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2003 में कैसे मुलायम सिंह ने बसपा बागियों के दम पर बनाई थी सरकार? देखें

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00:00आप देख रहें उत्तर प्रदेश की बेमिसाल सियासत की कहानी सरकार
00:03बहन मायवती का इस्तीफा हो चुका
00:06इधर मायवती की सरकार गिरी उधर मुलायम सिंग यादव ने तुरंट सरकार बनाने का दावा ठोग दिया
00:11सपा के पास सबसे अधिक विधायक थे
00:14कुल 143, बहुमत से तो बहुत दूर
00:17लेकिन बहुमत खुच चलकर मुलायम सिंग यादव के पास आ गया
00:22बियस्पी के 13 विधायक तूट गय थे और उनके समर्थन में आ गया
00:33यही चाहते हैं कि इस देश में जो गहर बराबरी के अधार पर समाधिक विवस्ता बनी है
00:39वो खतम होनी चाहिए सबता मूलक समाध बनना चीए
00:44मायावती फोरण समझ गए कि अभी पार्टी थोड़े तूटी है
00:48आगे और भी बड़ा नुकसान हो सकता है
00:50लिहाजा उन्होंने विधान सभाध ध्यक्ष के पास ये अरजी भीजी कि इन सभी 13 विधायकों की सदस्यता दल बदल निरूधा
00:58कानून के तहत खारिच करती जाए
01:00ये हो जाता तो बहुमत साबित करने में मुलायम सिंग को दिक्कत आती
01:06लेकिन असली कहानी भी अब यहीं से समझ नहीं की है
01:19केशरी नात त्रिपाठी विधान सभाध ध्यक्ष थे पर वो थे तु बीजेपी के ही नेता
01:25उनके सामने एक तरफ थी उन मायावती की आचिका जिनके साथ तीन बार बीजेपी सरकार बना चुकी थी
01:32और दूसरी तरफ थे मुलाइम सिंग यादव जिनके साथ बीजेपी के रिष्टे जितने खराब हो सकते थे उससे भी अथे
01:38खराब थे
01:4726 अगस्त यानि मायावती की सरकार गिरने और मुलाइम सिंग के दावा प्रस्तुत करने वाले दिन ही
01:53बीजपी के संसदिय दल की एक बैठक कोई थी यूपी के हाला अब कहा तो ये जाता है कि इस
01:59बैठक में ये तैप आया गया था कि
02:01विधान सभा भंग करके फिर से चुनाओं में जाने से बहतर है राश्टुपती शासन लेकिन एक विचार ये भी किया
02:08गया कि अगर मुलाइम सिंग की सरकार बनती है तो पन्ने दी जाए
02:13तो बस केश्री नात्रिपाथी ने बिस पी के बागी विधायकों वाली याजिका डाली धंडे बस्ति में और मुलाइम सिंग को
02:20ये संकेव दे दिया कि जाए राज्या भिशेक की तैयारी कीजिए
02:2529 अगस्त 2003 को मुलाइम सिंग यादर तीसरी बार बन गए यूपी के मुख्य मंत्री
02:46और पहुमत साबित करने के लिए उन्हें दिया गया पूरे दो सप्ता कसम है
03:00समाजवादी पार्टी को आप धुरविरोधी तो कह सकते हो भाचपा की लेकिन दोनों के बीच में कहीं न कहीं एक
03:07बुनियादी ऐसा रिष्टा है कि दोनों की सियासत एक दूसरे की मदद करती है
03:12ऐसे में भाचपा का समाजवादी पार्टी का मदद करना परदे के पीछे भी परदे के सामने भी सरकार बनाना ये
03:20सिलसिला पुराना है
03:21और जो आप जिक्र कर रहो उस वक्त ही ये दौर शुरू हुआ था कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार
