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Ashab-e-Rass ka waqia Quran-e-Kareem ki un pur-asrar qaumon mein se ek hai jinka zikr Allah Ta'ala ne ibarat hasil karne ke liye farmaya. Is documentary mein hum Ashab-e-Rass ki tareekh, unke gunah, Allah ke azaab aur is waqia se milne wale sabaq ko Quran aur authentic Islamic riwayat ki roshni mein bayan karte hain.

Video Highlights:

Ashab-e-Rass kon thay?
Quran mein Ashab-e-Rass ka zikr
Un par Allah ka azaab kyun nazil hua?
Islamic history aur Quranic lessons
Ibrat angez waqia

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Transcript
00:00We are seeing here that we are on a way that we're trying to do with the roots of the
00:04East.
00:09We're talking about the use of the East, which I saw on the East, where we're trying to do with
00:20the East.
00:20We're talking about the text and the East which we're trying to do with the West.
00:24What the Tyrant went to do with the West.
00:28which is what the story of the world
00:30is that one of the people who have been in the world
00:36is how to make a difference in the world.
00:39This is only the past, but it is today's time for a big important thing.
00:47A story of the world that has been in the world
00:50which has been the most important part of the world
00:52but has been the most important part of the world
00:58So, as you see, the word is called Russ.
01:05The word is called Russ.
01:05The word is called Russ.
01:08This is a very popular and popular.
01:13But the knowledge of the Lord and the Kedem of the Thessalonians is a very important thing.
01:19And the strange thing is that this is a good story.
01:29This is a great story.
01:31This is a great story.
01:32There are many different views.
01:37There are many different views on the island of the island.
02:08।
02:10इस قوم की शानदार जरी तरक्की और इनके अखलाकी जवाल के दर्मियान एक बहुत ही हैरान कुंतजाद था
02:17एक तरफ उनके पास जरखीज जमीने, पानी की फरावानी, सरसबस बागात और बेहतरीन तजारती रास्ते थे
02:24वो अपने वक्त की एक जबरदा सूपर पावर थे, लेकिन दूसरी तरफ अपनी इस बेतहाशा दौलत के नशे में वो
02:31इसकदर अंधे हो चुके थे
02:32कि उन्होंने इस काम्याबी का सहरा अला की बजाए एक बहुत बड़े दरख्त को दे दिया
02:37जी हाँ, एक दरख्त, वो इस दरख्त की पूजा करते, उसे नजरें बेश करते और सचमच ये समझते थे कि
02:43यही दरख्त इनकी किस्मत का कंट्रोलर है
02:45उनकी सोच को समझने के लिए जरा इस तारीखी दावे बगौर करें
02:49अगर हमारा मुकदस दरख्त बातिल है तो फिर हमारे बागात इतने सरसब्स और हमारी तिजारत इतनी काम्याब क्यों है
02:57ये रुहानी गुरूर की इंतहा थी, इस इंतहाई नाकस मंतिक ने उनके पूरे मौश्रे को अपनी लपेट में ले लिया
03:05था
03:05वो ये फर्स कर बैठे थे कि उनकी मादी दौलत ही उनके नजरियात के दुरूस्त होने की सबसे बड़ी और
03:12वाहिद दलील है और इसी अंधेरे में रोश्नी की किरन बन कर उभरती है नभी हंजला की जिदो जहद
03:20तारीख बताती है कि इस भटकी हुई तहजीब को सीधा रास्ता दिखाने के लिए अल्ला ने नभी हंजला बिन सफवान
03:27को मबूस फरमाया एक सच्चे और खरे इनसान
03:31जब नभी हंजला अल्यस्सलाम ने घरों बाजारों और महफिरों में हक की दावत देना शुरू की तो मौशरे का रदे
03:38अमल बहुत मुनजम और जालिमाना था
03:40सबसे पहले उन्होंने इस पेगाम का मजाक उड़ाया
03:43जब इस से काम ना बना तो कबाईली सरदारों ने अवाम में खौफ पहलाना शुरू कर दिया
03:48कि अगर तुमने इस शख्स की बात मानी तो हमारे देवता नाराज हो जाएंगे और कहता आ जाएगा
03:53और फिर हक को जुटलाने के आखरी हर्बे के तौर पर उन्होंने एक माफौकल फितरत मौजजे का मतालबा कर डाला
04:00यहां से इस कहानी का वो हिस्सा शुरू होता है जिसका जजबाती बोज आज भी महसूस किया जा सकता है
04:07मौजजा और एक इंतहाई अलमनाक शहादत
04:23आइस्ता खुश्क होने लगा उसके पत्ते जड़ गए और हरी भरी शाखें मुकमल तोर पर मुर्जा गए जरा इस मनजर
