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Upload date: 26/12/25

सुप्रीम कोर्ट की एक हालिया टिप्पणी के बाद अरावली पर्वत श्रृंखला के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोर्ट ने 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को अरावली की परिभाषा से बाहर रखने की बात कही है, जिससे आशंका है कि अरावली का बड़ा हिस्सा खनन, रियल एस्टेट और कॉरपोरेट गतिविधियों के लिए खोल दिया जाएगा।

इसी मुद्दे पर CCA (चलचित्र अभियान) की टीम ने निर्भय कुमार सिंह, सहायक प्रोफेसर (राजनीति विज्ञान), वैश डिग्री कॉलेज, शामली से बातचीत की। उनका कहना है कि अरावली भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो आज खनन, अतिक्रमण और विकास के नाम पर गंभीर खतरे में है। यदि अरावली नहीं बची, तो इसका सीधा असर पानी, मौसम, खेती, पर्यावरण और लोगों की ज़िंदगी पर पड़ेगा।

टीम – शाकिब यामीन रंगरेज़, इकरा अयुब सैफी


A recent observation by the Supreme Court has raised serious questions about the future of the Aravalli mountain range. The court suggested excluding hills less than 100 meters in height from the definition of the Aravallis, raising fears that a large part of the range will be opened up to mining, real estate, and corporate activities.

The CCA (Chalchitra Abhiyan) team spoke to Nirbhay Kumar Singh, Assistant Professor (Political Science) at Vaish Degree College, Shamli, on this issue. He stated that the Aravallis are one of India's oldest mountain ranges, and are currently under serious threat from mining, encroachment, and development. If the Aravallis are not protected, it will have a direct impact on water resources, climate, agriculture, the environment, and people's lives.

Crew – Shakib Yameen Rangrezz, Ikra Ayyub Saifi

#SaveAravallis #AravalliHills #EnvironmentProtection #SupremeCourtIndia #IndianEnvironment #StopMining #ClimateCrisisIndia #WaterCrisis #EcologicalBalance #GreenIndia



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00:00CCA की और वीडियोज देखने के लिए सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को दबाएं
00:30चुकि अरावली परवत जो है वो मानसून के एक बहुत बड़े हिस्से को रोक कर बारिस कराती है
00:36अगर वो परवत सिंखला आपको खनन के मार्ध्यम से क्योंकि जब उसको शुकार कर लेंगे तो अगले 20-25-50
00:42साल में सारे पहाड आपको खन दिये जाएंगे
00:46इसका सबसे बड़ा एकजामपल आप देखें कि जो बनारस के बगल में जो मिरजापूर है
00:52वहाँ पे अनियंतरित खनन का परेड़ाम आप देख रहे हैं कि पहाड कटके गिर रहे हैं और कितने लोगों की
00:58मिर्तु हो गई
01:00पहाडों में जो विकास के नाम पर जो रोड, सुरंग, रेलवे लाइन, खनन, पत्थर जो तोड़े जा रहे हैं
01:08जो अरावली परवत का ये जो कानून भारत सरकार ला रही है उससे समान व्यक्ति को कोई फायदा नहीं
01:18इससे फायदा है खनन माफिया, बड़े-बड़े भीरोक्रेट्स जो क्योंकि वो पट्टे पे दिये जाएंगे तो उसमें सबका अपना हिस्सा
01:27बनेगा
01:28और उसमें एक बड़ा मचली है जिसे हम अडानी के नाम से जानते हैं
