00:00चुनाव आयोग वो सम्मेधानिक संथा है जिस पर देश के चुनावों को निश्पक्ष तरीके से कराने की सबसे बड़ी जिम्मधारी
00:07है
00:07लेकिन अब इसे चुनाव आयोग के अंदर कथित तौर पर उठी आपतियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है
00:13रिपोर्ट सामने आ रहे हैं कि पुछले 10 महीनों में दो चुनाव आयोगतों सुकबीर सिंसंधू और विवेक जोशी ने कम
00:20से कम
00:2114 बार चुनाव आयोग के फैसलों और प्रतिक्रियाओं पर उनके सभी प्रोसेस पर लिखत आपतिया दर्ज की है
00:28मामला सीधे सीधे वोटर लिस्ट और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानि कि SIR से जुड़ा हुआ है
00:34हलाकि चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इस रिपोर्ट के बाद कहा कि SIR समेत आयोग के सभी पैसले सर्वसम्मती
00:42से लिए गए है
00:43यानि एक तरफ अंदरूनी आपतियों के रिपोर्ट है तो दूसरी तरफ आयोग की ओर से असहमती या रिफ्ट की बात
00:50को खारिज किया जा रहा है
00:52दरसल रिपोर्ट के मताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंग संधू और विवेक जोची ने पछले 10 महीनों में कम से कम
00:5914 बार कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपति दर्वज की
01:04रिपोर्ट के अनुसार इन आपतियों का संबंध नए वोटरों के बंजु करण वोटर लिस्ट से नाम जोडने और हटाने चुनावी
01:12डेटाबेस तक पहुँच और SIR से जूड़ी प्रतिक्रियाओं और उनकी जो प्रक्रिया प्रॉसेस थे उन से जूड़ी वी थी
01:18दोनों अधिकारियों ने कुछ कदमों को अन ओथराइजड और इन लीगल तक बता दिया
01:23सबसे ज्यादा चर्चा फॉर्म छे को लेकर है
01:27यही वो फॉर्म है जिसे नया मदाता वोटर लिस्ट में अपने नाम शामिल कराने के लिए भरता है
01:32रिपोर्ट के मताबक इसमें SIR से जुड़ा एक नया सवाल जोड़ा गया था
01:36जिसमें आवेदक से पूछा जा रहा था कि उसका या उसके माता पिटा या दादा दादी का नाम
01:42पछली SIR वाली मदाता सूची में था या नहीं
01:45रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे
01:50दूसरा बड़ा मुद्दा है वोटर डेटाबेस के केंद्री करण का
01:55रिपोर्ट के मताबक दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनता चताई थी
01:59कि चुनावी रोल के डिजिटल डेटाबेस तक राजिस्तर के अधिकारियों की पहुँच कहीं सिमित तो नहीं हो रही है
02:04उन्होंने इस सिस्टम में नियंत्रण और अधिकारियों को लेकर भी सवाल उठाये थे
02:09यहां मामला सिर्फ तक्नीकी नहीं है क्योंकि वोटरल इसमें किसी नाम को जोड़ना, हटाना या बहाल करना सीधे मदाता की
02:17अधिकार से जुड़ा होता है
02:19गोवा का एक मामला भी इस बहस में सामने आया है
02:22रिपोर्ट्स के मुताबिक 97 मदाताओं को स्थानी अधिकारियों ने दस्तावेजों के अधार पर योग्य पाया
02:28लेकिन सौफ्रिवर में उन्हें अंतिन सूची में शामिल करने का विकल्प उपलब्ध नहीं था
02:33इस दावे और इससे जुड़े पुराने घटना क्रम पर भी चुनावी प्रक्रिया और तफ्नीकी विवस्था को लेकर सवाल उठाए
02:40अब इस विवाद का राजुनिती के पहलों भी समझे
02:44विपक्ष पहले से ही SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाता रहा है
02:48नई रिपोर्ट सामने आने के बाद कौंग्र समेथ कई विपक्षी नेताओं ने
02:52आयोग और मुख्य चुनाव आयोग त ग्यानेश कुमार पर सवाल उठाए
02:56विपक्ष का कहना है कि अगर आयोग के भीतर ही महत्वपुन प्रक्रियाओं को लेकर आपतियां दर जुई है
03:03तो इनका सारवजनिक स्पष्टी करन होना चाहिए
03:06लेकिन चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इनापतियों को आयोग के अंतिम फैसले से अलग करके देखा
03:12जाना चाहिए
03:13उनके मुताबिक अधिकारियों ने अलग-अलग मुद्दो पर टपनिया या पर चिंताएं जरूर रखी
03:18लेकिन आयोग के फैसले सर्व सम्मत्य से लिए गया विसे इस विबात के प्रिश्ट भूमी नहीं नहीं है
03:24मार्च दोहजार चौबिस में जब ग्यानेश कुमार और सुकबीर सिंग संधु को चुनाव आयोगत नियुक्त किया गया था
03:29तब तातकालीन विपक्षी सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने चोयन प्रक्रिया पर और सहमती दर्जु की थी
03:35चौधरी का कहना था कि उन्हें दोसों से ज्यादा नामों की सूची मिली और बैठक से कुछ मिनट पहले 6
03:42शॉर्ट लिस्टेड नाम दिये गए
03:44जिससे उमिद्वारों की परियाप्त जाच करना मुश्किल था
03:47तो फिलहाल असली सवाल यही है क्या चुनाव आयोग के भीतर दर्ज हुई आपत्यां के वल प्रक्रिया गट टपनिया थी
03:54या इनके पीछे फैसले लेने के तरीके को लेकर कमभीर मत्भेद थे
03:59इस पर रिपोर्ट और आयोग की सफाई अलग-अलग तस्वीर पेश कर रही है
04:04और क्योंकि मामला वोटर लिस्ट और मर्दाताओं की अधिकार से चुड़ा है
04:08इसलिए आने वाले दिनों में इस विवाद पर और सपश्टी करण बेहद महत्वपून रहेगा
04:13इधर दिल्ली SIR का मामला अभी भी विवाद में है
04:16उस पर देखिये ये खास रिपोर्ट