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क्या हर आरोप सच होता है? क्या अदालत में पेश किए गए सबूत ही न्याय का फैसला करते हैं? या फिर सच और झूठ के बीच की लड़ाई में कुछ ऐसे सवाल छिपे होते हैं, जिनका जवाब ढूँढ़ना आसान नहीं होता? आज के इस वीडियो में हम बात करेंगे फ़िल्म धारा 375 की, जो एक गंभीर मामले, अदालत की बहस और न्याय व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाती है। इस फ़िल्म में एक महिला द्वारा लगाए गए आरोप, एक प्रसिद्ध वकील की दलीलें और अदालत में पेश किए गए सबूतों के बीच एक ऐसी कानूनी लड़ाई शुरू होती है, जहाँ हर पक्ष अपनी बात को सही साबित करने की कोशिश करता है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अदालत में साबित होने वाला सच और वास्तविकता हमेशा एक ही होते हैं? इस वीडियो में जानिए फ़िल्म की कहानी, उसके महत्वपूर्ण मोड़, किरदारों की भूमिका और वह संदेश, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा।
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Transcript
00:06इस पिल्म का नाम है आर्टिकल 375 जो एक कानूनी फिल्म है
00:11ऐसी कहानी शायती आपने पहले कभी नहीं देखी होगी
00:14इस फिल्म में कानून और सचाई के बिश एक पतली सी रेका है
00:18जिसे समझने के लिए काफी ज़्यादा दिमाग लगाने की जरुरत है
00:22ऐसी कहानी जो आज तक कभी किसी ने देखी ना हो जहां अक्सर हम औरतों को विक्टिम समझते हैं
00:29इस फिल्म में कुछ ऐसा दिखाया गया है जो हमारी सोच को हमेशा के लिए बदल कर रगतेगा
00:33और हमें यह सोचने पर मजबूर कर देगा क्या हमेशा औरते ही गलत होती है
00:38चलिए देखते हैं इस फिल्म की पूरी कहानी
00:40फिल्म सेक्शन 375 2019 में रिलीज हुई थी
00:43और यह एक courtroom drama फिल्म है जिसमें एक high profile rape case के बारे में दिखाया गया है
00:49और किस तरह कानून के मादेहम से उस case की छानबिन हुई
00:53फिल्म की शुरुवात में हम देखेंगे कि एक famous film director
00:56जिसका नाम रोहन खुराना है
00:58जिसकी अपनी costume designer assistant अंजली दांगले उसके साथ rape करने का आरोप लगाती है
01:05अंजली का ये कहना है कि राहूल ने उसके साथ दुश करम किया है
01:09जो कि एक काफी गंबीर मामला है
01:11वो पुलिस को ये statement देती है कि राहूल ने फिल्म की shooting set पर और अपने घर पर उसका
01:17सोशन किया है
01:18सबूतों और शक के अधार पर पुलिस राहूल को गिरिफतार कर लेती है
01:22और ये case lower court से शुरू होते होते session court तक पहुँच जाता है
01:27इस फिल्म की आदी सी जादा कहानी courtroom के अंदर की दिखाई गई है
01:31जहां दोनों पक्षों के वकील अपनी अपनी दलिले देते हुए दिखते हैं
01:36अंजली का case लड़ती हुई हीना मैता जो की एक सरकारी वकील होती है
01:41उन्हें ये जिमेदारी मिलती है
01:42जिनका इकलोता मकसद यही होता है कि वो अंजली को नियाय दिलाया राहूल को
01:48उसके दोरा किये गए गलत काम की सजा
01:50दूसरी तरब हम देखेंगे कि राहूल के लॉयर तरुन सलूजा जो की एक काफी होशियार और शातिर वकील होते हैं
01:57तरुन का मकसद सिव राहूल को बचाना ही नहीं बलकी
02:00case के हर पहलू तक पहुचना था
02:02उसे ये जानना था कि इस case में कितनी सच्चाई है
02:05और उस सच को बाहर लाना जो सबकी नजरों से छुपा हुआ है
02:09इस film में हम बहुत अदर twist और tons देखेंगे
02:12जैसे जैसे case की सुनवाई आगे बढ़ती जाएगी वैसे वैसे
02:16तरुन अपनी जाद से एक-एक सच का खुलासा करता जाएगा
02:19वो कोड को वो सच दिखाएगा जो सबकी नजरों से ओजहल था
02:23इस film से हमें एक बहुत बड़ा संदेश मिलेगा
02:25कि कई वर सचाई कानून और सबूतों से भी बढ़ा होता है
02:30और कभी कभी किसी के जूटे बयान और सबूतों की वज़े से किसी की जिन्दगी बरबाद हो सकती है
02:36दोनों वकीलों की दलिले सुनने के बाद कोड इस फैसले पे पहुशती है कि
02:40जो कानून के धराओं के अनुसार होता है और सबूतों के अधार पर जो उन्हें सही लगता है
02:45इस फिल्म का नाम सेक्शन 375 इसलिए रखा गया क्योंकि
02:49ये भारते दंड सहीता IPC उस धराओं पर बनी है जो अकसर रेव के मामलाव पर सुनाई जाती है
02:56फिल्म का मुख्य संदेश ये है कि कानून अन्धा नहीं होता पर सबूतों और सच पर चलता है
03:03तो ये पी इस फिल्म की पूरी कान्य अगर आपने अभी तक ये फिल्म नहीं देखिये तो हमारे कहने पर
03:08इस फिल्म ज़रूर देखे
03:22प्रूर आपने अभी तक ये ज़रूर आपने अभी तक ये पर चलता है

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