00:00जम्मू कश्मीर के कठुआ से मंगलवार शाम सुरक्षा बलों को हिला देने वाली खबर सामने आई
00:05जिस कैम्प में CISF के जवान एक बेहद एहम हाइड्रो एलेक्रिक प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे
00:11वहीं अचानत गोलिया चलने लगी
00:13गोलिया बाहर से नहीं आई थी
00:15बलकि कैम्प के अंदर ही एक जवान ने अपने साथियों पर कथे तौर पर फाइरिंगर भी
00:20देखते ही देखते चार CISF जवान गंभी रूप से घायल हो गए
00:24और बाद में सभी की मौत हो गई
00:26मरने वालों में एक असिस्टेंट कमांडेंट और एक सब इंस्पेक्टर भी शामिल है
00:31घटना जम्मू कश्मीर के कठवा जिले के बसोहली इलाके के माशका गाउमिस्थित
00:36सेवा हाइडरो इलेक्रिक पावर प्रोजेक्ट में हुई
00:38अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार शाम करीब साहे साथ बजे
00:42CISF कैम्प में जवानों के बीच किसी मुद्दे को लेकर कहा सुनी हुई
00:46शुरुवाती जानकारी के अनुसार इसी विवाद के बाद
00:49CISF के हेड कॉंस्टिबल अभिदेश कुमार ने कथित तौर पर
00:53अपनी सर्विस राइफल से साथियों पर गोली चला दी
00:56फाइरिंग के बाद कैम्प में मौजूद दूसरे जवानों ने आरोपी को काबू में किया
01:00और उसकी सर्विस राइफल अपने कब्जे में ले ली
01:02बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया
01:05कथुआ पुलिस ने आरोपी को गिरफतार कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है
01:10वरिष्ट CISF और पुलिस अधिकारी भी घटना स्थल पर पहुँचे और पूरे घटना करम की जानकारी जुटाई
01:16अब जरा उन चार जवानों के बारे में जानिये जिन्होंने इस घटना में अपनी जान गवाई
01:21ब्रिदकों में CISF के असिस्टिंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब इंस्पेक्टर लक्षमन सिंग और कॉंस्टिबल रफीक एहमद तथा संदीब कुमार
01:29शामिल है
01:30फाइरिंग में चारों जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे
01:33घटना स्थल बेहत दुर्गम इलाके में होने की वजह से घायलों को नजदी की NHPC अस्पताल ले जाया गया जो
01:39हिमाचल प्रदेश की तरफ स्थित है
01:41लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद चारों की जान नहीं बचाई जा सकी
01:45ये जगह भी इस घटना को समझने के लिए बेहत एहम है
01:49माशका का ये इलाका जम्मू कश्मीर के कठवा जिले के बसोहलीक शेतर में आता है और हिमाचल प्रदेश की सीमा
01:55के बेहत करीब है
01:56सेवा नदी पर बने हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF के जवानों के पास थी
02:02रिपोर्टों के मुताभिक इस जगह तक पहुँचने के लिए कई बार हिमाचल प्रदेश की तरफ से होकर जाना पड़ता है
02:08यही वज़ा है कि घायलों को भी हमाचल प्रदेश की तरफ स्थित NHPC अस्पताल ले जाया गया
02:13लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है
02:16आखिर कैंप के अंदर ऐसा क्या हुआ कि कहा सुनी कुछ ही देर में गोली बारी में बदल गई
02:22शुरुवाती रिपोर्टों में सिर्फ इतना सामने आया है कि जवानों के बीच किसी मुद्दे को लेकर बहस हुई थी
02:27CISF की ओर से भी कहा गया है कि कहा सुनी और उसके बाद हुई फाइरिंग की परिस्थितियों की जांच
02:32की जा रही है
02:33यानि अभी ये साफ नहीं है कि विवात की शुरुवात किस बात से हुई, किसने किस से क्या कहा और
