00:00आजकल संबंधों में वो मधूरता नहीं है जो पहले थी जाहे मैं पती-पद्नी के रिष्टे कहूं या माता-पिता
00:05के रिष्टे कहूं या कोई भी रेलेशन्शिप की मैं बात करूं
00:07रिष्टों में मधूरता नहीं है आज यहां तक तो ठीक है पर पहले थी यह कैसे पता
00:13दहेज हत्ते आएं पिछले 10 साल में उसके पीछे के 30 सालों की अपेक्षा बहुत कम हुई है
00:19तो हम कैसे कह रहे हैं कि पिछली पीडी में रिष्टे बहुत अच्छे हुआ करते थे
00:23कैसे कह रहे हैं अब आप धारन के लिए कहते हो तलाक की दर बढ़ गई है
00:26पहले डर इतना ज़्यादा था कि तलाक भी नहीं हो सकता था
00:30पहले तलाक नहीं होता था घुट-घुट के मरती रहती थी वस तो बहुत अच्छी बात थी
00:34लगबग वैसी बात कि देखो आज कल तो कल्योग आ गया है आज कोई विशेश कल्योग नहीं आ गया है
00:38हम 99 प्रतिश्यत अभी भी वैसे ये जैसे पहले थे
00:41परिस्थितियां हैं सयोग हैं दबाव है भै है अंधेरा है अज्ञान है या वासनाई हैं और जाकर कर रिष्टा बना
00:48लिया
00:48जाकर रिष्टा बना लिया ऐसे रिष्टे बनते हैं अब इन रिष्टों में कौन सी गुणवत्ता होगी
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