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हूतियों का सऊदी अरब पर बड़ा ऐलान, कर दी समुद्री नाकेबंदी! क्या भारत में भी अब महंगा होगा तेल?
इस वीडियो में हम चर्चा कर रहे हैं यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ की गई बड़ी समुद्री नाकेबंदी के बारे में. यमन के हूतियों ने बाब अल-मंदेब (Bab al-Mandeb) जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने का ऐलान किया है, जिससे सऊदी तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ने की आशंका है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक शिपिंग और विशेष रूप से तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

हूतियों की इस घोषणा के बाद लाल सागर (Red Sea) क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. सऊदी अरब की तेल सप्लाई बाधित होने की चिंताओं ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को हिलाकर रख दिया है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर बाब अल-मंदेब के रास्ते शिपिंग रुकी, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं.

इस नाकेबंदी का असर भारत सहित सभी एशियाई देशों पर पड़ सकता है. चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात से पूरा करता है, इसलिए सऊदी तेल सप्लाई में कोई भी व्यवधान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. इस पूरी भू-राजनीतिक स्थिति और तेल बाजार पर इसके संभावित प्रभावों को विस्तार से जानने के लिए यह वीडियो अंत तक देखें.This video analyzes the impact of the Houthi rebel group’s announcement of a maritime blockade against Saudi Arabia. The focus is on the threat to the Bab al-Mandeb strait and its consequences on global oil shipping and potential oil price hikes in India and other Asian countries.


#HouthiRebels #SaudiArabiaOil #GlobalShipping #OilPriceCrisis #MiddleEastTension #RedSeaConflict #OneindiaHindi

