00:05जब मैं चोरी चोरा आता हो
00:09तो मुझे राष्ट कवी रामधारी सिंग दिन करकी कुछ पंग्तियां याद आती है
00:18बारत के क्रांतिकारियों के बारे में उन्होंने लिखा था
00:21कि जला अस्तियां बारी बारी
00:25छिड़काई जिन्ने चिन्गारी
00:28जो चड़ गए पूरे बेदी पर
00:31लिए बिना गर्दन का मौल
00:35कलम आज उनकी जैबोल
00:38कलम आज उनकी जैबोल
00:46आज की जो परिस्तितियां देश के अंदर राजकता पैदा करने वालों के दोरा
00:51जो प्रिस्तितियां पैदा की जा रही है जो राजकता सडकों पर की जा रही है
00:57उनके बारे में भी रामधारी सिंग दिनकर ने लिखा है
01:02कि अंधा चका चौद का मारा क्या जाने इधियास बिचारा
01:11सूर्य चंद्रे खगोल भुगोल कलम आज उनकी जै बोल
01:17किनकी जै बोल जिन्होंने अपना सर्वस्थ ने चावर करके
01:25भारत की आजादी के लिए अपना सर्वस्थ ने चावर किया था
01:30और मुझे तो ये देख करके आस्थरे होता है
01:38चोरी चोरा की इस एधियासिक घटना की जो हम बात करते हैं
01:43तो बेन और भाईयों चोरी चोरा में
01:49एक सो इक्यावन एक सो बहुत्तर देश भक्तों को अंग्रेजों ने फांसी की सजा दी थी
01:58एक कॉंग्रेस के लोग हाई तोबा मचाते हैं
02:04कि पंडित जवाला लेरू देश के बहुत बड़े अधिवक्ता थे
02:09लेकिन सच्चाई क्या है
02:12जब चोरी चोरा की एक्यासि घटना को अंजाम दिया गया था
02:19चार फरवरी 1922 को
02:26और अंग्रेजों ने 172
02:31उस समय के किसानों को सर्मिकों को ब्यापारियों को ग्रफतार करके फांसी की सजा सुनाई थी
02:39तब पंडित जवाला नेरू नहीं आये थे
02:42तब कोई आया था पैरुकारी करने के लिए
02:46तो आये थे पंडित मदन मोहन मालवी आये थे
02:50और मदन मोहन मालवी जी ने इतनी अच्छी पैरुवी की थी
02:55कि 151 करांटिकारी जो किसान थे, सर्मिक थे, ब्यापारी थे, नौजवान थे
03:04उनको फांसी के भंदे से छुडाने में सपलता प्राप्त की थी
03:09और जिन करांटिकारियों को यहां पर इस पूरे अभ्यान के साथ
03:19जिनको हम जानते हैं, शी भगवान ही रहें इस घटना के मुख्य मारे दर्सक,
03:27नजर अलिय ए, कोमल सिंह आदो हैं, लाल मुहम्मद हैं, मेगू तिबाडी हैं, अब्दल्ल्ला हैं, स्याम सुन्दर हैं, सि महादेर
03:46सिंह हैं, सि बिक्र महीर हैं, सि मेगू अलिय हैं, काली चरण हैं, लोटी कुमार हैं,
03:56ये लोटू कोहार है रगबीर सुनार है राम लखन है राम रूप है सहतेव है रुदली केवाड संपत अहीर सीता
04:11राम दुदही भर ये वे क्रांतिकारी है
04:15जिने चोरी चोरा की एफ्यासे घटना के लिए अंग्रेजों ने फासी के फंदे पर लटकाने का काम किया था
04:26बैन और भाईयों क्या इस्तितियां थी नियाए की बात नहीं कर सकते थे
04:33अराजकता के खिलाब आवाज नहीं उठा सकते थे
04:36ये गुलामी की बेडियां देश को क्यों दी गई थी
04:43क्योंकि हम सब विभाजित थे बटेवे थे आपस में लड़ते रहते थे
04:52बिदेशी ताक्तों की कुद्रिष्टी लगी थी
04:54जैसे ये आवसर आया उन्होंने पुरी देश को अपने आगोस में लेकर के भारत को गुलाम बना दिया
05:02हमारी स्वाधिन्पा को कैट कर दिया हमें बंधग बना के रख दिया बारत के संसादनों पर लूट मचा दी
05:12क्र दिया संस्थ टाल के रारत के संसाथ में गुला मुष्टीे
05:29शोट
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