00:00लोगों ने मुझे कहा कि तुम सब कुछ तो बन गई अब और क्या बनना है
00:03मुझे आवाज बनना है
00:04उन लोगों की आवाज जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुच पाती
00:08और अगर पहुच भी जाए तो सुनी नहीं जाती
00:10और उन लोगों की तरफ से मुझे अपनी देश की अजादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए
00:20IAS की नौकरी छोड़ने के बाद दिव्या मित्तल अब क्या करेंगी
00:24इस सवाल का जवाब अब उन्होंने खुद ही दे दिया है
00:2713 साल प्रशासनिक सिवा में रहने के बाद पुर्वाय सदिकारी ने राजनीती में उतरने का फैसला किया है
00:34बास बात ये है कि वो किसी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल नहीं होगी
00:38बल्कि उत्तर प्रदेश में जनता के साथ मिलकर अपनी राजनितिक राह बनाएंगी
00:42सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके उन्होंने लोगों से जुड़ने की अपील की है
00:47और सरकार और नौकर शाही पर सवाल उठाएं
00:50आयाईटि दिल्ली और आयाएम बंगलोरू से पढ़ी दिव्या मित्तल मिरजापूर समेत कई जिलो की डियेम रह चुकी है
00:57दिव्या ने सोशल मीडिया पर शेयर करके खुद बताया कि वो आगे क्या करेंगी उनका क्या प्लान है
01:02और उन्हें राजनीती क्यों चुनी उनके जंदिकी में से क्या क्या पढ़ाव आये से क्वण से मोड आये
01:07जिन्होंने उन्हें इस फैसले को लेने पर मझबूर किया
01:11तो खुद देखिये दिव्या मित्तल ने क्या कुछ बताया है
01:15नमस्कार, मैं दिव्या मित्तल
01:16अभी कुछ दिन पहले मैंने आईये से त्याग पत्र दिया और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिये
01:21कुछ दिनों तक जवाब नहीं दिया क्योंकि काम बड़ा था और मैं होसला जुटा रही थी
01:26पर आज उन जवालों के जवाब देने आई हूँ
01:28आगे क्या किस के साथ और कहा से पहला सवाल आगे क्या राजनीती
01:35लोगों ने मुझे कहा कि तुम सब कुछ तो बन गई अब और क्या बनना है
01:39मुझे आवाज बनना है उन लोगों की आवाज जिनकी आवाज किसी दफतर तक नहीं पहुच पाती
01:45और अगर पहुच भी जाए तो सुनी नहीं जाती
01:47और उन लोगों की तरफ से
01:49मुझे अपनी देश की अजादी के
01:5180 सालों का हिसाब चाहिए
01:52एक बार में लहुरिया दह की पहाडी पे
01:55पानी पहुचाने के लिए निरीक्षन कर रही थी
01:57तभी एक औरत मेरी तरफ आने लगी
01:59मुझे लगा उसे कुछ चही होगा
02:01शायद पेंशन या पका मकान
02:03आकर मुझसे बोली कि माडम आपसे
02:05कुछ मांगना है और उसने जो
02:07मांगा उससे मेरा सर शर्म से
02:09जुग गया उसने कहा माडम
02:11हमारे गाउ में स्कूल केवल पाचवी कक्षा
02:13तक है और उसके बाद जंगल और पहार
02:15के बीच में बच्चों की पढ़ाई का अंथ हो जाता है
02:17मुझे आगे की कक्षा
02:19तक अपने गाउ में स्कूल चाहिए
02:22उस वक्त तक उस
02:23महिला के घर में पानी नहीं था
02:25और उसने स्कूल मांगा
02:26मैंने नियम देखे स्कूल स्विक्रित किया
02:30और आज
02:31तीन साल हो जाने के बाद
02:33वो स्कूल बनना शुरू नहीं हुआ
02:34अब मुझे बताईए कि क्या नहीं था
02:37पैसा नहीं था नियम नहीं था
02:39स्विक्रिती नहीं थी
02:40था तो बस इरादा नहीं था
02:42अगर इरादा होता तो पहाड भी रास्ता दे देता
02:45और इरादा नहीं था तो एक फाइल ही पहाड बन गई
02:48मुझे उन गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए
02:51मैं विशेश सचेव राजस्व थी और एक आदमी एक पन्नी में
02:55अपने कागज और उमीद को लपेटे हुए मेरे पास आया
02:58उसने मुझे कहा कि मैडम मैं भूमी हीन था
03:01और कुछ साल पहले एक SDM ने एक सरकारी जमीन का छोटा सा टुकड़ा
03:04मुझे पटे पे दे दिया
