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خیرپور میرس — سندھ کا تاریخی، ثقافتی اور قدرتی حسن سے مالا مال خطہ

خیرپور میرس سندھ کا ایک ایسا تاریخی خطہ ہے جہاں قدیم تہذیب، شاندار تعمیرات، قدرتی حسن اور روایتی ذائقے ایک ساتھ نظر آتے ہیں۔

اس ویڈیو میں جانیے فیض محل کی شاندار تاریخ، چٹان پر قائم تاریخی کوٹ ڈیجی قلعہ، قدرتی حسن اور جنگلی حیات سے بھرپور مہرانو ریزرو، جبکہ دنیا بھر میں اپنی پہچان رکھنے والی اعلیٰ معیار کی اسیل کھجوروں کے بارے میں۔

ساتھ ہی شاہ عبداللطیف یونیورسٹی کے تعلیمی کردار اور خیرپور کی مقامی سوغات موسانی ماوا کے منفرد ذائقے کا بھی ذکر کیا گیا ہے۔

اگر آپ کو سندھ کی تاریخ، ثقافت، سیاحت، تاریخی مقامات اور پاکستان کے پوشیدہ خزانوں میں دلچسپی ہے تو ویڈیو کو ضرور دیکھیں، لائک کریں اور Apna TV New York کو سبسکرائب کریں۔
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Transcript
00:09तो चलिए आज के इस दिल्चस्प जाइजे का आगाज करते हैं
00:13हम सिंद के एक इंतहाई रोशन और हैरत अंगेज जिला
00:16खैरपूर के कसीरल जहती खजानों पर रोशनी डालेंगे
00:19ये एक ऐसी जगा है जो तारीख के औराक, सकाफत और आला मेयारे जिंदगी का एक बेहतरीन मजमुआ पेश करती
00:26है
00:26जरा तसवर करें एक ऐसी जगा जहां अठारवी सदी के शाही महलात भी हूँ
00:32मीठे और लजीज हलवे के दो सो से जाइट स्टॉल्स भी हूँ
00:35और जहां खुजूर के लाखों दरख लहला आ रहे हूँ
00:38ये कोई खयाली दुनिया नहीं बलकि एक ही जिले की कहानी है
00:41जो मतनवे, तारीखी, जराई और सकाफती रंगों से भरा हुआ है
00:46आज के सफर में हम जिन एहम पहलों का जाइजा लेंगे
00:49उन में शामिल हैं तालपूर खांदान के अजीम महलात, कोट टीजी और महरानो रिजर्फ, आलमी शोहरत याफ़ता असील खजूर का
00:57मरकस, रिवायती मुसानी हलवा और खैरपूर का तालीमी मुस्तपिल
01:01तो सबसे पहले बात करते हैं तालपूर खांदान के महलात की, जो दरसल सिंद का एक शांदार शाही विर्सा हैं
01:08यहां जो बात वाकई तवज्ज तलब है, वो इस अलाके की तीजी से बढ़ती हुई तारीखी तामीरात हैं
01:141797 में कोट तीजी की ले की तामीर से लेकर फोरण बाद फैज महल का बनना और फिर 1955 में
01:21इस रियासत का बाकाइदा पाकिस्तान में शामिल होना
01:24यह सब एक इंतहाई दिल्चस्प और टेज रफ़तार सफर रहा है
01:28मिसाल के तौर पर फैज महल को यह ले लीजे
01:311798 में बनने वाला ये महल उस वक्त तालपूर ताज का सबसे चमकता हीरा समझा जाता था
01:36उसकी 16 इंतजार गाहें और शीशे का वो आला तरीन काम जिसके बाइस इसे शीश महल भी कहा जाता है
01:43ये उस दोर की बेपना शाही दौलत और फनकाराना महारत की जीती जागती तस्वीर है
01:49महलात की इन अजीमों शान दीवारों से निकल कर अब हम कोट डीजी और महरानों रिजर्व की तरफ परते हैं
01:55जो अपनी बेहतरीन दिफाई हिकमत अमली और कुद्रती पनागाहों के लिए मशूर है
01:59अब यहां एक कमाल का तजाद देखिए
02:02एक तरफ तो फैज महल की इंतिहाई नाजोग, फनकाराना और शाही ऐशो इश्रत है
02:07और दूसरी तरफ कोट डीजी केले का मजबूत दिफा
02:10तीस फुट उंची दिवारे और चूना पथर की पहाड़ी पर पक्की इंटों से बनी ये अजीम इमारत
02:16जो खास तोर पर इसलिए बनाई गई थी ताकि दुश्मन की भारी तोपों का डट कर मुकाबला किया जा सके
02:22और किले की सक्त फिजा के बिलकुल ही करीब महरानो रिजर्व वाकिया है
02:26खुश्क तारीही अमारत के बिलकुल बाराक्स एक नहायत सरसब्स और पुरसुकून माहुलियाती पनागा है
02:32यहां शिकार पर मुकमल पाबंदी है जिसकी वज़ा से नायाब काले हिरन और पाड़ा हिरन जैसे जानवर यहां खुलियाम घुमते
02:38हैं
02:39जीलों पर सेकड़ों बथों का मनजर तो वाकि देखने से तालुक रखता है
