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विरोध-प्रदर्शनों की आग में आखिर क्यों जल रही दुनिया? देखें
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00:00पूरी दुनिया इस वक्त एक अजीब से हंगामे की गिरफ्त में है
00:03जनता सडकों पर है, पुलिस आक्शन में है और सरकारे सवालों के घेरे में
00:09अमेरिका से लेकर यॉरप तक, एशिया से लेकर आफरिका तक
00:12कहीं शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन है, तो कहीं महेंगाई से जनता परिशान है
00:18कहीं पेंशन को लेकर आंदोलन है, तो कहीं बधाल इंटरस्ट्रक्चर के खिलाफ
00:23पुल मिलाकर दुनिया के अलग-अलग देशों में जनता, सरकार और प्रशासन मानुबारूद के धेर पर बैठें
00:55पूरी दुनिया में आग लगी है, प्रदर्शनों का दौर चल रहा है, आन दो लनों का आक्रोश नजरा रहा है
01:07सबसे बुरा हाल फ्रांस का है, यहां विद्रोह की चिंगारियां सुलग रही है
01:13फ्रांस के प्रमुक्ष शहरों में बहुती महंगाई, शिक्षा बजट में कटौती और सरकारी नीतियों के खिलाफ भड़का जन आक्रोश बेकाबू
01:21होता जा रहा है
01:23विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने देश भर से लगभग एक हजार लोगों को हिरासत में लिया है
01:31ग्रही मंत्राले के आंगलों के अनुसार राजधानी पैरिस समेथ अलग-अलग शहरों में चार लाग से ज़्यादा लोग सड़कों पर
01:38सरकार के खिलाफ उतर आये
01:41देश भर के समवेधन शील इलाकों के सुरक्षा के लिए फ्रानस के ग्रही मंत्राले ने सत्तर हजार से ज़्यादा पुरिस
01:47कर्मियों और सुरक्षा बलों को तैनाद कर दिया
01:54अलबेनिया में बगावत के शोले जल रहे हैं धश्ट चार के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं और सत्ता को चुनौती
02:00दे रही है
02:04सर्विया में तख्ता पलड की कोशिशें की जा रही है छात्रों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खुला है और वो
02:10फुद चुनाव लड़ रही है
02:14स्पेन में महंगे रिहाइश के खिलाफ लोगों में आक्रोश है
02:20बेल्जियम, इटली, पुर्टगाल में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन चल रही है
02:26ब्राजील, मेक्सिको, अमेरिका, इक्वडोर, चिली इन तमाम देशों में क्रांती की आवाजें बुलंद हो रही है
02:38ग्लोबल प्रोटेस्ट ट्रैकर के मुताबिक पिछले बारा महिनों में 57 से ज़्यादा देशों में बड़े प्रदर्शन हो पिछले बारा महिनों
02:46में दुनिया भर में सरकार विरोधी 107 से ज़्यादा बड़े प्रदर्शन हो पिलहाल दुनिया भर में 33 प्रदर्शन जार
02:53पिछले बारा महीनों में गयर स्वतंतर देशों में 17 से ज्यादा बड़े प्रदर्शन हो प्रांस में खरीब 4 लाग प्रदर्शन
03:01कारियों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया एक हजार से ज्यादा लोग गिरफतार किये गए बेल्जियम में 50,000 लोग आंदुलनों
03:08में शामि
03:20तो क्या ये प्रदर्शन सरकारों को अपनी नीतियां वदलने पर मजबूर करेंगे या फिर दुनिया भर में बहुते असंतोश की
03:27ये सिर्फ एक जलक है या फिर इन प्रदर्शनों को पीछे कोई विदेशी ताफ्ते सकरी है
03:38शिक्षा के मुद्दे पर छात्रों और शिक्षकों से शुरू हुआ प्रदर्शन फ्रांस में बहुत जल्दी एक बड़े आंदोलन में तबदील
03:46हो गया
03:46इसका दाइरा इतना बढ़ गया कि इसने देश व्यापी रूप ले लिया सरकार की नीटियों से नाराज़गी सडकों पर खुल
03:53कर दिखाई देने लगी
03:54लाखों की तादाद में लोग सरकार और सिस्टम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं
04:00आने वाले चुनाओं में मेकरों सरकार के लिए ये बड़ी मुसीबत बन सकती है
04:30दुनिया की फैशन कैपिटल में क्यूं हंगामा बर्पा है
04:36सबसे विखसित देशों में से एक फ्रांस क्यूं सूलग रहा है
04:46फ्रांस में जनता सडकों पर क्यूं है
04:52किन मुद्दों पर फ्रांस में आंदोलन और प्रदर्शन हो रहे है
05:00सबकों पर जनता, एक्शन में पुलिस, सवालों में मैक्रों सरकार
