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  • 3 weeks ago
🙏🐘🌺🌼Ganesha 12 Avatar | Episode 6 — Vikata Avatar | गणेश जी का षष्टम अवतार — विकट | The End of Passion, The Light of Self-Control🙏🐘🌺🌼

🙏🐘🌺गणपति बप्पा मोरया🙏🐘🌺मंगल मूर्ति मोरया🙏🐘🌺

#️⃣GANESHA 12 AVATAR — EPISODE 6

🌺गणेश जी का षष्टम अवतार — विकट🌺
🎵The Divine Musical Journey Begins…🎵

🌺विकट अवतार” 🌺 काम का अंत, संयम का प्रकाश🌺

🔥जहाँ कथा है… संघर्ष है… भक्ति है…
और अंत में है — संयम, शरणागति और धर्म की विजय।🙏

दैत्यराज कामासुर ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव से वरदान प्राप्त किया। वरदान की शक्ति पाकर उसका अहंकार बढ़ता गया और उसने तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। धर्म और सत्य संकट में पड़ गए।

देवगणों ने महर्षि मुद्गल की शरण ली और उनके मार्गदर्शन में मयूरेश सिद्ध क्षेत्र में गणपति की तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर विकट गणपति दिव्य स्वरूप में प्रकट हुए और कामासुर के अत्याचार का अंत करने का आश्वासन दिया।

⚔️ फिर हुआ एक महाभयंकर युद्ध…

कामासुर के पुत्र शोषण और दुष्पूर भी रणभूमि में उतरे, लेकिन युद्ध में मारे गए। क्रोधित कामासुर ने विकट गणपति को चुनौती दी। परंतु विकट प्रभु की दिव्य शक्ति के सामने उसका प्रहार निष्फल हो गया।

और फिर आया वह क्षण…
जब कामासुर का अभिमान टूट गया।

वह अपने अस्त्र-शस्त्र छोड़कर
🙏💫विकट गणपति के चरणों में शरणागत हो गया।

विकट प्रभु ने भी उसके अपराधों को क्षमा कर दिया।
धर्म की पुनः स्थापना हुई और देवताओं ने मयूरेश-विकट गणपति की जयजयकार की।💫🙏❤️

💫 The Spiritual Message:

🌸काम बुरा नहीं जब वह धर्म की सीमा में हो…🌸
लेकिन जब इच्छा अपनी सीमा खो देती है,🙏
तो वही इच्छा जीवन को बाँध लेती है।🌺🙏

🌸इच्छा पर संयम प्रभु को अर्पित🌸

💫विकट अवतार हमें सिखाते हैं —
✨ इच्छा पर संयम रखो
✨ इंद्रियों के दास मत बनो
✨ अपनी इच्छाओं को प्रभु को अर्पित करो
✨ शक्ति मिले तो उसका उपयोग धर्म के लिए करो
✨ और शरणागत पर क्षमा और करुणा बरसाओ।” 🌸

🎵 इस पूरी कथा को प्रस्तुत किया गया है एक Powerful Musical Video Journey के रूप में —
✨ Powerful Devotional Music
✨ Emotional Storytelling
✨ Epic Mythological Battle
✨ और जीवन को छू लेने वाला Spiritual Message

