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SIR Controversy के बीच Election Commission और CEC Gyanesh Kumar को लेकर बहस तेज हो गई है। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज की। Form-6 में बदलाव, voter database के केंद्रीकरण और मतदाता सूची से नाम हटाने जैसे मुद्दों पर सवाल उठे। इसी बीच Rahul Gandhi और विपक्ष ने Gyanesh Kumar पर निशाना साधा है। Tamil Nadu के CM Vijay और उनकी पार्टी TVK भी SIR की प्रक्रिया पर पहले से आपत्ति जताते रहे हैं। पूरी कहानी समझिए।

SIR Controversy has intensified after a recent The Indian Express report raised questions over the functioning of the Election Commission and the decisions taken under Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar. The report says Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi raised written objections on several issues, including changes in Form-6, voter database access and electoral roll procedures. Rahul Gandhi and other opposition leaders have questioned the Election Commission, while Tamil Nadu Chief Minister Vijay and his party TVK have already opposed the SIR process. What does the report reveal, and why is Vijay’s earlier stand on SIR back in focus? Watch the full story.


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00:00राहुल गांधी से लेकर तमिलनाड के विजय तक SIR को लेकर सब चुनाव आयोग को घेरते रहे हैं।
00:06लेकिन अब इंडियन एक्सप्रेस की एक नई रिपोर्ट ने इस विवात को एक और गंभीर मोड दे दिया है।
00:13रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग के ही दो आयुक्तों ने पिछले 10 महिने में कम से कम 14 बार कुछ
00:20फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ती दर्ज की है।
00:23इन अपत्तियों में ने वोटर जोडने, नाम हटाने, फॉर्म सिक्स में बदलाव और वोटर डेटा तक पहुच को लेकर सवाल
00:32उठाए गए है।
00:32यही वज़ा है कि SIR को लेकर चल रही राजनितिक बहस अब चुनावायोग के अंदर तक पहुच्ती हुई दिखाई दे
00:40रही है।
00:41विपक्ष ने मुक्च चुनावायोग ग्यानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं और उनके पद पर बने रहने को लेकर भी मांगे
00:48सामने आ गई हैं।
00:49हाला कि चुनावायोग का कहना है कि पिछले एक साल के सभी फैसले सर्व सम्मती से लिये गए हैं और
00:56इसी पूरे विवात के बीच तमिलनाट के विजय का पुराना रुख फिर से चर्चा में आ गया है।
01:02कहानी यहीं से शुरू होती है SIR यानि Special Intensive Revision का मकसद मद्दाता सूची की गहनजाच करना है।
01:11इसमें मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अपात्र नामों को हटाने और योग्य मद्दाताओं को सूची में शामिल करने की प्रकरिया होती
01:20है।
01:20लेकिन बिहार से शुरू हुई इसका वायत के बाद जब बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट मद्दाता सूची से बाहर हुए
01:28तो राजनितिक विवाद बढ़ता चला गया।
01:30इंडियन एक्स्प्रेस की 23 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मताबिक बिहार से शुरू हुई SIR प्रकरिया के दौरान 30 राजियों
01:38और केंशासित प्रदेशों के ड्राफ्ट रोल में 13 करोन से जादा नाम हटाए गए।
01:43रिपोर्ट का कहना है कि इन में से कई मामलों को लेकर खुद चुनावायों के दो आयुक्तों ने सवाल उठाए
01:50थी। इन दो आयुक्तों के नाम है सुखबीर सिंग संधू और विवेग जोशी।
01:55रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने पिछले 10 महिने में कम से कम 14 बार लिखित आपत्ती दर्ज की है।
02:01कुछ आपत्तियां एक ही दिन में भी दर्ज हुई हैं, उनका कहना था कुछ फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के
02:08बिना लिये गए हैं।
02:09सबसे बड़ा मुद्दा फॉर्म 6 को लेकर सामनी आया, यही वो फॉर्म हैं जिसके जरिये कोई नया नागरिक मद्दाता के
02:16तौर पर पंजी करन कराता है।
02:18रिपोर्ट के मुताबिक इस फॉर्म में ऐसा सवाल जोडा गया जिसमें नय मद्दाता से पूछा जाने लगा कि उसका या
02:25उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मद्दाता सोची में था या फिर नहीं।
02:31विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ती दर्श कराई, संधू ने अगस्त में इसे अनधिकरित और गैर कानूनी
02:39बताया और इसे हटाने की बात कही।
02:41दूसरा बड़ा मुद्दा वोटर डेटाबेस और नियंतरण को लेकर है।
03:11के IT सिस्टम और काम के बटवारे में हुए बदलाव पर सवाल उठाए, यानि SIR पर बाहर से उठाए सवाल
03:19अब चुनावाईयों के भीतर दर्जापत्तियों से भी जुड़ गए है।
03:23लेकिन इसी कहानी में तमिलनाड का अध्याय भी बहुत महत्पूर है।
03:28तमिलनाड में SIR शुरू होने से पहले ही अभिनेता से राजनेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलागा वेटरी कजगम यानि
