ग्रूप एडिटर फॉरन फैस गीता मोहन ने एक्स्क्लूसिव इंटर्म्यू में मसूद पजशक्यान से
38:04इनी सवालों के जवाब मांगे
38:05हम आपको सुनवाते हैं मसूद पजशक्यान ने इन सवालों पर क्या का
38:27हमारे देश में जाहिर है कि सुप्रीम लीडर की ही बात आखिरी मानी जाती है
38:31पहले दिन से ही ऐसा होता आया है
38:33हमारी पूरी व्यवस्था में वही व्यक्ति हैं जिनका फैसला आखिरी होता है
38:38इस युद को छे महीने हो चुके हैं आप एक आउनिस्ट असेस्मेंट दीजे प्रेजिट सर कि क्या आज एरान मजबूत
38:47खड़ा है या फिर वीक हो चुका है
38:50चाहे वो सैन्य हो आर्थिक हो या रन्नी तक
39:00आप जानते हैं कि ये बात सभी देशों पर लागू होती है
39:04खासकर विकास शील देशों पर उनकी अपनी समस्याएं हैं और हमारी भी कुछ समस्याएं थीं
39:11वे समस्याएं अभी भी हैं लेकिन अमेरिका ने जो किया उससे हम और एक जुट हो गए
39:17यहां तक की इस अलाके के लोग भी अन्जरामदाद निस्पत बाअमरिका मुतनफरतार किया अब वो अमेरिका से और ज्यादा नफरत
39:27करते हैं क्योंकि हम पर जल्म हुआ था
39:29उन्होंने बिना किसी उकसावे के हमारे देश पर हमला किया सिर्फ इसलिए क्योंकि उनके पास ताकत है
39:36उन्हें लगा कि वेनेज्वेला की तरह ही वो 24 घंटे के अंदर एरान पर कबजा कर लेंगे और यहां अपनी
39:44कटपुतली सरकार बना लेंगे
39:49आज आपको ब्रिक्स के बनने की कहानी भी बता होनी चाहिए भारत मंडपम में आपने दुनिया की तीन सेन महाशक्तियों
39:55को एक साथ देखा
39:56मजबूत अर्थवेवस्ता के चैंपियंज को देखा कच्चे टेल के शेहनशाहों को देखा
40:01आज से 20 साल पहले इन सभी को एक मंच पर लाना बहुत मुश्किल था
40:06वैश्वेक अर्थवेवस्ता और वैश्वेक कूटनीती में इन देशों की चर्चा तो थी
40:10लेकिन महत्व कम दिया जाता था उस वक्त यूरप और अमेरिका इनका दबदबा था
40:17जिनको पश्चमी देश कहते हैं और इसी दबदबे के सामनांतर ग्लोबल साउथ के विचार के साथ
40:23चार देशों ने एक साथा कर एक नया संगठन बनाया
40:27संगठन का मकसद था विकास शील और उभरती हुई अर्थविवस्ता वाले देशों में
40:32राजनितिक, आर्थिक, कूटनितिक सहीयोग पढ़ा ताकि एक दूसरे के काम आए
40:37इसका एक मकसद वैश्विक विवस्ता में इन देशों की आवाज उठाना भी था
40:41ताकि UN हो, IMFO, International Monetary Fund, World Bank हो, World Trade Organization हो
40:48ये संस्थाएं विकास शील देशों का प्रतिनिधित्व मजबूत कर सके, हो सका
40:53अब विकास शील देशों की आवाज बने Brazil, Russia, India और China ये चार देश
41:01इन चार देशों ने साथ आकर एक ऐसा मंच तयार किया
41:05जिसमें ये एक दूसे के व्यापारिक साजेदार बने, आपस में कूटनितिक सहयोग को बढ़ाया
41:10एक दूसे के हित में आपसी फैसला लेना असान हुआ
41:13जिन देशों ने एक साथ आकर ब्रिक जैसा संगठन बनाया, उसकी भवश्यवानी साल 2001 में ही हो गई थी
41:18और वहीं से इस नए कूटनितिक गटवन्दन का नाम पहली बार लोगों ने सुना
