00:00मुझे धीरज दिया और हमारे शायद हमने यही सोचा ता कि शायद औरते नहीं करती है पिंडदान पर हमने जब
00:10सीता मया की कहानी सुनी और हमको जब उस वो कहानी सुन के बहुत बड़ा धीरज आया कि
00:16रखी क्यों ना हम भी करें कि हमारे लगा बहुत हमारे sa chyba पुछे एंदिरूदर सअंडार्ट जीं के साथ था
00:24हमारा
00:25सहवास था और उनके विचारों से हम हमेसे प्रेरित रहे हैं और उनके विचार आगे लेके जाना चाहते हैं उन्हों
00:34हमें जो भी सनातन धर्म का प्रचार किया उसी का प्रचार करते हुए हम बिहार
00:40जैसे पवितर गया डिया से पवितर धरती पे आया है और मुझे पुरा यकीन है यहां की परमधर Requarta
00:47है यहां के जो लोग है यहां का जो परशासर पढ़िती है वह सा रहना है बहुती
01:04अच्छा है और हमारे महाराज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज
01:25इसेफे हमें हमेंएशा प्रस्थान दिया है।
01:27कि आप अपने विशारों पर डटे रहिएगा।
01:30बाकि आजुबाजुबाजु में क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है।
01:33उसके अपने ग्यानने ही देना है।
02:01चाहना नहीं चाहना हमारे हाथ में नहीं है और समासिवा करना हमारे हाथ में हैं वो जो हम कर रहे
02:07हैं
02:08और अगर शकीक रुपा होगी तो जादा से जादा लोगों को पहुचाने के लिए उन तक पहुचाने के लिए कई
02:16बार कुर्सी बहुत जरूरी होती है अगर उन्होंने चाहा तो वो शायद वो भी कर लेंगे