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Ex IAS Divya Mittal Political Journey: आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में उतरीं दिव्या मित्तल ने किया बड़ा ऐलान—वह किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी! जानिए पूर्व डीएम ने जनता के साथ मिलकर नया राजनीतिक मंच बनाने का फैसला क्यों लिया और नौकरशाही पर क्या गंभीर सवाल उठाए हैं।
उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल (Ex IAS Divya Mittal) ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद राजनीति में कदम रख दिया है। आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु (IIT-IIM Alumna) से पढ़ाई कर चुकीं दिव्या मित्तल मिर्जापुर और बस्ती जैसे जिलों की डीएम रह चुकी हैं। अपने 13 साल के प्रशासनिक कार्यकाल के बाद उन्होंने किसी भी स्थापित राजनीतिक दल (BJP, SP, Congress या BSP) में शामिल न होने का स्पष्ट फैसला किया है।
दिव्या मित्तल ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि वह उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि मानती हैं और जनता के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच (Independent Political Platform) तैयार करेंगी। उन्होंने अपनी इस नई राजनीतिक पारी को किसी पद तक पहुँचने का माध्यम बनाने के बजाय आम नागरिकों की आवाज बनने का जरिया बताया है। अपने संदेश में उन्होंने नौकरशाही की कार्यप्रणाली और सरकारी सिस्टम में मौजूद कमियों पर तीखे सवाल उठाए हैं।
पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपने कार्यकाल के दौरान स्कूल निर्माण में प्रशासनिक देरी और पट्टे की जमीनों पर कब्जे जैसे मामलों का जिक्र करते हुए पूछा कि जब कानून और नियम मौजूद हैं, तो जनता को अपने हक के लिए सिफारिशों का सहारा क्यों लेना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह का यह स्वतंत्र कदम आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। इस रिपोर्ट में देखिए दिव्या मित्तल के इस बड़े फैसले के पीछे की पूरी कहानी।

#DivyaMittal #IASDivyaMittal #UPPolitics

~PR.514~ED.110~GR.508~HT.178~VG.HM~

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00:00लोगों ने मुझे कहा कि तुम सब कुछ तो बन गई अब और क्या बनना है
00:03मुझे आवाज बनना है
00:04उन लोगों की आवाज जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुच पाती
00:08और अगर पहुच भी जाए तो सुनी नहीं जाती
00:10और उन लोगों की तरफ से मुझे अपनी देश की अजादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए
00:20IAS की नौकरी छोड़ने के बाद दिव्या मित्तल अब क्या करेंगी
00:24इस सवाल का जवाब अब उन्होंने खुद ही दे दिया है
00:2713 साल प्रशासनिक सिवा में रहने के बाद पुर्वाय सदिकारी ने राजनीती में उतरने का फैसला किया है
00:34बास बात ये है कि वो किसी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल नहीं होगी
00:38बल्कि उत्तर प्रदेश में जनता के साथ मिलकर अपनी राजनितिक राह बनाएंगी
00:42सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके उन्होंने लोगों से जुड़ने की अपील की है
00:47और सरकार और नौकर शाही पर सवाल उठाएं
