00:05बाब अल मंदेप पर एक बार फिर दुन्या की नज़र टिक गई है।
00:30बाब अल मंदेप का रास्ता गंभी रूप से बाधित हुआ तो क्या इसका असर सिर्फ सौधी अरब पर पड़ेगा या
00:37भारत समेत पूरी दुन्या को इसकी कीमत चुकानी होगी।
00:40मामले की शुरुआत उस समय हुई जब हूथियों ने सौधी अरब के खिलाफ ततकाल प्रभाव से मैरिटाइम एमबार्गो घोशित किया।
00:48हूथियों ने इसे कथित तोर पर यमन पर सौधी दबाव और नाकेबंदी का जवाब बताते हुए आँख के बदले आँख
00:54वाली नीती से जोड़ा।
00:56उनका कहना था कि जिस तरह सौधी अरब ने यमन पर दबाव बनाया उसी तरह अब सौधी अरब को भी
01:01समुद्री रास्ते पर जवाब दिया जाएगा।
01:03उस समय सौधी अरब ने हूथी घोशना की मिंदा की थी और अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
01:09उठाने की बात कही थी।
01:11लेकिन इस पूरे घटना क्रम को समझने के लिए सबसे पहले बाब अलमन्देब को समझना जरूरी है।
01:17बाबल मन्देब लाल सागर को गल्फ अफेडन और आगे हिंद महा सागर से जोडने वाला बेहत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है।
01:25इसकी चौडाई सबसे संग्रे हिस्ते में करीब 29 किलो मीटर है।
01:29और यही रास्ता एशिया, यॉरप और मध्यपूर्व के बीच समुद्री व्यापार के लिए बेहद एहम है।
01:342024 में इस जल्डमरू मध्य से करीब 4.1 अरब बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उतपाद गुजरे थे।
01:42यानि दुनिया की उर्जा अपूर्ती में इसकी भूमी का छोटी नहीं है। और अब असनी खत्रा यहीं से शुरू होता
01:48है।
01:49इरान से जुड़े हूथी संगठन ने पहले भी लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाया था।
01:542023 के बाद उनके हमलों ने दुनिया की बड़ी शिपिंग कमपनियों को अपने रास्ते बदलने के लिए मजबूर किया था।
02:01कई जहाजों ने लाल सागर और स्वेज नहर का रास्ता छोड़ कर अफरीका के दक्षणी छोड यानि केप ऑफ गुड
02:07होप का लंबा रास्ता अपनाया।
02:08इसका मतलब था ज्यादा दूरी, ज्यादा इंधन खर्च, ज्यादा समय और ज्यादा बीमा लागत।
02:14अब अगर सौधी अरब के खिलाफ घोशित समुद्री नाकेबंदी वास्तव में बड़े पैमाने पर लागू होती है, तो स्थिती और
02:21गंभीर हो सकती है।
02:22क्योंकि सौधी अरब के लिए लाल सागर सिर्फ एक सामान्य शिपिंग रूट नहीं है, खास कर तब जब हार्मूज स्ट्रेट
02:29पर पहले से तनाव बना हुआ है।
02:52की जोखिम में आ जाता है, तो सौधी अरब के पास तेल बाहर भेजने के वैकलपिक रास्तों पर और ज्यादा
02:58निर्भर रहने की मजबूरी पैदा हो सकती है।
03:00और इसका असर सिर्फ सौधी अरब की अर्थ विवस्था तक सीमित नहीं रहेगा।
03:05भारत, चीन, जापान और दक्षिन कोरिया जैसे एशियाई देश सौधी तेल के बड़े खरीदार हैं।
03:112024 में सौधी अरब की क्रूड एक्सपोर्ट्स में चीन की हिस्सेदारी करीब 22.6%, दक्षिन कोरिया की 15.8%, जापान
03:20की 15.4% और भारत की 10.5% थी।
03:25ऐसे में समुदरी रास्ते में लंबे समय तक व्यवधान आने पर एशियाई रिफाइनरियों के लिए ट्रांस्पोर्ट कोस्ट और इंशॉरंस कोस्ट
03:32बढ़ सकती है। और जब शिपिंग महंगी होती है तो उसका असर आखिरकार एनरजी प्राइसेस पर दिखाई दे सकत
03:38है। लेकिन यहां एक महत्व पूर्ण बात समझना जरूरी है। ब्लॉकेड की घोषना और पूर्ण समुदरी नाके बंदी एक चीज
03:46नहीं है। हूथियों ने समुदरी प्रतिबंद की घोषना तो की लेकिन शुरुवात में ये पूरी तरह स्पष्ट नहीं था कि