05:05फ्रांस आंदोलन की आग में जूलच रहा है
05:08इस पूरे आंदोलन की शुरुवात हुई 17 सितंबर को
05:11जब परिस के एक कस्बे, क्रटेल में, शिक्षकों ने स्टाफ और संसाधनों की कमी को आधार बना कर प्रदर्शन की
05:19शुरुवात की
05:22धीरे धीरे छातर भी इसमें जोलते चले गए
05:25उनकी शिकायतें ग्लास में जरूरत से ज़्यादा बच्चे, कम टीचर, स्कूलों में नरसों और सोशल स्टाफ की कमी और तूटता
05:33इंफ्रास्ट्रक्चर
05:36धीरे धीरे टीचरों और छातरों से शुरू हुआ ये आंदोलन पूरे देश में जंगल की आग की तरह फैल गया
05:43लोग बढ़ें तो प्रदर्शन का दाइरा भी पढ़ बहुती महगाई और सरकारी सेवाओं की बधाली के खिलाब लोगों ने सडकों
05:51पर उतरना शुरू कर दिया
05:53देश भर में पांच लाग से ज़ादा लोग विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए कई जगों पर हिंसा हुई लूट पाठ
06:00हुई पुलिस के साथ जड़प हुई और सार्वजनिक इमारतों में आग लगाई गया
06:05करीब अठारा सो लोगों को गिरफतार किया गया
06:10इस विरोध ने राश्टपती इमैनुवल मैकरों की सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है
06:152027 में राश्टपती चुनाब होने है और उससे पहले सरकार के सामने आर्थिक और राजनितिक दोनों मोर्चों पर बड़ी चुनावती
06:23खड़ी हो गई है
06:26लेकिन फ्रांस जैसे विक्सित देश में आखिर जनता इतनी नाराज क्यों है
06:30इसकी एक बड़ी वज़े है देश का आर्थिक संकट
06:34फ्रांस का खर्च ज़्यादा है और टैक्स के जर्ये कमाई कम
06:38नागरिकों के लिए पेंशन, स्वास सेवाएं और शिक्षा तो है
06:42लेकिन इन सुविधाओं पर खर्च लगतार सरकार की कमाई से ज़्यादा हो रहा है
06:48आर्थिक सहयोग और विकास संगठन जानी OECD के मताबिक
06:532025 में फ्रांस का घाटा GDP का 5.01 पीसदी था
06:58जबकि सरकारी खर्च GDP के 11.05 प्रतिशत तक पहुँच गया था
07:04यानि सरकार का खर्च ज्यादा है कमाई कम है इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकार कर्ज ले रही
07:11है
07:11कर्ज पर ब्याद चुकाने के लिए जरूरी सेवाओं पर खर्च कम करना पड़ रहा है
07:17फ्रांस का संकट सिर्फ अर्थ दिवस्था तक सीमित नहीं है देश की राजनीती भी गहरे बटवारे का सामना कर रही
07:23है
07:24दक्षल पंथी दल इमिग्रेशन पर सक्ति चाहता है जबकि वाम पंथी दल बेतर सार्वजनिक सेवाओं
07:30सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक असमानता घटाने पर जोड देता है
07:35उदर राश्पती मैकरों के पास संसद में बहुमत नहीं है इसलिए बजट पारित करना और आर्थिक सुधार लागू करना मुश्किल
07:43हो रहा है
07:45राजनितिक दल इस बात पर सहमत नहीं है कि देश की आर्थिक समस्याओं का बोज किस पर डाला जाए और
07:51किन सुविधाओं में कटाउती की जाए
07:54सरकार के सामने विकल्ब भी आसान नहीं है
07:58टैक्स बढ़ाती है तो जंता पर बोज बढ़ेगा
08:00खर्च घटाती है तो शिक्षा स्वास्त और दूसरी सेवाएं प्रभावित हो सकती है
08:05पेंशन में बदलाब करती है तो लोगों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है
08:09और अगर लगातार कर्ज लेती है तो ब्याद चुकाने की लागत बाढ़ सकती है
08:16दो हजार सटाइस के राश्टपती चुनाफ से पहले मैक्रों सरकार को जन्ता की मांगो बहते कर्ज और संसद में राजनितिक
08:24गतिरोध के बीच रास्ता निकालना होगा
08:29अलबेनिया में ब्रश्टा चार के खिलाफ विद्रो है तो स्पेन में आवास संकट के खिलाफ लोगों में गुसा है
08:36प्रदर्शन लगातार बढ़ते जा रहे हैं और समाधान की कोई सूरत ही नज़र नहीं आ रहे
08:44यॉर्प के एक छोटे से देश अलबेनिया में इन दिनों सड़कों पर जबरदस्ट गुसा दिखाई दे रहा है
08:54सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया है
08:59प्रदार मंत्री के इस तीफे की मांग तेज हो गई है
09:06लेकिन सवाल है आखिर ऐसा क्यूं है? मुद्दे क्या है? मांगे क्या है? परेशानी क्या है?