03:05कागज तो मिल गए पर जमीन पे कबजा नहीं मिला
03:08मैंने उसके कागज देखे रिपोर्ट सरासर जूट थी
03:11तो मैंने संबंदित जिले के अधिकारी से बात करी
03:13उसने माना कि रिपोर्ट गलत है
03:15रिपोर्ट वापस हुई बनाने वाले पे कारवाई भी हुई
03:18अब मामला आया कबजा दिलाने का
03:20मैंने दो बार फून किया
03:22तेन बार कहलवाया
03:23तो वहां से जवाब आया
03:24कि उपर से मना किया गया है
03:26ये उपर कौन है
03:29सम्विधान तो कहता है कि सबसे उपर लोग है
03:31तो उसे न्याय के लिए इधर उधर क्यों भटकना पड़ रहा है
03:34जो उपर से दिया जाए वो क्रिपा
03:37और न्याय तो हक है
03:38तो मुझे उन पन्नियों में लप्टे अन्याय का हिसाब चाहिए
03:42हजारों गाउं हैं जहां आज भी सड़क नहीं है
03:45नदी है तो पुल नहीं है
03:47बरसात में गाउं टापू बन जाता है
03:49और इंतजार चल रहा है पीडियों से
03:53और सड़क है तो उस पे इतने गड़े हैं
03:55कि उस पर चलब कर स्कूल जाने वाले नन्हे पाउं पे
03:58जो कीचर लगते हैं उसके दाग उनके सफेद कपरों तक नहीं पहुच पाते
04:01और उसी गड़े में कोई motor cycle वाला गिरता है तो उसके खून के छीते भी उनके कपरों तक नहीं
04:07पहुच पाते
04:09उनको जानकारी नहीं है ऐसा नहीं है
04:11उनको पता है कि गड़ा कहा है फाइल का नंबर क्या है और मौतो का आकड़ा क्या है
04:16नहीं है तो फिक्र और जब फिक्र नहीं होती तो मौत हादसा नहीं फैसला होती है
04:22मुझे उन मौतों का हिसाब चाहिए
04:24मैं एक साधारन परिवार की लड़की थी इस देश ने मुझसे वादा किया था कि पढ़ोगी तो बढ़ोगी
04:30मैंने पढ़ा और आज मैं आपके आगे खड़ी हूँ
04:33पर आज के बच्चों का वादा क्या जो रात रात भर पढ़ रहे हैं और पेपर लीख हो जाता है
04:38पात साल तक तयारी करो और फैसला किसी अदालत में
04:41और आने वाले कल की बात तो उससे भी बड़ी है
04:44जो किसान अपनी जमीन गिर्वी रखकर अपने बेटे को एंजिनियर बना रहा है
04:48या जो मा अपने जेवर बेचके बेटी को कोडिंग करा रही है
04:52क्या उनको पता है कि उनका भविश्य सुरक्षित है की नहीं
04:55आज AI आ रहा है
04:57बहुत सारे ये काम AI करेगा
04:59हर नौजवान को इस बात का डर है
05:02मैं दो बेटियों की मा हूँ छोटी है
05:04पर मुझे अभी भी इसकी चिंता है
05:06उनके पास जवाब नहीं है
05:08कोई बात नहीं किसी के पास नहीं है
05:10पर सवाल तो हो सकता था
05:11सोच तो हो सकती थी
05:13कोई सदन नहीं है जहाँ पर इसके बारे में बात हो रही हो
05:16हमारे बच्चे जस भविश की ओर चल रहे हैं
05:18उसकी किसी को चिंता ही नहीं है
05:21आज हमारी राजनीती में सब कुछ है
05:23सत्ता है, शिलन्यास है, शोर है
05:26पर सोच नहीं है
05:27मुझे उस ना सोचने का हिसाब चाहिए
05:31उदेश केवल एक राजनेता बदलने का नहीं है
05:34राजनीती बदलनी होगी
05:35इरादे की राजनीती, न्याय की राजनीती, फिक्र की राजनीती
05:39और सोच की राजनीती
05:40वो राजनीती नहीं जो लोगों को सरफ गिंती है
05:43सीड़ी बनाकर सत्ता तक पहुचना चाहती है
05:46वो राजनीती जो लोगों को सुनती है
05:49और वही पर रुख जाती है क्योंकि लोग ही तो मन्जिल है
05:53और यही पर दूसरे सवाल का जवाब आता है
05:55जब मन्जल आप हैं
05:57तो मन्जल तक पहुचने वाला रास्ता भी केवल आप ही से होकर गुजरेगा किसी जंडे के नीचे नहीं
06:02जिन जंडों के नीचे 80 सालों में हिसाब नहीं बदला
06:05उन जंडों के नीचे खड़े होके हिसाब नहीं मांगा जा सकता
06:08जो हिस्सा बन जाए, वो हिसाब नहीं मांग सकता, इसलिए मैं राजनीती करूँगी किसी दल के साथ नहीं, केवल आप
06:15के साथ, केवल लोगों के साथ
