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  • 5 minutes ago
ओडिशा के भवानीपटना में रहने वाले 14 साल के छात्र स्वराज सत्पथी ने अपनी शानदार प्रतिभा से सबको हैरान कर दिया है. गैरेज के कबाड़ और पुरानी गाड़ियों के फेंके गए पार्ट्स का इस्तेमाल करके स्वराज ने महज तीन महीने की कड़ी मेहनत से दो सीटों वाली एक सोलर-पावर्ड इलेक्ट्रिक कार तैयार की है, जिसका नाम 'VOLT-X' रखा गया है.विकास रेजिडेंशियल स्कूल में पढ़ने वाले स्वराज ने अपनी इस इनोवेटिव गाड़ी में 48 वोल्ट की बैटरी, 800 वॉट का ब्रशलेस डीसी मोटर और डिस्क ब्रेक सिस्टम लगाया है. यह कार 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है और इसे बनाने में करीब एक लाख रुपये का खर्च आया है. कबाड़ में संभावनाएं तलाशने वाले स्वराज की इस प्रेरणादायक कहानी और 'VOLT-X' के फीचर्स को विस्तार से जानने के लिए वीडियो को अंत तक जरूर देखें.

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Transcript
00:00Kabaad में किसी को बेकार का सामान नजर आता है तो किसी को खजाना
00:05उडीशा के भवानी पटना के रहने वाले 14 साल के स्वराज सत्पत ही को भी
00:10उसी Kabaad में एक सपना और एक नई मशीन नजर आई
00:15और तीन महिने की महनत से उन्होंने दो सीटो वाली सोलर पावर्ड इलेक्ट्रिक वहिकल पैयार की
00:22जसका नाम उन्होंने रखा वोल्टेक्स
00:26विकास रेसिडेंशल स्कूल में पढ़ने वाले स्वराज के मन में
00:30लंबे वक्त से खुद की डिजाइन की हुई गाड़ी बनाने का सपना था
00:34बस फिर क्या था
00:36स्वराज ने गैरेज से पुरानी गाड़ियों के निकल चुके मोटर, बैटरी और दूसरे पार्ट्स जुटाए
00:43और धीरे-धीरे कबाड के धेर से एक एलेक्ट्रिक वहिकल तयार की
00:49वोल्टेक्स में 1000 वाट का सोलर सिस्टम लगाये गया है
00:53गाड़ी की अधिक्तम रफतार करीब 25 किलोमीटर प्रती घंटा है
00:57जिसे फुल चार्ज होने में करीब 3-4 घंटे लगते हैं
01:20वोल्टेक्स को बनाने में स्वराज ने लगभग 1 लाख रुपे खर्च की
01:25लेकिन उनकी इस सफर में सबसे बड़ी अडचन थी स्टेरिंग सिस्टम
01:30स्वराज ने इसे बार-बार टेस्ट किया
01:33गलतियां हुई फिर सुधार किया
01:35और आखिरकार स्टेरिंग ने काम करना शुरू कर दिया
01:39अब स्वराज की नजर सिर्फ वोल्टेक्स पर नहीं
01:43उनका सपना है एक दिन अपनी बनाई इलेक्ट्रिक गाड़ी को बाजार तक पहुचाना
01:57अगर मुझे सरकार का समर्थन मिलता है तो मैं और अधिक इलेक्ट्रिक वाहन बनाना चाहूँगा
02:04और यात्रियों के लिए सुविधायें जोड़ना चाहूँगा
02:08शुरुवात में उनके माता पिता भी चिंतित थे
02:11लेकिन जब वोल्टेक्स ने आकार लेना शुरू किया तो चिंता की जगह गर्व ने ले लिया
02:19शुरुवात में मुझे इस बात की चिंता थी कि वो गाड़ी को बनाने में ज्यादा समय बता रहा है
02:24मैं अक्सर उससे कहती थी कि वो इस काम के बज़ाए अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे
02:29लेकिन आज उसने मुझे बहुत कर्व मैसूस कराया है
02:33स्वराज की कहानी सिर्फ एक गाड़ी बनाने की कहानी नहीं है
02:37ये उस सोच की कहानी है जो कबाड में भी संभावनाए तलाशती है
02:42उडिशा के भवानी पटना से ETV भारत के लिए बिकाश कुमार दास की रिपोर्ट
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