🙏❤️ आइए, Episode 6 में अनुभव करें —
🌺 GANESHA 12 AVATAR — EPISODE 6

🎵 लंबोदर अवतार | Musical Devotional Video
🌺🔥जय विकट गणपति देवा की

Category

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Fun
Transcript
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00:30જब काम बने जीवन का राजा જब तृष्ण मन को नचाए તब विकट रूप धरगन पती મोहित जीव को राह
00:48दिखाए
00:51दिशाल सरूप अलो किकताया गिव्य तेज अपाय असयम की अगनी बुझाने आये गणपति सरकार
01:04जै विकट गणपति देवा जै विन्नहर का मंगल कारी काम विकार हर लो प्रभू है करुणा मैद पुराई
01:14गंगंगं गणपति देवा विकट मंगल मैदेवा
01:26चलंधर वध की लीला में जब विन्दा का तप नष्ट हुआ
01:31उसी समय एक तेजस वी असुर काम अगनी से उत्पन हुआ
01:39काम की अगनी से जन्मा था इसलिए नाम पड़ा काम असुर
01:44शुक्रचार्य के चरणों में जाकर बन गया उनका आध्याधर
01:52गुरुने उसको धीक्षा दी शिव का पंचाप्षरी मंत्र
01:57अन्जल तक त्याग दिया उसने तप में लगा निरंतर
02:02चीर्ण हुआ उसका शरीर पर तप से बन अडिग रहा
02:07पर शोंकी साधन पून हुई शिव का दर्शन उसे मिला
02:15भोले नाथ प्रसन हुए बोले मागो बरदान
02:20कामा सुर ने मागा उनसे ब्रम्हांड का राज्य महान
02:26शिव भक्ति और मृत्युन जयता मांगी उस मेरे साथ
02:31महादेव निवर्दे डाला खुल गया विजय का पथ
02:39माहिशा सुर की पुत्री कृष्णा से कामा सुर का विवाह हुआ
02:49सभी दैट्यों ने उसकी सक्ता स्वीखार कर ली तक्सकाल
02:55रतिदंगर बनी राजधानी बढ़ा उसका प्रताप विशाल
03:00रावन शंभर महिशु और बलिदुर मदूस के पाँच प्रधान
03:05सेना लेकर का मासुर निकला जीतने को सारा जहान
03:11प्रित्वी के सारे राजाओं को एक एक कर जीत लिया
03:16फिर सर्ग पर चढ़ाई करके देमों को भी पराजित क्या
03:24तीनों लोपों पर राज हुआ पर धर्म हुआ लाचार
03:29चल कपट का राज हुआ मिट गया सक्याचार
03:35देव भटके रिश भटके मुनि खोजे अपना धाम
03:40काम की आधी में ढूब गया तीनों लोपों का शुभ नाम
03:50देव गण योगी राज मुद्गल के चर्णों में जाकर बोले
03:56हे मुनिवर अब कौन बचाए हम सब के बंधन खोले
04:01मुद्गल रिश ने कहा वयूरेश सिद्ध छेत्र जाओ
04:06विगन हर्ता की दपस्या करके उनको शीग प्रसंद कराओ
04:14देव गए उसका मन छीत में मन को एतागर किया
04:19दुख और भय को जाग कर गर्पति का ध्यान किया
04:27गम गम गम गम हे गण पति ये विगन हर्ता
04:32गम गम गम मुद्गल राज की देविन हर्ता महराज की देव
04:41तो पस्या से प्रसंद हो कर विकट गणपती आए
04:48विशाल और योगित स्वरूप में विव्या प्रदाश बरसाए
04:53उनका धर्शल पाकर देवों ने चरणों में शीष छुगाया
04:59विकट ने कहा परमादो सबले विस्वर में बताया
05:04आमासुर के अप्याचार का आज प्रबु अंत करो धर्म कर्म की जोटी बुझी है तिर से जगने
05:17सत्य भरों
05:20विकट बोले आहां तू आकाश में जैकार हुई
05:25आसुरी सत्का कापूटी गर्म की फिर पुकार हुई
05:31जै जै जै विकट गड़ राज जै जै पिगना हरता आज
05:36कामासुर के अंत हेत धर्म सगारण का साथ
05:41समय हाया तो विकट प्रभु ने देवों संग राज धानी घेरी
05:47चार ओर से धर्म किसे ना बन कर आई शक्त घनेरी
05:52कामासुर को धलकार अगया जन का शम्शीश उपाया
