00:00क्रिश्ण जन्माश्मिपायल क्या करें और क्या ना करें जाने व्रत और पूजा के नियाब
00:23इस सल किस दिन है फ्रत जाने सब कच ये कहानी है एक दिन की आध्यात्मे क्यात्रा की जसका नाम है श्रे क्रिश्ण जन्माश्मिपायल ये पर्व जो किस वर्ष 16 अगस्त 2025 को है
00:41केवल भगवान क्रिश्ण के जन्माश्माश्म का दिन नहीं बलकि स्वयम को अनुशाशत कर इश्वर के करीब लेजाने का एक सुनहरा अवसर भी
00:51इस यात्रा का अरंभ भाद्रपदमास की क्रिश्ण पक्ष अश्टमी को सूर्य उदाई से पहली हूता है
00:59जब आप स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहन कर अपनी अंतर मन में एक संकल्प लेती हैं
01:07हाथ में चल लेकर मन ही मन श्री क्रिश्ण का ध्यान करती हुए आप प्रण करती हैं कि आज पूरा तिन आप अपने इंद्रियों पर सैयम रखते हुए पूर्ण श्रधा और पवित्रता की साथ ये व्रत करेंगे
01:23ये संकल्पी आपके व्रत की नीव है जो आपको दिन पर अडिक रहने की शक्ती देता है जिन व्रत दो मार्गों पर चलता है एक फलाहार जिसमें आप फल दूद दही और कुट्टू या संगाडे की आटे से बने साथविक व्यंचन ग्रहन कर सकते हैं और दूसरा निर्�
01:53को चुनकर अपने भक्ति यात्रा प्रारंभु कर सकती हैं अब जब आपनी व्रत का संकल्प ले लिया है तो इस यात्रा के कुछ महत्वापून नियम है जो आपकी साध्रा को सफल बनाती है इस दिन क्या करें और क्या ना करें इसका वीशेश ध्यान रखना होता है दिन भ
02:23आपने या श्रेक्रिष्न की लीलाओं के श्रवण में लगाएं श्रवण में लगी शेबद भगवत गीता भागवत पुरान का पाठ करना इस दिन सर्वुत्तम माना गया घर में भक्ति मैं महाल बनाय रखी भजन कीरतन करें और अपने मन में इसी के प्रती वेश या प्र
02:53का स्मरण करने का है भोजन में साधारन अन्न, नमक, लहसुन, प्याज जैसे तामसिक पदार्थों को भूल कर सात्विक भोजन करें जिनकाले रंग के वस्त्र पहनने से बचें क्योंकि पीला रंग भगवान कृष्न को अत्यधिक प्रिया है आपका अचर्ण, आपके वि�
03:23जैसे जैसे दिरंधलता है और रात्री गहरानी लगती है आपका इंतिजार और आपकी भक्ती अपनी चरम पर होती है
03:36स्यात्र का सबसे दिव्यक्षण है मत्यरात्री बार है पचे का जब कानह का जन पूता है इस समय खीरे को काट कर बाल को बाल की जन की रस्मीनी भाई जाती है फिर उन्हें पंच अमरित दूद, दही, घी, शहद शक्कर से स्नान कराकर सुंदर पीले वस्त्र पहनाएं और �
04:06फर पूरे परीवार के साथ उनकी आर्थी करें यह जनमुदसव का उलासी आपके दिन भर के सैयम और तपस्या का प्रतिफल है जनमुदसव की पूजा संबन्न होने के बाद ही व्रत का बारण करने का विधान है सबसे पहले भगवान को अर्वित किया गया भूब प्रसात
04:36में कानहा के जन्म की खुशी और उनके आशिरवात के साथ सफलता पूर्वक संपन्न होती है जो आपके जीवन को आनंद और सम्रिथी से भर देती है