00:00पिछले साल भर शताब्दी के निमित्त कारिक्रम चले और उसके समापन के अवसर पर विज्यादश्में उत्सों मनानी के लिए आज
00:10हम यहां पर इकत्री जाएं।
00:14यहां वर्ष संत शिरोमनी जिनको कहते हैं ऐसे पूज संत रविदाजी महाराच का 650 वा वर्ष चल रहा है।
00:29उसके निमित्त देश में कारक्रम चल रहे हैं संग की शाखाओं पर भी सर्वत्र रविदाजी के जीवन के कार्य और
00:38उनके जीवन की जानकारी देने वाले कारक्रम चल रहे हैं।
00:43जब अपना देश अत्याचारी विदेशी आकरमकों से पीडित था।
00:50यहां अपने स्वधर्म पर चलने वाले नागरिकों पर उनके अत्याचार हो रहे थे।
00:55सर्वत्र आतंक का वातावरेंट था।
00:58ऐसे समय में संतर अविदाज जी ने स्वधर्म निष्ठा सामाजिक समरस्ता और भक्ती का प्रचार धडल्ले से किया।
01:09अपने जीवन के उदारण से उन्होंने उस समय के समाज में और एक प्रकार से धीरज बंदाया हिम्मत बढ़ाई और
01:21उनकी गुणवत्ता को कायम रखा।
01:22जब अभी इसको भूल गए तो आपसका नाता भूल गए अपनापन भूल गए विघटित हो गए उसके कारण दुर्बल हो
01:32गए दुर्बल हो गए तो हम भैखा गए हम दरने लगे दुनिया से हम रहेंगे की नहीं रहेंगे दुर्बल व्यक्ति
01:43अपने आपको दिवारों म
01:52की बात करने वाले हम लोग समुद्रबंधी आदी बंधनों में फस गए है यजा और ऐसा दुर्बल होने
02:00के बाद मनुष्य अपने अस्तित्व को दिखाना चाहता है तो फिर वह
02:06कुछ अहंकार भी पाल लेता है हम अहंकारी भी बन गए और इन सबका
02:12का परिनाम क्या हुआ हमारी पी हमने अचन्स को त्याग दिया हमारी
02:18दुर्गती ओगए कुषिभ केस में अस्तित्वा और अपने अस्मिता को स्मरन
02:24करना इस भावनात्मक आधार को स्मरन करते हुए उसके आधार
02:29ुश्रापर संगटित और परस्पर हित कई लिए कटिवद्दी जीवन जीना यह हमको करना ही पड़ेगा
02:36कि इसी दूट्री से सव वर्षों से संग काम करता है और पिछले वर्ष उसकी शताब्दी मनाई गई कि शताब्दी
02:46के कारिक्रम हुए
02:48संग की शाखाओं का विस्तार करना संग का संपर का बढ़ाना यह लक्ष था इसी निमित्त क्योंकि भारत का स्थान
03:00एक बन रहा है विश्व में और संग के बारे में भी विश्वास बढ़ा है
03:05तो विश्व के देशों में भी भारत हिंदू और संग इन तिनों के बारे में सही जानकारी जनी की आवश्च्रक्ता
03:14ध्यान में आई इस दुरुटी से वहां के प्रबोधन का भी आयोजन किया गया