00:00इटली में अब स्कूल की क्लास में चेहरा ढखकर जाना मुश्किल होने वाला है।
00:05बुर्का और नकाब को लेकर प्रधान मंतरी जॉर्जिया मेलोनी ने ऐसा एलान किया है जिसने पूरे यूरोप में एक बार
00:11फिर पुरानी बहस को सामने ला दिया है।
00:14मेलोनी सरकार इसके पीछे स्कूलों में एकिकर्ण, बच्चों की पढ़ाई, भाशा और महिला पुरुष की बराबरी जैसे मुद्दों को रख
00:22रही है।
00:23लेकिन इस फैसले के साथ धार्मिक आजादी का मुद्दा भीर चर्चा में आ गया है।
00:28सबसे एहम बात ये है कि इटली में अभी बुरका और नकाब पर कोई नया कानून लागू नहीं हुआ है।
00:35मेलोनी ने इसका प्रस्ताव लाने का एलान किया है यानि अभी ये पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया से होकर गुजरेगा और
00:43आगे संसद में इस पर चर्चा भी होगी।
00:46कहानी शुरू होती है 20 सितंबर 2026 से।
00:49इटली की राजधानी रोम में जॉर्जिया मेलोनी अपनी पार्टी ब्रदर्स आफ इटली के युवा कारिकरम में पहुची थी।
00:56वहीं उन्होंने स्कूलों को लेकर कई बड़े प्रस्ताओं का एलान किया।
01:01इनमें सबसे आदा चर्चा, बुर्का और नकाब को लेकर हुई।
01:04मेलोनी ने कहा कि स्कूल में छात्राओं का चहरा खुला होना चाहिए।
01:09उनके मुताबिक किसी लड़की को परंपरा के नाम पर चहरा ढखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
01:15उन्होंने महिला और पुरुष की बराबरी को भी इस फैसले से जोड़ा यानि मेलोनी की दलील सिर्फ सुरक्षा तक सीमित
01:22नहीं है।
01:23वो इसे स्कूल, महिलाधिकार और इटली के सामाजिक धाचे से जोड़ कर देख रही है।
01:29यहां बुर्का और नकाब के बीच का अंतर भी समझना जरूरी है।
01:33नकाब में आमतोर पर पूरा चहरा ढखा होता है लेकिन आखे दिखाई देती हैं।
01:39बुर्का इससे भी जादा शरीर को ढखता है और चहरे के सामने भी कपड़ा लगा होता है।
01:45मेलोनी सरकार जिस रोक की बात कर रही है उसका निशाना खास तोर पर चहरे को पूरी तरह ढखने वाले
01:52कपड़ों पर है।
01:53और फिलहाल इसका एलान स्कूलों के लिए किया गया है।
01:56इसका मतलब ये नहीं है कि पूरे इटली में हर सार्जनिक जगह पर बुरका नकाब पर तुरंट प्रतिबंध लागू हो
02:03गया है।
02:04अब स्कूलों पर सरकार का फोकस समझी है।
02:07मेलुनी सरकार की मताबिक स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं है।
02:11स्कूल वो जगह है जहां अलग-अलग परिवारों से आए बच्चे एक साथ पढ़ते हैं, भाशा सीखते हैं और समाज
02:18का हिस्सा बनते हैं।
02:19इसी सोच के तहांत सरकार विदेशी छात्रों की संख्या को भी एक क्लास में सीमित करने की योजना बना रही
02:26है।
02:26इसके साथ एक और प्रस्ताव है अगर किसी विदेशी छात्र को स्कूल में घुलने मिलने और पढ़ाई की व्योस्था में
02:34शामिल होने में गंभीर दिक्कत हो रही है तो इसके माता-पिता को इटैलियन भाशा सीखनी होगी।
02:40यानि बुर्का नकाप का मुद्दा अकेला नहीं है। इसके साथ भाशा, इंटिग्रेशन यानि समाज में घुलने मिलने का मुद्दा भी
02:49जोड़ा गया है।
02:50मेलोनी की पूरी दलील का एक बड़ा हिस्सा इटली में आने वाले लोगों के सामाजिक एकिकरण से जुड़ा हुआ है।
02:56उनका कहना है कि जो लोग इटली में आकर अपना भविश्य बनाना चाहते हैं उन्हें इटली की भाशा सीखनी होगी
03:03और वहां की संस्कृती और नि
03:17में रहा है। इटली की भावगोलिक इस्थि ऐसी है कि भूमद सागर के रास्ते यूरोप आने वाले कई प्रवासियों के
03:24लिए ये शुरुवाती देशों में से एक है। इसी वजा से वहां इमिग्रेशन को लेकर लगातार आजनीतिक बहस होती रहती
03:32है। मेलोनी की सरकार
03:33भी इस मुद्दे पर सक्त नीतियों की बात करती रही है। लेकिन बुर्का और नकाब का मामला इटली के लिए
03:40बिल्कुल नया नहीं है। इटली में 1975 से ही एक कानून मौझूद है। इस कानून के तहट सार्धनिक जगहों पर
03:46ऐसा हेलमेट या कपड़ा पहनना मना है जिस
03:49से किसी व्यक्त की पहचान करना मुश्किल हो जाए। अगर उसके पीछे कोई उचित कारण नहीं है। इस कानून में
