00:03हलचट का पावन पर्व कृष्ण जनमास्ट में से दो दिन पहले मनाया जाता है इसे ललही छट चंदन छट कमर
00:11छट और खमर छट के नाम से भी जाना जाता है धार्मिक मानेताओं के अनुसार इसी दिन बलराम जी का
00:17जनम हुआ था इसलिए इसे बलराम जयनती के रूप में �
00:20भी मनाया जाता है वहीं कई छेत्रों में और समुदाय में में इस पर्व को तिन छट्टी चंदर छट्थी चानन
00:29छट और चना छट के नाम से भी हरचट के दिन महिले अपने संतान की लंबी आयउ और उनके सुखी
00:37जीवन की कामना से वरत रखती है मानेता ये भी है कि इस �
00:45पुजा की जाती है कौन से भगमान को पूजा जाता है चलिए बताते हैं आपको इस वीडियो में दरशच की
00:55दिन महिलाय अपने संतान के लिए वरत रखती है यह वरत भगमान कृष्ण के जेस्ट भाता रहता यानि कि भगमान
01:01बल्राम को समर्पित होता है इस दिन ब्ल्राम �
01:06का जनम हुआ था बलराम जी का मुख्य शस्त्र हल और मुसव है इसलिए इस दिन हल की विशेश पूजा
01:14की जाती है वही क्रिश्रिप्रदान संस्कृति होने के कारण इस दिन किसान और आम लोग हल की पूजा करके अन्यदाता
01:21और धर्ती माता के प्रतीद अभार व्यक्त करते
01:24हैं मैं संतानों के दिरगाई और अच्छे स्वास और रक्षा के लिए माताएं इस दिन छठी माता की पूजा अर्चना
01:31भी करती है इस दिन पूजा में गोबर से दिवार पर सस्टी माता हल और सबतरिशी के चित्र बना कर
01:38सतनाज और महुआ अर्पित किया जाता है और पू
01:54झाल झाल
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