00:06Raghav's sonata is so strong that the sound of the cycle was so strong.
00:15Raghav's sonata was so strong.
00:16He was so strong in the night.
00:20But the situation was the one that he had seen before.
00:24He had never seen his way.
00:27He had so much known that Rampur was somewhere in the middle of the village.
00:32He had never seen his way.
00:36He had never seen his way.
00:37He had never seen his way.
00:39How could he have been?
00:45He had never seen his way.
00:48He had never seen his way.
00:52just a few times the way you'll find a rancher
00:54and it will be made right now.
00:58Did you see the spread of a person's ello?
01:02He was trying to figure out that side.
01:05He was trying to get rid of a
01:34He was the one who was the one who was the one who was the one.
01:36भाई साब, नमस्ते, मेरा नाम रागव है. मुझे अर्जंट काम से रामपुर गाउं जाना है, पर मैं रास्ता बटक गया
01:44हूँ. क्या आप बता सकते हैं कि यहां से कौन सा रास्ता सीधा रामपुर गाउं जाता है?
01:48उस आदमी ने रागव के तरफ गौर से देखा और धीरे से अपना चेहरा उपर किया. उसके चेहरे पर गहरी
01:56जुर्यां थी और आखों में एक अजीब सा खाली पन. उसने धीमी आवाज में रागव का कुछ जबाब दिया.
02:03बेटा तुम तो रास्ता भटक गए हो. तुम तो एक मिल आगे आगे हो. तुम्हारा रामपुर गाव का रास्ता तो
02:11पीछे ही छुट गया है. और हाँ बेटा तुम बहुत गलत वक्त पर इस रास्ते पर आगए हो. रामपुर जाने
02:18वाला रास्ता तो उसी मुर्दा घर के
02:20ھیک پیچھے سے ہو کر نکلتا ہے
02:22یہ کیا کہہ رہے ہو کاکا
02:24آپ کا مطلب ہے کہ
02:25میں راستے سے بہت آگے آگیا ہوں
02:27رامپور گاؤ کا راستہ
02:29ادھر سے نہیں جاتا کیا
02:31نہیں بیٹا یہ راستہ تو
02:33شہر کے طرف جاتا ہے
02:35رامپور گاؤ کا راستہ تو پیچھے ہے
02:38جس راستے سے تم آئے ہو
02:40وہاں تم کو ایک پورانا
02:42گھر جیسا دکھائی دیا کیا
02:44ہاں کاکا
02:45راستے سے آتے آتے مجھے ایک پورانی
02:47عمارت تو دیکھی
02:48लेकिन काका आप ऐसा क्यों पूछ रहे हो
02:51बेटा वो कोई इमारत या घर नहीं है
02:53वो तो एक मुर्दा घर है
02:55और वही से एक रास्ता आगे की और निकलता है
02:59वही रास्ता रामपूर गाओ के तरफ जाता है
03:02धाबे वाले की ये बात सुनकर राघव ने एक कहरी सांस ले
03:06मुर्दा घर का नाम सुनते ही उसके मन में फिर से वही सीहरन दोड़ गई
03:10जिससे वो अभी अभी बच कर निकला था
03:13धाबे वाले ने राघव की और देखते हुए बूला
03:16बेटा रात को उस रास्ते पर परिंदा भी पर नहीं मारता
03:20तुम इस रास्ते से नए हो शायद इसी लिए यहां तक आ गए
03:25रामपूर जाने वाली पगडंडी उसी मुर्दा घर की पिछली दिवार से सट कर निकलती है
03:30जो सीधे जंगल के सीने को चीरती हुई गाउं तक जाती है
03:35ये बात सुनकर राघव कर से कापने लगा
03:38उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब वो क्या करें
03:42लेकिन आज ही राघव को किसी भी हाल में रामपूर गाउ जाना ज़रूरी था
03:47राघव ने फिर एक बार ढाबे वाले को पूचा
03:51काका क्या कोई और रास्ता नहीं है क्या रामपूर गाउ जाने के लिए
03:54वो जगा देखने में ही बहुत अजीब लग रही थी
03:57अगर दुसरा कोई रास्ता हो तो बता दीजिए
04:00बेटा रास्ते तो बहुत है
04:02पर मंजिल तक पहुचने वाला वही मुर्दाघर के पास से गुजरने वाला एक रास्ता है
04:08वैसे भी बेटा डर तो जिन्दा लोगों से लगता है
04:12वो जगा तो बस एक खाली इमारत है
04:15वहाँ आप कोई हलचल नहीं होती
04:17बस एक सन्नाटा है जो कभी कभी बातें करता है
04:21राघव को ढाबे वाले की बाते कुछ अजीब लगी
04:23लेकिन उसके पास और कोई चारा नहीं था
04:26उसे सुबह होने से पहले हर हाल में रामपुर पहुँचना ही था
04:30बेटा उस मुर्दा घर के रास्ते से समहल कर जाना
04:34उस मुर्दा घर के पास पहुँचकर रुकना मत
04:37चाहे कोई भी आवाज सुनाई दे
04:40ढाबे वाले की बात सुनकर राघव ने अपनी साइकिल मोड़ी और
04:43When he says he
04:44consumed, he asked
04:45To prolong the terror
04:48In familiarism, he felt loved
04:48He was so talented
04:51Out-of-the-arch
04:53And, J Afghan,
05:02In the yasira, he was in the red house.