01:33वो इसमें इनबॉल्व हैं और ये पुरा खनन प्रिक्रिया उन लोगों के लिए ही लाया जा रहा है
01:39उस छेत्र में रहने वाले जो जीव जनतु हैं, जानवर हैं, पक्छी हैं
01:45तवाम जो उनसे बड़ा आपको एक व्यक्ति का हित इस समय आकर खड़ा हो गया है
01:53तो ये सिधे सिधे जो सरकार का फाइदा है, चाही इस सरकार की सबसे बड़ी खामी ही है
01:59कि ये निणे जिन्होंने नितिगत निणे जो उन्होंने जितने भी लिए हैं
02:12इसलिए मैं आपके माध्यम से अपील करना चाहता हूँ
02:23रहूं देश के प्रत्तिक नागरिक से कि इस नियम को इस प्रक्रिया को यदि
02:29आप नहीं रोकेंगे तो आने वाला पिढ़ी आपको कभी माफ नहीं करेगा कोट
02:34सरकार ये जानबूझ के इस पूरे प्रक्रिया को सुप्रीम कोट के माध्यम से कराई है तकी लोगों
02:41जो हो वो क्योंकि आज भी लोग सुप्रीम कोट को बड़े ही आदर के नजर से देखते हैं तो उसका
02:47फाइदा सरकार लेना चाहती है कि भाई हम करेंगे तो डारेक्ट विरोध होगा और सुप्रीम कोट के माध्यम से करवाएंगे
02:53तो फिर बात में पल्ला जाड़ने के लिए
02:55भी अगर एक आंदोलन जन आंदोलन खड़ा होता है तो फिर हम जब पीछे हटें तो मेरे पास कहने के
03:01लिए हो कि भाई यह तो सुप्रीम कोट का आदेश था हमने आपके आंदोलन और आपके मत का सम्मान किया
03:07और हम पीछे हट गए
03:08सीसे माप सभी का स्वागत है साथियो अभी इस देश में अरावली पाड को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो
03:15चुका है
03:17हालिया सुप्रीम कोट के अभी एक टिपनी में कहा गया है कि
03:20अरावली पाडियों के कुछ पाडियों को जो सो मिटर से कम की पाडिया है उसे अरावली संक्रा में नहीं गिला
03:26जाएगा
03:27जिससे काफी लोगों में जो परियावरण विद्यान का कहना है अगर ये नियम सही से लागू हो गया
03:33तो आने वाले समय में अरावली पाड़िया लगवक खतम ही हो जाएगी
03:37हमारे साथ अभी निर्भयक कुमार सिंग जी है जो पोलिटिकल के प्रोफेसर है
03:42और साथ साथ में परियावरण को लेकर काम करते रहते हैं
03:46जी बहुत-बहुत शुक्रिया आपका भी बहुत-बहुत सुक्रिया हमसे बातचित करने के लिए
03:52सर अभी जो अरावली पाहड को लेकर एक विवाद पूरे देश में खड़ा हो गया तो आप कैसे उसको देखते
03:58हो
03:58क्या चीज़े की जा रही है आपके मार्ध्यम से पूरे देशवासियों को मैं बताना चाहता हूं कि अरावली जो है
04:09वो भारत की सबसे प्राचीन परवत सिंखला है
04:15और जो भारत का जो इको सिस्टम है उसको संतुलित करने में इस परवत सिंखला का काफी महत्पूर योगदान है
04:25इसका जो प्रथम बिवाद जो शुरू होता है वो 2002 में शुरू होता है जब हर्याना में एक अनियंत्रित खनन
04:35परक्रिया शुरू होती है
04:36जिसे बाद में वो मामला कोट में जाता है और कोट उस पर रोक लगा देती है लेकिन एक मुद्दा
04:46और जो सबके सामने आता है
04:49वो 2010 में जो Foreign Survey of India जो FSI है वो सर्वे में ये पाती है कि अरावली के
04:59जो बहुत सारे पहाड़ है वो गायब हो गए है
05:04तो ये बड़ा संकट आपको सामने आया फिर चुकि खनन को लेकर चुकि अरावली का जो परवत छेत्र है वो
05:17गुजरात हरियाना पंजाब और दिल्ली का एक बहुत बड़ा छेत्र जो लगभग 700 किलोमीटर का छेत्र कभर करता है उसके
05:28इको सिस्टम से जुड़ा है और उ
