00:17ुदिश्थिर की चिंता देख युवा अभिमन्यू ने खुद आगे बढ़कर मोर्चा संभाला।
00:22अकेले ही उसने चक्रवियू के पहले द्वार को एक जटके में तोर डाला।
00:27सातों द्वारों को पार कर वह अंदर जा पहुचा और तहल का मचा दिया।
00:31लेकिन नियमों को ताक पर रख कर कौरव महार्थियों ने मिलकर उस पर हमला किया।
00:36बिना हतियार के भी इस वीर ने रथ के पहिये से दुश्मनों का सामना किया।
00:41अभिमन्यू की यह वीरता आज भी अमर इतिहास के पन्नों में दर्ज है।
00:45अधर्म की इस जीत ने ही महाभारत के विनाश की नीम रखी थी।
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