03:52इसे �
03:53जमीन पर किस तरह लागू किया जाएगा? क्या केवल सौधी लिंक्ट जहाज निशाने पर होंगे? क्या सौधी पोर्ट्स की तरफ
03:59जाने वाले टैंकर्स को रोका जाएगा? या क्या लाल सागर में व्यापक कमर्शल शिपिंग को भी खत्रा होगा? यही अनसर्टिनिटी
04:06�
04:06कंपनियों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन सकती है
04:09क्योंकि किसी जहाज को मिसाईल लगना ही एक मातर खत्रा नहीं है
04:13अगर किसी इलाके को हाई रिस्क घोशित कर दिया जाये
04:16तो शिपिंग कंपनियां वहां से गुजरने से बच सकती है
04:36दोबारा ज्यादा आक्रामक हो गया है। हूतियों ने सौधी शहरों और इंफ्रास्ट्रक्टर को निशाना बनाने वाले मिसाइल और ड्रोन हमले
04:44किये हैं।
04:4419 सितंबर को सौधी अधिकारियों ने कहा कि हूथियों ने रियाद की और बैलिस्टिक मिसाइल दागी जिसे इंटिसेप्ट कर लिया
04:51गया।
04:51इसी दोरान हूथियों ने यानबू समेत कई जगों पर हमलों के दावे किये, हाला कि सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टी
04:58नहीं हुई है।
04:59वहीं यमन के अंदर भी हूथी तेजी से सामरिक स्थलों पर अपनी पकड मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
05:05रॉइटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में हूथियों की बढ़त ने बाब अलमन्देब के आसपास उनकी स्थिती को और मजबूत
05:12किया और सौधी समर्थित ताकतों पर दबाव बढ़ा है।
05:15यानि अब मामला सिर्फ समुद्र में जहाजों की सुरक्षा का नहीं है।
05:45के मुताबिक बाब अलमन्देब की पूर्ण बंदी की स्थिती में वैश्विक तेल आपूर्ती का करीब 7 प्रतिशत तक प्रभावित होने
05:51का जोकिन बताया गया है।
06:15की चीजों तक पहुँच सकता है।
06:16लेकिन अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि बाब अलमन्देब पूरी तरह बंद हो चुका है या दुनिया में तेल की
06:23आपूर्ती रुख गई है।
06:24फिलहाल सबसे बड़ा खत्रा डिस्रप्शन और अंसर्टिनिटी का है।
06:28शिपिंग कमपनिया देख रही हैं कि हूथी आगे क्या करते हैं।
06:31सौधी अरब अपने समुद्री और सैन्य विकल्पों को मजबूत कर रहा है।
06:35यॉरपिये देश भी लाल सागर में अपनी नेवल प्रेजन्स बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं।
06:4021 सितंबर को EU की काजा कलास ने कहा कि रेड सी शिपिंग की सुरक्षा के लिए
06:44EU की Aspidus Mission को मौझूदा 6 वार्शिप से ज्यादा की जरूरत हो सकती है।
07:15तो बड़े पैमाने पर री राउटिंग शुरू हो सकती है।
07:18और तब सवाल सिर्फ ये नहीं होगा कि सौधी अरब का तेल एशिया तक पहुँचेगा या नहीं।
07:23सवाल होगा तेल की कीमत कितनी बढ़ेगी, शिपिंग कितनी महंगी होगी और इसका असर भारत समेत दुनिया के कितने देशों
07:29की अर्थ व्यवस्था पर पड़ेगा।
07:31क्योंकि लाल सागर में उठने वाली लहरे सिर्फ यमन गे तट तक नहीं रुखती, उनका असर हजारों किलोमीटर दूर बैठे
07:38उन देशों तक पहुँच सकता है, जो अपने इन्धन, व्यापार और उर्जा सुरक्षा के लिए इन समुदरी रास्तों पर निर्भर
07:44हैं।
07:44और यही वजह है कि हूथियों की नेवल ब्लॉकेट की घूशना को सिर्फ एक शेत्रिय धम की समझना खतरनाक होगा।
07:51बाब अलमंदेप पर बढ़ता तनाव अब ग्लोबल शिपिंग और एनरजी सिक्योरिटी का मामला बन चुका है।
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