00:00When I come to my heart, when I am filled with my heart, when I am filled with my heart,
00:11when I am filled with my love, when I am filled with God.
00:56।
01:00Oh
01:05Oh
01:07Oh
01:30पाताल गया गुरु शुक्र के पास, मांगा उसने ग्यान विधान
01:36गुरु देवा मुझे को शिष्य बनाओ, प्रम्हांड विजै का मार्ग बताओ
01:43शुक्राचार्य ने हृमंत्र दिया, कहा तपस्या में मन लगाओ
01:50सहर स्रों अर्शों तक तप करता, तन के वल अस्थी पंजर हुआ, खुद की धोर तपस्या से
01:59मां सिंह वाही का आग मन हुआ
02:05जग दंबाने वरदान दिया, निरोग रहो निश्कन तक राज
02:11हर इच्छा होगी पूर्ण तुम्हारी मद के मन में बढ़ा समाज
02:18वरपा कर लोटा वो अपने नगर मिले कर विजय का मान
02:24साल सासंग हुआ विवाह जन में तीन पुत्र माहा
02:31विला सिलो लुप धन प्रिये, बंश बढ़ा और मद बढ़ता गया
02:37परदानों के मद में डूबा, धर्म का दिप बुजता गया
02:44प्रिटवी पर फिर धावा बोला, स्वर्ग लोक भी जीत लिया
02:50कैलाश की पावन भूमी पर असरों का अधिकार किया
02:55निभ्यर के और धर्म मिटा, देवों का सम्मान गया
03:00मदासुर के अत्याचारों से सारा जग वीरान हुआ
03:07देव गण पहुच रिशी सनत कुमार के चरणों में अपनी पीडा लेकर
03:13धिशी ने कहा गणपती को ध्याओ, एक दंत कास्मरण करो मन भर
03:22खेक दंत भेगन राज सोवर्षों तक देवों ने कठिन अनुष्ठान किया
03:33भक्तों की करुण पुकार सुनकर एक दंत गणेशा ने दर्शन दिया
03:42एक दंत चार भुजाएं हाथी मुखन उपम प्रकाश, पाश परशुकमल अभे मुद्रा
03:54भक्तों के तुम परम निवास
03:58लंबो दर प्रसन मुखार विंद नाभे मिशेश नाग विराजे
04:05सिद्धी बुद्धी संग शोभित होकर भक्तों के सब संखट भाजे
04:12माया धारन करके भी तुम पर मात्मा स्वरूप कहाए
04:18एक में वाया एक में सता वेग तुम्हे
04:25एक गंत कहाए
04:29देवों ने चर्डों में जुक कर मांगा अपना उतार
04:35जै एक दंत गंपत देवा जै मंगल का इदाता
04:40मदा सुर के भैसे बचाओ है जग के पालन हारा
04:50एक दंत ने देवों से कहा अब भर तुम सब छोड़ो
04:55मद के बंधन में जो बंधा है उसके आगे सत्य ना छोड़ो
05:02दूत बना कर संदेश दियब देवों का अधिकार लोडाओ
05:09देश प्याग कर मेरे शरण में आओ
05:12वरना रण में मुझे से टक राओ
05:17दूत ने जाकर बात सुनाई मदासुर ग्रोध से जल उठा
05:24नारत के तुरा ने बजन यादा एफिर भी उद्ध को निखला पड़ा
05:31धल शूठा कर बाण चलाया ब्लण पट कर प्रहार किया
05:37पर एक दंत के दिव्य परशों में उसका गर्व जूड किया
05:46एक दंत महाबल गण पति विक्राल परशु उठा तों अदमिक जाए
05:55तेरे आगे कौन विशाल गम गम गम गण पति देवा पुष्ट कमन मंगल मैं देवा
06:03भूमी पर गिरा मदा सुर ख्षन भर चेतना खो बैठा
06:13परशु को भिर उठाने चला दिव्य अस्त्र हाथ से छूट गया
06:23तब समझा वहप ये कोई साधारण देव नहीं है प्रभू
06:33सर्वसमर्थ पर मात्मा है जिनके आगे जुकता है सब कुछ
06:40अहंकार का वरण तूटा आँखों से पश्चाता पहा
06:47एक दंत के चरणों में गिर कर मदासुर ने विनय कहा
06:55प्रभो में अपना दिक्षमा दो मुझे को अपनी भक्ती दो
07:01मैंने जग को दुख दिया है अब चरणों में शक्ती दो
07:09शरण में आया मदासुर तूट गया उसका भिमान
07:19एक दंत ने दया बरसाई मिल गया उसको सचा ज्यान
07:34गंगंगंगंगंगंपति देवा
07:40एक दंत ने कहा मुसका कर मेरी पूजा जहां सजे
07:46दैवी संपत जहां विराजे वहां तुम्हारे चरण ना पड़े
07:52आशुरी भाव जहां फलता हो वहां उसका फल तुम भोगो
07:58धर्म के पथ से जो भटके उनके कर्मों का फल तुम भोगो
08:06वर्पा कर वह पाताल गया हिदय में गणपति का नाम
08:12देवगण भी लोटे अपने छा गया जग में सुख धा
08:21गंगंगंगंगंगंपति देवा एक दंत मंगल मैं देवा
08:25अहंकार जहां भी जन्ने वहां तुम्हारा नाम जपेवा
08:32एक समेश्री हरी विश्णु ने एक दंत की उपास ना की
08:41प्रसन होकर गंड राज ने मनी चिंता मनी ब्रदान की
08:54विश्णु ने वह मनी आगे कपिल मुनी को दे दी थी
08:59पर गणासुर नामक असुर ने मुनी से वह मनी चीन ली थी
09:05तब फिर गण पतिरण में आये अधर्म का भिमान मिटाया
09:12गणासुर का शिरत छेद करके चिंता मनी मुनी को लोटाया
09:19एक दंत केवल रूप नहीं है गहरा इसका ग्यान है
09:25माया और सत्ता के भीतर छिपा हुआ भगवान है
09:32देह बदलती जग बदलता पर सत्त कभी न बदलता है
09:38जो मैं के मद को छोड़ प्रभू को सचे मन से भजता है
09:43उसके भीतर ग्यान जगेगा अंतर होगा निर्मल पावन
09:50एक दंत की क्रिपा से उसका जीवन होगा मंगलम ऐसावन
09:59जै एक दंत गणपति देवा जै विगन हरता मंगल देवा
10:06मदा सुर कमद हरने वाले हत्तों के तुम पालन हाले
10:11जै एक दंत गणपति देवा जै सिध्धी बुद्धी के स्वामि देवा
10:16अहंकार का दम मिताकर जैन का सूरज लाने वाले
10:21जै एक दंत गणपति देवा
10:24जै एक दंत गणपति देवा
10:51चरणों में मेरा दारं बार प्रणा
10:58मद मिते मन शुत्थ बने रिदाये पसे
11:07श्री गनेश का नाम
11:10जै श्री गनेश जै श्री एक दंत गणपति बप्हा मोरया
11:17मुंगल मुर्ती मोरया