05:33तो ये जो अभी अरावली को लेकर जो भरस सरकार ने जो प्रस्ताव दिया था और सुप्रीम कोर्ट ने जो
05:42उसे अनुमोदित दिया है इससे बहुत सारी चिंताइं उभर के सामने आई
05:49उसमें जो सबसे बड़ी चिंता ये है कि जो परिभासित किया गया है सरकार के अपने तर्ख हैं और पर्यावरंड
05:59वादी हम जैसे सुप्चिंतक जो पर्यावरंड को लेके सजग हैं जागरूख हैं और समान ब्यक्ति के लिए उसका दुसरा माइन
06:10है
06:10कि सरकार को डबलम्मेंट के नाम पर उसे गिर्वी रखने का एक प्रयास है ताकि ज़ादा से ज़ादा मातरा में
06:21खनन हो और जो उन्होंने परिभासा बनाई है और उस परिभासा में उन्होंने जो क्लोज रखा है
06:28सो मीटर का उसने कहा कि सो मीटर से जो ज़्यादा उची पहाड़ियां होंगी वहीं अरावली की परवत स्रिंखला को
06:38में गिना जाएगा
06:40लेकिन इस परिभासा को अगर आप स्युकार कर लेते हैं तो अरावली परवत स्रिंखला का लगभग 80-90 परसेंट जो
06:51आपको परवत स्रिंखला है वो इसके दारे में आ जाती है
06:56इसका मतलब यह है कि 10 से 20 परसेंट ही परवत स्रिंखला ऐसी है जिसकी उचाई सो मीटर से उचा
07:05है यानि अगर इस परिभासा को आप स्युकार कर लेते हैं तो आप यह स्युकार करते हैं कि जो जो
07:13अरावली परवत की वज़ा से जो भारत का इको सिस्टम जो तयार होता है
07:16वह सीधे सीधे प्रभावित होगा और इससे एक अनियंत्रित खनन आपके बीच में आएगा जिससे पूरा पार्स्तिति की तंत्र जो
07:28है वो डिश्टर्ब होगा चुकि अरावली परवत जो है वो मांसून के बहुत बड़े हिस्से को रोक कर बारिस कराती
07:37है
07:38अगर वो परवर्थ सिंखला आपको खनन के माध्यम से क्योंकि जब उसको शुकार कर लेंगे तो अगले 20-25-50
07:44साल में सारे पहाड आपको खन दिये जाएंगे
07:48इसका सबसे बड़ा एक्जामपल आप देखें कि जो बनारस के बगल में जो मिर्जापूर है वहाँ पे अनियंतरित खनन का
07:56परिणाम आप देख रहे हैं कि पहाड कटके गिर रहे हैं और कितने लोगों की मिर्ट्टू हो गई
08:01आप दोहजार पचीश जो है जो इस बात का गवाह रहा है कि भारत की विभीन छेत्रों में इस इको
08:09सिस्टम में जो डिस्बैलेंस आया है पहाडों में जो विकास के नाम पर जो रोड, सुरंग, रेलवे लाइन, खनन, पत्थर
08:19जो तोड़े जा रहे हैं उसके कारण जो ए
08:31इस सारे नीड़े को हम सब भारतवासी भोगेंगे और इस इको सिस्टम को बनाने में अरावली परवत सिंखला का एक
08:40बहुत बड़ा योगदान है
08:42अच्छा भी आपने बहुत सारी चीज़े रखी खनन की बात रखी तो यह अभी जो टिपनी की गया जो फैसला
08:49आया है तो क्या इसके पीछे यह कानूनी परिकरिया या कोई आर्थिक दबाओ जो है बना के चीज़े की जा
08:56रही है क्योंकि हम जब देखते हैं कोई भी सरकार
08:59परकरती को बरबाद करने के लिए सरकार नियर्ण दे और वह भी पूझी पति को फाइदा पहुचाने के लिए तो
09:04इसमें क्या डर जो मैं डर क्या है कि लोगों को असली फाइदा पहुचाने के लिए चीज़े लाई जा रही
09:09है बेसिकली जो रिपोर्ट भी आ रहे हैं कि �
09:13देश के 10% लोगों के पास देश के संपत्ति का 90% हिस्सा उनके पास है तो अब इसली
09:21सी बात है कि जो अरावली परवत का ये जो कानून भारत सरकार ला रही है उससे समान व्यक्ति को
09:30कोई फाइदा नहीं इससे फाइदा है खनन माफिया बड़े-बड़े ब्यूरोक्रेट
09:36जो क्योंकि वो पट्टे पे दिये जाएंगे तो उसमें सबका अपना हिस्सा बनेगा और उसमें एक बड़ा मचली है जिसे