00:50आयाईटि दिल्ली और आयाएम बंगलोरू से पढ़ी दिव्या मित्तल मिरजापूर समेत कई जिलो की डियेम रह चुकी है
00:57दिव्या ने सोशल मीडिया पर शेयर करके खुद बताया कि वो आगे क्या करेंगी उनका क्या प्लान है
01:02और उन्हें राजनीती क्यों चुनी उनके जंदिकी में से क्या क्या पढ़ाव आये से क्वण से मोड आये
01:07जिन्होंने उन्हें इस फैसले को लेने पर मझबूर किया
01:11तो खुद देखिये दिव्या मित्तल ने क्या कुछ बताया है
01:15नमस्कार, मैं दिव्या मित्तल
01:16अभी कुछ दिन पहले मैंने आईये से त्याग पत्र दिया और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिये
01:21कुछ दिनों तक जवाब नहीं दिया क्योंकि काम बड़ा था और मैं होसला जुटा रही थी
01:26पर आज उन जवालों के जवाब देने आई हूँ
01:28आगे क्या किस के साथ और कहा से पहला सवाल आगे क्या राजनीती
01:35लोगों ने मुझे कहा कि तुम सब कुछ तो बन गई अब और क्या बनना है
01:39मुझे आवाज बनना है उन लोगों की आवाज जिनकी आवाज किसी दफतर तक नहीं पहुच पाती
01:45और अगर पहुच भी जाए तो सुनी नहीं जाती
01:47और उन लोगों की तरफ से
01:49मुझे अपनी देश की अजादी के
01:5180 सालों का हिसाब चाहिए
01:52एक बार में लहुरिया दह की पहाडी पे
01:55पानी पहुचाने के लिए निरीक्षन कर रही थी
01:57तभी एक औरत मेरी तरफ आने लगी
01:59मुझे लगा उसे कुछ चही होगा
02:01शायद पेंशन या पका मकान
02:03आकर मुझसे बोली कि माडम आपसे
02:05कुछ मांगना है और उसने जो
02:07मांगा उससे मेरा सर शर्म से
02:09जुग गया उसने कहा माडम
02:11हमारे गाउ में स्कूल केवल पाचवी कक्षा
02:13तक है और उसके बाद जंगल और पहार
02:15के बीच में बच्चों की पढ़ाई का अंथ हो जाता है
02:17मुझे आगे की कक्षा
02:19तक अपने गाउ में स्कूल चाहिए
02:22उस वक्त तक उस
02:23महिला के घर में पानी नहीं था
02:25और उसने स्कूल मांगा
02:26मैंने नियम देखे स्कूल स्विक्रित किया
02:30और आज
02:31तीन साल हो जाने के बाद
02:33वो स्कूल बनना शुरू नहीं हुआ
02:34अब मुझे बताईए कि क्या नहीं था
02:37पैसा नहीं था नियम नहीं था
02:39स्विक्रिती नहीं थी
02:40था तो बस इरादा नहीं था
02:42अगर इरादा होता तो पहाड भी रास्ता दे देता
02:45और इरादा नहीं था तो एक फाइल ही पहाड बन गई
02:48मुझे उन गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए
02:51मैं विशेश सचेव राजस्व थी और एक आदमी एक पन्नी में
02:55अपने कागज और उमीद को लपेटे हुए मेरे पास आया
02:58उसने मुझे कहा कि मैडम मैं भूमी हीन था
03:01और कुछ साल पहले एक SDM ने एक सरकारी जमीन का छोटा सा टुकड़ा
03:04मुझे पटे पे दे दिया
03:05कागज तो मिल गए पर जमीन पे कबजा नहीं मिला
03:08मैंने उसके कागज देखे रिपोर्ट सरासर जूट थी
03:11तो मैंने संबंदित जिले के अधिकारी से बात करी
03:13उसने माना कि रिपोर्ट गलत है
03:15रिपोर्ट वापस हुई बनाने वाले पे कारवाई भी हुई
03:18अब मामला आया कबजा दिलाने का
03:20मैंने दो बार फून किया
03:22तेन बार कहलवाया
03:23तो वहां से जवाब आया
03:24कि उपर से मना किया गया है
03:26ये उपर कौन है
03:29सम्विधान तो कहता है कि सबसे उपर लोग है
03:31तो उसे न्याय के लिए इधर उधर क्यों भटकना पड़ रहा है
03:34जो उपर से दिया जाए वो क्रिपा
03:37और न्याय तो हक है
03:38तो मुझे उन पन्नियों में लप्टे अन्याय का हिसाब चाहिए