09:15मुद्दा नमबर एक धश्टा चार
09:19मुद्दा नमबर दो शिक्षा
09:22मुद्दा नमबर तीन भविश्र की चिंता
09:26मुद्दा नमबर चार बहुती महंगाई
09:30अल्बेनिया के इस आंदोलन की कहानी सिर्फ सक्ता विरोध की कहानी नहीं है
09:34इसकी शुरुवात हुई थी 31 मई 2026 को पर्यावरण बचाने की मांग से
09:39एक लगजरी परिटन परियोजना के विरोध से
09:42ये वो इलाका था जहां फ्लेमिंगो पक्षी पाय जाते थे
09:46विरोध करने वालों का आरोब था कि बड़े प्रोजेक्ट के लिए प्रकृति को खत्रे में डाला जा रहा है
09:51इस विरोध को फ्लेमिंगो आंदोलन का नाम मिला
09:54कई महीनों तक विरोध पदर्शन होते रहे
09:57लेकिन अक्टूबर आते आते आंदोलन का स्वरूप बदलने लगा
10:0013 अक्टूबर को छात्र बड़ी संख्या में सटकों पर उतर आए
10:03इसके बाद शिक्षा, घष्टाचार और सरकार की जवाब देही जैसे मुद्टगी आंदोलन के केंद्र में आ गए
10:15आज आंदोलन की मांगे कई स्तरों पर हैं
10:18जातर चाहते हैं कि विश्र विद्यालेयों की फीस कम हो
10:21हॉस्टल और शैक्षनिक सुविधाओं में सुधार किया जाए
10:24शिक्षा विवस्था में घष्टाचार की जांच हो
10:27रोजगार के बेहतर अफसर पैदा किये जाएं
10:30लेकिन राजनितिक स्तर पर सबसे बड़ी मांग प्रधान मंतरी A.D. रामा के स्तीफे की है
10:41अलबेनिया के प्रधान मंतरी A.D. रामा दोहजार तेरा से सत्ता में है
10:452025 के चुनाव में उनकी सोशलिस्ट पार्टी ने लगतार चौथी बार सरकार बनाने का जनादेश हासल किया
10:53लेकिन अब प्रधर्शन कारी उनके स्तीफे की मांग कर रहे है
10:56दिल्चस्प बात ये है कि इस आंदूलन में प्रधर्शन कारीयों का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है
11:01जो सत्ता रूर पार्टी के साथ साथ विपक्ष को भी नहीं चाहता है
11:11अलबेनिया यूरोपिय यूनियन में शामिल होना चाहता है
11:13सरकार में 2030 तक सदस्सिता हासिल करने की महत्वकांख्षा जताई है
11:19ऐसे में भष्टाचार के आरोप, हिंस्तक प्रदर्शन और राजनेतिक अस्थिरता देश की छवी पर गंभीर असर डाल सकते हैं
11:32अब ज़रा स्पेन का हाल देखिए
11:34एक सस्ते घर की चाहत में स्पेन में जनता को बगावत करने पर मजबूर कर दिया है
11:39साफ साफ कहें तो स्पेन में इस वक्त आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा है
11:44हाउसिंग क्राइसिस यानि आवास का संकर
11:52क्यूं जल रहा है स्पेन किराय लगतार बढ़ रहे हैं
11:55आम लोगों की कमाई उतनी है नहीं
11:57जितना मकान का किराया हो गया है
11:59अपना घर लेना मुश्किल है
12:00घर का किराया चुकाने के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खरश करना पड़ता है
12:05प्रदर्शन कारियों की मांग है कि किराए पर नियंतरन हो
12:08किराएदारों को घरों से ना निकाला जाए
12:10और किफायती मकान उपलब्ध कराए जाए
12:13इस आंदोलन की वज़े बनी 87 साल की मारी करमिन अबासकार
12:17वो मैडरिड में खरीब 70 साल से अपने घर में रह रही थी
12:21जब उनकी इमारत निवेश से जुड़ी एक कंपनी के हाथ में आई
