00:00तमीज से रो, संसकार से रो, इसके पहुच हुओ, उसकी बात मानो, पती के तेल लगाया करो, लड़कियों के हाथ
00:05में मुबाइल मत पढ़ने दे न, यह है धर्म
00:06नई पीड़ी ने इस पुराने धर्म को मानने से पूरी तरह इंकार कर दिया है, क्योंकि धर्म का मतलब ही
00:12हो गया है धारणा, धर्म का मतलब ही हो गया है विश्वास, और नई पीड़ी विश्वास करने से इंकार करती
00:18है, हम नहीं मानते हैं विश्वास, हमें नहीं चलना मान
00:34विलुप्त हो जाएगा क्योंगी धर्म का मतलब भी बन गया है धारना और अंध-विश्वास जब तक धर्म का अ
00:59के अंतस की जो किंद्री ये स्थिते और समस्याएं हैं वो तो हजार साल पहले जो थी आज भी वही
01:04हैं और आगे भी वही रहेंगे
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