Skip to playerSkip to main content
🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें:
https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita-course?cmId=m00021

📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?
फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021
➖➖➖➖➖➖
ये वीडियो 21st Sept'25 के लाइव सत्र से लिया गया है|
➖➖➖➖➖➖
#आचार्यप्रशांत
#acharyaprashant
#Phuljhari
#InnerLight
#SelfAwareness
#diwali

Category

📚
Learning
Transcript
00:00पुलगड़ी जलाते हो अभी अभी खरीद के लाए हो कैसी लगती हो बड़िया और फिर आप उसको जलाते हो चले तो पहले तो दूर से ही आकर शक्त थी जब जला देते हो तब तो ऐसा लगता है सितारे भी खेर दिये उसने
00:12ऐसे होता है कि नहीं होता है
00:15होता है ना
00:17और फिर
00:20एक ठूट भचता है हाथ में
00:24जला हुआ
00:28और उसको ले आगर के
00:33या तो बाल्टी में डाल देते हो तो सुर्र की आवाज आती है
00:36या अगर नहीं जमीन पे रख दिया और किसी ने पाव रख दिया
00:40तो फिर हाई हाई यह क्या था कौन पत्तमीज यहां फेक गया जली फुल जड़ी
00:44यह हर फुल जड़ी के साथ होना है
00:50दुख यह नहीं है कि होना है
00:52दुख यह है कि तुम सोचते हो तुम्हारी फुल जड़ी के साथ नहीं होगा
00:55हर साल उन्हीं पेड़ों पर वही पत्तियां लगती हैं और उसी समय जड़ती है
01:07फूल के गिरने में कोई समस्या नहीं है
01:09पर जब कहो फूल तुम्हें भेजा है, खत्में फूल नहीं मेरा दिल है
01:13तो फूल नहीं गिरा है, दिल गिरा है
Comments

Recommended