06:17पर होगा कैसे, राजनीती तो शरीफ लोगों के लिए है इने, और इसका जवाब मुझे अपने इस्तीफी के चंद घंटों
06:24में मिल गया, जहां बहुत सारे आम लोगों ने मेरा समर्थन किया, वहीं एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने
06:31लिखा, कि मैं रात के �
06:33अंधेरे में एक दूसरे बड़ी पार्टी के बड़े नेता से मिली थी, वो मुलाकात कभी नहीं हुई थी, ये बात
06:39लिखने वाले को भी पता थी, परन्तु उदेश सच लिखना नहीं था, उदेश था कि एक औरत जो सवाल पूछने
06:45निकली है, उसको पहले ही दिन डरा द
06:47यही तो यह लोग करते हैं, किसी को F.I.R. करके डरा दो, किसी को ट्रोल करके बठा दो,
06:52ताकि आम आदमी अच्छे लोग राजनीती में ना आए और इनका ऐसे ही राजनीती चलती रहे, और हमें इसी को
06:59बदलना है, इसलिए मैं डरूंगी नहीं, मैं सवाल ही पूछूंगी
07:02ताकि इस देश की हर छोटी बच्ची अपने मन की बात कह सके, और उसे रात के अधेरे का डर
07:08ना दिखाया जा सके, जिन लोगों ने उस दिन मेरा समर्थन किया था, उनहीं लोगों के साथ एक ऐसा मंच
07:13बनाएंगे, जो इनसे डरेगा नहीं, डरेगा तो केवल इस देश के
07:17भविशे के लिए, पर सवाल ये भी है, कि डर नहीं है, ठीक है, पर पैसा भी तो नहीं है,
07:22बाहुबल भी तो नहीं है, जाती धरम का समीकरण भी तो नहीं है, तीनों बाते सहीं है, पर अब ये
07:28बताईए, जो पैसा चुनाओं में बहाया जाता है, वो कहां से आता है, वो ह
07:48जाती धर्म का समीकरंड इसलिए नहीं है क्योंकि मैंने कभी बैठाया नहीं।
07:52जब मैं अधिकारी थी, तो न्याय करने से पहले मैंने कभी किसी का नाम नहीं पूछा।
07:56राजनीती में भी नहीं पूछूंगी।
07:5880 साल तक इन्होंने समिकरनी तो बिठाए और साथ में देश भी बैठा रह गया।
08:03इस तरह की राजनीती कैसे शुरू होगी, कैसे खड़ी होगी और कैसे चलेगी यह हम लोग साथ मिलके तै करेंगे।
08:09अब तीसरा सवाल कहां से?
08:11मैं यहां अफसर बन के आई थी, पर यहां के लोगों ने मुझे अपनी बेटी बना लिया।
08:17सर पे हात रखा, घर का खाना खिलाया, जब ठकी तो सम्हला।
08:21गुरू वो होता है जो हमें हमसे मिलवा दे।
08:24यहां की मिट्टी ने मुझे सिखाया कि मैं कौन हूँ और किस के लिए हूँ।
08:30उत्तरपदेश की मिट्टी ही मेरी कर्म भूमी है और इसलिए शुरुआत यहीं से उत्तरपदेश से।
08:35मैं जानती हूं कि हमें क्या बताया गया है कि इस देश में कुछ नहीं बदलता और खास दोर पे
08:41उत्तरपदेश में तो बिलकुल नहीं।
09:05उत्तरप्रदेश ने तो हमेशा रहा दिखाई है आजादी की चिंगारी सबसे पहली बार उत्तरप्रदेश से ही शुरू हुई और आज
09:11भी जनपद, दर जनपद मैंने देखा कि लोग सही के साथ जुड़ते हैं और जो काम अफसर भी नहीं कर
09:17पाते हैं वो लोग करके दिख
09:31कर रहे हैं और कोई नहीं आया क्योंकि जिसका हमें इंतजार था वो हम खुद हैं इसलिए मैं आपको कह
09:37रही हूँ कि मुझ पर भरोसा मत करिये अपने आप पर करिये मैं आपको बुला रही हूँ शिक्षक को, डॉक्टर
09:42को, किसान को, मजदूर को, वकील को, चात्र को, उस
10:01के सामने खुद आत्मविश्वास से खड़े हो सकें, तो आज सिर्फ इतना करें कि इस पोस्ट के नीचे कमेंट करें,
10:06या मेरे वाटसाप नंबर 1198 956 957 दुबारा 1198 956 957 पर वाटसाप मेसेज करके मेरे साथ जुड़ें, और एक
10:19दिन ऐसा आएगा, जब कोई आदमी अप
10:22एक आगज एक पन्नी में लपेटे किसी सरकारी दफतर जाएगा, तो बिना किसी सिफारिश और बिना किसी फोन के उसके
10:28सुनवाई होगी, और घर आके वो अपने बेटे से कहेगा कि बेटे, आज मेरे साथ नया हुआ, और बेटा कहेगा
10:34तो पापा इसमें नया क्या है, तो
10:36उसे याद होगा कि उसके पन्नी का हिसाब किस दिन मांगा गया था, चलिए हिसाब मांगते हैं