12:24तो किराए में भारी बरहोतरी का विवाद सामने आया
12:27किराए में खरीब 230 फीसदी बरहोतरी की मांग के बाद
12:31वो अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए एक बुजर्ग महिला को
12:35उमर के इस पड़ाफ पर अपना घर छोड़ना पड़ा तो इस घटना ने
12:38पूरे देश में घुस्सा पैदा कर दिया सितंबर 2026 के आखिर में
12:42इस घटना के बाद विरोध बहने लगा तीन अक्टूबर को मैडरेट वलेंसिया और दूसरे
12:48शहरों में बड़े प्रदर्शन हो स्पेन में आवास का संकत अभी खतम नहीं हुआ है देश की दो
13:072026 को समय से पहले आम चुनाव करने का एलान किया चुनाव में भी घरों का किराया मकानों की उपलबता
13:14और किराएदारों की सुरक्षा एहम मुद्दे रहने वाले हैं
13:21सर्विया में च्छात्रों का आंदोलन सप्ता के लिए बड़ी चुनोती बन चुका है नवंबर
13:262024 में रेल्वे स्टेशन की छट गिरने से 16 लोगों की मौत हुई थी इसके बाद भरश्टाचार और जवाब देही
13:33को लेकर विरोध शुरू हुआ था दीरे दीरे च्छात्र आंदोलन में आम नागरिक जुरते गए और सरकार के खिलाफ आवाज
13:41बुलंद होती गई
13:43अब यही च्छात्र आंदोलन चुनावी मैदान में भी उतर चुका है तो क्या सडकू पर उठी च्छात्रों की आवाज सक्ता
13:50में बदलाव वहाँ पर ला पाएगी
14:05यह तस्वीरे हैं सर्विया की जहां आप च्छात्रों ने ठाना है कि वही देश को चलाएंगे
14:10सर्विया के च्छात्रों ने सक्ता को खुली चुनावती दी है कि सिंगासन खाली करो जनता आती है
14:15यह च्छात्र अब चुनाव में उतरने जा रहे हैं और इसलिए सर्विया की सड़कें आन्दोलन की आवाजों से गूझ रही
14:22है
14:38यह तस्वीरें सर्विया की राजधानी बेलग्रेड की हैं
14:41जहां 22 अक्टूबर को स्लाविया स्कॉाइर पर च्छात्रों के समर्थन में जन सेलाग उमर था
14:46हाथों में सर्विया के जंडे, आस्मान में जल्ती मशालें, मुबाईल की रोशनी और सरकार के खिलाफ उठती आवाजें
14:53हजारों की गिर्ण में चामिल लोग च्छात्रों के समर्थन में अपनी ताकत दिखा रहे हैं
15:08सर्विया में रविवार को चुनाप के और च्छात्रों के ये आंदोलन राश्पती इलेक्जैंडर वूसिक के लिए बड़ी चुनापी है
15:14माना जा रहा है कि इस चुनाप में बड़ा उलट फिर हो सकता है
15:17सर्विया के आंदोलन कारी छात्रों ने रविवार के संसदी चुनाप के लिए स्टूडेंट्स विन नाम से 250 उम्मीदवारों की सूची
15:24उतारी है
15:25इस सूची में प्रोफेसर, कलाकार, किसान और एक लोक्पीर रैपर तक शामिल है
15:30गुरवार की रैली में चात्रों मीदवार संविधान की तत्यां लेकर मंच पर पहुँचे
15:34संदेश साफ था, आंदोलन अब सिर्व सड़कों तक सीमित नहीं, बलकि सट्का को चुनाप के ज़र्ये चुनाथी देगा
15:46इस आंदोलन की शुरुवात नवंबर दोहजार चौबीस में हुई थी
15:49सर्विया के नोवी साध रेलवे स्टेशन पर छत्री के धांचे के डहने से 16 लोगों की मौत हुई थी
15:56इस हाथ से के बाद सरकार पर धष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगे और लोग सड़कों परादे
16:01देश व्यापी प्रदर्शन शुरू हो गया, धीरे धीरे चात्रों का आंदोलन देश व्यापी बन विया