03:55धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों को लेकर सवाल पहले भी अदालत तक पहुच चुके हैं। 2008 में इटली की काउंसिल आफ
04:02श्टेट ने एक मामले में कह
04:04था कि धार्मिक या सांस्कृतिक कारण से चेहरा ढखना अपने आप में कानून तोड़ना नहीं माना जा सकता है। हाला
04:11कि जब पहचान की जरुरत हो तो व्यक्त को चेहरा दिखाना पड़ सकता है। यानि इटली में पहले से एक
04:17ऐसा कानून मौजूद है जिससे पहचान �
04:20और साजनिक फिरुक्षा को लेकर चेहरे को ढखने पर नियम है। अब मेलोनी सरकार सकूलों के लिए अलग और ज्यादा
04:27साफ नियम वाले कानून लाने की तयारी कर रही है। सरकार इसका संबन्ध सकूलों के माहोल और बच्चों के एकिकरन
04:34से जोड रही है। सकूल में ब�
04:47देशी शात्रों की संख्या को लेकर 30 प्रतिशत की सीमा पहले से मौजूद है, मेलोनी ने अब इसे कानून में
04:54नए तरीके से लागू करने या मजबूत करने की बात कही है, हाला कि अभी ये पूरी तरह साफ नहीं
05:00किया गया है कि नई व्योस्था पुरानी सीमा से कितनी अल�
05:13भारण है, फ्रांस ने सार्जनिक जगहों पर चहरा ढखने वाले कपड़ों पर रोक लगाई थी, इस कानून को लेकर मामला
05:20यूरोपीय कोर्ट आफ यूमन राइट्स तक पहुचा था,
05:232014 में अदालत ने फ्रांस के कानून को यूरोपीय कन्वेंशन के खिलाफ नहीं माना, अदालत के सामने समाज में लोगों
05:30के बीच सामान सामाजिक संपर्क बनाए रखने का तर्क भी रखा गया था,
05:35बेल्जियम में भी सार्जनिक जगहों पर चेहरा ढखने वाले कपड़ों को लेकर कानून है, 2017 में यूरोपीयन कोर्ट आफ यूमन
05:42राइट्स ने बेल्जियम से जुड़े एक मामले में भी इसी तरह की रोख को सही माना था,
05:46इससे इतना साफ है किटली जिस दिशा में जाने की तयारी कर रहा है, यूरोप में उसके उधारन पहले से
05:53मौझूद है, हाला कि हर देश का कानून एक जैसा नहीं है, कहीं सार्जनिक जगहों पर रोख है, कहीं सरकारी
06:00संसानों में रोख है, कहीं स्कूलों में रोख है, और
06:02कहीं पहचान छिपाने पर सुरक्षा के आधार पर नियम लागू है। इसलिए दुनिया के करीब 24 देशों में बुर्का और
06:09नकाब पर रोक है। ऐसा कहना ठीक है लेकिन इन सभी देशों में एक जैसा पूर प्रतिबंद नहीं है।
06:32इसे संसद में भेजा जाएगा और वहां तय प्रक्रिया के तहां इस पर चर्चा और मद्दान होगा। यानि आने वाले
06:39दिनों में इटली की संसद में इस मुद्दे पर बहस देखने को मिल सकती है। इस पूरे मामले का राजनीतिक
06:46पहलू भी काफी एहम है। इटली में अ�
07:02नेशनल फ्यूचर नाम की पार्टी भी शामिल है जिसका नित्त यूरोपिय सांसद रौवर्टो वनार्ची कर रहे हैं। इस पार्टी ने
07:09जुलाई में स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोग की मांग की थी। इसके बाद मेलूनी सरकार की तरफ से
07:14ऐसा प्रस्ताव स
07:26सामने आती रहे हैं। एक तरफ सरकारे सार्जनिक जगहों पर चहरा खुला रखने को पहचान और सुरुक्षा और सामाजिक संपर्ग
07:33से जोड़ती रही है। दूसरी तरफ धार्मिक सुतंत्ता और व्यक्तिगत पसंद का मोद्दा भी सामने आता रहता है। कुछ मुस्लि
07:54है कि फ्रांस और वेल्जियम के मामले में यूरोपियन कोर्ट तक बहस पहुच गई थी। अदालत ने कुछ मामलों में
08:00रोक को सही माना था लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हर देश में हर तरह की रोक अपने
08:05आप में सही मानी जाएगी। हर कानून और उसकी परसितियों क
08:08अलग लग देखा जा सकता है। अब इटिली में भी इसी तरह की बहस आगे बढ़ने वाली है। इसकोलों में
08:14चहरा खुला रखने का नियम, सुरक्षा और पहचान से जुड़ा रहेगा। विदेशी छात्रु की संख्या, भाषा से जुड़े प्रस्ताव, शिक्षाब्य
08:22और इंटीग्रेशन की नीत का हिस्सा होंगी। और इन सब के बीच धार्मिक सुतंता और वेक्तिकत अधिकारों को लेकर भी
08:30बहस जारी रहेगी। फिलहाल इतना साफ है कि जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों के लिए एक नया रास्ता प्रस्तावित किया है
08:37और बुर्का और
08:38नकाब पर रोक लगाने की बात कही है। विलेशी चात्रों की संख्या भी सीमित करने की बात कही है।
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