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पूरा वीडियो: छठ पूजा का अनोखा अर्थ -प्राचीन भी आधुनिक भी @Shri Prashant || Jaag Sake To Jaag, with India News

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Transcript
00:00आप मुझे एक ऐसी चीज बता दीजिए जो छठ वहाँ पर्व में इस्तिमाल होती हो और बायो डिग्रेडेबल न हो
00:06नदियों के प्रते सम्मान, नदियों की सफाई, नदी में जाकर के खड़े रहना
00:12उगते सूरज को भी अरगे और ढूपते सूरज को भी अरगे
00:16किसी भी तरह का मासाहार न करना, मासाहार तो छोड़ दीजिए, नमक तक की वरजना
00:21भोग से इस प्रकार की दूरी के लगातार उपवास, आप जो वस्तर भी पहन रहे हो, वो भी सिला हुआ
00:28नहीं हो सकते
00:29प्रकरती जो भी है भाई, भोगने के लिए नहीं है, और उसका प्रमाण ये है कि उसके सामने सर जुगाया,
00:34इसको भोगना होता है, इंसान उसके सामने तो सर जुगाता नहीं है
00:37वही जो स्पिरिट है, जो वह भाव है, वो हमें छट में देखने को मिलता है
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