16:07इसमें आम नागरिक भी शामिल होने लगी, अब यही आंदोलन चुनावी मुकाबले में बदल रहा है
16:18आपको यॉरप के दूसरे देशों का भी हाल दिखाते हैं, इटली, बेल्जिम, पुर्टगाल इन सभी देशों में लगातार प्रदर्शन चल
16:25रहे हैं
16:25हिंसक जड़प आम है, लूट पार्ट की घटनाएं बढ़ रही है, इटली में जीवन जीने का जो औसत कॉस्ट है,
16:36यानि कॉस्ट अफ लिविंग, उसके बढ़ने के कारण लोग सड़कों पर है
16:40पुर्टगाल में महंगाई की मार से लोग परिशान है
16:58ये तस्वीरें हैं इटली की, जहां महंगाई, महंगे इंधन और सरकार की मीथियों को लेकर लोगों का घुसा अप सड़कों
17:04पर दिखाई दे रहा है
17:15रोम से मिलान तक, ट्योरिन से बलोनिया तक, एटली की कई शहरों में लोग सरकार के खिलाफ परदर्शन कर रहे
17:21हैं
17:21लोगों की नाराज़की की बड़ी वज़े बड़ती महंगाई और तेल की कीमते हैं
17:25इसके साथ ही सरकार की सेयने खर्च बढ़ाने की नीती का भी विरोध हो रहा है
17:30एटली की राजधानी रोम में परदर्शन के दौरान हालात तनाफून हो गए हैं
17:34यहाँ पिछले कई दिनों से परदर्शन कारियों और पुलिस की बीच टकराफ की स्थिती बन रही है
17:39प्रदर्शन कारी आर पार के मूड में नजर आ रहे हैं और सरकार इसके लिए विपक्ष को जिम्मेदार बता रही
17:45है
17:54मिलान में भी बड़ी संख्यां में लोग सबकों पर उकरे हैं
17:56हाथों में मशाले लेकर प्रदर्शन कारी हर दिन मार्च निकाल रहे हैं
18:01और सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगा रहे हैं
18:11चोरिन में विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शन कारियों और पुलिस की बीच जबरदस धत्का मुक्की हुई
18:17एक तरफ हजारों के संख्या में लोग थे और दूसरी योड़ पुलिस जम कर पथर बाजी भी हुई
18:22बुलोनिया में भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस और लोगों के बीच धरन थी
18:26इटली के लोग कई सालों से मांग कर रहे थे कि उनकी रोज मर्रा की मुश्किले कम हो
18:30लेकिन जब सरकार से नाराज़की बढ़ गई तो आज लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए
18:53ब्रसल्स की सड़कों की हालत देखिए यहां चातर और पुलिस सामने सामने हैं
18:57चनिवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ जोरदार जड़ाप हुई और देखते ही देखते हालात बेखाब होगी
19:15पुलिस वालों ने प्रदर्शन कारियों पर जम कर प्रहार किया
19:18बेल्जियम में प्रदर्शन अब सिर्फ नारे बाजी तक्सीमित नहीं रहा
19:21यहां के चातर अब सक्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं
19:38ब्रसिल्स का सेंट्रल रेलवे स्टेशन हो या फिर सेंट्रल पार्क
19:41अजारों की संख्या में चातर धर्णा देकर बैठे हैं
19:43जैसे ही चातर सेंट्रल बिल्डिंग की और आगे बाते हैं
19:46पुलिस से जबर्दस सामना होता है
19:48इसलिए दो दिनों में विद्रोह की आग भयंकर हो गई है
19:51वेल्जियम में चातर बेरोजगारी, बारती महँगाई और भष्ट शिक्षा विवस्था से परिशान है
20:04पुर्तगाल में भी कई शहरों में लोग सड़कों पर हैं
