00:00कुछ नया नहीं बताते हैं धर्म ग्रंथ
00:02वो कहते हैं जो तुम पहले से ही जानते हो पहले तो उसको स्विकार कर लो
00:08वास्तव में वो आप से कहते हैं कि जो जानने लायक है तुम्हें पहले ही पता है
00:13तुम्हें तो छोड़ना है वो सब कुछ जो जानने लायक नहीं है
00:18सारी प्रक्रिया, नकार की, निशेद की, नेती-नेती की है
00:22क्या नया बता देंगे, आपकी दिंदगी के बारे में आप से जाधा किसको पता है
00:29आपकी भावनाएं, आपके केंद्र, आपके विचार, आपके संबंध, इनके बारे में कोई बाहर से आगा आपको बताने
00:37मैं कौन हूँ, मुझे क्या पता, नाम भी नहीं पता, क्या पता मुझे, किसी को क्या पता
00:42किसी को क्या पता और गीता तो हजारों साल पहले आई थी आज
00:46आप आज के हो
00:48उन्होंने आपके विक्तेकत जीव उन्हें गुसके कभी नहीं देखागी क्या चल रहा है
00:52तो सिर्फ आप ही हो जिसको पता है
00:54वो क्या बताएंगे
00:56वो कुछ बताने नहीं आए
00:57वो कुछ हटाने आए हैं, क्या हटाने आए हैं, आपका ये डर, कि जो चल रहा है, उसको अगर मान
01:04लिया, तो बड़ी हानी हो जाएगी, कोई हानी नहीं, तुम्हारा बिगड उससे नहीं रहा जो चल रहा है, तुम्हारा बिगड
01:17इस डर से रहा है, कि तुमने मान लिया कि क्
01:21जाएगी सबसे बड़ी हानी जूट से होती है जूट ही हानी है जिसे आंतरिक जूटों में जीना पड़ रहा है
01:29उसने अपनी सबसे बड़ी हानी कर ही रखी है इससे बड़ी और कोई हानी नहीं होती