03:42हजारों गाउं हैं जहां आज भी सड़क नहीं है
03:45नदी है तो पुल नहीं है
03:47बरसात में गाउं टापू बन जाता है
03:49और इंतजार चल रहा है पीडियों से
03:53और सड़क है तो उस पे इतने गड़े हैं
03:55कि उस पर चलब कर स्कूल जाने वाले नन्हे पाउं पे
03:58जो कीचर लगते हैं उसके दाग उनके सफेद कपरों तक नहीं पहुच पाते
04:01और उसी गड़े में कोई motor cycle वाला गिरता है तो उसके खून के छीते भी उनके कपरों तक नहीं
04:07पहुच पाते
04:09उनको जानकारी नहीं है ऐसा नहीं है
04:11उनको पता है कि गड़ा कहा है फाइल का नंबर क्या है और मौतो का आकड़ा क्या है
04:16नहीं है तो फिक्र और जब फिक्र नहीं होती तो मौत हादसा नहीं फैसला होती है
04:22मुझे उन मौतों का हिसाब चाहिए
04:24मैं एक साधारन परिवार की लड़की थी इस देश ने मुझसे वादा किया था कि पढ़ोगी तो बढ़ोगी
04:30मैंने पढ़ा और आज मैं आपके आगे खड़ी हूँ
04:33पर आज के बच्चों का वादा क्या जो रात रात भर पढ़ रहे हैं और पेपर लीख हो जाता है
04:38पात साल तक तयारी करो और फैसला किसी अदालत में
04:41और आने वाले कल की बात तो उससे भी बड़ी है
04:44जो किसान अपनी जमीन गिर्वी रखकर अपने बेटे को एंजिनियर बना रहा है
04:48या जो मा अपने जेवर बेचके बेटी को कोडिंग करा रही है
04:52क्या उनको पता है कि उनका भविश्य सुरक्षित है की नहीं
04:55आज AI आ रहा है
04:57बहुत सारे ये काम AI करेगा
04:59हर नौजवान को इस बात का डर है
05:02मैं दो बेटियों की मा हूँ छोटी है
05:04पर मुझे अभी भी इसकी चिंता है
05:06उनके पास जवाब नहीं है
05:08कोई बात नहीं किसी के पास नहीं है
05:10पर सवाल तो हो सकता था
05:11सोच तो हो सकती थी
05:13कोई सदन नहीं है जहाँ पर इसके बारे में बात हो रही हो
05:16हमारे बच्चे जस भविश की ओर चल रहे हैं
05:18उसकी किसी को चिंता ही नहीं है
05:21आज हमारी राजनीती में सब कुछ है
05:23सत्ता है, शिलन्यास है, शोर है
05:26पर सोच नहीं है
05:27मुझे उस ना सोचने का हिसाब चाहिए
05:31उदेश केवल एक राजनेता बदलने का नहीं है
05:34राजनीती बदलनी होगी
05:35इरादे की राजनीती, न्याय की राजनीती, फिक्र की राजनीती
05:39और सोच की राजनीती
05:40वो राजनीती नहीं जो लोगों को सरफ गिंती है
05:43सीड़ी बनाकर सत्ता तक पहुचना चाहती है
05:46वो राजनीती जो लोगों को सुनती है
05:49और वही पर रुख जाती है क्योंकि लोग ही तो मन्जिल है
05:53और यही पर दूसरे सवाल का जवाब आता है
05:55जब मन्जल आप हैं
05:57तो मन्जल तक पहुचने वाला रास्ता भी केवल आप ही से होकर गुजरेगा किसी जंडे के नीचे नहीं
06:02जिन जंडों के नीचे 80 सालों में हिसाब नहीं बदला
06:05उन जंडों के नीचे खड़े होके हिसाब नहीं मांगा जा सकता
06:08जो हिस्सा बन जाए, वो हिसाब नहीं मांग सकता, इसलिए मैं राजनीती करूँगी किसी दल के साथ नहीं, केवल आप
06:15के साथ, केवल लोगों के साथ
06:17पर होगा कैसे, राजनीती तो शरीफ लोगों के लिए है इने, और इसका जवाब मुझे अपने इस्तीफी के चंद घंटों
06:24में मिल गया, जहां बहुत सारे आम लोगों ने मेरा समर्थन किया, वहीं एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने
06:31लिखा, कि मैं रात के �
06:33अंधेरे में एक दूसरे बड़ी पार्टी के बड़े नेता से मिली थी, वो मुलाकात कभी नहीं हुई थी, ये बात