20:07और यहां मांग कुछ और है
20:08यहां के लोग सस्ते घर और सम्मान के साथ रहने की अधिकार किमांग कर रहे हैं
20:26लिस्बन में प्रदर्शन कारियों ने शहरों के बीच कई तंबू लगा दिये हैं
20:30पुलिस ने पहले तो इन तंबू को हटा दिया लेकिन उसके बाद फिर ये भीड जमा हो गई
20:34दरसल तंबू के साथ प्रदर्शन इसलिए हो रहा है क्योंकि यहां के लोग बहुते किराई से सबसे ज़्यादा परिशान है
20:40और इस घीर्ड में सबसे ज़्यादा वो लोग शामिल हैं जिनके पास रहने के लिए अपना घर नहीं है
20:53पुर्दगाल में महंगाई, खाने पीने की चीजों और इंधन की बढ़ती कीमतों ने लोगों की परिशानी बढ़ा दी है
20:58पढ़ाई का खर्च और सार्वजनिक सेवाओं की बढ़ाली भी लोगों के घुस्से की वज़े बन रही है
21:03प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस के साथ तक्राव में लगभग 27 लोग खायल हुए है
21:13दुनिया में जब भी कोई बड़ा आंदोलन होता है तो दो सवाल उठते हैं
21:17पहला सवाल क्या विदेशी ताकतें इसके पीछे हैं और दूसरा सवाल ये कि इस आंदोलन की कीमत कितनी है
21:27सडकें बंद होती है कारोबार ठप होता है सारजनिक परिवहन प्रभावित होता है
21:31पुलिस की तैनाती से लेकर सरकारी संपत्ती की मरंबत तक खर्च की एक लंबी फेहरिस्थ बंती
21:36लेकिन इसी कहानी का एक दूसरा पहलू भी होता है क्योंकि अगर कोई आंदोलन भ्रश्ट सरकार को अपनी नीती बदलने
21:44पर मजबूर कर दे
21:45तो उसका आर्थिक फाइदा लाखुन लोगों तक पहुंच सकता है
22:12तुनिया के कई देशों की जंता सडकों पर है
22:14कहिं छातर सरकार के खिलाफ मोचा खोले हुए है
22:17कहीं भश्टाचार के खिलाफ आंदोलन हो रहा है
22:20तो कहीं सरकार की नीतियों के खिलाफ गुस्सा सडकों पर दिखाई दे रहा है
22:26फ्रांस से सर्विया तक भारत से इंडोनेशिया तक इन आंदोलनों के मुद्दे अलग-अलग है
22:31लेकिन एक सवाल बार-बार उठ रहा है
22:34क्या ये सिर्फ जनता के घुस्से का इजहार है
22:37या इनके पीछे कोई अंतराश्ट्री नेटवर्ग ही काम कर रहा है
22:42ये प्रायास बाहर से फंडिट है
22:45मैं तो आरोप लगा रहा हूँ
22:47ये बाहर से फंडिट है
22:48ये बाहर से मोटिवेटिट है
22:52और ये बाहर के देश खास करके अब अमेरिका को देख लो
22:56बड़ा नाखोश है इंडिया से
23:18इस बीच फॉक्स न्यूस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया
23:21कि फ्रांस और दूसरे देशों में प्रदर्शनों से जुड़े
23:24101 संगठनों का नेटवर्क सकरिये है
23:26जो आंदोलन आयोजित करने, समर्थन देने
23:29या उनका प्रचार करने में भूमी का निभा रहा है
23:32रिपोर्ट में वामपंथी समुहों, ट्रेड यूनियनों
23:35और अंतर राष्ट्री संगठनों के संपर्कों का उल्लेक है
23:41भारत में मुख्य चुनावायुक्त
23:43ज्यानेश कुमार के स्तीफे की मांग से जुड़े प्रदर्शनों का भी इस परताल में जिक्र किया गया है
23:49तो क्या इन संपर्कों का मतलब विदेशी साजश है?
23:52क्या किसी आंदोलन को समर्थन देना, सोशल मीडिया पर उसका प्रचार करना गलत है?