03:36TV के ने इसका विरोध शुरू किया था।
03:39नोमबर 2025 में विजय ने कहा था कि करीब 6.3 करोण मद्दाताओं की जाच सिर्फ 30 दिनों में करना
03:47कितना विवहारिक होगा। इस पर सवाल उठ रहा है।
03:50उन्होंने ये भी आशंका जताई थी कि बिहार जैसी सिती तमिलनाड में भी पैदा हो सकती है।
03:55विजय का तर्क सीधा था। मद्दाता सूची को साफ करना जरूरी है लेकिन इस प्रक्रिया में ऐसा नहीं होना चाहिए
04:02कि कोई वास्तविक मद्दाता ही सूची से बाहर हो जाए।
04:06उनकी पार्टी ने इसी आधार पर SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दर्वाजा खटखटाया, TVK की याचका में दावा किया
04:13गया किसा यार की प्रक्रिया समयधानिक अधिकारों और चुनावी कानूनों का उलंगन करती है।
04:19बाद में तमिलाड से जुड़ी SIR याचकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 में सुनवाई पूरी करते हुए उन्हें निप्ता
04:27दिया।
04:27हाला कि याचका करताओं को कानून के तहत उपलब्ध दूसरे रास्ते अपनाने की छूट भी दी गई थी।
04:33तमिलाड में SIR का असर आकड़ों में भी दिखाई दिया है।
04:37फरोरी 2026 में प्रकाशित अंती मद्दाता सूची के मताबिक राज में मद्दाताओं की संख्या करीब 6.41 करोन से घटकर
04:465.67 करोन रहे गई है।
04:49यानि करीब 74 लाग की कमी दर्ज हुई है।
04:52चुनावी अधिकारियों ने कहा कि मद्दाता सूची में बदलाओ और अपडेट की प्रकरिया आगे भी जारी रहेगी।
04:58विजय इसी तरह की प्रकरिया को लेकर लगातार साउधानी बरतने की बात करते रहें।
05:04उन्होंने कहा था कि अगर किसी व्यक्ति का नाम पुरानी सूची में है तो उसे फिर से पूरी प्रकरिया में
05:10क्यों जाना चाहिए।
05:11उन्होंने आधार को पहचान और उम्र के प्रमाड के तौर पर सविकार करने, अंतिम मद्दाता सूची को डिश्टल और खोजने
05:19योग्य बनाने और पूरी प्रकरिया को जादा आसान और पारदर्शी रखने जैसे सुझाओ भी दिये थे।
05:26विजे ने सिर्फ चुनाव आयोग पर ही सवाल नहीं उठाये थी। उन्होंने तमिलनाड की सत्ता धारी उस वक्ती डियेमके पर
05:32भी साईयार के मुद्दे को राजनीतिक तरीके से इस्तिमाल करने का आरोप लगाया था।
05:37उनका कहना था कि अगर डियेमके वास्तों में असाईयार का विरोध करती है तो विधान सभा में उसी तरह का
05:43प्रस्ताव क्यों नहीं लाती जैसा केरल में किया गया था।
05:46ये विजय के राजनीतिक आरोप थे जिन्हें डियमके ने उस वक्त सविकार नहीं किया था।
06:16विवाड में SIR को लेकर चिंता जताने वाली शुरुवाती पार्टियों में से थी। अब वापस आते हैं सितंबर 2026 पर।
06:24इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट आने के बाद विवाड का केंद्र केवल SIR के प्रकरिया नहीं रह गया है।
06:30अब सवाल चुनाव आयोग के अंदर काम करने के तरीके को लेकर भी उठ रहे हैं।
06:35रिपोर्ट में जिन दो आयोगतों की आपत्यों का जिक्र है वे उसी तीन सदस्ये चुनाव आयोग का हिस्सा हैं जिसकी
06:42अध्यक्षता मुख चुनाव आयोग ग्यानेश कुमार करते हैं।
06:46रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आयुकतों ने कई मामलों में लिखा कि उन्हें फैसले की जानकारी नहीं दी गई। वहीं चुनाव
06:53आयोक की ओर से कहा गया कि अलग-अलग सुझावाना सामान प्रक्रिया है और पिछले एक साल में लिए गए
06:59फैसले सर्व सम्मती से लिए ग
07:14की लेकिन इस पूरे विवाद में एक बात अलग से समझना जरूरी है इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दर्ज आपतियां
07:22गंभीर संसागत सवाल जरूर उठाती है लेकिन इनसे अपने आप में ये साबित नहीं होता कि चुनावी नतीजों में किसी
07:29तरह की हेर-फे
07:42देती है एक तरफ चुनावायोग का तर्क है कि मद्दाता सूची को सही और साफ रखना जरूरी है दूसरी तरफ
07:50विपक्ष और टीवी के जैसी पार्टियां कह रही है कि इस प्रकरिया में वास्तविक मद्दाताओं के अधिकार सुरक्षित रखना सबसे
07:58जादा जरूरी ह
07:59और अब इस बहस में राहुल गांधी के साथ विजय का पुराना रुख भी फिर से सामने आ गया है
08:05राहुल गांधी SIR को लेकर चुनावायोग पर लगातार सवाल उठाती रहे हैं विजय ने तमिलाड में SIR शुरू होने से
08:13पहले ही इसके तरीके और समय को लेकर आपति ज
08:29कुछ नामों तक सीमित नहीं रह गई है कहानी चुनावायोग की प्रकरिया उसके फैसलो उसके भीतर की कारपणा ली और
08:36उस पर जनता के भरोसे की है आगे सबसे एहम बात यही होगी कि आयोग इन आपतियों का क्या जवाब
08:43देता है फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर क्या स�
08:49वालों का क्या उत्तर मिलता है और SIR के दोरान जिन मद्दाताओं के नाम प्रभावित हुए उनके लिए ये प्रकरिया
08:56कितनी आसान और पारदर्शी रह जाती है क्योंकि चुनाव सिर्फ मद्दान के दिन का नहीं होता चुनाव के शिरुवात मद्दाता
09:04सूची से होती है
09:05और मद्दाता सूची में दर्ज हर नाम के साथ किसी नागरिक का लोकतांतरिक अधिकार भी जुड़ा हुआ होता है

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