06:39लिखने वाले को भी पता थी, परन्तु उदेश सच लिखना नहीं था, उदेश था कि एक औरत जो सवाल पूछने
06:45निकली है, उसको पहले ही दिन डरा द
06:47यही तो यह लोग करते हैं, किसी को F.I.R. करके डरा दो, किसी को ट्रोल करके बठा दो,
06:52ताकि आम आदमी अच्छे लोग राजनीती में ना आए और इनका ऐसे ही राजनीती चलती रहे, और हमें इसी को
06:59बदलना है, इसलिए मैं डरूंगी नहीं, मैं सवाल ही पूछूंगी
07:02ताकि इस देश की हर छोटी बच्ची अपने मन की बात कह सके, और उसे रात के अधेरे का डर
07:08ना दिखाया जा सके, जिन लोगों ने उस दिन मेरा समर्थन किया था, उनहीं लोगों के साथ एक ऐसा मंच
07:13बनाएंगे, जो इनसे डरेगा नहीं, डरेगा तो केवल इस देश के
07:17भविशे के लिए, पर सवाल ये भी है, कि डर नहीं है, ठीक है, पर पैसा भी तो नहीं है,
07:22बाहुबल भी तो नहीं है, जाती धरम का समीकरण भी तो नहीं है, तीनों बाते सहीं है, पर अब ये
07:28बताईए, जो पैसा चुनाओं में बहाया जाता है, वो कहां से आता है, वो ह
07:48जाती धर्म का समीकरंड इसलिए नहीं है क्योंकि मैंने कभी बैठाया नहीं।
07:52जब मैं अधिकारी थी, तो न्याय करने से पहले मैंने कभी किसी का नाम नहीं पूछा।
07:56राजनीती में भी नहीं पूछूंगी।
07:5880 साल तक इन्होंने समिकरनी तो बिठाए और साथ में देश भी बैठा रह गया।
08:03इस तरह की राजनीती कैसे शुरू होगी, कैसे खड़ी होगी और कैसे चलेगी यह हम लोग साथ मिलके तै करेंगे।
08:09अब तीसरा सवाल कहां से?
08:11मैं यहां अफसर बन के आई थी, पर यहां के लोगों ने मुझे अपनी बेटी बना लिया।
08:17सर पे हात रखा, घर का खाना खिलाया, जब ठकी तो सम्हला।
08:21गुरू वो होता है जो हमें हमसे मिलवा दे।
08:24यहां की मिट्टी ने मुझे सिखाया कि मैं कौन हूँ और किस के लिए हूँ।
08:30उत्तरपदेश की मिट्टी ही मेरी कर्म भूमी है और इसलिए शुरुआत यहीं से उत्तरपदेश से।
08:35मैं जानती हूं कि हमें क्या बताया गया है कि इस देश में कुछ नहीं बदलता और खास दोर पे
08:41उत्तरपदेश में तो बिलकुल नहीं।
09:05उत्तरप्रदेश ने तो हमेशा रहा दिखाई है आजादी की चिंगारी सबसे पहली बार उत्तरप्रदेश से ही शुरू हुई और आज
09:11भी जनपद, दर जनपद मैंने देखा कि लोग सही के साथ जुड़ते हैं और जो काम अफसर भी नहीं कर
09:17पाते हैं वो लोग करके दिख
09:31कर रहे हैं और कोई नहीं आया क्योंकि जिसका हमें इंतजार था वो हम खुद हैं इसलिए मैं आपको कह
09:37रही हूँ कि मुझ पर भरोसा मत करिये अपने आप पर करिये मैं आपको बुला रही हूँ शिक्षक को, डॉक्टर
09:42को, किसान को, मजदूर को, वकील को, चात्र को, उस
10:01के सामने खुद आत्मविश्वास से खड़े हो सकें, तो आज सिर्फ इतना करें कि इस पोस्ट के नीचे कमेंट करें,
10:06या मेरे वाटसाप नंबर 1198 956 957 दुबारा 1198 956 957 पर वाटसाप मेसेज करके मेरे साथ जुड़ें, और एक
10:19दिन ऐसा आएगा, जब कोई आदमी अप
10:22एक आगज एक पन्नी में लपेटे किसी सरकारी दफतर जाएगा, तो बिना किसी सिफारिश और बिना किसी फोन के उसके
10:28सुनवाई होगी, और घर आके वो अपने बेटे से कहेगा कि बेटे, आज मेरे साथ नया हुआ, और बेटा कहेगा
10:34तो पापा इसमें नया क्या है, तो
10:36उसे याद होगा कि उसके पन्नी का हिसाब किस दिन मांगा गया था, चलिए हिसाब मांगते हैं

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