03:28बनती थी तो ये उम्मेद जग जाती थी कि अब भारती जनता पार्टी उरूच पे आएगी
03:33और जब भाजपा सत्ता में होती थी तो समाजवाद्यों को लगता था कि अब नंबर मेरा आएगा
03:41तो वो बीजेपी जो गेस्ट हाउस कांट से लेकर राम मंदिर आंदोलन तक मुलायम सिंग को लोगतंत्र के लिए खतरा
03:50बताते नहीं ठकती थी
03:51उसने उस समय मुलायम सिंग में लोगतंत्र का रक्षक देखा वैया राज नहीं थी तो कांटे से कांटा निकालने के
03:59लिए जानी ही जाती बीजेपी वही कर रही थी
04:02मायवती से हिसाब चुपता करना उसकी प्राध्मिक्ता थी
04:07मुलायम सिंग यादब को बीएसपी के 13 पागी विधायकों सहित कल्यान सिंग की पार्टी के 4 विधायकों का समर्थन भी
04:13मिला
04:15सारे पुराने मद्वेद भुलाकर राश्ट्रे लोग दल अपने 14 विधायकों के साथ मुलायम सिंग से आ मिला
04:22निर्दलिया और छोटे दलों के करीम 19 विधायक आए जो कसर रह गई
04:26वो कॉंग्रेस और CPM ने पाहर से समर्थन देकर पूई कर दी
04:35मुलायम सिंग बहुमत से मुख्यमंतरी बन गए है
04:38लेकिन अभी खेल बाकी था
04:39BSP के 37 और विधायकों ने बगाबत कर दी
04:43पहुँच गए विधान सभाध्यक्ष के श्रीनात त्रिपाठी के पास बुले हमें नए राजनीतिक दल के तौर पर मानिता दी दी
04:49जाए
05:03मायावती के पैरों तले जमीन खिसक रही थी और उस पर विधान सभाध्यक्ष की भूमिका
05:11केश्रीनात त्रिपाठी तुरंत बागली विधायकों के दल को लोकतांत्रिक बहुजण दल के तौर पर मानिता दे दी
05:18अलबत्ता पुराने तेरा विधायकों वाला मामला अभी भी लंबित था उस पर वो फैसला नहीं ले पाए थे
05:24केसे नात्रपाथी ने तेरा विधायकों के मसले पर कोई फैसला ही नहीं दिया लंबे समय तक उसको पेंडिंग रखा
05:36और मुलायम सिंग्यादव इस बात का इंतियार करते रहे कि और विधायक कैसे तूटें ताकि अलग गुट बनने की परियाप्त
05:47संख्या हो जाए
05:49यह संख्या बाद में पूरी हुई लेकिन थोड़ा समय बाद पूरी हुई और कुल 37 विधायक वस्पा के टूटे जबकि
06:00ज़र्रत उस वक्तेश की थी
06:03कि उसके बाद तक्नीकी दिश्ट से विधिक दिश्ट से सारी चीजें पूरी हो गई तो इस तरीके से केशर नात्र
06:10पाठी के सदस्यता के नेड़े पर विलंबित फैंसले के कारण उस वक्त मुलायम सिंग्यादाव सरकार को बहुत बड़ी राहत मिल
06:21गई राहत क्या मिल ग
06:32सर्वोच अदालत ने बड़ी निंदा की इसको अवैट ठहराया यूं तो राजनीती का उसूल है जिसकी सरकार बनती है वो
06:44सबसे पहले अपनी पार्टी से किसी को विधानसभा अध्यक्ष बना गेता है
06:49लेकिन मुलायम सिंग की सरकार के दोरान बीजेपी के कद्दावर नेता केश्रीनाथ त्रिपाथी ही विधानसभा अध्यक्ष बने रहे
06:58चुकि केश्रीनाथ जी एक अच्छे वकीलों में उनकी गिंती है विध के अच्छे ग्याता है जानकार है और उन्होंने पार्ट
