00:00अगर जंगल में कोई अंजान आवाज
00:02आपका नाम लेकर पानी पिलाने बोलाए
00:04तो कबھی मत जाना
00:06क्योंकि वहाँ प्यास पानी की नहीं
00:08इनसानों की बुझाई जाती है
00:10मध्य प्रदेश के एक छोटे से
00:12गांओ के pीछे घना जंगल था
00:15उस जंगल के बीचों
00:30कोई तुम्हें बुला रहा है।
00:32एक शाम 24 साल का मोहन लकडियां काटते काटते रास्ता भटक गया।
00:37अंधेरा इतना घना था कि अपने हाथ भी मुश्किल से दिखाई दे रहे थे।
00:42तभी दूर से किसी औरत की मीठी आवाज आई।
00:46मोहन, पानी पीलो, बहुत प्यास लगी होगी।
00:49मोहन के शरीर में सेहरन दोड़ गई।
00:52उसने कभी उस आवाज को नहीं सुना था, फिर भी वह उसका नाम कैसे जानती थी।
00:57डरते डरते वह आवाज की तरफ बढ़ा।
01:00कुछी देर में वह उसी पुराने कुएं के सामने खड़ा था।
01:04कुएं का पानी बिलकुल शान्त था जैसे काला शीशा।
01:08जैसे ही वह पानी देखने के लिए जुका, उसमें उसका चहरा नहीं था।
01:13पानी के अंदर एक औरत खड़ी थी।
01:15उसके लंबे भीगे बाल चहरे पर चिपके थे, आँखें पूरी सफेद थी और होंट कानों तक भटे हुए थे।
01:22वह बिना पलक जपकाए मुस्कुरा रही थी।
01:25मोहन चीखते हुए पीछे हटा, तभी कुएं के अंदर से आवाज आई।
01:30इतने साल बाद कोई अपनी मर्जी से मेरे पास आया है।
01:34मोहन भागने लगा, लेकिन जंगल का हर रास्ता घूम कर उसी कुएं के सामने आ जाता।
01:39जितना तेज वा भागता, कुएं की आवाज उतनी ही पास सुनाई दे थी।
01:44फिर अचानक उसके पीछे किसी के गीले पैरों की छप छप छप छप सुनाई देने लगी।
01:51उसने हिम्मत करके पीछे देखा, वहां कोई नहीं था।
01:55लेकिन जमीन पर गीले पैरों के निशान बन रहे थे।
01:58जैसे कोई अद्रिश चीज उसके बिलकुल पीछे चल रही हो, अगली सुबह गाम वाले मोहन को खोजने निकले, कुएं के
02:06पास उसकी कुलहडी पड़ी थी, और मिट्टी पर सिर्फ एक जगह तक उसके पैरों के निशान थे, उसके बाद कोई
02:13निशान नहीं, ऐसा लग र
02:14जैसे किसी ने उसे जमीन से उठाकर सीधे कुएं के अंदर खीच लिया हो, उस दिन के बाद हर अमावस्या
02:22की रात उस जंगल से दो आवाजें आने लगी, पहली उसी और दूसरी मोहन की, दोनों एक साथ रहगीरों को
02:31पुकारते, पानी बहुत ठंडा है, बस एक बार नी�
02:44मुएं के अंदर खड़ा हुआ देखता है, और उसके पीछे कोई मुस्कुरा रहा होता है।