23:56फॉक्स न्यूस की ये रिपोर्ड बहस और जाज का विशे हो सकती है
24:04भी किसी तरह सर्विया में भी छात्रों के आंदोलन के बीच राश्पती एलिक्जैंडर गुसिक ने
24:09आंदोलन को विदेशी प्रभाव से जोड़ने के आरोप लगाए है
24:12हाला कि इन आरोपों की पुष्टी नहीं हुई है
24:16उदर नेपाल की एक अलग कहानी है
24:18जहां जैन्जी के हाथों में सक्ता तो आ गई
24:20लेकिन अब उनको लोगों की उमीदों पर खरा उतरना है
24:23नई सरकार के सामने भष्टाचार परकारवाई, रोजगार, सुशासन और प्रदर्शन के दोरान हुई मौतों की जवाब देही जैसी बड़ी चुनोतिया
24:32है
24:34यानि आंदोलन से सक्ता बदल सकती है
24:36लेकिन जन्ता की उमीदों को पूरा करना एक अलग अगनी पर इक्षा है
24:40लेकिन अब बात प्रदर्शनों और आनबोलनों से हो रहें नुकसान की
24:44विरोध प्रदर्शन और सामाजिक अशान्ती केवल राजमीतिक घटनाएं नहीं
24:48इनका असर देश की अर्थ व्यवस्था, शेर बाजार, कारोबार, रोजगार और आम लोगों की रोजाना की कमाई पर भी पड़ता
24:56है
25:00आईमेफ की एक रिपोर्ड के मुताबिक सामाजिक अशान्ती की घटनाओं के छे महीने बाद
25:05जीडीपी में एक प्रतिशत की गिरावट रिखी गे
25:07नेपाल में राजमीतिक हरतालों से अर्थ व्यवस्था को जीडीपी के एक दशमलब चार प्रतिशत के बराबर नुकसान हुआ
25:15फ्रांस और स्पेन में नुकसान जीडीपी के लगभक 0.17% और 0.1% के बराबर बताया गया
25:24भारत में 2016 के जाट आरक्षन आंदोलन में स्थानी आर्थिक गतिविधियों को लगभक 34,000 करोड का नुकसान होने का
25:32अनुमान दिया गया
25:322020 के किसान आंदोलन के दौरान पंजाब, हर्याना, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में रोजाना 3,000 से 35,000
25:42करोड के नुकसान का अनुमान भी सामने आया
25:45CTI की जो Economic Survey है, उसके साब से अभी तक पूरे अक्टूबर के मैने में दिल्ली में प्रोटेस्ट के
25:52कारण लगभक 3,000 करोड रुपए के विपार का नुकसान हो चुका है
25:56अगर अलग-अलग सेक्टर वाईज हम देखें तो 1800 करोड रुपए का नुकसान रिटेल सेक्टर है जो कनोट प्लेस, खान
26:03मार्केट, जंगपर, पालिकवजा, लाजपतनगर, जो लूटियन जोन पूरा नई दिल्ली का इलाका है
26:08तो रिटेल मार्केटों में जो सेल 70-80 परचेंट गिर गई थी, उसके करण 1800 करोड रुपए का नुकसान हो
26:14है
26:16बड़े सामाजिक संगर्शों के बाद शेर बाजार के रिटर्न में औसतन एक दशमलव चार प्रतिशत अंग की गिरावट दर्ज की
26:23गई
26:24राजनीतिक अनिश्चित्ता बढ़ने पर निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है और बाजार में उतार चड़ाव बढ़ सकता है
26:30खुद्रा कारोबार, परेटन, व्यापार और माल धुलाई यासे ख्शेत्र विशेश रूप से प्रभावित होते हैं
26:38कि 20,000 दुकाने मतलब डाई किलिमेट के परिदी में 20,000 दुकाने मतलब जीएस्टी करता रोस जाएका ना वो
26:46दिन जीएस्टी करता हो गया हमको जो नुकसानों वह अलग हैं
26:50लेबर को हमें पैसे देने पढ़ेंगे क्योंकि कोई सरकारी चुटी नहीं हो वैसे भी चुटी चुटी चुटी सरकारी केसे देने
26:55पड़ती commenचा ही
27:10सबसे अधक नॉटर प्लेस को नुकसाना होता जब हावे प्रदर्शन होता
27:15दिल्ली के खान मार्केट के व्यापारियों के मताबिक बाजार में व्यबधान के दौरान हर दुकान को रोजाना एक से डेल
27:22लाक रुपए तक का नुकसान का अनुमान लगाया गया
27:24सावजनिक संपत्यों को नुकसान और परिवहन बंद होने से रेलवे और राज मालगों की आये पर भी असर पड़ता है
27:31सबसे ज़्यादा मार पड़ी दिहाली मजदूरों पर रहडी पड़ी वालों पर छोटे दुकानदारों और रोज काम पर जाने वाले लोगों
27:39पर
