00:00रात के करीब साड़े ग्यारह बज रहे थे, चारों तरफ गहरा अंधेरा और जींगुरों की चीखती हुई आवाजें थी, रश्मी
00:08अपनी खिडकी के पास बैठी पढ़ाई कर रही थी, अचानक बिजली चली गई, कमरे में लाला टेन की हलकी पीली
00:15रोशनी जल रही थी, ज
00:20अभी रश्मी को बाहर नीम के पेड के पास से कुछ घिसटने की आवाज आई, चम, चम, घिस, रश्मी ने
00:27खिडकी से बाहर जांका, धुंद में लिप्टा नीम का पेड एकडम शांत था, लेकिन पेड की ओट से एक आकृती
00:34बाहर निकल रही थी, रश्मी की आँखें फ�
00:50लेकिन सबसे भयानक बात यह थी, कि उस शरीर पर गर्दन के ऊपर का हिस्सा था ही नहीं, कट चुकी
00:56गर्दन से खून नहीं टपक रहा था, बलकि एक अजीब सा काला गाढ़ा धुआ निकल रहा था, वह बीहड आकृती
01:04बिना सिर के भी सीधे रश्मी की खिडकी की तरफ ह
01:07बढ़ रही थी, रश्मी का गला सूख गया, वह चिलाना चाहती थी, लेकिन डर के मारे उसकी आवाज गले में
01:14ही घुट कर रह गई, उसकी चाती धडकन के मारे फटने को हो रही थी, उसने जटके से खिडकी के
01:21पट बंद किये और सिटकनी लगा दी, खट, खट, खट, कु
01:37को चादर से पूरी तरह ढख लिया, अचानक कमरे का तापमान बर्फ की तरह ठंडा हो गया, लाला टेन की
01:44लौ नीली पड़ी और बुझ गई, अंधेरे कमरे में अब केवल रश्मी की तेज सांसों की आवाज थी, तभी उसे
01:51महसूस हुआ कि चादर के ऊपर कोई बहुत भ
02:07देखा? वह आवाज बिना मुह के आ रही थी, सीधे रश्मी के दिमाग के अंदर, रश्मी डर के मारे आँखें
02:14मुह कर रोने लगी, उसने हिम्मत जुटा कर चादर को थोड़ा सा हटाया, कमरे के बीचों बीच वह बिना सिर
02:21का भूत खड़ा था, उसकी कटी हुई गर्द
02:23से निकलता काला धुआ, पूरे कमरे में फैल रहा था, भूत का हाथ धीरे धीरे रश्मी की तरफ बढ़ा, उसके
02:31लंबे, काले और मुड़े हुए नाखून रश्मी के माथे को छूने ही वाले थे, कि अचानक घर के मंदिर से
02:38घंटी की आवाज और दादा जी के चलने की आ
02:53घबराय हुए कमरे का दर्वाजा खोल कर अंदर आ पहुँचे, रश्मी बिस्तर के एक कोने में सिमटी हुई, बुरी तरह
03:00कांप रही थी और पसीने से तरबतर थी, दादा जी ने तुरंत आगे बढ़कर उसे गले से लगाया और संभालने
03:07की कोशिश की, क्या हुआ रश्
03:23जात में हुई उस खौफनाग घटना का एक-एक मंजर बयां किया, बिजली का जाना, नीम के पेड़ के पास
03:29से आती घिसटने की आवाज, खिड़की के बाहर सफेद खून से सने कुर्ते में खड़ा, बिना सिर का भूत, उसकी
03:36कटी गर्दन से निकलता काला धुआ और कान क
03:39पास गूंज ती उसकी भयानक आवाज, रश्मी की बातें सुनकर कमरे में कुछ पलों के लिए गहरा सननाटा च्छा गया,
03:47माता पिता ने खौफ और चिंता से एक दूसरे की तरफ देखा, दादा जी ने रश्मी के सिर पर प्यार
03:53से हाथ फेरा और उसके चेहरे से पसीना �
03:55पोंचते हुए बड़े प्यार से बोले, अब डरने की कोई बात नहीं है मेरी बच्ची, जब तक तुम्हारा यह परिवार
04:02और ईश्वर का आशिरवात तुम्हारे साथ है, कोई भी बुरी शक्ती तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड सकती, माता जी ने तुरंत
04:09आगे बढ़
04:09कर रश्मी को अपने गले से लगा लिया और कहा, हां रश्मी, दादाजी बिल्कुल सही कह रहे हैं, अब तुम
04:16अकेली नहीं हो, हम सब यहीं तुम्हारे पास हैं.