05:29He was in the red house.
05:29अरे वो मुसाफिर, कहा जा रहे हो इतनी रात को, और वो भी इस मुर्दा घर के रास्ते से, इस
05:35मुर्दा घर की दिवारे आज बहुत बेचेन है
05:39मुझे, मुझे रामपुर गाउ जाना है, उस धाबे वाले भाई ने यही रास्ता बताया है
05:44प्राघव की बात सुनके नथुराम जोर से हसने लगा, उसकी हसी किसी सूखी लकड़ी के तूटने जैसी थी
05:51धाबे वाला उसने तो सही बताया, परियाद रखना, इस रास्ते से गुजरते वक्त पीछे मुड कर मत देखना
05:59इस मुर्दा घर की खिड़किया खुली है और अंदर का सनाटा तुझे पुकारेगा
06:04बस साइकील की पैडल मारते रहना
06:07प्राघव ने हिम्द जुटाई और तेजी से साइकल दोड़ाई
06:11उसे महसूस हो रहा था कि मुर्दा घर की काली खिड़कियों से
06:15कोई उसे लगातार देख रहा है
06:17लेकिन उसने पीछे मुर्कर देखने की हिम्मत नहीं की
06:20कुछी मिंटों में वो उस मन्हूस इमारत के घेरे से बाहर निकलाया
06:25उसने राहत के लंबी सास ले
06:28वो सही सलामत पच निकला
06:31मुर्दा घर से करीब दो मील आगे निकलते ही
06:34घने पेडों के बीच
06:36सडक पर उसे एक आदमी पैदल चलता हुआ देखा
06:38वो आदमी धीला ढ़ाला कुर्ता और धोती पहने था
06:42रागर ने सोचा कि शायद ये कोई गाउँ वाला है
06:46तो उसने साइकल रोक ली
06:47राम राम काका
06:49आप इतनी रात को यहाँ इस भैयानक रास्ते से
06:52अकेले
06:53बेटा मैं पास के ही गाउँ हरियापूर करहने वाला हूँ
06:56शेहर से लौट रहा था
06:57बस छूट गई तो पैदली निकल पला
06:59वैसे तुम कहां जा रहे हो बेटा
07:02काका मैं शेहर गरेने वाला हूँ
07:04और मैं रामपूर गाउ जा रहा हूँ
07:06क्या रामपूर गाउ का रास्ता यही है
07:10हाँ बेटा रामपूर जाने वाला रास्ता यही है
07:12लेकिन बेटा यह रास्ता भोती भैयानक और सुनसान है
07:29रामपुर का रास्ता हरियापुर के जंगल से होकर ही जाता है.
07:33चलो, मैं तुम्हें सही मोर तक छोड़ देता हूँ.
07:37राघव को अब थोड़ा सुकून महसूस हो रहा था,
07:40कि उसके साथ कोई इंसान है,
07:42लेकिन शिवानन्द के चलने की आहट सडक पर बिलकुल सुनाई नहीं दे रही थी.
07:47राघव को शिवानन्द का साथ पाकर बहुत तसल्ली मिली.
07:51दोनों के बीच बातों का सिलसला शुरू हुआ.
07:54शिवानन्द ने बताया कि हरियापुर एक खुशाल गाउं है,
07:57और वहाँ के लोग बहुत मिलनसार है.
08:00वो राघव को रास्ते की बारीकियों के बारे में समझाता रहा,
08:04ताकि वो दोबारा रास्ता ना भटक जाए.
08:06बातों बातों में समय का पता ही नहीं चला,
08:09और जल्द ही हरियापुर की सीमा दिखाई देने लगी.
08:13बस बेटा यही है मेरा गाउ.
08:16मेरा घर यही पास में है.
08:18बेटा रात बहुत हो गई है,
08:20और आगे का रास्ता भी बहुती डरावना है.
08:23अगर तुम्हें कोई एतराज नहीं हो,
08:25तो तुम आज की रात मेरे घर में रुख सकते हो.
08:28सुबहा तुम रामपूर गाउ चले जाना.
08:30नए काका, मुझे किसी भी हाल में अभी रामपूर गाउ पहुचना है.
08:36ठीके बेटा, अगर तुझे अभी रामपूर पहुचना है तो,
08:39अब तुम यहां से सीधे चले जाओ.
08:41करीब दो मील बाद तुम्हें एक बड़ा पत्थर दिखेगा.
08:44वहीं से दाहीने मुड़ जाना, वही रास्ता तुम्हें सीधा रामपूर ले जाएगा.
08:48अब तुम सुरक्षित हो.
08:50अब रागव एक बार फेर खेला था.
08:53लेकिन इस बार उसके मन में डर कम और मन्जल तक पहुँचने का भरोसा ज्यादा था.
08:58उसने अपनी साइकल के पैडल तेज किये.
09:01घंडी हवा अब उतनी डरावनी नहीं लग रही थी.
09:04थोड़ी देर बाद रागव उस बड़े पत्थर के पास पहुँच जाता है.
09:23लेकिन की एक लंबी सांस ली.
09:25वो आखिरकार अपने मन्जल पर पहुचे गया.