00:01ुदिश्थिर का रत जमीन को छूता नहीं था। पुरुक्षेत्र के मैदान में उनका रत हमेशा हवा में तैरता रहता था।
00:07यह चमतकार उनके कभी जूठ न बोलने वाले सत्य के प्रभाव से था। युदिश्थिर को धर्मराज कहा जाता था क्योंकि
00:15उन्होंने कभी अस
00:16सत्य नहीं बोला। लेकिन महाभारत के युद्ध में एक ऐसा क्षण आया जब सब कुछ बदल गया। गुरु द्रोनाचार्य के
00:23वद के लिए पांडवों को एक बड़ी चाल चलनी पड़ी। श्री कृष्ण ने योजना बनाई कि द्रोनाचार्य को यह विश्वास
00:29दिला
00:30कि उनके पुत्र अश्वत्थामा की मृत्य हो चुकी है। लेकिन धर्मराज युधिष्ठिर जूठ बोलने को तयार नहीं थे। अब श्री
00:38कृष्ण के कहने पर उन्होंने आधा सत्य और आधा जूठ बोला। और जैसे ही उन्होंने यह चल किया, एक भयानत
00:45चमतकार हु�
00:46सत्य के छूठते ही उनका रत जमीन पर आगिरा। ऐसे ही अन्सुने रहसियों के लिए विडियो को लाइक और सनातन
00:53पेज को फॉलो करें।