00:11मौत जब कंक्रीट की छटों से गिरती है तो बचने का रास्ता नहीं देती
00:15लेकिन सोचें अगर पांच मंजरला कंक्रीट का पहाड आपके छाती पर आगिरे
00:21फेफडों में हवा के जगा धूल भर जाए और सामने सिर्फ मौत खड़ी हो
00:25तो आप क्या करेंगी
00:28ज्यादतर लोग हिम्मत हार जाते हैं
00:30लेकिन दिल्ली के सब्ते निकेतन में कंक्रीट के मलबे के नीचे दबे
00:34एक छातर ने काप्ती उंगलियों से अपना फोन निकाला
00:37कैमरा उन किया और ग्यारा सेकेंड में मौत को चकमा दे दिया
00:41मलबे के अंदर से आई इस एक चीक ने पूरे देश के तंत्र को हिला कर रख दिया है
00:46आज बात उस खौफनाक हादसे की जहां सपनों की राजधानी दिल्ली में कंक्रीट के अवेध टाइम बम फूटे हैं
00:53और मासूम चातरों की सासे मलबे में तडप रही थी
00:57रविवार की दो पहर दिल्ली का सत्य निकेतन इलाका
01:01जहां देश के कोने कोने से आई बच्चे अपने सुनहरे भविश्य की किताबे पढ़ते हैं
01:07लेकिन किसी को नहीं पता था कि जिस इमारत में वो रह रहे हैं वो उनकी कब्रगाह बनने वाली
01:11अच्वाना के एक जोरदार धमाका और पांच मंजिला होस्टिल की इमारत तैश के पत्तों के तरह डेह गई
01:19सिर्फ पांच सेकिंड और चारू तरफ सिर्फ मलबा चीखे और उड़ता हुआ कंक्रीट का गुबबार
01:26देखते ही देखते पांच मासूमों की दर्दनाक मौत हो गई और बीस से तीस चातरों स्खोफनाक अंधेरे मलबे में जिन्दा
01:33दफन हो गए
01:34सत्यनिकेतिन की संक्री गलिया चीखों से गुझ उठी लोग हाथों से पत्थरों को हटाने के लिए दोड़े
01:41क्योंकि अंदर उनके बच्चे दबे थे लेकिन असली रॉंक्टे तो तब खड़े हो गए जब हाथसे के कुछ ही देर
01:47बाद सोशल मीडिया पर 11 सेकंड का वो क्लिप सामने आया
01:50धूल से सनाज चहरा माथे से बहता खून और उपर लटकते भारी भरकम कंक्रीट के टुकडे वो छातर मलबे के
01:59नीचे दबा था लेकिन उसका होसला नहीं तूटा था उसने फोन गुमाया और अपने दोस्त से जिन्दगी की भीक मांगी
02:06और सुनिये ये सिर्फ एक वीडि
02:18अनिल शर्मा के मताबिक अंदर से बच्चे रोते हुए फोन कर रहे थे सर औक्सिजन खत्म हो रही है जल्दी
02:25आये बचावदल फोन पर ही उन बच्चों से बात कर रहे थे उन्हें धाडस बंधा रहे थे कि बेटा हिम्मत
02:31रखना हम आ रहे है और उसी फोन कॉल की लोकेशन
02:45और क्रेने पोहँच ही नहीं सकती थी एंडियारिफ दिल्ली फायर सर्विस पुलिस डीडीमे और एमसीडी की टीमें युद स्तर पर
02:53जुटी है लेकिन मशीने लाचार थी जवान अपने हाथों से और छूटे उपकर्णों से कंक्रीट हटा रहे थे क्योंकि जरा
03:01सी चूक ह
03:01तो मलबे का वजन अंदर फसे बच्चों पर गिर सकता था गटना सर पर खुद मुख्यमंत्री रेखा गुपता श्रम मंत्री
03:07कपल मिश्रा और सांसत बासुरी स्वराज पहुँचे थे
03:11मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा था कि दोशी कोई भी हो बक्षरा नहीं जाएगा लेकिन सवाल ये कि जब
03:18हाथसा हो जाता है तब ही ये सिस्टम क्यों जाकता है आज हम इस मंट से सीधे सवाल पूछते हैं
03:24पांच मंजिला ये अवेद इमारत किसकी शेह पर ख
03:41इलाकों से माबाप अपने कलेजे के टुखडों को दिल्ली पढ़ने भेशते हैं सुमीद में कि वो अफसर बनेगा डॉक्टर बनेगा
03:47इंजीनियर बनेगा उने क्या पता था कि दिल्ली का ये सिस्टम उनके बच्चों को मलबे के नीचे दबा देगा घड़ी
03:53की सोया टिक
04:11उनके सिर पर भी अवेद निर्माण का कोई कंक्रीट टाइम बं मन रा रहा है। सुलाल बस इतना हिंडी शोर
04:16दुनिया के तमाम बड़ी खबरों के लिए देखते रहें वन इंडिया है।
04:20देखते हैं जनके में बंसज सक्षाना हिंडी बश्राइल्त प्रौं देखका टिकश्च झांडिया कैस्थिए दिकर बंसजाटे टौंख कि उनके स्ट्टमाटे उनके
04:44नचे फिरों सुल दूलों कि वंड़ते लिएलटे स्ट्राइψोलिग में जब privatल
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