00:03हलचट का पावन पर्व इस साल दो सितंबर को मनाया जाएगा इस दिन महिलाए अपने संतान की लंबी आयू के
00:10लिए व्रत रखती हैं वहीं ये व्रत उन लोगों के लिए भी खास होता है जिने संतान सुक्की प्राप्ती में
00:15बांधाय आरई होती हैं इस व्रत में भगवान �
00:18बलराम की पूजा की जाती है मानेता है कि हलचट के दिन बलराम जी का जनम हुआ था बता दे
00:23हलसस्टी यानि हलचट के दिन चंदन घिसका टीका लगाया जाता है जिसके कारण इसे चंदन चट भी कहा जाता है
00:29चले बताते हैं आपको कि हलचट की सरल पूजा विधी क्या है
00:33हलचट का व्रत निराहार रखा जाता है यानि इस व्रत में अन का सेवन नहीं किया जाता इस दिन व्रती
00:40हल से जोता या बोया हुआ अन या फल सबजी नहीं खाती है
00:44इस वरत में सिर्फ भैस के दूद दही का सेवन किया जाता है
00:48प्रतीस दिन सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले महुए की दातुन से दात साफ करती है
00:53अगर आप महुए का दातुन ना मिले तो आप नए ब्रश से ब्रश कर सकते हैं
00:58फिर इसनान करके वरत का संकर पले
01:00इसके पूजा घर में भैस के गोबर से दिवार पर छट माता, हल, सब्त रिशी, पशु और किसान का चेत्र
01:08बनाएं
01:08अगर आपको गोबर नहीं मिलता और आप ऐसे नहीं बना सकते
01:12तो आप हल छट माता, बलराम जी और हल की फोटो मिल जाये तो
01:17इसे प्रिंट आउट निकलवा कर दिवार पर चिपका कर पूजा कर सकते हैं
01:22वहीं एक मिट्टी के कुलहड में जुआर की धनी और महुआ भरा जाता है
01:27और एक मट्की में देवली छेवली रखी जाती है
01:30इसके बाद हल छट माता की फिर कुलहाडी की और फिर मट्की की पूजा की जाती है
01:36इसके बाद साथ तरह क्यानाज धूल के साथ भूने हुए चले आभूशन और हल्दी से रंगावस्तर चढ़ाये जाता है
01:42अगर आपको यह सब ना मिले तो आप सिर्फ महुआ चढ़ा कर या सातना चढ़ा कर दिया जला कर पूजा
01:49कर सकते हैं
01:49अंध में हल्चट की कथा सुनी जाती है फिर बलराम और भगवान कृषन की आर्थी की जाती है
01:55पूजा के बाद वहीं बैठ कर महुए के पत्ते पर महुए का फल अभैस के दूर से बनी दही खा
02:00कर व्रत खोला जाता है
02:01तो इस विधी से आप हल्चट की पूजा कर सकते हैं
02:04उमीद करती हूँ आपको जानकारी पसंद आई होगी
02:06फिल्हाल हमारी इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक शूरेंड चैनल को सब्सक्राइब करना भूले
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