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  • 29 minutes ago
किसी घर में बैठी महिला ऊन से जुराबें बुन रही है, कोई क्रोशिया से खूबसूरत डिजाइन तैयार कर रही है, तो कोई अपने हाथों से खिलौने और टोकरियां बना रही है. ये महिलाएं हुनरमंद तो पहले भी थीं, लेकिन इनके बनाए उत्पादों को सही बाजार नहीं मिल पाता था. लिहाजा मेहनत के मुताबिक कमाई भी नहीं हो पाती थी. अब कुल्लू में 2200 से अधिक महिलाओं ने मिलकर  माउंटेन यार्न मल्टी पर्पज सोसायटी के माध्यम से घरों में तैयार होने वाले उत्पादों को बाजार में बेचना शुरू किया है. कुल्लू के ढालपुर में चल रहे अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के व्यापारिक मेले में इस बार महिलाओं ने अपना स्टॉल लगाया है. ऊन से तैयार जुराबें, दस्ताने, गर्म कपड़े, क्रोशिया के आकर्षक उत्पाद, टोकरियां और हाथों से बने खिलौने लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. इन उत्पादों को कुल्लू जिले के अलग अलग ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाएं अपने घरों में तैयार करती हैं. माउंटेन यार्न सोसायटी इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का काम करती है. दिल्ली में भी सोसायटी अपना स्टॉल लगा चुकी है, जहां उत्पादों को अच्छा रुझान मिला. दरअसल, हुनर की कमी कभी इन महिलाओं के सामने चुनौती नहीं थी. चुनौती थी उस हुनर की सही कीमत पाने की.  

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Transcript
00:28।
00:30مالٹی پر پوس سوسائٹی کے مادھیام سے
00:31گھروں میں تیار ہونے والے
00:33اطبادوں کو بازار میں بیکنا شروع کیا ہے
01:00It was good for us, our Dushaira, and now the Dushaira was finished, but it was still in the same
01:08place, but it was still in the same place.
01:11Kullu Keir Halpur Me Chal Rheye Antarraştire Kullu Dushaira Ke Vyaparik Mele Mele Me Is Bar Mahilau Ne Apna Store
01:17Laga Ya Hai.
01:18On Se Tiyar Juraabin, Dastanye, Garm Kupde, Krooshya Ke Aakrshan Utpada, Tukariyan Or Haantho Se Beni Khilau Ne Logeo Ka
01:25Dhyan Kheech Rheye Hai.
01:26इन उतपादों को कुलूस दिले के अलग-अलग ग्रामीड इलाकों में रहने वाली महिलाएं अपने घरों में तैयार करती है.
01:33Mountain Yarn Society इन उतपादों को बाजार तक पहुँचाने का काम करती है.
01:38दिली में भी Society अपना स्टॉल लगा चुकी है जहां उतपादों को अच्छा रोजान मिला.
01:50दरसल हुनर की कमी इन महिलाओं के सामने चुनावती नहीं थी.
01:54चुनावती थी उस हुनर की सही कीमत पाने की.
01:57महिलाएं घरों में मेहनत से उतपाद तैयार करती थी,
02:00लेकिन उन्हें बेचने के लिए कोई ऐसा मंच नहीं था,
02:03जहां उनके उतपादों का उचित मुल्य मिल सके.
02:06कई बार मजबूरी में अपने ही लाके में कम कीमत पर सामान बेचना पड़ता था.
02:33बाकी महिलाओं को क्या कहना चाहेंगी कि आप भी इसमें जुड़ों ज़्यादा से ज़्यादा आर्टिजन कार्ड बना लो और सब
02:41को रोजगार मिलेगा.
02:43फाइदा हो रहा है पहले के मकामने, पहले घर में ऐसे ही माल स्टॉक पड़ा होता था,
02:47अब स्टॉर लग गए दा माउंटेन के फिर उसमें काफी फाइद हो गया माउंटेन यार मल्टी परपस सोसाइटी से नगर,
02:57बुंतर और कुलू विकासखन के विभिन स्वयम सहारता सम्मूहों की 2235 महिलाएं जुड़ी होई हैं.
03:03सोसाइटी की ओर से महिलाओं को हैंड लूम और हैंडी क्राफ्ट का प्रसिक्षन भी दिया जाता है, ताकि उनके हुनर
03:09को और बहतर बनाये जा सके और वे नए नए उतपार तयार कर सके.
03:53धालपूर मैदान में सजेश छोटे से इस्टॉल की कहानी दरसल उन हजारों घरों की कहानी है, जहां महिलाओं अपने हाथों
04:00से कुछ नकुछ तयार करती हैं.
04:02फर्क बस इतना है कि अब उनका हुनर घर के भीतर तक सीमित नहीं है, उसे बाजार मिल रहा है,
04:08पहचार मिल रही है.
04:10ETV भारत के लिए कुलू से बालकृष्ण शर्मा की रिपोर्ट.

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