00:00जहाँ पर हमारे कोच थे, तो वहाँ पर मैंने एक बर देखा था, वहाँ कोई खिलाडी जैसे थे और शायद उनका फौजी बैकग्राउंड था, तो वह आये होंगे उन्होंने क्लब जॉइन किया, तो कोच उनको बता रहे हैं कि आपकी जो ग्रिप है ये ठीक नहीं है, स्क
00:30फिर मालू मैं कोच से क्या बोलते हैं, ये मेरे आखों के सामें हो रहा है, ये बोलते हैं, आईए थोड़ा सा, रैली करते हैं, और उस रैली में ये सज्जन, जितनी जान लगा कर हो सकता था, उतनी जान से कोच के उपर पॉइंट बनाने कोशिश कर रहे थे, पता नहीं, �
01:00अपनी नजर में बिलकुल जिल्ले सुभानी हैं, ये हंकार, नहीं तो कोई तुक बनता है कि कोई आपसे कह रहाएगी ग्रिप ठीक करो, और आप उससे बोले रैली खेलो,