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  • 2 days ago
कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान जब राजा शल्य कर्ण के सारथी बने, तो उन्होंने हर पल कर्ण का मनोबल तोड़ा। जानिए इसके पीछे का गुप्त पौराणिक रहस्य।
Transcript
00:05ुरुक्षेत्र के मैदान में जब महारथी कर्ण ने शल्य को अपना सार्थी चुना तो एक खतरना खेल शुरू हुआ।
00:12ुर्योधन के अनुरोध पर शल्य कर्ण के रत को हाकने के लिए तो तैयार हो गए थे।
00:17लेकिन उनकी एक शर्थ थी कि वे युद्ध के दोरान कर्ण की वीरता का अपमान करेंगे और मनोबल तोडेंगे।
00:24द्रोनाचार्य और भीश्म के पतन के बाद जब कर्ण सेनापती बने तो शल्य ने उनके उत्साह पर पानी फेरना शुरू
00:31किया।
00:32जब भी कर्ण अर्जुन की प्रशंसा करते, शल्य तुरंत अर्जुन को उनसे श्रेष्ट बताकर कर्ण का दिल तोर देते।
00:39शल्य ने दुर्योधन को भी कई बार चेताया था कि पांडवों के खिलाफ युद्ध में विनाश निश्चित है।
00:45मगर इसके बावजूद शल्य ने अपनी निश्था निभाते हुए कर्ण के रत की बागदोर थामे रखी थी।
00:51युद्ध के निरनायक शनों में जब कर्ण और अर्जुन आमने सामने आये, तब शल्य की रणनीती ने बड़ा असर डाला।
00:58कहा जाता है कि यदि शल्य ने कर्ण का मनोबल न तोड़ा होता, तो युद्ध का परिनाम कुछ और हो
01:04सकता था।
01:04यह सब भगवान श्री कृष्ण की उस विशाल कूटनीती का हिस्सा था, जिसके आगे हर कोई विवश्थ था।
01:11इस प्रकार शल्य और कर्ण का यह प्रसंग महाभारत के सबसे रहस्मय और दुखद अध्यायों में से एक है।
01:17ऐसे ही अनसुने पौरानिक रहस्यों को जानने के लिए अभी लाइक और फॉलो करें।

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