07:08अफ इस्टेटिजी कह लीजे या जो एक राजनेतिक चाल होती है वो कह लीजे उस लिहाज से केश्रीनाथ जी ने
07:17उन तेरा विधायकों के �
07:18जो बस्पा के टूटके अलग दल बना लिया था जिसमें मायावती ने कहा था कि इन तेरा विधायकों की सदस्ता
07:25समात की जानी चाहिए दल बदल कानून के तहर्ट वो उन्होंने नहीं की और उससे मुलाइम सिंग इस्टेबिल हो गया
07:35खैर कहीं पर दुश्मनी निभाई गई तो कहीं पर दुश्मन के दुश्मन के साथ दोस्ती
07:44मुलाइम सिंग सरकार चलती रही इस बीच बीएस पी ने इलहाबाद हाई कोट की लखनव खंड़ पीट में तेरा विधायकों
07:53की सदस्ता खारिज नव करने
07:54और 37 विधायकों के दल को मान्यता देने के मामले में याचिका दाखिल करती मुलाइम सरकार कोट से मुहलत मांगती
08:06रही केस खिचता गया
08:10बीएस पी जनता के बीच गुस्सा निकालती रही 2003 बीट गया 2004 बीट गया 2005 आ गया लेकिन कोई निर्णय
08:21तब तक नहीं हो सका
08:27मुलाइम सिंग यादव का राज चलता रहा लेकिन जिन फेड़ गवई मुलाइम सिंग को उनके समर्थक धर्ती पुत्र कहा करते
08:35थे
08:35वो इसी दौर में बड़े औद्योगिक घरानों के साथ नजर आने लगे
08:41फिल्मी दुनिया की चका चॉन्व से घिरे हुए
08:53सेफ़ई महोत्सव की शुरुवात वैसे तो 1996 में ही हो गई थी
08:57लेकिन तब वो छोटे और स्थानिय स्थर पर हो दा दा
09:022003 में मुलाइम सिंग के मुख्यमंत्री बनते ही वो विराट और भव्व्य हो गया
09:08इतना भव्वे की बॉलिवुड की रंगीनिया तक सेफ़ई के सामने फीकी पड़ जाए
09:13मुलाइम के राजनीतिक विरोधी इसे बड़ा मुद्दा बनाया करते थे
09:17इस चका चौन्द के आयोजन में पार्टी नेता अमर सिंग का बड़ा योगदान रहा करता था
09:22और अमर सिंग धीरे धीरे नेता जी के सबसे करीबी बन चुके थे
09:27समाजबादी पार्टी के कई बड़े नेताओं को पार्टी में अमर सिंग का बड़ता कद अच्छा नहीं लग रहा था
09:36अमर सिंग का विरोध खुले आम होता था
09:38लेकिन मुलायम सिंग को उनकी आलोचना सुनना पसंद नहीं था
09:41नेता जी पूंजी वाद के साथ मिलकर समाजवाद की नई परिभाशा गड़ रहे थे
09:47और उधर कानून व्यवस्था का मुद्दा यूपी में बड़ा होता जा रहा था
09:55कानून व्यवस्था में एक उंगली सरकारी सनरक्षन पर भी उठने लगी थी
10:042007 में इलहबाद के मदर्से में दो बच्चियों के साथ बचस्वनूखी के मामले ने यूपी से लेकर दिल्ली तक संसनी
10:12पहला दी
10:13इसमें नाम आया था समाजवादी पार्टी के ततकाली इन सांसद अतीक एहमद और उसके भाई खालिद का
10:21क्या यह उनको इनसाब मिल रहा है औरे इनसाब तो यह है कि जो असली मुल्जी में उनको पकरना चाहिए
10:27इस मदर्से कि सुरक्षा होने
10:30चाहिए असली जो मुल्जे में उनके खलाब सक्से सक्कारवाई होने चाहिए को कि जिनकी इज़त आपर लूटिये क्या वापिस आजागी
10:37दो दो लाक रूमे में

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