41:24साल 2001 में गोल्मन साक्स के चीफ, इकॉनमिस्ट जिम ओनेल ने विश्व की उभरती अट विवस्ताओं पर अपनी एक रिपोर्ट
41:32पेश की थी
41:33नाम था Building Better Global Economic Bricks
41:38इसमें उन्होंने Brazil, Russia, India, China के जो शुरुवाती अक्षरों को लेकर Brick शब्द का इस्तमाल किया
41:44दावा किया था कि ये चारो देश आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्ता में बड़ा योगदान देगी
41:50यानि Brick तब तक कोई आधिकारी शब्द नहीं था और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्ता के विश्वेशन के लिए गढ़ा गया एक
41:57शब्द समझे
41:58इसके ठीक पांच साल बार जैसा उन्होंने कहा था वैसा हुआ और इन चारों देशों ने मिलकर Brick का गठन
42:07किया
42:07साल 2006 था Brick आज Bricks बन चुका है आज इस संगठन के 11 थाई सदस्य है दस साजेदार देश
42:15भी है ब्रजिल रश्या इंडिया और चाइना संस्थापक देश है और इन चारों के अलावा साल 2011 में जब साउथ
42:21आफरिका जुडा तो ये सदस्यता लेने के बाद Brick था Bricks बन गया
42:27ब्रजिल, रश्या, इंडिया, चाइना, साउथ आफरिका, Bricks करीब 13 वर्शों तक इन 5 देशों ने संगठन को बनाए रखा और
42:35आपसी साजेदारी को दिन बदिल मजबूत करते गए
42:39Bricks के विचार एकदम साफ थी, सदस्य देशों के बीच कुटने ते एक व्यापारिक सहयोग को समय के साथ बढ़ाना,
42:45मस्बूत बनाना
42:47इसी विचार ने कई देशों को इस संगठन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया
42:52अब इस अंगठन की शक्ती को पहचान कर साल दोजार चौबिस में पांचने देश मिस्र एजिप्ट, एथियोपिया, इरान, सौधी अरब
43:01और युए इने इसकी सदस्य दाली ने
43:04साल दोजार चौबिस में रश्या के कजान शेहर में ब्रिक्स समिट का आयोजन हुआ था और इससे सदस्य देशों के
43:10अलावा साज़िदार देशों को जोडने की व्यवस्था बनाई गए और फिर साल दोजार पच्चिस में इंडोनेशिया ब्रिक्स का स्थाई सदस्य
43:17बन
43:34प्रीश है
43:35कि तो बहुभा, भी कि अर relies कि समय करे�्ष मादिएए भास, आर कि अरफा यं
43:45कि स Ε coy कि अरे कि अर्फार जτε रह
44:05ड्सक चिर अपतन पुब आपरेखं वार दोपरेपй्ट, कम यह नदेझ्ड़ेल tob
44:35झाल झाल
45:08आज ब्रिक्स एक ऐसा संगठन बन गया है
45:11जिसमें शामिल देशों को वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था से दूर नहीं रखा जा सकता
45:17बल्किया स्थिती ये है कि ब्रिक्स में शामिल देश दुनिया के व्यापार को चला रहे है
45:22ब्रिक्स देशों में दुनिया की 49.5% आबादी रहती है आधी आबादी दुनिया की लगबग आधी आबादी इन देशों
45:32में है और दुनिया की GDP में 40% हिस्सेदारी ब्रिक्स देशों की है और सिर्फ यही नहीं दुनिया के
45:38कुल व्यापार में 26% हिस्सेदारी भी जो ट्रे
45:52मेरे फैचरिंग शम्ता वाले देश हैं, ये अपने आप में बड़े कंजूमर मार्केट्स भी हैं, इन में परमाणू शक्तियां हैं,