02:39आखिर वो कौन सी स्थिती थी जिसके बाद सर्विस हत्यार का इस्तिमाल किया गया
02:43कुछ रिपोर्टों में इस विवात की वज़ह को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं
02:47एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि आरोपी जवान और उसकी पत्नी द्वारा अपने छोटे बच्चे को साइट पर लाने
02:53से जुड़े मुद्दे को लेकर हुआ था
03:13देखा जा रहा है इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि फाइरिंग किसी तांक आतंकी हमले या बाहरी
03:19घुसपैट के दौरान नहीं हुई बलकि सुरक्षा बलकि अपने क्यांप के भीतर हुई और यही वज़ा है कि CISF ने
03:26भी मामले की आंतरिक जांच का फैसल
03:43यहां एक और बड़ा सवाल सामने आता है क्या ऐसे मामलों को सिर्फ एक व्यक्तिगत विवाद मानकर खत्म किया जा
03:49सकता है इस सवाल का जवाब तलाशना इसलिए जरूरी है क्योंकि केंद्रिय सशस्त्र बलों में आत्महत्या और फ्रेटरिसाइड को लेकर
03:56सरकार पहले भ
04:11फ्रेटरिसाइड की घटनाएं दर्ज हुई इनमें CISF में इसी अवधी में 60 आत्महत्याओं के मामले दर्ज हुए थे हाला कि
04:18इन आकडों में कठुआ की 2026 की घटना शामिल नहीं है सरकार ने राज्यसभा में 2026 में दिये जवाब में
04:25भी 2021 से 2025 तक के आकड़े बताये थे �
04:29इन पांच वर्षों में CAPFs, NSG और असम राइफल्स में फ्रेटरिसाइड के कुल 24 मामले दर्ज हुए 2021 में 11,
04:372022 में 6, 2023 में 2, 2024 में 1 और 2025 में 4 ऐसे मामलों की वजहों को लेकर ग्रिह
04:46मंत्रालय और विशेशग्यों की ओर से पहले भी कई पहलूँओं पर चर्चा की गई है
04:59मंत्रालय ने ऐसे मामलों के जोखिम कारकों का अध्यान करने के लिए टास्क फोर्स भी बनाई थी, लेकिन कट हुआ
05:05कि इस घटना में फिलहाल किसी एक वजह को अंतिम कारण बताना जल्दबाजी होगी, क्योंकि जाच अभी जारी है, पुलिस
05:12को ये पता लगाना होगा कि
05:13विवाद की शुरुआत किस बात से हुई थी, कैम्प में उसमय कौन-कौन मौजूद था, फाइरिंग कितनी देर चली, आरोपी
05:20के पास हत्यार कैसे आया और फाइरिंग के बाद उसे किस तरह काबू में किया गया, साथ ही ये भी
05:25देखा जाएगा कि क्या घटना से पहले कि
05:27इसी तरह का विवाद या शिकायत सामने आई थी? इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण बात है, घटना में
05:33जानगवाने वाले चारों जवान पहले घायल हुए थे और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, यानि घटना के
05:39बाद ततकाल राहत और मेड
05:41रिस्पॉंस शुरू किया गया, लेकिन उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें बचाया नहीं जा सका।
06:11जिसका काम देश की एहम आधार भूत सनरक्षना की सुरक्षा करना था। फिलहाल चार जवानों की मौत की पुष्टी हो
06:17चुकी है, आरोपी गिरफतार है और CISF की आंतरिक जांच के साथ पुलिस की जांच भी चल रही है। लेकिन
06:23इस पूरी घटना की सबसे एहम कड़ी �
06:25अब ही सामने आना बाकी है। वो वजह, वो विवाद और वो कुछ मिनिट जिन्होंने एक सुरक्षा कैम्प के माहौल
06:31को अचानक मातम में बदल दिया। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि उस शाम माशका के CISF
06:38कैम्प में आखिर क्या हुआ था और एक मामुली का
06:41सुनी ने इतना भयावह रूप कैसे ले लिया।