Skip to playerSkip to main content
  • 2 days ago
रात के करीब 11:30 बज रहे थे। चारों तरफ गहरा अंधेरा और झींगुरों की चीखती हुई आवाज़ें थीं। रश्मि अपनी खिड़की के पास बैठी पढ़ाई कर रही थी। अचानक बिजली चली गई। कमरे में लालटेन की हल्की पीली रोशनी जल रही थी, जो हवा के झोंके के साथ थरथरा रही थी।

Category

🎈
Fun
Transcript
00:00रात के करीब साड़े ग्यारह बज रहे थे, चारों तरफ गहरा अंधेरा और जींगुरों की चीखती हुई आवाजें थी, रश्मी
00:08अपनी खिडकी के पास बैठी पढ़ाई कर रही थी, अचानक बिजली चली गई, कमरे में लाला टेन की हलकी पीली
00:15रोशनी जल रही थी, ज
00:20अभी रश्मी को बाहर नीम के पेड के पास से कुछ घिसटने की आवाज आई, चम, चम, घिस, रश्मी ने
00:27खिडकी से बाहर जांका, धुंद में लिप्टा नीम का पेड एकडम शांत था, लेकिन पेड की ओट से एक आकृती
00:34बाहर निकल रही थी, रश्मी की आँखें फ�
00:50लेकिन सबसे भयानक बात यह थी, कि उस शरीर पर गर्दन के ऊपर का हिस्सा था ही नहीं, कट चुकी
00:56गर्दन से खून नहीं टपक रहा था, बलकि एक अजीब सा काला गाढ़ा धुआ निकल रहा था, वह बीहड आकृती
01:04बिना सिर के भी सीधे रश्मी की खिडकी की तरफ ह
01:07बढ़ रही थी, रश्मी का गला सूख गया, वह चिलाना चाहती थी, लेकिन डर के मारे उसकी आवाज गले में
01:14ही घुट कर रह गई, उसकी चाती धडकन के मारे फटने को हो रही थी, उसने जटके से खिडकी के
01:21पट बंद किये और सिटकनी लगा दी, खट, खट, खट, कु
01:37को चादर से पूरी तरह ढख लिया, अचानक कमरे का तापमान बर्फ की तरह ठंडा हो गया, लाला टेन की
01:44लौ नीली पड़ी और बुझ गई, अंधेरे कमरे में अब केवल रश्मी की तेज सांसों की आवाज थी, तभी उसे
01:51महसूस हुआ कि चादर के ऊपर कोई बहुत भ
02:07देखा? वह आवाज बिना मुह के आ रही थी, सीधे रश्मी के दिमाग के अंदर, रश्मी डर के मारे आँखें
02:14मुह कर रोने लगी, उसने हिम्मत जुटा कर चादर को थोड़ा सा हटाया, कमरे के बीचों बीच वह बिना सिर
02:21का भूत खड़ा था, उसकी कटी हुई गर्द
02:23से निकलता काला धुआ, पूरे कमरे में फैल रहा था, भूत का हाथ धीरे धीरे रश्मी की तरफ बढ़ा, उसके
02:31लंबे, काले और मुड़े हुए नाखून रश्मी के माथे को छूने ही वाले थे, कि अचानक घर के मंदिर से
02:38घंटी की आवाज और दादा जी के चलने की आ
02:53घबराय हुए कमरे का दर्वाजा खोल कर अंदर आ पहुँचे, रश्मी बिस्तर के एक कोने में सिमटी हुई, बुरी तरह
03:00कांप रही थी और पसीने से तरबतर थी, दादा जी ने तुरंत आगे बढ़कर उसे गले से लगाया और संभालने
03:07की कोशिश की, क्या हुआ रश्
03:23जात में हुई उस खौफनाग घटना का एक-एक मंजर बयां किया, बिजली का जाना, नीम के पेड़ के पास
03:29से आती घिसटने की आवाज, खिड़की के बाहर सफेद खून से सने कुर्ते में खड़ा, बिना सिर का भूत, उसकी
03:36कटी गर्दन से निकलता काला धुआ और कान क
03:39पास गूंज ती उसकी भयानक आवाज, रश्मी की बातें सुनकर कमरे में कुछ पलों के लिए गहरा सननाटा च्छा गया,
03:47माता पिता ने खौफ और चिंता से एक दूसरे की तरफ देखा, दादा जी ने रश्मी के सिर पर प्यार
03:53से हाथ फेरा और उसके चेहरे से पसीना �
03:55पोंचते हुए बड़े प्यार से बोले, अब डरने की कोई बात नहीं है मेरी बच्ची, जब तक तुम्हारा यह परिवार
04:02और ईश्वर का आशिरवात तुम्हारे साथ है, कोई भी बुरी शक्ती तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड सकती, माता जी ने तुरंत
04:09आगे बढ़
04:09कर रश्मी को अपने गले से लगा लिया और कहा, हां रश्मी, दादाजी बिल्कुल सही कह रहे हैं, अब तुम
04:16अकेली नहीं हो, हम सब यहीं तुम्हारे पास हैं.

Recommended