00:00रामायन में रावणवद के बाद राम लक्षमण से कह रहे हैं कि नहीं नहीं जितना संभव था यथा शक्ति मैंने यहां से अधर्म को मिटा दिया अब यहां का सिंगहासन विभीशन के हवाले करो या किसी और के और चलो लक्षमण अब वापस चलते हैं
00:17हमें वापस जाना है अयोध्या जननी और जन्म भूमे का स्थान स्वर्गतुल्ले होता है अब यह समझने वाली बात है किसी एक भौगोलिक जगह पर क्यों लोटना है वापस क्यों आना है आवश्यक हो जाता है कि राम लंका की जगह सरीउतट पर लोटें क्योंकि लंका में
00:47तो वही मिलेगी जहां उस संतुष्टी के लिए एक सुयोग्य वातावर्ण तैयार किया गया है तो आव चलते हैं अयोध्या जहां से फिर काशी बहुत दूर नहीं जहां से फिर हिमाले भी बहुत दूर नहीं यहां लंका तो कैसे यहां दर्शन होंगे रिशियों के यह आ�
01:17कितना मुश्किल है और स्वयम को जानने के रास्ते में कठेनाईया कितनी ज्यादा है एक पूरा एको सिस्टम चाहिए जो व्यक्ति को आंतरिकता के लिए प्रेरित करता रहे सत्य की खातिर आत्म अनुसंधान की खातिर धर्म की खातिर और यही वजह है कि भारतिय राष्�
01:47कि वह भारत राष्ट्र के साथ कितना तार्तम में रख पाता है कितना मेल बैठा पाता है
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