00:13कभी कभी सिंदकी हमें एक ऐसा डर दिखा देती है जुज के बाद घर लोटना भी किसी चमतकार से कम
00:19नहीं लगता
00:19एक मां के लिए शायद दुनिया की सबसे बड़ी खुशी है ही होती है
00:23वो अपने बच्चों को फिर से अपनी बाहों में भर सके और मांसी पारिक के सादवी को जोयजा ही हुआ
00:28मुंबई एरपोर्ट पर जब मांसी पारिक ने अपनी बेटी निर्वी को देखा तो वो खुद को रोग नहीं पाई
00:33बेटी को गले लगाते ही उनकी आँखों से आसो निकल पड़े और कुछी पल के बाद जब उन्होंने अपने पती
00:38सिंगर आपार्थि गोहिल को सामने देखा तो उनकी भावनाए और जादा उमड़ पड़ी
00:43ये सिर्फ एक माख अपने परिवार से मिलना नहीं था ये उस महिला का घर लोटना था जो पिछले कुछ
00:48दिनों में जंदगी को बेहद करीब से देख चुकी थी
00:51दरसल मांसी पारेक सदगुरू की ईशा फाउंडेशन के साथ केलाश मांसरोबर यात्रा पर गई थी
00:56यात्रा के दोरान वो चाइना के रास्ते में थी लेकिन इसे बीच तिब्बत और नेपाल के आसपास अच्वानक से आई
01:02भयानक वाड और लेंड्सलाइड ने पूरा रास्ता बदल दिया
01:05जिस रास्ते से उन्हें आगे जाना था वही रास्ता कुछी घंटों में तबाही के मंसर में बदल गया
01:10मांसी ने खुद बताया कि जिस जगा उन्हें अगले दिन पहुंचना था
01:14वहाँ कुछी टाइम के बाद इतनी भयानक तबाई हुई कि उन्हें देखकर यकीन करना मुश्किल था
01:18उन्होंने उस जगा की तस्वीरे और विडियो शेर करते हुए बताया कि वहाँ कुछ दिन पहले मौजू थी
01:24और शायद यही सोच कर उनकी रोंग्टे खड़े हो गए अगर हलात कुछ घंटे अलग होते तो कहानी कुछ और
01:29हो सकती थी
01:30मांसी ने बताया कि वह जज जगा परती ही वहाँ से उस खतना के लाके तक पहुशनी में उन्हें तक्रीबन
01:35पांच घंटे अलगने वाले थे
01:37जब फ्लड आया तब वो और उनका ग्रूप उस जगा से काफी दूर थे इसलिए वो सुरक्षित रही लेकिन आसपास
01:45की तबाही में उन्हें अंदर तक हिला दिया
01:47उन्होंने सोशल मीडिया पा लिखा कि जिन्दगी कितनी अंसर्टिन है इस घटना ने उन्हें बहुत करीब से महसूस कराया
01:54साथ उन्होंने इस ट्राजिटी में प्रभावित लोगों के लिए लगा था प्रातना करने की अपील भी की लेकिन मांसरी की
01:59मुश्किले यही खतम नहीं हुए अब उन्हें वापस इंडिया लोटना था और यही सफर उनके लिए एडवंचर से ज़ादा डरावनी
02:05जंग ब
02:20करना था क्योंकि बस से दूसरी तरफ इंतजार कर रही थी और आगे बढ़ने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था
02:26सोची तरफ पहाडों के बीच लेंट स्लाइट का रास्ता और दूसरी तरफ बार की तबाही और सामने सिर्फ एक मकसद
02:33किसी पी तरह घर पहुँचना उन्हो
02:37लगा जैसे उन्होंने कोई जंग जीत ली हो वहां से काट मांडू तक का सफर भी आसान नहीं था उन्होंने
02:42इसे अपनी जंदगी की सबसे उबढखाबर बस ट्राइट बताया लेकिन मांसी के लिए उस वक्त हर मुश्किल के पीछे सिर्फ
02:48एक चेहरा था उनकी बेटी नि
03:06पहुँचे पारिवार ने उन्हें फूलों की माला पहना कर वेलकम किया लेकिन जो ऐसे ही मांसी ने अपनी बेटी को
03:11देखा वो अपनी आखों से बहते हुए आसों को रोक नहीं पाई और मांसी ने उसको गस कर गले लगा
03:16लिया कुछ सेकेंड के लिए मांसी भूल गई कि क
03:35इनों ने इस भायानक सिचुएशन को बहुत करीब से फेल किया वो सुरक्षिक घर लोटाई है लेकिन इस पूरे अनुभव
03:41की याद शायद उनके साथ जिंदगी भर रहेंगी क्योंकि जस दिन आपको महसूस हो जाए कि जिंदगी और मौत के
03:47बीच सिर्फ कुछ घंटे क�
04:01लोटाई और उसकी बेटी को सकी माँ वापस मिल गई
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