00:00अचार जी मेरा ये प्रिश्णा कि मेरा एक जगह पे मन क्यों नहीं लगता है जैसे मैं पढ़ाई करती हूं तो उस टाइम मेरा मन नहीं लगता है तो मैं अपना मन एक जगह पे कैसे लगाऊं
00:09तो विकट प्रशन है इसका क्या बिटा तुम्हारी उम्र में मन एक जगह लगना भी नहीं चाहिए
00:15क्यों कोई चढ़कर बोले कि ये जगह है इसी विशय में मन लगाओ
00:20स्कूल में जाओ आपका बच्चा बहुत डिसिप्लिंड है
00:23ये बहुत खतरनाग बात बोल दिये टीचर ने
00:28बड़ा अच्छा लगता है वो उसको बिलकुल मूर्ती बना दिया है पत्थर की
00:31वो ऐसे अंकल जी नमस्ते और भगवान जी की जे जे
00:35बच्चों में जिंदगी होनी चाहिए नुशासन नहीं प्राण होना चाहिए
00:39बच्चा चाहिए एकदम जिसमें भीतर जिंदगी इतनी है
00:43कि छला करे ये, समेटे नहीं से मटरा
00:47ऐसा होना चाहिए बच्चा
00:48हर बच्चा विद्रोही ही पैदा होता है
00:51क्या गलत करा है, तो उसके भीतर बत्तमीजी होनी चाहिए
00:57उसके उपर नियम कायदे मतलागी है
01:00यहां बैठो ऐसे करो चलो चलो
01:02सीधे हाथ से खाना खाया करो
01:04न सीधे से खाएंगे
01:06न उल्टे से जैसे ऐसे भी खा सकते
01:08हमें देखने तो दो कि गाय कैसे खाती होगी
01:11मेरा सही था
01:12मैंने का मैं बैटिंग राइट हैंड करूँगा
01:14बॉलिंग लेफ्ट हैंड करूँगा
01:15खाना यह साथ सिखाऊँगा
01:17कंगी यह साथ से करूँगा
01:18न इधर की सुनूँगा
01:21मैं दोनों इधर से भी चलाता हूँ
01:23इधर से भी
01:24यह शुरू में अच्छा लगता है
01:27वेल मैनर्ड किड यही है जो आगे जा करके फिर कृष्ण के खिलाफ खड़ा होता है
01:32क्योंकि तुमने उसको सिखा दिया है समाज के साथ खड़ा होना
01:35कृष्ण के साथ तो कोई विद्रोही ही खड़ा होगा बत्तमीज
01:38और मैं सिर्फ बच्चों की बात नहीं कर रहा हूँ बच्चों की मम्यों की भी बात कर रहा हूँ
01:41जैसे वेल मैनर्ड किड्स होते हैं उतनी वेल मैनर्ड उनकी मम्या होती है
01:46बिल्कुल ऐसल का सुसीला नारी यह बहुत हो गया सुशीला और बलाल पीला चाहिए
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