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The alleged diesel supply deal between US President Donald Trump and Russian President Vladimir Putin has sparked a debate over double standards in international politics. Trump shared details of the agreement regarding Russian diesel supplies on his social media platform, Truth Social. Under the deal, Russia is reportedly set to supply large quantities of diesel to the US and global markets. Amid the Iran war and disruptions in the Strait of Hormuz, rising energy prices have become a major challenge for the United States. Russian diesel supplies are being viewed as an attempt to ease fuel shortages and curb inflation. The deal also raises questions about why the US, which previously pressured India over its purchases of Russian oil, is now seeking energy supplies from Russia itself.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच कथित डीजल सप्लाई डील ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोहरे मापदंडों पर बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर रूस से डीजल आपूर्ति को लेकर समझौते की जानकारी दी। इस डील के तहत रूस से अमेरिकी और वैश्विक बाजार में बड़ी मात्रा में डीजल पहुंचने का दावा किया गया है। ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बीच बढ़ती ऊर्जा कीमतें अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में रूसी डीजल की आपूर्ति को महंगाई और ईंधन संकट से राहत की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सवाल यह भी है कि भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर दबाव बनाने वाला अमेरिका अब खुद रूस से ऊर्जा आपूर्ति क्यों चाहता है? इस समझौते पर यूक्रेन की प्रतिक्रिया और रूस के प्रतिबंधों को लेकर उठते सवाल भी अहम हैं। क्या यह अमेरिका का दोहरा चरित्र है या राष्ट्रहित की मजबूरी? देखिए पूरी रिपोर्ट।

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00:00दुनिया को ज्यान बाटने वाले महा महिन की अपनी ही क्लास में पोल खुल गई है।
00:05ज़रा सोची, जिस रूस के नाम से अमेरिका कल तक आग बबूला हो रहा था,
00:10जिसके तेल पर पाबंदी लगाने के लिए वाशिंटन ने आधी दुनिया पर घंकियों की बोच हार कर दी थी।
00:16आज उसी रूस के सामने अमेरिका घुटनों पर आखड़ा हुआ है।
00:20कल तक जो रूसी तेल अमेरिका की नजर में क्राइम था।
00:23आज वही 10 लाख मेट्रिक टन डीजल ट्रॉम्प की सत्ता बचाने की वाक्सिंग बन चुका है।
00:53बेहत सफल बातचीत पूरी की है।
00:56सहमती बनी है कि रूस तुरंट अमेरिकी और ग्लोबल मार्केट को 3 लाख मेट्रिक टन से अधिक डीजल की सप्लाई
01:03करेगा।
01:04लेकिन डील सिर्फ इतना ही नहीं है।
01:06इस समझोते की टाइम लाइन को ध्यान से समझे।
01:09रूस तुरंट 3 लाख मिट्रिक टन डीजल भेज़ेगा।
01:12नवंबर के महीने में 5 लाख मिट्रिक टन डीजल की सप्लाई हूँ।
01:17उसके ठीक बात 10 लाख यानकी 1 मिलियन मिट्रिक टन डीजल अमेरिका पहुचेगा।
01:21और आने वाले समय में रूसी रिफाइनरियों की शमता की अधार पर कुल 30 लाख यानि 3 मिलियन मिट्रिक टन
01:28डीजल अमेरिका और वैश्विक बाजार में उतारा जाएगा।
01:31इतना ही नहीं इस तेल को अमेरिका में असानी से आने देने के लिए वाशिंटन ने रूसी डीजल पर लगी
01:36पाबंदियों को एप्रिल 2027 तक के लिए सस्पेंड कर दिया है।
01:40अब सवाल ये है कि खुद को दुनिया का चौधरी समझने वाला अमेरिका चानक पुतिन के सामने क्यों नत्मस तक
01:46हो गया है।