04:30का तसवर करें
04:31ये उनकी आँखों के सामने उनके माबूत की मुकमल बेबसी का एक वाज़े सुबूत था जिसका मकसद इस कौम को
04:38उनकी खुश्फेमी से बेदार करना था
04:40अब जाहिर है इस सरीय मौजजे के बाद मनतकी रद्देमल तो यहीं होना चाहिए था
04:46कि वो हक को कबूल कर लेते, बुथ परस्ती छोड़ देते और सच्चे दिल से तौबा करते
04:51मगर हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ
04:53उनके सरदारों ने हक के सामने जुकने के बजाए उल्टा एक पूर तशद्द लहर को भड़का दिया
04:59उन्होंने बड़ी चलाकी से हकाइक को तोड़ा मरोडा और नभी हंजला पर काले जादू का इल्जाम लगा दिया
05:05उनका रोहानी गुरूर उन्हें सच्चाई मानने से मुकमल तोर पर रोक रहा था
05:09मसलसल ظلم और मस्तरद किये जाने के शदीद जजबाती बोज़ के बावजूद नभी हंजला अले ने आखरी बार अपनी कौम
05:16को मतनब्य किया
05:17जरा इन अलफाज की गहराई को महसूस करें
05:20मैंने तुम तक हक का पेगाम पहुचा दिया है अब तौबा कर लो वरना अजब तुम्हारे दर्वाजे पे खड़ा है
05:26इस एक जुमले में उस अजीम इनसान का दर्द उनकी बेलोस खेर खाही और एक ऐसी कौम के लिए आखरी
05:32पकार छुपी थी
05:33जो खुद अपने ही हातों अपनी तबाही के गड़े में च्छलांग लगाने को तैयार खड़ी थी
05:38और फिर तारीख का वो स्यातरीन बाब रकम हुआ
05:41कौम की दुश्मनी अपनी जालिमाना इंतहा को पहुँच गई
05:45उन्होंने अपने ही नभी को गिरफतार किया बेपना अजियतें दी
05:49और बिलाखर उसी गहरे तारीख कुए में बेदर्दी से फेग दिया
05:53जिसके बाद ये जालिम तहजीब हमेशा के लिए अस्हाब रस यानि गड़े वाले लोग कहलाई
05:58एक ऐसा इनसान जो सिर्फ उनकी भलाई चाहता था जो उनकी अखलाकी बका की जंग लड़ रहा था उसके साथ
06:05ये सलूप किया गया
06:05तारीखतान लिखते हैं कि इस बेपना जुर्म पर तो जैसे जमीन और आसमान भी मातम करने लगे
06:11इस हौलनाक जुर्म के बाद उनका हत्मी जवाल ज्यादा दूर नहीं था
06:16तबाही का ये सिलसला इंतहाई तेज और लर्जा खेज था जिस दुन्यावी दौलत पर उन्हें बेजा गुरूर था वो एक
06:25एक करके उनसे च्छीन ली गई
06:26सबसे पहले उनकी वो सरसबस बगात सूख गए जिन पर उन्हें बड़ा नास था फिर पानी जमीन में गाइब होने
06:34लगा और उनकी पूरी शानदार मईशत जमीन बोस हो गई
06:38और आखिरकार तारीख बताती है के आस्मान से एक ऐसी खौफनाक जमीन हिला देने वाली चीख आई जिसने सब कुछ
06:47मिलिया मेट कर दिया
06:48उनके शहर उनके अजीमुशान महलात सब कुछ रेत के जरूं की तरह उड़ गए
06:54जदीद तहजीबों के लिए असबाक
06:56जब हम बहसित मुर्ख इस वाकिया का जाइजा लेते हैं
06:59तो असहाब रिस्क की ये दास्तान आज के जदीद मौशरों के लिए कई लाजवाल सबक छोड़ जाती है
07:04ये बताती है कि सच को हर हाल में बोलना चाहिए
07:08चाहे मौशरा कितना ही मजाग क्यों न उड़ाए
07:10ये इस बात का सुबूत है कि किस तरहा रोहानी गुरूर इंतहाई तरक्याफ़ता मौशरों को भी अंधा कर देता है
07:16ये याद देहानी है कि मादी दौलत कभी भी अखलाकी दुरूस्टगी की दलील नहीं हो सकती
07:21जालिमों को कुछ देर की मुहलत तो मिल सकती है लेकिन काईनाती इंसाफ बरहाल होके रहता है
07:27रोहानी दियानत को छोड़ कर सिर्फ दुन्यावी खुशाली को तरजी देने के सकाफ़ती नताइच हमेशा तबाह कुन निकलते हैं
07:34आज असाब रस के वो उंचे महलाद वो बेपना दौलत और ताकत जिन पर उने खुरूर था वो सब खाक
07:41में मिल चुके हैं
07:42उनका कोई नाम और निशान तक बाकी नहीं रहा
07:45लेकिन दूसरी तरफ नभी हन्जला अले की रोहानी दियानत उनका सच और उनकी अजीम कुर्बानी आज हजारों साल बाद भी
07:54इज़त और इहतराम के साथ तारीख के सीने में महफूज है
07:58दुन्यावी दौलत महज आरजी है जबके रोहानी सालमियत और हक की हातिर दी गई कुर्बानी हमेशा के लिए अमर हो
08:06जाती है
08:07तो इस तमाम तारीखी वाके का तज्जिया करने के बाद एक गहरा और चुपता हुआ सवाल हमारे सामने खड़ा होता
08:14है
08:14क्या आज की जदीद और तरकी याफ़ता तहजीबें भी अपनी शानदार काम्यावियों की बन्याद इखलाकी और रूहानी खंडरात पर रखकर
08:23बिलकुल इसी खामोश और तारीक अंजाम को दावत तो नहीं दे रहीं जो असहाब रस का मुकदर बना
08:28ये यकीन एक ऐसा सवाल है जिस पर हम सब को बहुत संजीदगी से गोर करने की जरूरत है

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