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00:05बाब अल मंदेप पर एक बार फिर दुन्या की नज़र टिक गई है।
00:30बाब अल मंदेप का रास्ता गंभी रूप से बाधित हुआ तो क्या इसका असर सिर्फ सौधी अरब पर पड़ेगा या
00:37भारत समेत पूरी दुन्या को इसकी कीमत चुकानी होगी।
00:40मामले की शुरुआत उस समय हुई जब हूथियों ने सौधी अरब के खिलाफ ततकाल प्रभाव से मैरिटाइम एमबार्गो घोशित किया।
00:48हूथियों ने इसे कथित तोर पर यमन पर सौधी दबाव और नाकेबंदी का जवाब बताते हुए आँख के बदले आँख
00:54वाली नीती से जोड़ा।
00:56उनका कहना था कि जिस तरह सौधी अरब ने यमन पर दबाव बनाया उसी तरह अब सौधी अरब को भी
01:01समुद्री रास्ते पर जवाब दिया जाएगा।
01:03उस समय सौधी अरब ने हूथी घोशना की मिंदा की थी और अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
01:09उठाने की बात कही थी।
01:11लेकिन इस पूरे घटना क्रम को समझने के लिए सबसे पहले बाब अलमन्देब को समझना जरूरी है।
01:17बाबल मन्देब लाल सागर को गल्फ अफेडन और आगे हिंद महा सागर से जोडने वाला बेहत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है।
01:25इसकी चौडाई सबसे संग्रे हिस्ते में करीब 29 किलो मीटर है।
01:29और यही रास्ता एशिया, यॉरप और मध्यपूर्व के बीच समुद्री व्यापार के लिए बेहद एहम है।
01:342024 में इस जल्डमरू मध्य से करीब 4.1 अरब बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उतपाद गुजरे थे।
01:42यानि दुनिया की उर्जा अपूर्ती में इसकी भूमी का छोटी नहीं है। और अब असनी खत्रा यहीं से शुरू होता
01:48है।
01:49इरान से जुड़े हूथी संगठन ने पहले भी लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाया था।
01:542023 के बाद उनके हमलों ने दुनिया की बड़ी शिपिंग कमपनियों को अपने रास्ते बदलने के लिए मजबूर किया था।
02:01कई जहाजों ने लाल सागर और स्वेज नहर का रास्ता छोड़ कर अफरीका के दक्षणी छोड यानि केप ऑफ गुड
02:07होप का लंबा रास्ता अपनाया।
02:08इसका मतलब था ज्यादा दूरी, ज्यादा इंधन खर्च, ज्यादा समय और ज्यादा बीमा लागत।
02:14अब अगर सौधी अरब के खिलाफ घोशित समुद्री नाकेबंदी वास्तव में बड़े पैमाने पर लागू होती है, तो स्थिती और
02:21गंभीर हो सकती है।
02:22क्योंकि सौधी अरब के लिए लाल सागर सिर्फ एक सामान्य शिपिंग रूट नहीं है, खास कर तब जब हार्मूज स्ट्रेट
02:29पर पहले से तनाव बना हुआ है।
02:52की जोखिम में आ जाता है, तो सौधी अरब के पास तेल बाहर भेजने के वैकलपिक रास्तों पर और ज्यादा
02:58निर्भर रहने की मजबूरी पैदा हो सकती है।
03:00और इसका असर सिर्फ सौधी अरब की अर्थ विवस्था तक सीमित नहीं रहेगा।
03:05भारत, चीन, जापान और दक्षिन कोरिया जैसे एशियाई देश सौधी तेल के बड़े खरीदार हैं।
03:112024 में सौधी अरब की क्रूड एक्सपोर्ट्स में चीन की हिस्सेदारी करीब 22.6%, दक्षिन कोरिया की 15.8%, जापान
03:20की 15.4% और भारत की 10.5% थी।
03:25ऐसे में समुदरी रास्ते में लंबे समय तक व्यवधान आने पर एशियाई रिफाइनरियों के लिए ट्रांस्पोर्ट कोस्ट और इंशॉरंस कोस्ट
03:32बढ़ सकती है। और जब शिपिंग महंगी होती है तो उसका असर आखिरकार एनरजी प्राइसेस पर दिखाई दे सकत
03:38है। लेकिन यहां एक महत्व पूर्ण बात समझना जरूरी है। ब्लॉकेड की घोषना और पूर्ण समुदरी नाके बंदी एक चीज
03:46नहीं है। हूथियों ने समुदरी प्रतिबंद की घोषना तो की लेकिन शुरुवात में ये पूरी तरह स्पष्ट नहीं था कि
03:52इसे �
03:53जमीन पर किस तरह लागू किया जाएगा? क्या केवल सौधी लिंक्ट जहाज निशाने पर होंगे? क्या सौधी पोर्ट्स की तरफ
03:59जाने वाले टैंकर्स को रोका जाएगा? या क्या लाल सागर में व्यापक कमर्शल शिपिंग को भी खत्रा होगा? यही अनसर्टिनिटी
04:06
04:06कंपनियों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन सकती है
04:09क्योंकि किसी जहाज को मिसाईल लगना ही एक मातर खत्रा नहीं है
04:13अगर किसी इलाके को हाई रिस्क घोशित कर दिया जाये
04:16तो शिपिंग कंपनियां वहां से गुजरने से बच सकती है
04:36दोबारा ज्यादा आक्रामक हो गया है। हूतियों ने सौधी शहरों और इंफ्रास्ट्रक्टर को निशाना बनाने वाले मिसाइल और ड्रोन हमले
04:44किये हैं।
04:4419 सितंबर को सौधी अधिकारियों ने कहा कि हूथियों ने रियाद की और बैलिस्टिक मिसाइल दागी जिसे इंटिसेप्ट कर लिया
04:51गया।
04:51इसी दोरान हूथियों ने यानबू समेत कई जगों पर हमलों के दावे किये, हाला कि सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टी
04:58नहीं हुई है।
04:59वहीं यमन के अंदर भी हूथी तेजी से सामरिक स्थलों पर अपनी पकड मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
05:05रॉइटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में हूथियों की बढ़त ने बाब अलमन्देब के आसपास उनकी स्थिती को और मजबूत
05:12किया और सौधी समर्थित ताकतों पर दबाव बढ़ा है।
05:15यानि अब मामला सिर्फ समुद्र में जहाजों की सुरक्षा का नहीं है।
05:45के मुताबिक बाब अलमन्देब की पूर्ण बंदी की स्थिती में वैश्विक तेल आपूर्ती का करीब 7 प्रतिशत तक प्रभावित होने
05:51का जोकिन बताया गया है।
06:15की चीजों तक पहुँच सकता है।
06:16लेकिन अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि बाब अलमन्देब पूरी तरह बंद हो चुका है या दुनिया में तेल की
06:23आपूर्ती रुख गई है।
06:24फिलहाल सबसे बड़ा खत्रा डिस्रप्शन और अंसर्टिनिटी का है।
06:28शिपिंग कमपनिया देख रही हैं कि हूथी आगे क्या करते हैं।
06:31सौधी अरब अपने समुद्री और सैन्य विकल्पों को मजबूत कर रहा है।
06:35यॉरपिये देश भी लाल सागर में अपनी नेवल प्रेजन्स बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं।
06:4021 सितंबर को EU की काजा कलास ने कहा कि रेड सी शिपिंग की सुरक्षा के लिए
06:44EU की Aspidus Mission को मौझूदा 6 वार्शिप से ज्यादा की जरूरत हो सकती है।
07:15तो बड़े पैमाने पर री राउटिंग शुरू हो सकती है।
07:18और तब सवाल सिर्फ ये नहीं होगा कि सौधी अरब का तेल एशिया तक पहुँचेगा या नहीं।
07:23सवाल होगा तेल की कीमत कितनी बढ़ेगी, शिपिंग कितनी महंगी होगी और इसका असर भारत समेत दुनिया के कितने देशों
07:29की अर्थ व्यवस्था पर पड़ेगा।
07:31क्योंकि लाल सागर में उठने वाली लहरे सिर्फ यमन गे तट तक नहीं रुखती, उनका असर हजारों किलोमीटर दूर बैठे
07:38उन देशों तक पहुँच सकता है, जो अपने इन्धन, व्यापार और उर्जा सुरक्षा के लिए इन समुदरी रास्तों पर निर्भर
07:44हैं।
07:44और यही वजह है कि हूथियों की नेवल ब्लॉकेट की घूशना को सिर्फ एक शेत्रिय धम की समझना खतरनाक होगा।
07:51बाब अलमंदेप पर बढ़ता तनाव अब ग्लोबल शिपिंग और एनरजी सिक्योरिटी का मामला बन चुका है।
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