09:44हम अडानी के नाम से जानते हैं वो इसमें इनबॉल्व हैं और ये पुरा खनन प्रिक्रिया उन लोगों के लिए
09:52ही लाया जा रहा है तो देश से
09:56बड़ा देश के पर्यावरण से बड़ा उस छेत्र में रहने वाले जो जीव जनतु हैं जानवर हैं पक्षी हैं तवाम
10:07जो उन से बड़ा आपको एक व्यक्ति का हित इस समय आकर खड़ा हो गया है तो ये सीधे-सीधे
10:16जो सरकार का फाइदा है चाहे इस सरकार की सबसे ब�
10:25बड़े-बड़े पुझीपतियों का ज्यादा फाइदा रहा चाहे वह तीन क्रिशी कानून को लेकर हो या भूमी सुधार को लेकर
10:31हो या अभी ये जो परवत सिंख अभी मंद्रेगा का जो उन्होंने नियम में जो बदलाव लाया और नाम चेंज
10:40किया तो इस सरकार की मंस
10:42जो है वो बड़े-बड़े पुझीपतियों को फाइदा पहुंचाना है और उसका सिधा सा मतलब है कि वह सारे लोग
10:50कहीं ने कहीं उनको जिताने में अपनी भूमी का निभाते है अच्छा सर हम देख रहे हैं लगतार कि कहा
10:58जा रहा है अगर परवतों को परवतों के साथ �
11:00चेड़ चार की गई परवतों के साथ तो सबसे ज़्यादा खामियाजा किसानों या मजदूर गरीब किन लोगों को सबसे ज़्यादा
11:06खामियाजा इसका बहुत न पड़े तेखे पर र्यावरण का जो एकोसिस्टम है उसमें सभी सामील है मनुस्य तो है ही
11:15उसका पार्ठ ह
11:16जो अब परवर सिंखला जब वो समाप्त हो जाएगी क्योंकि 90% 80% वो आपको उस दाइरे में आ
11:24जा रहा है परिभासा के दाइरे में तो फिर जो मांसून को रोकने वाला कोई नहीं होगा तो वो सीधे
11:31डारेक्ट आपको उत्राखंड से टकराएगा
11:33और उत्राखंड में आपको तवाही जिस तरह से दिन परति दिन बढ़ रही है वो संख्या और बढ़ जाएगी और
11:40जो तापमान है दिल्ली का आसपास के छेत्रों का वो अभी काफी बढ़ जाएगा ये तो चलो as a human
11:47आप बता रहे हैं लेकिन सबसे बड़ी समस्या तो उस छ
12:02डुसरे चेड़ में ट्रवल करते हैं तो जब खनन होगा तो फिर उनका जो एक क्योंकि वह एक इक्त मुह
12:08एक्षिस्टम बनाएं उनका एक रास्ता है तो यह जो पंठारी चेत्र की तरह होते हैं है 50 मीटर और न¿
12:15सट्काकि मोजुत हैं तो इनका जो अपना एक को
12:31आप देख रहे हैं कि हमारे बीच से गीध गौरया क्यों खतम हो गए क्योंकि हमने उनके बनाए एको सिस्टम
12:38को खतम किया तो अब अगर उस छेत्र में जो 700 किलोमीटर के छेत्रों में फैला हुआ छेत्र है अरावली
12:45की जो परवर सिंखला है तो उस छेत्र के सभी वने जीव
12:51प्रभावित होंगे आज आप देखिए कि आपके छेत्र में घडरोज आपको हिरन यह आपको पूरे उत्तर परदेश बिहार और लगभग
13:01हर राजी की समस्या बनती जा रही है पहले जब हम बच्पन में थे तो यह सारे यह सारे जानवर
13:07जो हैं वह हमारे दिहात छेत्र मे
13:21में आने के लिए बाद्य हो गए हैं तो कहीं न कहीं हम जंगल में बहुत सारे ऐसे काम कर
13:26रहे हैं जहां पी यह जानवर रहते हैं उस एको सिस्टम में उन्हें खलल हो रहा है तो फिर वह
13:31प्लेन एरिया की तरह भाग रहे हैं और इसकी वजह से किसान को भी आर्थिक तोर प
13:51होगा वह उस रहने वाण जानवरों का डिश्टर्थ और नियम जो है वह कानूनी परिकेरिया में लाए जा रहे हैं
14:10उसको कैसे देख कर आप
14:17इसमें जो वो जानवर हैं
14:21उनके इधर-उधर भतकने और विस्थापन के रूप में देख रहे हैं
14:26आस पास के जो राज्य हैं छेत्र हैं उनमें पर्रावरणी दोस पैदा होगा इस रूप में देख रहे हैं
