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पूरा वीडियो: भारत दुनिया में सबसे प्रदूषित क्यों? || आचार्य प्रशांत, NDTV इंटरव्यू (2025)
लिंक: https://youtu.be/uMGKRRTLBmU?si=Y5yVJi62K2OjaCvb
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प्रदूषण को सिर्फ़ विकास का परिणाम मान लेना, समस्या की जड़ को नज़रअंदाज़ करना है। जब हमें बाहर की गंदगी देखकर भी दुख नहीं होता, तो सवाल उठता है कि क्या हम भीतर से इतने मैले हो चुके हैं कि अपने ही जीवन को नुकसान पहुँचाने से भी हमें कोई फर्क नहीं पड़ता?
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वीडियो जानकारी: 05.06.2025, ग्रेटर नोएडा

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Transcript
00:00मुंबई ने प्रदूशण के मामले में दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया
00:03IQ Air की रांकिंग में मुंबई भारत का सबसे प्रदूशित शहर बनकर सामने आया है
00:09आप सांस लेने के मर रहे हो, सांस लेके जिया जाता है
00:14आपको मजबूर किया गया है कि आप सांस लेके मर जाओ
00:17और आपके भीतर क्रोध नहीं उठा
00:19आप खड़े हो करके गरजना नहीं कर रहे है कि यह कैसे हो रहा है कौन जिम्मेदार है
00:23मैंने कहता कि यह सब हमारी ambitions का या development का या GDP का परिणाम है कि आज भारत प्रदूशित
00:32है
00:32ना तो हमने ऐसा कोई development कर लिया है ना आम भारती है कोई बहुत ambitious होता है
00:38और ना हमारा per capita GDP किसी गिंती में आता है
00:41भारत का जो प्रदूशन है वो अध्योगे क्या आर्थिक कारणों से नहीं है
00:46सुनने में जैसा भी लगे पर उसका मूल कारण आध्यात्मिक है
00:51आपका मन खराब है पुल्टे पुल्टे आपको विचार आ रहे है
00:55तो भी आप यही कहते हो ना मैं ठीक नहीं हूँ
00:57इसी तरीके से अगर आपकी हवा जहरीली हो गई है तो भी तो आप यही कहोगे ना मैं ठीक नहीं
01:02हूँ
01:03बाहरी लक्षन है समस्या भीतरी है
01:05हम क्या आप खुद को बता रहे हैं कि वो भारत विकास कर रहा है इसलिए प्रदूशन हो रहा है
01:11यह आंतरिक दूशन है जो बाहरी प्रदूशन के रूप में दिखाई दे रहा है
01:14यह प्रदूशन विकास से नहीं आ रहा है
01:17यह प्रदूशन भीतरी गंदगी से आ रहा है
01:20हम भीतर से बिलकुल मैले हो चुके हैं
01:22इसलिए बाहर कुछ भी मैला करने में हमें कोई संकोच नहीं होता
01:26मैला देख के हमें कोई दुख नहीं होता

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