02:43तारीख के इन औराक से आगे बढ़ते हुए अब हम जिक्र करते हैं खैरपूर की मईश्चत के सबसे बड़े महर्रक
02:49का यानि असील खजूर का आलमी मरकज
02:53जरा इस अदद पर गोर करें
02:55दो सौ जी हाँ खैरपूर में खुजूर की दो सौ से जाइद अखसाम पैदा होती है
03:00चार हजार साल पुरानी काश्ट की तारीख के साथ ये इलाका आलमी जराई सतय पर एक बहुत बड़ा नाम बन
03:06चुका है
03:07ये बलकुल एक जराई दियो की हैसियत रखता है
03:09इन सब में जो किसम सबसे ज़्यादा चमकती है वो है असील खुजूर
03:14उसका सुनहरी अंबरी रंग, इंतिहाई नर्मगूदा और कैरमेल और शेह जैसी मिठास उसे दुनिया भर में मशूर बनाती है
03:22दर्याई सिंद की मादनियाद से भरपूर मिठी और शदीद गर्मिया
03:26इन दोनों का मिलाप इन बेहद मीठे फलों के लिए बिलकुल आदर्श महौल फराहम करता है
03:31और मज़े की बात ये है कि इन कदीम फलों को अब बिलकुल जदी तरीकों से इस्तमाल किया जा रहा
03:36है
03:36खजूर का पेस्ट एनरजी बार्स में डलता है, इसका सिरफ वीगन मिठास के तोज़ पर इस्तमाल होता है
03:41यहां तक कि इसका पाउडर स्मूदीज में भी शामल किया जाता है
03:44यह देखना वाकई शांदार है कि कैसी हिवजाने सिहत की असूलों पर तैयार होने वाली ये रिवायती पैदावार
03:50आज 30 से जाइद ममाले की फूड इंडस्ट्री की ज़रूरियात पूरी कर रही है
03:54खजूरों की इस आलमी मंडी से वापस आते हैं मकामी सता पर
03:58जहां हम टंडो मस्ती के मशहूर मौसानी हलवे का जिकर करेंगे
04:01एक मकामी शक्स के नाम से मनसूब ये हलवा अजीब बात है कि आज एक पूरी की पूरी मार्केट बन
04:07चुका है
04:08एक आम सी शुरुआत और आज वहां 150 से लेकर 200 तक मुखतलिफ स्टॉल्स मौजूद है
04:13एक इलाकाई मीठे का इस तरह एक नई मकामी इंडस्ट्री को जनम देना किसी कमाल से कम नहीं है
04:20और उसका जाइका इतना खास क्यों है? क्योंकि इसकी बनने का तरीका आज भी बिलकुल असली और देसी है
04:26खालिस भैस के दूद को लकड़ी की खुली आग पर उबाला जाता है
04:30फिर उसे फाड़ कर चीनी के साथ पूरे दो घंटे तक मुसलसल पकाया जाता है
04:34यह जो मेहन तलब काम है यही इसे बनावटी मिठाईयों से अलग और इंतहाई लजीज बनाता है
04:40खैरपूर की इस जानदार जाइजे में यह समझना भी उतना ही जरूरी है कि यह जिला तालीम के जरीए अपना
04:45मुस्तक्बल कैसे समार रहा है
04:47बालाई सिंथ में शाह अब्दुल्लतीफ युनिवरसिटी वाहिद युनिवरसिटी है जो 302 एकड के वसी रखबे पर पहली हुई है
04:54और इसमें 29 मुख्तलिफ शोबे काइम है आसारी कदीमा के मकामाद और सरसब्स मनाजर के दर्मियान ये इदारा मकामी आबादी
05:02के लिए एक मजबूत तालीमी बुनियात का काम कर रहा है
05:0413,000 से जाइद तुल्बाउ तालिबात यहां आला तालीम हासिल कर रहे हैं
05:09ये युनिवरस्टी नहाइद काम्याबी से इस खिते के नौजवानों को परवान चड़ा रही है ताकि वो आज की इंतहाई मसापकती
05:16मार्किट के तकाज़ों को पूरा कर सकें
05:18लेकिन इन तमाम रोशन पहलों के साथ-साथ एक इंतहाई संजीदा मसला भी है
05:23जरात और तालीम में तरक्की तो हो रही है मगर पिछले वक्तों की वो शांदार महलात और अजीन तारीखी मकामात
05:29अदमे तवज़ी की वज़े से आहस्ता हिस्ता खस्तहाली का शिकार हो रहे हैं
05:33इनका तहफुस वक्त की एहम तरीन जरूरत बन चुका है
05:36तो आखिर में ये बुनियादी सवाल जहन में आता है कि क्या खैरपूर की ये नाकाबल यकीन तारीख इसकी मुनफरिद
05:43पक्वान की रिवायात और इसकी जदीद सलाहियतें आने वाली नसलों के लिए महफूज रह सकेंगी
05:48जरूरत इसमर की है कि हम जदीद मौशी तरक्वी और इन अन्मोल सकाफती खजानों की हिफाज़त के दर्मियान एक तवाजन
05:55कायम करें
05:55क्या हम ऐसा कर पाएंगे ये एक ऐसा सवाल है जिस पर हम सब को ठहर कर जरूर सोचना चाहिए
06:18क्या चाहिए

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