14:35इसलिए मैं आपके माध्यम से अपील करना चाहता हूं देश के प्रतेक नागरिक से कि इस नियम को इस प्रिक्रिया
14:43को यदि आप नहीं रोकेंगे तो आने वाला पीड़ी आपको कभी माफ नहीं करेगा
14:48क्योंकि सतत्विकास चू कि मेरा स्पेसलाइजसेशन गांधी जी पर है और गांधी जी का नाम मोधी जी बहुत लेते हैं
14:57हलाकि उन्होंने मंध्रेगा से गांधी जी
14:59का नाम टिया है लेकिन जो इसलिए कि आरावली की पहारी काट सकें तो ये बड़ा थी
15:10दुखद है कि दिखाने के दात कुछ और हैं और खाने के दात कुछ और हैं तो इस सरकार की
15:19यह सबसे बड़ी पहचान यही।
15:21अच्छा अभी हम देख रहे हैं लगातार चाहे लोक सबह में कोई भी हो वो पास कर दिया जाता है
15:27आपको लगता है आज के समय में सिर्फ अदालतों पर भरोसा करने या किसी परियावरण बचाने के लिए क्या जनांदोलन
15:35की ज़रुत है इस सबह मतब हमारे लोक तंत्र के ल
15:50है जो हमारे समयधानिंग संस्थाएं हैं जिसमें सुप्रीम कोट को आपको एक निस्पक्ष और स्वतंत्र इंस्टिउशन के तौर पर सेप्रेशन
15:59ऑफ पावर के अधार पर उसको भारत में जगह दी गई है लेकिन आप देखेंगे कि सरकार इस चीज़ को
16:05जानती है कि अ�
16:19लेकिन ये कहना बेमानी होगी क्योंकि अब सुप्रीम कोट सरकार ये जानबूझ के इस पूरे परकृरिया को सुप्रीम कोट के
16:28माध्यम से कराई है ताकि लोगों का गुष्छा जो हो वो क्योंकि आज भी लोग सुप्रीम कोट को बड़े ही
16:34आधर के नजर से देखते हैं �
16:37तो उसका फाइदा सरकार लेना चाहती है कि भाई हम करेंगे तो डारेक्ट भी रोध होगा और सुप्रीम कोट के
16:42माध्यम से करवाएंगे तो फिर बात में पल्ला जारने के लिए अगर एक आंदोलन जन आंदोलन खड़ा होता है तो
16:48फिर हम जब पीछे हटें तो मेरे पास कह
17:04अगर आपको सरकार और जनता को एक-एक बात कहने का मोगा मिला तो आप सरकार को क्या कहोगे और
17:10जनता को क्या कहोगे मैं सरकार को कहूंगा कि आप इस तरह का वन जीव जन बिरोधी प्रस्ताव को जितना
17:21जल्दी हो सके वापस ले लीजिए मेरा आप से बिनम्र निवेदन
17:26भी है और आपको एक आप कर सकते हैं कि एक आम नागरिक होने के नाते आपको एक आदेश भी
17:38है कि आप इस से वापस हर जाईए अन्य था धीरे धीरे लोगों के मन में जागरुकता फैल रही है
17:46और एक जन आंदोलन के लिए आप तयार रहें और मैं आम जनता से यह कहना चाहत
17:55हूं आम नागरिक से यह कहना चाहता हूं कि हमें अपने जीवन में हमको आने वाले पिढ़ी हमें कभी माफ
18:02नहीं करेगी क्योंकि सतत्विकास की पहली सर्त है कि हम आने वाले पिढ़ी के लिए क्या बचा के रख रहे
18:09हैं कौन से खनीजपदार संसाधन पर्या वरंड सोच क
18:25कानून वापस नहीं होते हैं तो कहीं न कहीं हम अपने आने वाले पिढ़ी के साथ गदारी कर रहे हैं
18:34हम अभी निर्बे सिंग जी के साथ थे इन्होंने परियावरण को लेकर बात कई देखो परियावरण रहेगा तो ही आने
18:42वाले समय में पिढ़ी का विकास और दोनों च
18:56अपने आने वाली पिढ़ी के लिए पर्यावरण के लिए तो पुरा जीवन समर्पित है तथ सतत विकास के लिए, मनरेगा
19:03के लिए तो जीवन समर्पित है तो समय कुछ नहीं है ये तो हमारा करतब्बिए है
19:10इस QR कोड़ पर स्कायन करें और CCA के दोस्त बने
19:49झाल झाल
20:06झाल झाल
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