46:02सैन्य महा शक्तियां हैं, साल 2003 से 2024 के बीच ब्रिक्स देशों का आपसी व्यापार पेरगुना बढ़ा, साल 2003 में
46:09करीब 7,64,000 करोड रुप
46:22होने पर सभी मिलकर बदला लेते हैं, मतलब ये सैन्य कारणों से नहीं बताया गया है, ये युद्ध के लिए
46:27ब्रिक्स एक ऐसा संगठन है, जो सभी को साथ लेकर चलने पर भरोसा करता है, विकास, व्यापार, आपसी, सहयोग, पहली
46:39बार ब्रिक्स की आपचारिक मीटिं�
46:41वो साल 2006 में न्यू यूज़ित यूराइट नेशन जेनरल असेंबली की मीटिंग के दोरान हुई थी, यूए जी एके मुख्य
46:48कारिक्रम में अलग ब्रजील, रश्या, भारत, चायना, इनके विदेश मंतियों ने आपस में मिलकर इस संगठन में अपचारिक ताएं पूरी
46:55की थी, इसके बाद साल 2009 में ब्रिक का पहला समिट रश्या में आयुज़ित किया गया, इस समिट में ब्रजील
47:01से राश्यपती लूला डिसल्वा, रश्या के पूर राश्यपती दिमित्री मेद्विदेव, भारत के पूर प्रधाननत्री डॉक्टर मन मोहन सिंग, चाना के
47:09
47:09राश्यपती हूजिन ताओ शामिल हुए थे, इस बैठक में तय हुआ कि आपसी सहयोग को तो बढ़ाना ही है, इसके
47:16अलावा सदस्य देशों की संख्या भी बढ़ानी है, विस्तार करना है, अब ब्रिक्स का कोई स्थाई हेड़कॉर्टर नहीं है, हर
47:24साल इसके सदस्य दे
47:38इसका हेड़कॉर्टर चाइना के शांगाई में है, इसका मकसद है विकास शील देशों में इंफ्रास्ट्रक्टर, ट्रांस्पोर्टेशन, क्लीन एनरजी, पानी, अर्बन
47:49डिवेलप्मेंट के लिए आर्थिक सहायता उपलब्त करवाना, दर असल ब्रिक्स देशों ने प
48:06इसलिए साल 2015 में NDB बनाया गया, NDB अब तक ब्रिक्स देशों को 2,86,000 करोड रुपे दे चुका
48:16है, भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोगतंत्र है, और उसकी इसी शक्ती ने उसे कई मौके पर ब्रिक्स का एक
48:23महतरपून संस्थापक सदस से बनाया, साल 2001 में जब ब्रिक्
48:31अर्थव्यवस्था माना गया, तो बहुत सारे लोगों को इस पर संदेह था, साल 2013 आते आते वो एक चर्चा में
48:37उठने लगी कि ब्रिक्स कितना कारगर है, आई का मतलब इंडिया नहीं, इंडोनेशिया होना चाहिए, क्योंकि इंडोनेशिया भारत से जाधा
48:47तेजी से ब�
49:00दोल दिखता है, और इसलिए इंडोनेशिया उस वक्त तेजी से आगे बढ़ रहा था, 2013 के आसपास बहुत तेजी से
49:07इंडोनेशिया बढ़ रहा था, सारे विशलेश्कों को भारत ने खलत सावित किया, इंडोनेशिया के मुकाबले भारत के अर्च्ववस्था तब करीब
49:14साथ गुना बड़ी थी, और इंडोनेशिया कई सारे द्यूइपों का सम्भू है, जिससे ट्रांस्पोर्टेशन एक बहुत बड़ी समस्या था, निवेशकों
49:22के लिए खर्चीला था, इस मामले में भारत उनके लिए एक अच्छा विकल्प था, और शायद इसलिए गोल्म
49:46अच्छा विकल्प था, इस मामले में भारत ऊच्छा विकल्प था, जिससनुर्भ का सम्टास्जर्ष था, झाल्द बड़ी सम्टास्पों के लिए फिroग
49:58इसलिए झाल्प भारत झाल्प था, विकल्वा में भारत उनके बटरा하다аться औरका सिर्जर्श दाजर्यु गल्पतान
