00:00सोला सो से जादा बच्चों की चांग, एक स्कूल की इमारत और सामने तेजी से बढ़ता हुआ बाड़ का पानी,
00:08सोला सो मासूम बच्चों की जिन्दकियां दाओ पर लगी हुई थी
00:13सवाल ये है कि अगर आपको पता चले कि कुछी मिनिट में आपके स्कूल के आसपास तबाही आने वाली है
00:18तो आप क्या करेंगे? क्या आप बच्चों को सुरक्षित निकाल पाएंगे? क्या आपके पास इतना वक्त होगा कि सोला सो
00:24से जादा बच्चों को एक साथ बचाया ज
00:27सके? नेपाल में एक स्कूल प्रिंसिपल के सामने बिलकुल यही चुनौती खड़ी थी और इस कहानी में सबसे बड़ा सवाल
00:33है क्या है उनकी सूजबूज जिसने सोला से जादा बच्चों को मौत के मुझ से बचा लिया? नेपाल की बाड़
00:41में एक टीचर का ऐसा फैसला �
00:44जिसने सोला सो बच्चों की जिन्दगी बचा ली नेपाल में आई भीशन फ्लाश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही
00:51मचाई है पानी तेजी से बढ़ रहा था हालात लगातार बिगड रहे थे और लोगों के पास समलने का वक्त
00:56नहीं था इसी बीच त्रिभूवन �
00:58प्रिशुली सेकंडरी स्कूल के प्रिंशिपल राजेंद्र दवाडी को बाड के खतरे की जानकारी विली अब यहां कहानी का सबसे एहम
01:06इसरा शुरू होता है क्योंकि उनके सामने सिर्फ अपने स्कूल को बचाने की चुनौती नहीं थी उनके सामने थे सोला
01:12सो से जादा �
01:13बच्चे ऐसे वक्त में कुछ मिनट की देरी भी बेहत खतरनाक साबित हो सकती थी राजेंद्र दवाडी ने हालात को
01:20समझते हुए तुरंद बच्चों को सुरक्षित जगा पहुँचाने का फैसला लिया स्कूल में मौजूद टीचर्स को बच्चों को बाहर निकालने
01:26और
01:27उन्हें उची और सुरक्षित जगा की तरफ ले जाने का निर्देश दिया यानि किसी अफरात तफरी का इंतजार नहीं किया
01:32गया क्योंकि यह सोचकर नहीं बैठा था कि शायद बाड यहां तक नहीं पहुँचेगी उन्होंने पहले से प्लान पना लिया
01:39था पहले तो आ�
01:53पानी इधर से बह रहा है ना वहां पर तीन मंजिल का वो उसी दिन जिस दिन है हुआ उस
02:04दिन यहां से सब बच्चे को निकल के वो टीचर ने सब को यहां से बगा के सब को बचाया
02:32यहां तीन तल्ले का बिल्डिंग था वो इसकुल था उसका सामने एक मंदिर था और यह पूरा बजार था बिल्कुल
02:40सम्तल जमीं जहां है वहां स्कूल था एजो अभी पानी इधर से बह रहा है ना एबीच में जो खाली
02:46जगाया ना वहां पर तीन मंजिल का वो इसकूल थ
02:53है शोलस दो था है । सुनह जेस कूल निकला के टीचर ने वहन और सब यहां से बागा के
03:06यहां सब को बचा बीचाया अभी ज भी सब का तो नाम निसान नहीं अभी तो ऐस पूरा लिखे ग्या
03:15तोral बर्मन दारा
03:16मंदिर भी था रम मंदिर लेकिन जमीन को देखके लगता है शायद इहाँ कभी कुछ रहा ना हो बिलकुल संतल
03:22कर दियाए गया है
03:23नीचे का फोड़ा फोड़ा दिखता है लेकिन इस तरफ तो कुछ नहीं दिकता है यहां पूरा मंदिर था यह पूरा
03:31बजार था
03:33बहुत आदमी यहां से मरे हुए है कि यहां का पूरा कितना आदमी का क्या हुआ अभी तक कोई जानकारी
03:41नहीं है लेकिन ज्यादा हुआ है
03:45स्कूल की बसे उस वक्त एहम थी प्रिंसिपल ने बस ड्राइवर्स को भी अलर्ट किया और उन्हें रास्ते से वापिस
03:51लोटने के लिए कहा
03:52सोची एक तरफ स्कूल के अंदर सेक्डों बच्चे हैं दूसरी तरफ बाहर तेजी से बढ़ता पानी और हर सेकेंड फैसला
03:58लेने का तबाव
03:59लेकिन इस तेजी से लिए गए फैसले ने आगे चल कर पूरी कहनी बदल दी
04:04कुल 1643 बच्चे समय रहते सुरक्षित जगा तक पहुँच गए और इसके कुछी समय बाद वो हुआ जिसका अंदाजा शायद
04:12किसी ने नहीं लगाया था
04:13बाड का पहनी और मलबा बहुत तेजी से इलाके में पहुँचा हालात इतने खराब हो गए कि स्कूल की इमारत
04:19तक तबाह हो गई पूरी तरह से तहस नहस हो गई और सोचिये जरा उस स्कूल में अगर ये 16
04:27सो मासूम बच्चे होते तो क्या होता
04:30यही वज़े है कि राजेंद्र दवादी का फैसला सिरफ एक administrative decision नहीं था बलकि इसे उनकी presence of mind
04:38और leadership की मिसाल के तोर पर देखा जा रहा है
04:41सोचिये कुछी मिंटों के अंदर 1600 बच्चों को निकालना बसों में बिठाना उची जगा पहुचाना ये कितना कठिन रहा होगा
04:49एक principal और कुछ teachers के लिए
04:52उन teachers को principal को हमारा सलाम है और ये 1600 बच्चों की जान इन्होंने जो बचाई है इतिहासे से
04:59कभी नहीं भूलेगा
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