27:39हमारे दो दो पीरेड निकल गए फेस्टिवल आदा अल्मस्ट खतम है समय अब इसमें कम से कम नहीं तो मैं
27:48अगर खान मार्किट के बात करूं तो आप यह समझे
28:04से राजस्तों कम आ रहा है आपका रेविनियू कम हमें आ रहा है अब उसका जवाब देना पड़ेगा जो पिछले
28:09दिनों प्रदर्शन हुए हैं इनको लेकर के दिल्ली के अंदर वहपार आलमोस मनलब इस समय खतम की कगार पे हैं
28:20सच्छे आंदोरन की किमत सिर्फ सरकार या प्रदर्शन कारियों को ही बही चुकानी पड़ती है इसकी आर्थिक मार आम जनता
28:26तक प्रदर्शन हो रहे हैं भारत में भी हाल ही में दिल्ली और दूसरे शहरों में SIR को लेकर प्रदर्शन
28:37हुए
28:37लेकिन विदेशों में होने वाले आंदोलन और भारत की आंदोलन में क्या फर्क है ये भी हम आपको बताते हैं
29:00देश कोई भी हो लेकिन आंदोलनों को मकसद एक ही होता है अपनी नाराजगी सरकार तक पहुँचाना
29:09देश कोई भी हो इन प्रदर्शनों के तरीके भी लगभग एक जैसे ही होते हैं
29:13बस अलग होता है तो इनसे जुड़े قानून और अलग-अलग देशों में इनको देखने का नज़रिया
29:20दुनिया के कई देशों में अलग-अलग मुद्दों पर प्रदर्शन चल रहे हैं
29:27भारत में कुछ दिन पहले दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के स्तीफे को लेकर चंता सडकों पर आई
29:33तो अमेरिका, योरप और मिडल इस्ट में भी तमाम तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं
29:38लेकिन इनमें एक बड़ा सवाल है
29:40भारत और विदेशों के आंदोलनों में क्या फर्द है?
29:43क्या हर देश में विरोध की सीमाई अलग-अलग है?
29:45योरप में सडक जाम करना क्या उतना आसान है जितना भारत में है?
29:50क्या योरप में भी कोई जंतर मंतर होता है?
29:52क्या हर देश में संसत के बाहर प्रदर्शन किया जा सकता है?
29:56विदेश और भारत में पुलिसिया कारवाई में क्या अंतर है?
30:01विदेशों और भारत के प्रदर्शनों में फर्क सिर्फ मुद्दों का नहीं है
30:04असली फर्क है प्रदर्शन की कानूनी इजाज़त, पुलिस की ताकत, विरोध करने के तै तरीके और सरकार पर दबाव बनाने
30:13के रास्तों में
30:17भारत में प्रदर्शन का अधिकार है लेकिन जगे और तरीके पर पाबंदियां भी हैं
30:22समविधान के अनुछेद 19.1.A और 19.1.B में बोलने और शांती पूर्वक यानि बिना हतियार इखटा होने
30:31का अधिकार है
30:31लेकिन प्रशासन जगे रास्ते और कानून व्यवस्था के आधार पर शर्ते लगा सकता है
30:37फ्रांस में सड़क पर मार्च से पहले प्रशासन को 3-15 दिन पहले सूचना देना जरूरी होता है
30:44पैरिस में और अधिक समय सीमा वाले नियम लागो हो सकते हैं
30:48प्रशासन सार्वजनिक व्यवस्था के खतरे पर प्रदर्शन रोग भी सकता है
30:53बिटेन में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है
30:56लेकिन बाधा डालने के कुछ तरीखों पर कड़े कानून है
30:59पुलिस मार्च के रास्ते और प्रदर्शन की शर्तें तै कर सकती है
31:03सार्वजनिक परिवहन या जरूरी धांचे को गंभीर रूप से बाधित करना अपराध हो सकता है
31:09अमेरिका में समविधान में विरोध और अभिव्यक्ती की मजबूत सुरक्षा है
31:13पर हर जगे मनमानी की छूट नहीं
31:16प्रथम संशोधन अभिव्यक्ती और शांति पून सभा की सुरक्षा करता है
31:20लेकिन समय जगे और तरीके से जुड़े नियम लागो हो सकते हैं
31:25सरकारी इमार्तों पार्कों और सडकों के नियम अलग-अलग हो सकते हैं
31:30यानि वहां भी हर जगे बिना शर्त प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं है
31:33यानि अलग-अलग देशों में प्रदर्शन की इजासत जरूर है
31:37लेकिन आम नागरिकों को परिशानी हो या संपत्ति को नुकसान पहुँचे
31:41ये कहीं भी मनजूर नहीं है