02:10मेहंगे डीजल की वज़े से ट्रक वालों की कमर तूट गई है और सूपर्मार्केट में खाने पीने की चीज़े मेहंगी
02:16हो गए।
02:17सोशल मीडिया पोस ही नहीं बलकि राश्रपती डॉनल्ड ट्राम्प ने वाइट हाउस में समवाद दाता हो और मीडिया से बात
02:23करते हुए भी इस दील पर खुल कर अपनी बात रखी और पुतिन का शुकरी आदा किया।
02:27मीडिया से मुकातिब होते हुए डॉनल्ड ट्राम्प ने बेहद कॉन्फिडेंस के साथ कहा कि मुझे लगता है कि आपने रूस
02:34के साथ हुए ओयल डील के बारे में सुना होगा ये एक बहुत बड़ी डील हमारे देश में भारी मात्रा
02:39में तेल और खासकर डीजल आने बाल
03:05ट्राम्प ने आगे अपने उजा मंत्री क्रिस राइट की ओर इशारा करते हुए मीडिया से कहा कि हम डीजल के
03:11संकट और उसकी आसमान छुटी कीमतों को पूरी तरह खत्म करने जा रहे हैं
03:15याद रखिए हमने एरान को परमाणू हतियार बनाने से रोका है और अब तेल डीजल की कीमते रिकॉर्ड तीजी से
03:22नीचे गिरेंगी
03:45उनका देश एक ऐसे साथी से कमजोर हुआ है जो जीत के बाद ही सामने आएगा एक ऐसा साथी जो
03:52सिर्फ जीत के बाद ही साथ देगा
04:13अमेरिका में 3 नवेंबर को चुनाब
04:15सर्वे बता रहा है कि रिपब्लिकन पार्टी चुनाब हार सकती
04:18ऐसे में ट्रम्प को अपनी कुर्सी और वोट बैंक बचाने के लिए
04:21कैसे भी करके डीजल की कीमते गिरानी थी
04:23कच्चे तेल को लाकर रिफाइन करने का टाइम नहीं था
04:27इसले सीधे रूस से तयार डीजल खरीद लिया
04:29अब ज़रा ठहरिये और याद कीजे
04:31जब भारत ने अपनी 140 करोन जनता को महंगाई से बचाने के लिए
04:36रूस से सस्ता क्रूड ओयल खरीदा था
04:38तब इसी अमेरिका ने क्या कहा था
04:40अमेरिकी सांसदों ने भारत पर 100 प्रतीशट टारिफ लगाने की धम किया दी थी
04:45अमेरिका के मंत्रियों ने बयान दिये थे कि भारत रूसी तेल खरीद कर यूकरेन युद को फंड कर रहा है
04:50लेकिन हमारे विदेश मंत्री डॉकरेस जैशंकर ने तब भी अमेरिका को आइना दिखाते हुए कहा था कि भारत की पहली
04:56प्राथमिक्ता अपने नागरिकों की उज़ा सुरक्षा है
04:59आज साबित हो गया है कि भारत का रुख सो अप्रतीशट सही था
05:03जब भारत अपने लोगों के लिए तेल खरीदे तो अमेरिका उसे नैतिकता का पार्ट पढ़ाता है और जब खुद अमेरिका
05:09के चुनाव पर बात आती है तो वहीं अमेरिका चुपचाप पुतिन से 10 लाग टन डीजल की टील कर लेता
05:15है
05:15इसे को कहते हैं अमेरिका का दोहरा चरित एस देल के बाद सबसे बुरा हाल यूकरीन के राश्वपती वॉलदिमियर जलन्सकी
05:23का है
05:24जलन्सकी ने इस समझोते पर कड़ा इतराज जताते हुए से यूकरीन की पीठ में जुरा खोपने जैसा बताया है
05:30दुसे तरफ मॉस्को और क्रेमिलेन में जच नकाम होल है
05:33पोतिन के सलाकारों का कहना है कि अमेरिका का ये कदम साबित करता है
05:37कि पश्चिम देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिरबंद पूरी तरह से नकाम हो चुके है
05:42तो ट्राम्प और पोतिन के इस देल ने एक बात शीशे की तरह साफ कर दी है
05:47इंटरनार्शनल पॉलिटेक्स में ना तो कोई पर्मनेंट नियम होता है और ना ही कोई पर्मनेंट दुश्मन
05:52यहां सर्फ अपने हित और सत्ता का खेल चलता है
05:55अमेरिका के इस कदम ने भारत के उस टान पर हमेश्रा हमेश्रा के लिए मोहर लगा दी है कि राश्ट्र
06:00हित से बढ़कर कोई कूटनीती नहीं होती
06:03अब फैसला आपके हाथ में, क्या आपको लगता है कि अमेरिका को अब भारत या दुनिया के किसी भी देश
06:08पर उंगली उठाने का कोई हक बशा है
06:10अपनी राए नीचे comment box में जरूर बताए, फिलहाल बस इतना ही देश और दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के
06:15लिए देखते रहिए One India है

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