00:00राहुल गांधी से लेकर तमिलनाड के विजय तक SIR को लेकर सब चुनाव आयोग को घेरते रहे हैं।
00:06लेकिन अब इंडियन एक्सप्रेस की एक नई रिपोर्ट ने इस विवात को एक और गंभीर मोड दे दिया है।
00:13रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग के ही दो आयुक्तों ने पिछले 10 महिने में कम से कम 14 बार कुछ
00:20फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ती दर्ज की है।
00:23इन अपत्तियों में ने वोटर जोडने, नाम हटाने, फॉर्म सिक्स में बदलाव और वोटर डेटा तक पहुच को लेकर सवाल
00:32उठाए गए है।
00:32यही वज़ा है कि SIR को लेकर चल रही राजनितिक बहस अब चुनावायोग के अंदर तक पहुच्ती हुई दिखाई दे
00:40रही है।
00:41विपक्ष ने मुक्च चुनावायोग ग्यानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं और उनके पद पर बने रहने को लेकर भी मांगे
00:48सामने आ गई हैं।
00:49हाला कि चुनावायोग का कहना है कि पिछले एक साल के सभी फैसले सर्व सम्मती से लिये गए हैं और
00:56इसी पूरे विवात के बीच तमिलनाट के विजय का पुराना रुख फिर से चर्चा में आ गया है।
01:02कहानी यहीं से शुरू होती है SIR यानि Special Intensive Revision का मकसद मद्दाता सूची की गहनजाच करना है।
01:11इसमें मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अपात्र नामों को हटाने और योग्य मद्दाताओं को सूची में शामिल करने की प्रकरिया होती
01:20है।
01:20लेकिन बिहार से शुरू हुई इसका वायत के बाद जब बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट मद्दाता सूची से बाहर हुए
01:28तो राजनितिक विवाद बढ़ता चला गया।
01:30इंडियन एक्स्प्रेस की 23 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मताबिक बिहार से शुरू हुई SIR प्रकरिया के दौरान 30 राजियों
01:38और केंशासित प्रदेशों के ड्राफ्ट रोल में 13 करोन से जादा नाम हटाए गए।
01:43रिपोर्ट का कहना है कि इन में से कई मामलों को लेकर खुद चुनावायों के दो आयुक्तों ने सवाल उठाए
01:50थी। इन दो आयुक्तों के नाम है सुखबीर सिंग संधू और विवेग जोशी।
01:55रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने पिछले 10 महिने में कम से कम 14 बार लिखित आपत्ती दर्ज की है।
02:01कुछ आपत्तियां एक ही दिन में भी दर्ज हुई हैं, उनका कहना था कुछ फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के
02:08बिना लिये गए हैं।
02:09सबसे बड़ा मुद्दा फॉर्म 6 को लेकर सामनी आया, यही वो फॉर्म हैं जिसके जरिये कोई नया नागरिक मद्दाता के
02:16तौर पर पंजी करन कराता है।
02:18रिपोर्ट के मुताबिक इस फॉर्म में ऐसा सवाल जोडा गया जिसमें नय मद्दाता से पूछा जाने लगा कि उसका या
02:25उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मद्दाता सोची में था या फिर नहीं।
02:31विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ती दर्श कराई, संधू ने अगस्त में इसे अनधिकरित और गैर कानूनी
02:39बताया और इसे हटाने की बात कही।
02:41दूसरा बड़ा मुद्दा वोटर डेटाबेस और नियंतरण को लेकर है।
03:11के IT सिस्टम और काम के बटवारे में हुए बदलाव पर सवाल उठाए, यानि SIR पर बाहर से उठाए सवाल
03:19अब चुनावाईयों के भीतर दर्जापत्तियों से भी जुड़ गए है।
03:23लेकिन इसी कहानी में तमिलनाड का अध्याय भी बहुत महत्पूर है।
03:28तमिलनाड में SIR शुरू होने से पहले ही अभिनेता से राजनेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलागा वेटरी कजगम यानि
03:36TV के ने इसका विरोध शुरू किया था।
03:39नोमबर 2025 में विजय ने कहा था कि करीब 6.3 करोण मद्दाताओं की जाच सिर्फ 30 दिनों में करना
03:47कितना विवहारिक होगा। इस पर सवाल उठ रहा है।
03:50उन्होंने ये भी आशंका जताई थी कि बिहार जैसी सिती तमिलनाड में भी पैदा हो सकती है।
03:55विजय का तर्क सीधा था। मद्दाता सूची को साफ करना जरूरी है लेकिन इस प्रक्रिया में ऐसा नहीं होना चाहिए
04:02कि कोई वास्तविक मद्दाता ही सूची से बाहर हो जाए।
04:06उनकी पार्टी ने इसी आधार पर SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दर्वाजा खटखटाया, TVK की याचका में दावा किया
