00:26।
00:30योद्धा चक्रवियों में फंस्ता, संजय की सांसे भी धृत्राष्ट के सामने थम जाती थी। संजय ने अकेले ही धृत्राष्ट को
00:37भगवत गीता के उन दिव्य उपदेशों का भी साक्षात अनुभव कराया था। युद्ध के मैदान में बहने वाले खून से
00:44लेकर हर ए
00:45एक वीर की चीक संजय के कानों में गूजती थी। धृत्राष्ट अपने पुत्रों के नाश की हर एक भयानक खबर
00:52को इस दिव्य द्रिश्टी से खुद महसूस करते रहे। युद्ध समाप्ती के बाद जब यह शक्ती समाप्त हुई तो संजय
00:59की आखों में सिर्फ वीरान
01:01पन रह गया। पुरुक्षेत्र के इन गुप्त रहसियों का ऐसा सजीव वर्णन महाभारत के अलावा दुनिया में कहीं नहीं मिलता।
01:08ऐसे ही अनसुने सनातन रहसियों को जानने के लिए अभी हमारे पेज को लाइक और फॉलो करें।