05:57देख ओर निकट कर पती बुझी और सुर हरा
06:02कामासुर के अगया चार का आज बभु अत करो
06:07धर्म कर्म की जोती बुझी है फिर से जग में सत्य भरो
06:16रण का शम्ख बजा एक और विकट गणपती दूजी और असुर खडा
06:24आकाश गर्जा धर्ती का बिघोर युद्ध आरंभुआ
06:31अस्त्र शस्त्र की वर्शा में रण का रूप विक्राल हुआ
06:39कामासुर के दो पुत्र थे शोशन और दुश्पुर नाम
06:44रण भूमी में दोनों उत्रे लेकर अपनी पूरी शक्ति तमाम
06:51देव गणों से भिड़ते भिड़ते दोनों रण में गिर गए
06:56कामासुर के हिदय में तब क्रोध के वादल खिर गए
07:01पुत्रों के शव देख कर वा विकट प्रभू पर गर जा
07:06मेरे वीरों को देख कर भी तुमने कैसे साहस किया
07:13मेरे प्रभाव से देव गण मुर्चित पड़े है रण में
07:19तीनों लोक मेरे आधीन है भागो अब तुम इस सिक्षन में
07:26लिकट बोले शांत स्वर में तुमने शिव के वर का दुरुपयोग करके अधर्म कमाया है
07:36जो वर था भक्ती का साधन उसे अभी मान बनाया है
07:43मैं स्रिष्टि स्थिति संहार करता जन्म मृत्यु से परे हूँ
07:50तुम मुझे मार नहीं सकते मैं ही तुम्हारे भी तर हूँ
07:55गुरु शुक्रा जार्य किवानी एक बार स्मरण करो
08:00मेरे स्वरूप को पहचानो यद जीवन चाहते हो तो शरंधरो
08:10कामासुर ख्रोध में अन्धा था जदा उठा कर वार किया
08:15विकट प्रभु परग प्रहार ख्षन में निश्पल हो गया
08:21कब विकट ने ख्रोध भई के वलेक द्रिष्टी डाली
08:27कामा सुर्मूर खित हो कर गिरा शक्ति उसकी शीन हुई सारी
08:35बिना शस्त के ऐसी दशा देख कर मन काप गया
08:40जब प्रभु शस्तर उठाएंगे तब मेरा क्या होगा
08:45सोच गया
08:48तूट गया उसका सारा गर्व
08:51चुक गया उसका मस्तग्व
08:54विकट गणपत के चर्णों में आगी रागो असुरे तत्काल
08:59काम जुता गणपत के आगे तूट गया भिमान
09:06विकट प्रभू ने क्षमा बरसाई गिल गया उसे ज्यान
09:12अस्त्र शस्त्र सब छोड़ दिये चर्णों में रखा शीश
09:17शुर ने शरण स्विकार की मिट गया मन का क्लेश
09:24विकट ने भीक्षमा किया नहीं रखा मन में ग्वेश
09:30शर नागत पर क्रिपा बरसाखर मिटा दिया उसका क्लेश
09:37बेगो ने फिर जैगार लगाई मयुरेश की महिमा गाई
09:43धर्म के जोती फिर जग मगाई सक्के ने अपनी राह दनाई
09:48छलक बट का राज मिका फिर यग्यों की ध्वन्याई
09:53रिश मुनी ने सुख की सास ली देवों ने मंगल धुन दाई
10:00जै जै जै जै गनपति देवा
10:09खामा सुर का मोह हरने वाले अपतों के रखवाले देवा
10:16जहां इच्छा सन्यम पाए बहां तेरा प्रकाश
10:21जहां भक्ती मन में जागे बहां मिटे हर प्रास
10:28काम बुरा नहीं जब धर्म में हो इच्चा बुरी जब सीमा खोए
10:34मन की चाहत प्रभु को अर्पित हो तो जीवन क्यों फिर रोए
10:40प्रिश्ना जितनी बढ़ती जाए मन उतना ही खाली हो
10:46प्रभु का नाम हिवे में भर तो हर भाग उजिया ली हो
10:52दिकट कहते मन को जीतो इंद्रियों के दास न बनो
10:57जो इच्चा आए प्रभु को अर्पित अपने सक किसी दूर ना हटो
11:04कामा सुर की कथा सुनाती शक्ती बिना से नम गर्थ
11:09भक्ती बिनावर गाल भी आखी बन जाता है जीवन का अनर्थ
11:18जै पिकर्ष्ट जनपति देवा जै मंगल मूर की देवा
11:25जै पिकर्ष्ट जनपति देवा जै मंगल मूर की देवा
11:30झाल

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