04:13गया किसा यार की प्रक्रिया समयधानिक अधिकारों और चुनावी कानूनों का उलंगन करती है।
04:19बाद में तमिलाड से जुड़ी SIR याचकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 में सुनवाई पूरी करते हुए उन्हें निप्ता
04:27दिया।
04:27हाला कि याचका करताओं को कानून के तहत उपलब्ध दूसरे रास्ते अपनाने की छूट भी दी गई थी।
04:33तमिलाड में SIR का असर आकड़ों में भी दिखाई दिया है।
04:37फरोरी 2026 में प्रकाशित अंती मद्दाता सूची के मताबिक राज में मद्दाताओं की संख्या करीब 6.41 करोन से घटकर
04:465.67 करोन रहे गई है।
04:49यानि करीब 74 लाग की कमी दर्ज हुई है।
04:52चुनावी अधिकारियों ने कहा कि मद्दाता सूची में बदलाओ और अपडेट की प्रकरिया आगे भी जारी रहेगी।
04:58विजय इसी तरह की प्रकरिया को लेकर लगातार साउधानी बरतने की बात करते रहें।
05:04उन्होंने कहा था कि अगर किसी व्यक्ति का नाम पुरानी सूची में है तो उसे फिर से पूरी प्रकरिया में
05:10क्यों जाना चाहिए।
05:11उन्होंने आधार को पहचान और उम्र के प्रमाड के तौर पर सविकार करने, अंतिम मद्दाता सूची को डिश्टल और खोजने
05:19योग्य बनाने और पूरी प्रकरिया को जादा आसान और पारदर्शी रखने जैसे सुझाओ भी दिये थे।
05:26विजे ने सिर्फ चुनाव आयोग पर ही सवाल नहीं उठाये थी। उन्होंने तमिलनाड की सत्ता धारी उस वक्ती डियेमके पर
05:32भी साईयार के मुद्दे को राजनीतिक तरीके से इस्तिमाल करने का आरोप लगाया था।
05:37उनका कहना था कि अगर डियेमके वास्तों में असाईयार का विरोध करती है तो विधान सभा में उसी तरह का
05:43प्रस्ताव क्यों नहीं लाती जैसा केरल में किया गया था।
05:46ये विजय के राजनीतिक आरोप थे जिन्हें डियमके ने उस वक्त सविकार नहीं किया था।
06:16विवाड में SIR को लेकर चिंता जताने वाली शुरुवाती पार्टियों में से थी। अब वापस आते हैं सितंबर 2026 पर।
06:24इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट आने के बाद विवाड का केंद्र केवल SIR के प्रकरिया नहीं रह गया है।
06:30अब सवाल चुनाव आयोग के अंदर काम करने के तरीके को लेकर भी उठ रहे हैं।
06:35रिपोर्ट में जिन दो आयोगतों की आपत्यों का जिक्र है वे उसी तीन सदस्ये चुनाव आयोग का हिस्सा हैं जिसकी
06:42अध्यक्षता मुख चुनाव आयोग ग्यानेश कुमार करते हैं।
06:46रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आयुकतों ने कई मामलों में लिखा कि उन्हें फैसले की जानकारी नहीं दी गई। वहीं चुनाव
06:53आयोक की ओर से कहा गया कि अलग-अलग सुझावाना सामान प्रक्रिया है और पिछले एक साल में लिए गए
06:59फैसले सर्व सम्मती से लिए ग
07:14की लेकिन इस पूरे विवाद में एक बात अलग से समझना जरूरी है इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दर्ज आपतियां
07:22गंभीर संसागत सवाल जरूर उठाती है लेकिन इनसे अपने आप में ये साबित नहीं होता कि चुनावी नतीजों में किसी
07:29तरह की हेर-फे
07:42देती है एक तरफ चुनावायोग का तर्क है कि मद्दाता सूची को सही और साफ रखना जरूरी है दूसरी तरफ
07:50विपक्ष और टीवी के जैसी पार्टियां कह रही है कि इस प्रकरिया में वास्तविक मद्दाताओं के अधिकार सुरक्षित रखना सबसे
07:58जादा जरूरी ह
07:59और अब इस बहस में राहुल गांधी के साथ विजय का पुराना रुख भी फिर से सामने आ गया है
08:05राहुल गांधी SIR को लेकर चुनावायोग पर लगातार सवाल उठाती रहे हैं विजय ने तमिलाड में SIR शुरू होने से
08:13पहले ही इसके तरीके और समय को लेकर आपति ज
08:29कुछ नामों तक सीमित नहीं रह गई है कहानी चुनावायोग की प्रकरिया उसके फैसलो उसके भीतर की कारपणा ली और
08:36उस पर जनता के भरोसे की है आगे सबसे एहम बात यही होगी कि आयोग इन आपतियों का क्या जवाब
08:43देता है फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर क्या स�
08:49वालों का क्या उत्तर मिलता है और SIR के दोरान जिन मद्दाताओं के नाम प्रभावित हुए उनके लिए ये प्रकरिया
08:56कितनी आसान और पारदर्शी रह जाती है क्योंकि चुनाव सिर्फ मद्दान के दिन का नहीं होता चुनाव के शिरुवात मद्दाता
09:04सूची से होती है
09:05और मद्दाता सूची में दर्ज हर नाम के साथ किसी नागरिक का लोकतांतरिक अधिकार भी जुड़ा हुआ होता है