50:38प्रिक्स देशों के अगली कोशिश है कि सदस्यों और साजेदार देशों के बीच व्यापार स्थान्य करन्सी में हो
50:43हलाकि इसके लिए फिलहाल किसी तरह के ब्रिक्स करन्सी की बात नहीं की जाती है
50:47लेकिन जो नाशनल करन्सी है ज़रूर वानते हैं कि जो अमेरिकी डॉलर है उसमें व्यापार कम होना चाहिए
50:54रश्या और इंडिया में करना है तो रुपया और रूबल में करिए नाशनल करणसी में दोनों देशों के
50:59ब्रिक्स देशों की कोशिश है कि सदस्य देशों के बीच व्यापार उनकी अपनी अपनी करणसी के हिसाब से हो
51:05जिसे भारत और रश्या दो पक्षवावार में दूसरे करनसी का इस्तमाल करते हैं
51:09इससे स्थानी करनसी का इस्तमाल बढ़ेगा डॉलर पर निर्भटा कम होगी
51:13अलग रख देशों का पेमेंट सिस्टम जुरने की संभावनाय बढ़ जाएंगी
51:16इससे ब्रिक्स देशों के बीच एक अलग एक वैक कल्पिक वित्यव्यवस्था बनेगी
51:22पेमेंट सिस्टम बनेगा आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी
51:26अभी होता है कि भारत को अगर साओधी अरब से कच्छा तेल खरीदना है
51:30तो उसे इसका भुकतान अमेरिकी डॉलर में करना पड़ता है
51:33जबकि भारत की करन्सी रुपया है साओधी अरब की करन्सी साओधी रियाल है
51:37ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दुनिया के जादतर देश अमेरिका की करन्सी में ही एक दूसरे के साथ द्यापार करते
51:42हो
51:42इसकी शिरुवात वर्ष 1944 में दूसे विश्ववयत के समय हुई थी
51:48उस समय अमेरिका की करेंसी स्थिर थी
51:50यही देखते हुए लगवग सभी देशों ने ये तै किया
51:52कि वो अब से US डॉलर में एक दूसे के साथ व्यापार करेंगे
51:56जब उन्हें जरूरत होगी
51:58अमेरिका इन डॉलर्स के बदले में उन्हें गोल्ड रिजर्व में सोना देगा
52:02हलाकि वर्ष 1970-1980 के दशक में जब अमेरिका में सोने के भंडार खाली होने लगे
52:07तब ये व्यवस्था बदली
52:09लेकिन दुनिया में अलग-अलग देशों के बीच व्यापार तब भी US डॉलर में ही होता रहा
52:14आज भी दुनिया का 54% अंतराश्य व्यापार अमेरिका की करनसी में होता है
52:18जिसमें अमेरिका की करनसी मजबूत स्थिर रहती है
52:22क्योंकि पेमेंट सिस्टम के लिए भी पूरी दुनिया अमेरिका के स्विफ्ट बैंकिंग सिस्टम का इस्तमाल करती है
52:27इसलिए अमेरिका फाइदे में रहता है
52:30दुनिया के हजारों बैंक और वित्य संस्थाएं स्विफ्ट का इस्तमाल करती है
52:34इसलिए अंतराश्य व्यापार में इसका बहुत बड़ा महत्म है
52:37अभी ब्रिक्स देशों के बीच स्विफ्ट जैसा कोई पेमेंट सिस्टम नहीं है
52:40इसलिए जादतर देश फिलहाल अमेरिकी डॉलर में व्यापार करते थे
52:45लेकिन अब वो अपनी अपनी विवस्था बना रहे
52:47Cross Border National Currency Payment System
52:51यानि दो देशों के बीच उनकी जो अपनी अपनी लोकल करन्सी है उसमें पेमेंट करेंगे
52:56रिष्टा बनाना है तो तारीफ करना सीखो और खत्म करना है तो सच बोलना
53:01नमस्कार
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